पश्चिम के साथ पूरब से भी उठी उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग

पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर प्रदेश में अनेक संगठन उत्तर प्रदेश के बंटवारे को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।

उत्तर प्रदेश विभाजन की बहस गरम
उत्तर प्रदेश विभाजन की बहस गरम
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar23 Jan 2026 01:22 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश का बंटवारा करने की मांग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश से भी उठी है। सब जानते हैं कि उत्तर प्रदेश आबादी की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा प्रदेश है। उत्तर प्रदेश को सम्पूर्ण विकास को आधार बनाकर लम्बे अर्से से उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग चलती रहती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर प्रदेश में अनेक संगठन उत्तर प्रदेश के बंटवारे को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।

पश्चिमी निर्माण मोर्चा का संघर्ष बढ़ रहा है आगे

उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा का संघर्ष लगातार आगे बढ़ रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा के महासचिव कर्नल सुधीर सिंह का दावा है कि देर जरूर लग रही है किन्तु एक ना एक दिन उत्तर प्रदेश का बंटवारा अवश्य होगा। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश का सही अर्थों में तभी विकास होगा जब उत्तर प्रदेश को कम से कम तीन भागों में बांट दिया जाएगा। कर्नल सुधीर ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में शुरू हुए उत्तर प्रदेश के बंटवारे के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा है कि हम सब लोग एक साथ मिलकर उत्तर प्रदेश का बंटवारा कराने का काम करेंगे।

अमेठी से उठी उत्तर प्रदेश के बंटवारे की मांग

उत्तर प्रदेश का अमेठी क्षेत्र प्रदेश का प्रसिद्ध क्षेत्र है। हाल ही में अमेठी से उत्तर प्रदेश का बंटवारा करके पूर्वांचल राज्य बनाने की मांग खुलकर सामने आई है। एक कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह और पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने साफ कहा कि पूर्वांचल का विकास तभी संभव है, जब उसे अलग राज्य का दर्जा मिले। इस कार्यक्रम में हजारों लोग मौजूद रहे। पूर्वांचल को लेकर यह तर्क दिया जाता है कि यहां विकास की रफ्तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य उत्तर प्रदेश की तुलना में धीमी रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार के मामले में यह क्षेत्र आज भी पिछड़ा माना जाता है। समर्थकों का कहना है कि अगर पूर्वांचल अलग राज्य बने, तो प्रशासन ज्यादा फोकस के साथ काम कर पाएगा, योजनाएं जमीन पर तेजी से उतरेंगी और स्थानीय समस्याओं का समाधान बेहतर तरीके से होगा।

आसान नहीं है उत्तर प्रदेश का बंटवारा

किसी भी राज्य को बांटना आसान नहीं होता है। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें कई स्तरों पर सहमति और औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। भारत के संविधान में इसके लिए साफ व्यवस्था दी गई है, ताकि फैसले भावनाओं में नहीं, बल्कि कानून के दायरे में हों। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 3 संसद को यह अधिकार देता है कि वह कानून बनाकर किसी राज्य का क्षेत्र घटा-बढ़ा सके, दो या दो से अधिक राज्यों को मिला सके या नया राज्य बना सके. यानी अंतिम फैसला संसद के हाथ में होता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि राज्य सरकार या जनता की भूमिका नहीं होती है। जब किसी राज्य को बांटने का प्रस्ताव आता है, तो राष्ट्रपति उस प्रस्ताव को संबंधित राज्य की विधानसभा के पास राय के लिए भेजते हैं। विधानसभा इस पर चर्चा करती है और अपनी राय राष्ट्रपति को देती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि विधानसभा की राय बाध्यकारी नहीं होती। यानी अगर विधानसभा सहमत न भी हो, तब भी संसद कानून बना सकती है, लेकिन व्यवहारिक रूप से विधानसभा की राय को काफी महत्व दिया जाता है।  राज्य बंटवारे का सीधा असर वहां रहने वाले लोगों पर पड़ता है। इसलिए इस प्रक्रिया में जनता, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से भी विचार-विमर्श किया जाता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि अलग राज्य की मांग सिर्फ राजनीतिक है या इसके पीछे वास्तविक जरूरत और जनसमर्थन भी है। 

