क्यूँ जवानी याद आ गई… मजाज़ के 5 शेर, जो आपको रोक लेंगे

शुरुआती दौर में उन्हें वह तवज्जो नहीं मिली, जिसके वे हक़दार थे, मगर वक्त के साथ उनकी शायरी ने अपनी जगह खुद बनाई और देखते ही देखते मजाज़ का नाम उर्दू अदब के यादगार हस्ताक्षरों में शुमार हो गया।

मजाज़ के शेर
मजाज़ के शेर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar20 Jan 2026 02:47 PM
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Asrarul Haq Majaz : असरारुल हक़ “मजाज़” (1911–1955) उर्दू की प्रगतिशील धारा से जुड़े उन रोमानी शायरों में गिने जाते हैं, जिनकी पहचान कम लिखकर भी गहरी छाप छोड़ने वालों में होती है। लखनऊ से उनका भावनात्मक और साहित्यिक रिश्ता इतना मजबूत रहा कि वे “मजाज़ लखनवी” के नाम से भी पहचाने गए। शुरुआती दौर में उन्हें वह तवज्जो नहीं मिली, जिसके वे हक़दार थे, मगर वक्त के साथ उनकी शायरी ने अपनी जगह खुद बनाई और देखते ही देखते मजाज़ का नाम उर्दू अदब के यादगार हस्ताक्षरों में शुमार हो गया।

जीवन-परिचय

मजाज़ का असली नाम असरारुल हक़ था। आगरा में रहते हुए उन्होंने कुछ समय के लिए “शहीद” उपनाम अपनाया, लेकिन बाद में उन्होंने अपने नाम के साथ वह तख़ल्लुस जोड़ा, जिसने उन्हें अदब की दुनिया में स्थायी पहचान दिलाई—“मजाज़”। उनका जन्म 19 अक्टूबर 1911 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रुदौली में हुआ माना जाता है। हालांकि, कुछ साहित्यिक स्रोतों में उनकी जन्म-तिथि को लेकर मतभेद भी मिलता है फ़िराक़ गोरखपुरी के अनुसार यह 2 फरवरी 1909 बताई जाती है, और प्रकाश पंडित ने भी इसी तिथि को स्वीकार किया है।

असरारुल हक़ “मजाज़” टॉप 5 शेर

1 - हिन्दू चला गया न मुसलमाँ चला गया,    

इंसाँ की जुस्तुजू में इक इंसाँ चला गया। 

2 - फिर मिरी आँख हो गई नमनाक,

फिर किसी ने मिज़ाज पूछा है। 

3 - क्यूँ जवानी की मुझे याद आई,

मैं ने इक ख़्वाब सा देखा क्या था। 

4 - इज़्न-ए-ख़िराम लेते हुए आसमाँ से हम,

हट कर चले हैं रहगुज़र-ए-कारवाँ से हम। 

5 - हिज्र में कैफ़-ए-इज़्तिराब न पूछ,

ख़ून-ए-दिल भी शराब होना था। 


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SIR का वार, टिकट का तुरुप… सांसदों संग जीत की स्क्रिप्ट लिखेंगे अखिलेश

अखिलेश यादव ने सांसदों से कहा है कि वे अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में आने वाली विधानसभा सीटों की पूरी रिपोर्ट लेकर आएं। इन रिपोर्टों में स्थानीय मुद्दों, संगठन की ताकत, जनता के मूड, बूथ स्तर की स्थिति और चुनावी चुनौतियों का विस्तृत आकलन शामिल होगा।

अखिलेश यादव
अखिलेश यादव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar20 Jan 2026 12:26 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 की बिसात बिछनी शुरू हो गई है और मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी अब चुनावी मोड में साफ नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में सांसदों की अहम बैठक बुलाकर संकेत दे दिया कि उत्तर प्रदेश की अगली लड़ाई के लिए पार्टी अब सीट-दर-सीट रणनीति पर उतरेगी। बैठक में लोकसभा के 37 और राज्यसभा के 4 सांसदों के साथ वरिष्ठ नेतृत्व मौजूद रहेगा, जहां संगठन की जमीनी पकड़, संभावित प्रत्याशी, बूथ मैनेजमेंट और चुनावी रोडमैप पर गहन मंथन होगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इसे उत्तर प्रदेश में 2027 की सियासी जंग का पहला बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है। अखिलेश यादव ने सांसदों से कहा है कि वे अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में आने वाली विधानसभा सीटों की पूरी रिपोर्ट लेकर आएं। इन रिपोर्टों में स्थानीय मुद्दों, संगठन की ताकत, जनता के मूड, बूथ स्तर की स्थिति और चुनावी चुनौतियों का विस्तृत आकलन शामिल होगा।

सांसदों का रिपोर्ट कार्ड भी होगा चर्चा का विषय

बैठक के एजेंडे में सिर्फ रणनीति नहीं, बल्कि सांसदों की परफॉर्मेंस ऑडिट भी प्रमुख रूप से शामिल है। सपा नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश के सांसदों का एक विस्तृत रिपोर्ट-कार्ड तैयार किया है, जिस पर बंद कमरे में साफ-साफ और खुलकर चर्चा होने के संकेत हैं। मकसद यह समझना है कि लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में जो बढ़त मिली, उसे विधानसभा की सीट-दर-सीट जीत में कैसे बदला जाए। साथ ही जिन जिलों और क्षेत्रों में संगठन की पकड़ ढीली पड़ी है या बूथ स्तर पर मशीनरी कमजोर दिख रही है, वहां तुरंत सुधारात्मक कदम तय किए जाएंगे ताकि 2027 तक उत्तर प्रदेश के हर हिस्से में पार्टी का नेटवर्क एक समान मजबूती के साथ खड़ा हो सके।

