ब्राह्मणों के सम्मान में बहन जी उतरी मैदान में, कर दी बड़ी मांग

मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे संवेदनशील सामाजिक ताने-बाने वाले राज्य में ऐसे कंटेंट गलत संदेश फैलाते हैं और टकराव बढ़ा सकते हैं इसीलिए उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर इस पर रोक लगाने की मांग की है।

बसपा सुप्रीमो मायावती
बसपा सुप्रीमो मायावती
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar06 Feb 2026 11:46 AM
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UP News : नेटफ्लिक्स की अपकमिंग वेब सीरीज घूसखोर पंडत को लेकर चल रहा विवाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी तेजी से दिखने लगा है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री तथा बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस मुद्दे पर सीधा मोर्चा खोलते हुए सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और आरोप लगाया कि फिल्मों/वेब कंटेंट में पंडित शब्द को जानबूझकर अपमानजनक संदर्भ में रखकर ब्राह्मण समाज की छवि को चोट पहुंचाई जा रही है। मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे संवेदनशील सामाजिक ताने-बाने वाले राज्य में ऐसे कंटेंट गलत संदेश फैलाते हैं और टकराव बढ़ा सकते हैं इसीलिए उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर इस पर रोक लगाने की मांग की है। 

यह सुनियोजित अपमान - मायावती

मायावती का कहना है कि बीते कुछ वक्त से उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि फिल्मों और वेब कंटेंट में भी ब्राह्मण समाज को लेकर ऐसी प्रस्तुतियां लगातार सामने आ रही हैं, जिनसे समाज में नाराजगी गहराती जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि किसी समुदाय की पहचान से जुड़े शब्दों को जानबूझकर गलत संदर्भ में रखकर पूरे समाज को कटघरे में खड़ा करना न्यायसंगत नहीं है। इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील बिंदु घुसपैठिया शब्द को लेकर उभरा है। विरोध कर रहे संगठनों का दावा है कि सीरीज में ब्राह्मण पात्रों के लिए इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल हुआ है, जो न सिर्फ अपमानजनक है बल्कि समाज में गलत धारणा भी फैलाती है। मायावती ने इसे जातिसूचक और गरिमा पर चोट बताकर केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। उधर, सीरीज बनाने वालों की तरफ से यह तर्क दिया जा रहा है कि कहानी का मकसद सरकारी तंत्र में रिश्वतखोरी और सिस्टम की खामियों पर प्रहार करना है जहां एक कर्मचारी पंडत उपनाम के साथ पद का दुरुपयोग कर अवैध वसूली करता दिखाया गया है। लेकिन विरोधियों का कहना है कि भ्रष्टाचार किसी एक जाति तक सीमित नहीं होता, ऐसे में कहानी के बहाने जाति-विशेष की पहचान को विवादित ढंग से जोड़ना यूपी जैसे सामाजिक रूप से संवेदनशील राज्य में तनाव बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण संगठनों ने खोला मोर्चा

उत्तर प्रदेश में सनातन रक्षक दल समेत कई ब्राह्मण संगठनों ने इस सीरीज के नाम और प्रस्तुति पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ‘पंडत’ शब्द सम्मान और ज्ञान का प्रतीक है, उसके साथ घूसखोर जोड़ना सीधे-सीधे समाज की छवि धूमिल करता है। विरोधियों का तर्क है कि भ्रष्टाचार किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं होता, फिर कहानी में विशिष्ट पहचान को उभारना एजेंडा जैसा लगता है। पोस्टर/ट्रेलर में धार्मिक प्रतीकों या वेशभूषा के साथ कुछ दृश्यों पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। UP News

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योगी सरकार का बड़ा एक्शन, तीन जिलों के SDM पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश के चंदौली में तैनाती के दौरान राजस्व मामलों में नियमों की अनदेखी कर कथित तौर पर अवैध कब्जेदारों को फायदा पहुंचाने के आरोप में शासन ने तीन उपजिलाधिकारियों (SDM) को निलंबित कर दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 3 SDM को किया सस्पेंड
उत्तर प्रदेश सरकार ने 3 SDM को किया सस्पेंड
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar06 Feb 2026 10:02 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश में सरकारी और ग्राम समाज की जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस वाला संदेश देते हुए बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। उत्तर प्रदेश के चंदौली में तैनाती के दौरान राजस्व मामलों में नियमों की अनदेखी कर कथित तौर पर अवैध कब्जेदारों को फायदा पहुंचाने के आरोप में शासन ने तीन उपजिलाधिकारियों (SDM) को निलंबित कर दिया। निलंबित अफसरों में लालता प्रसाद (वर्तमान तैनाती - गाजियाबाद), सतीश कुमार (वर्तमान तैनाती -एटा) और विराग पांडेय (वर्तमान तैनाती - बुलंदशहर) शामिल हैं। शासन ने निलंबन अवधि में तीनों को आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद के कार्यालय से संबद्ध किया है। यह कार्रवाई प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज के आदेश पर की गई है।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर से जुड़ा मामला