संसद में कैसे पास होता है प्रदेश के बंटवारे का कानून

राज्य बंटवारे से जुड़ा विधेयक संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया जाता है। इसे पारित करने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है। यानी संविधान संशोधन जैसा भारी बहुमत यहां जरूरी नहीं होता है। यह बात राज्य गठन की प्रक्रिया को अपेक्षाकृत सरल बनाती है।  जब संसद से कानून पास हो जाता है, तो उसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद अधिसूचना जारी होती है और नया राज्य कानूनी रूप से अस्तित्व में आ जाता है। इसी के साथ प्रशासनिक ढांचा, सरकार और अन्य व्यवस्थाएं लागू की जाती हैं।  भारत में इससे पहले भी कई नए राज्य बने हैं। साल 2000 में उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड, मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ और बिहार से झारखंड का गठन हुआ था। 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना बना। इन उदाहरणों से साफ है कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी हो, तो नया राज्य बनना संभव है। UP News

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उत्तर प्रदेश सचिवालय में पोस्टिंग का खेल! 30+ एसओ नोटिस के घेरे में

अब इन्हीं कथित अनियमितताओं और लेन-देन की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश शासन के स्तर पर मामला संज्ञान में आया और आधिकारिक जांच प्रक्रिया शुरू होने से प्रशासनिक गलियारों में हलचल और बढ़ गई है।

सचिवालय में तैनाती विवाद ने पकड़ा तूल
सचिवालय में तैनाती विवाद ने पकड़ा तूल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar23 Jan 2026 11:17 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित यूपी सचिवालय में तैनाती को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि अनुभाग अधिकारी (एसओ) पद पर मनचाही/मलाईदार पोस्टिंग पाने के लिए कुछ अधिकारियों ने घूस का सहारा लिया। मामले को गंभीर मानते हुए सचिवालय प्रशासन विभाग ने 30 से अधिक अनुभाग अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। नोटिस जारी होने के बाद से सचिवालय के गलियारों में खलबली मची हुई है और कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि जांच आगे किस दिशा में जाएगी।

पिछले कुछ महीनों से जुगाड़-घूस की चर्चाएं

सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश सचिवालय (लखनऊ) में यह चर्चा तेज थी कि तबादला नीति को किनारे रखकर कुछ अधिकारियों को लगातार महत्वपूर्ण और प्रभावशाली विभागों में बनाए रखा जा रहा है। सचिवालय की तय व्यवस्था के तहत विभागों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत कर चक्रानुक्रम (रोटेशन) के आधार पर तैनाती का प्रावधान रखा गया था, ताकि हर कर्मचारी को समान अवसर मिले और प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। लेकिन आरोप है कि कई मामलों में इस नियम को दरकिनार कर चुनिंदा अधिकारियों को बार-बार A श्रेणी वाले विभागों में ही पोस्टिंग दिलाई गई। अब इन्हीं कथित अनियमितताओं और लेन-देन की शिकायतों के बाद उत्तर प्रदेश शासन के स्तर पर मामला संज्ञान में आया और आधिकारिक जांच प्रक्रिया शुरू होने से प्रशासनिक गलियारों में हलचल और बढ़ गई है।

एसओ से मांगा गया लिखित जवाब

जानकारी के मुताबिक अनुभाग अधिकारियों की पोस्टिंग में घूसखोरी को लेकर शिकायत शासन के उच्च स्तर तक पहुंची थी। उसी शिकायत के आधार पर मामले की पड़ताल और आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र सचिवालय प्रशासन विभाग को भेजा गया। इसके बाद विभाग ने संबंधित अनुभाग अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है, ताकि आरोपों पर उनका लिखित जवाब लिया जा सके। सचिवालय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष चौहान के हवाले से बताया गया कि, कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं। सभी को नोटिस देकर उनका पक्ष मांगा गया है। जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