SIR पर भी रहेगा खास फोकस

इस बैठक में विशेष गहन संशोधन (SIR) से जुड़ी रिपोर्ट को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। सपा का मानना है कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे आने वाले चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इसी वजह से अखिलेश यादव ने सांसदों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में SIR की स्थिति, संभावित शिकायतें और जमीनी फीडबैक लेकर आएं, ताकि पार्टी आगे की रणनीति तय कर सके।

बजट सत्र की रणनीति और यूपी सरकार पर हमले की तैयारी

सपा अध्यक्ष ने सांसदों को संसद के आगामी बजट सत्र के लिए भी रणनीति बनाने को कहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव चाहते हैं कि सांसद उत्तर प्रदेश सरकार की उन नीतियों और फैसलों को केंद्र में रखकर आक्रामक रुख अपनाएं, जिन्हें जनता के हितों के खिलाफ माना जा रहा है। योजना यह भी है कि इन मुद्दों को सिर्फ सदन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उत्तर प्रदेश के गांव-शहर तक ले जाकर जनजागरण का अभियान बनाया जाए। अखिलेश यादव पहले ही साफ कर चुके हैं कि समाजवादी पार्टी 2027 में उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। बैठक में सांसदों को संदेश दिया जाएगा कि वे लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहें, बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करें और जनता से सीधे संवाद बढ़ाएं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की जमीन तैयार हो चुकी है, जरूरत सिर्फ उसे सही दिशा में संगठित करने की है।

प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया भी हो सकती है तेज

बैठक के जरिए सपा संकेत दे रही है कि उत्तर प्रदेश में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया भी जल्द शुरू हो सकती है। पार्टी का फोकस इस बार “जीताऊ चेहरों” और मजबूत सामाजिक समीकरणों पर रहेगा। सूत्रों का कहना है कि संगठन को नए सिरे से धार देने के लिए सीटवार रणनीति बनाई जाएगी, ताकि चुनाव के वक्त कोई ढील न रह जाए। सपा का लक्ष्य PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्गों के साथ-साथ अन्य सामाजिक समूहों को जोड़कर उत्तर प्रदेश में बड़ा गठबंधन तैयार करने का है। पार्टी मान रही है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक संतुलन और स्थानीय मुद्दों का मेल ही जीत का रास्ता खोलता है। UP News

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नीला ड्रम के बाद ‘नीला संदूक’: झांसी में ऐसा कांड कि पुलिस भी सन्न!

पुलिस का कहना है कि घटना के बाद आरोपी ने शव को ठिकाने लगाने और पहचान छिपाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाए गए। आगे चलकर उसने अपनी दूसरी पत्नी गीता और बेटे नितिन से मदद मांगी।

झांसी केस अपडेट
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locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar20 Jan 2026 10:29 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के मुताबिक, एक रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी पर आरोप है कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी और फिर घटना के बाद लंबे समय तक सबूत मिटाने की साजिश रची। मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि जांच में आरोपी के साथ उसकी दूसरी पत्नी और बेटे की भूमिका भी सामने आई है ।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के झांसी में मुख्य आरोपी राम सिंह किराए के कमरे में पत्नी प्रीति के साथ रह रहा था। शुरुआती पूछताछ में उसने दावा किया कि उसे प्रीति के व्यवहार पर शक था और पैसों को लेकर बढ़ते विवाद ने रिश्तों में तनाव को और गहरा दिया। पुलिस का कहना है कि इसी खिंचाव के बीच 8 जनवरी को वारदात हुई। पुलिस का कहना है कि घटना के बाद आरोपी ने शव को ठिकाने लगाने और पहचान छिपाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाए गए। आगे चलकर उसने अपनी दूसरी पत्नी गीता और बेटे नितिन से मदद मांगी। आरोप है कि रविवार तड़के शव को ठिकाने लगाने की कोशिश के दौरान एक ऑटो चालक को बैग से तेज दुर्गंध महसूस हुई, जिसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी।

ऑटो चालक की सूझबूझ बनी टर्निंग पॉइंट

उत्तर प्रदेश के झांसी में इस सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश जिस कड़ी से हुआ, उसमें ऑटो चालक की सतर्कता निर्णायक साबित हुई। झांसी पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध हालात और बैग से उठती दुर्गंध को भांपकर चालक ने बिना घबराए तत्काल सूचना दी, जिससे पुलिस समय रहते मौके पर पहुंची और अहम साक्ष्य सुरक्षित किए जा सके। अधिकारियों का कहना है कि चालक की इस जिम्मेदारी और साहस को देखते हुए उसे सम्मानित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

पुलिस ने इस केस में मुख्य आरोपी राम सिंह के साथ उसकी दूसरी पत्नी गीता और बेटे नितिन को भी गिरफ्तार कर लिया है। दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद किया गया। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी भाग निकलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन देर रात उसे दबोच लिया गया। फिलहाल तीनों से अलग-अलग पूछताछ जारी है और पुलिस बयानों, परिस्थितिजन्य कड़ियों और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए पूरी साजिश की परतें खोलने में जुटी है। UP News


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