यह सख्त कार्रवाई चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर क्षेत्र से जुड़े उन भूमि प्रकरणों के बाद सामने आई है, जिनमें प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठे। आरोप है कि जब ये अधिकारी तत्कालीन तहसीलदार के तौर पर तैनात थे, तब ग्राम समाज और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के मामलों में पहले से पारित बेदखली और वसूली के आदेशों को या तो वापस ले लिया गया, या फिर उन्हें निरस्त कर कब्जेदारों को राहत देने वाले निर्णय दे दिए गए। 

DM के निरीक्षण में सामने आई गड़बड़ी

पूरा प्रकरण तब उजागर हुआ जब चंदौली के जिलाधिकारी चंद्रमोहन गर्ग ने निस्तारित पत्रावलियों का निरीक्षण कराया। जांच में सामने आया कि कई मामलों में ग्राम समाज की संपत्तियों खलिहान, चकमार्ग, कब्रिस्तान, परती भूमि और बंजर भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ पहले से जारी आदेशों को बाद में पलट दिया गया।

निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की, जिसमें एडीएम न्यायिक, एसडीएम चकिया और एसडीएम चंदौली को शामिल किया गया।

तीनों SDM सस्पेंड

जांच समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि ग्राम सभा की संपत्ति से जुड़े मामलों में नियमों का उल्लंघन हुआ और कुछ प्रकरणों में चुनिंदा कब्जेदारों को लाभ पहुंचाने वाले आदेश पारित किए गए। रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने शासन को कार्रवाई की संस्तुति भेजी, जिसके बाद शासन ने त्वरित निर्णय लेते हुए तीनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया। UP News

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बरेली में बनेगा उत्तर प्रदेश का पहला मीडिया टावर, शहर को मिलेगी आधुनिक पहचान

बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) रामगंगानगर आवासीय योजना के सेक्टर-7 में अत्याधुनिक मीडिया टावर का निर्माण कराने जा रहा है। प्राधिकरण का दावा है कि यह उत्तर प्रदेश का पहला मीडिया टावर होगा, जो सूचना प्रसारण के साथ-साथ शहर की खूबसूरती को भी नया आयाम देगा।

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अत्याधुनिक मीडिया टावर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar05 Feb 2026 07:11 PM
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UP News : बरेली शहर एक और बड़ी सौगात की ओर बढ़ रहा है। बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) रामगंगानगर आवासीय योजना के सेक्टर-7 में अत्याधुनिक मीडिया टावर का निर्माण कराने जा रहा है। प्राधिकरण का दावा है कि यह उत्तर प्रदेश का पहला मीडिया टावर होगा, जो सूचना प्रसारण के साथ-साथ शहर की खूबसूरती को भी नया आयाम देगा।

कोयंबटूर मॉडल पर होगा निर्माण

यह मीडिया टावर तमिलनाडु के कोयंबटूर शहर में बने आधुनिक मीडिया टावर की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। लगभग 11 मीटर ऊंचे इस स्ट्रक्चर को हाईटेक तकनीक से लैस किया जाएगा। बीडीए अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना न सिर्फ तकनीकी रूप से उन्नत होगी, बल्कि बरेली को स्मार्ट सिटी की दिशा में एक और कदम आगे ले जाएगी।

2.5 करोड़ की लागत, हाईटेक एलईडी डिस्प्ले

करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस टावर में आठ मीटर का विशाल डिस्प्ले एरिया होगा। इसमें सिंगापुर के मशहूर गार्डन बाय द वे की तर्ज पर ढलान वाली एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी। टावर में लगभग 5,000 मल्टी-कलर एलईडी लाइट्स होंगी, जो रात के समय झिलमिलाते हुए बेहद आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करेंगी।

सूचना, विज्ञापन और योजनाओं का होगा प्रसारण

मीडिया टावर की स्क्रीन पर समाचार, सरकारी योजनाओं, जनहित संदेशों और व्यावसायिक विज्ञापनों का उच्च गुणवत्ता में प्रदर्शन किया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी आम जनता तक सीधे और प्रभावी तरीके से पहुंचाना है।

इन्फोटेनमेंट हब के रूप में होगा विकसित

बीडीए इस मीडिया टावर को केवल डिस्प्ले यूनिट तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इसे इन्फोटेनमेंट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए एक आधुनिक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जहां से कंटेंट, डिस्प्ले और मीडिया प्लेयर को नियंत्रित किया जाएगा। साथ ही, विज्ञापनों के माध्यम से प्राधिकरण को राजस्व मिलने की भी संभावना है। बीडीए के मुख्य अभियंता एपीएन सिंह के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना की टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। निर्माण पूरा होने के बाद यह मीडिया टावर बरेली की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। भविष्य में यही मॉडल प्रदेश के अन्य शहरों में भी अपनाया जा सकता है।

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