विजिलेंस जांच की मांग तेज

नोटिसों का सिलसिला शुरू होते ही यूपी सचिवालय में माहौल गर्म हो गया है। कर्मचारी संगठनों और कुछ कर्मचारी नेताओं का कहना है कि मामला सिर्फ नोटिस और लिखित जवाब तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वे मांग कर रहे हैं कि पूरे प्रकरण की विजिलेंस या किसी स्वतंत्र सक्षम एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब मिले। सचिवालय के एक समीक्षा अधिकारी के मुताबिक ऐसे आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि पोस्टिंग में लेन-देन की बात सही साबित होती है, तो इसका सीधा असर शासन के कामकाज की पारदर्शिता, निष्पक्षता और शुचिता पर पड़ेगा। साथ ही यह मांग भी उठ रही है कि ट्रांसफर पॉलिसी के विपरीत जिन-जिन तैनातियों पर सवाल उठे हैं, उनकी भी व्यापक जांच होनी चाहिए UP News

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उत्तर प्रदेश में बोले राज्यमंत्री: अमेरिकी टैरिफ से भारत की अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं

विदेश राज्यमंत्री ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा शांति और सहयोग पर आधारित रही है। भारत ने न तो कभी किसी देश पर आक्रमण किया और न ही आतंकवाद जैसी गतिविधियों का समर्थन किया है।

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विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar22 Jan 2026 07:13 PM
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UP News : केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा है कि अमेरिका को यह गलतफहमी नहीं रखनी चाहिए कि उसकी व्यापार नीतियों या टैरिफ फैसलों से भारत की आर्थिक स्थिति कमजोर होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आज वैश्विक मंच पर एक सशक्त और भरोसेमंद देश के रूप में स्थापित हो चुका है और किसी एक राष्ट्र पर निर्भर नहीं है। गोंडा में आयोजित विकसित भारत जी-राम-जी जन जागरण अभियान में शामिल होने पहुंचे मंत्री ने योजना के उद्देश्यों और अब तक की उपलब्धियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया यह भली-भांति समझ चुकी है कि भारत की आर्थिक और कूटनीतिक स्थिति मजबूत है। वैश्विक स्तर पर यदि किसी देश पर विश्वास किया जाता है, तो वह भारत है।

भारत की विदेश नीति हमेशा शांति और सहयोग पर आधारित

विदेश राज्यमंत्री ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा शांति और सहयोग पर आधारित रही है। भारत ने न तो कभी किसी देश पर आक्रमण किया और न ही आतंकवाद जैसी गतिविधियों का समर्थन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आज पीएम मोदी एक प्रभावशाली वैश्विक नेता के रूप में पहचाने जाते हैं, जिनकी नीतियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भरोसा करता है। रूस-भारत-चीन समूह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले वैश्विक व्यवस्था दो शक्तियों के इर्द-गिर्द घूमती थी, लेकिन अब दुनिया मल्टीपोलर व्यवस्था की ओर बढ़ चुकी है। इस बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका लगातार और अधिक प्रभावशाली हो रही है।

जांच समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने गोंडा मेडिकल कॉलेज और महिला अस्पताल में सामने आई व्यवस्थागत खामियों पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने बताया कि जांच समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं, जिनकी जानकारी चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव को दे दी गई है। सीटी स्कैन सुविधा, स्वच्छता और अन्य अवसंरचनात्मक समस्याओं को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है और जल्द ही सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे कोई व्यक्ति ऊंचे पद पर पहुंचता है, उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर घटना हुई, वहां पहले से नियम था कि वहां केवल पैदल आवागमन की अनुमति है। ऐसे में रथ ले जाना नियमों के खिलाफ था। उन्होंने दोहराया कि कानून व्यवस्था सर्वोपरि है और कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता।

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