चांदी का मुकुट, सोने का शंख… गूगल गोल्डन बाबा की कहानी सुनकर चौंक जाएंगे

बाबा का दावा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति श्रद्धा के चलते उन्होंने यह प्रण लिया है कि वे योगी के प्रधानमंत्री बनने तक नंगे पांव रहेंगे। बाबा बताते हैं कि पहले वे करीब 5 लाख रुपये की चांदी की चप्पलें पहनते थे, लेकिन इस व्रत के बाद उन्होंने जूते-चप्पल पूरी तरह छोड़ दिए।

गूगल गोल्डन बाबा
गूगल गोल्डन बाबा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 10:25 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज माघ मेले में इस बार एक संत अपने आध्यात्मिक से ज्यादा स्वर्णमयी अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। गले में भारी-भरकम सोने का शंख, हाथों में करोड़ों के कंगन, उंगलियों में देवी-देवताओं वाली सोने की अंगूठियां, सिर पर विशाल चांदी का मुकुट और साथ में शुद्ध सोने के ‘लड्डू गोपाल’—भीड़ इन्हें देखते ही ठिठक जाती है। लोग इन्हें अब गूगल गोल्डन बाबा के नाम से जानते हैं।

माघ मेले में बने आकर्षण का केंद्र स्वामी मनोजानंद महाराज

बाबा का दावा है कि वे करीब 5 करोड़ रुपये की कीमत के सोने-चांदी के आभूषण धारण करते हैं। चांदी के मुकुट के साथ गले में सोने-चांदी से जड़ा शंख और हाथ में हमेशा सोने की ‘लड्डू गोपाल प्रतिमा उनके व्यक्तित्व की पहचान बन चुकी है। माघ मेले के सेक्टर-2 में उनका शिविर बताया जा रहा है, जहां वे नियमित अनुष्ठान और दान-पुण्य करते हैं।

सीएम योगी के लिए ली बड़ी प्रतिज्ञा 

गोल्डन बाबा की चर्चा सिर्फ उनके आभूषणों तक सीमित नहीं है,उनका संकल्प भी उतना ही सुर्खियों में है। बाबा का दावा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति श्रद्धा के चलते उन्होंने यह प्रण लिया है कि वे योगी के प्रधानमंत्री बनने तक नंगे पांव रहेंगे। बाबा बताते हैं कि पहले वे करीब 5 लाख रुपये की चांदी की चप्पलें पहनते थे, लेकिन इस व्रत के बाद उन्होंने जूते-चप्पल पूरी तरह छोड़ दिए। इतना ही नहीं, उनके चांदी के मुकुट पर भी सीएम योगी की तस्वीर होने की बात कही जा रही है, जो उनकी आस्था को और “दिखाई देने वाली” पहचान दे रही है।

गूगल गोल्डन बाबा नाम कैसे पड़ा?

अपने नाम को लेकर बाबा का तर्क भी उतना ही दिलचस्प है। वे कहते हैं, “गूगल पर खोजेंगे तो मैं सामने आ जाऊंगा, इसलिए लोग मुझे गूगल गोल्डन बाबा कहते हैं। बाबा के अनुसार, वे करीब 20 वर्षों से इसी तरह की स्वर्णमयी वेशभूषा में रहते आ रहे हैं और पिछले 8 वर्षों से लगातार माघ मेले में आ रहे हैं। मेले में जब भी वे बाहर निकलते हैं, उनके आसपास लोगों की भीड़ जमा हो जाती है कोई तस्वीर लेना चाहता है तो कोई उनके बारे में जानना।

सोना पहनना हमारे यहां सम्मान की निशानी - गोल्डन बाबा

साधु-संतों की दुनिया में जहां सादगी को सबसे बड़ा आभूषण माना जाता है, वहीं गोल्डन बाबा का तर्क बिल्कुल उलटा है। वे कहते हैं कि वे क्षत्रिय वंश से आते हैं और उनके परिवार में सोना धारण करना सदियों से सम्मान और सामर्थ्य का प्रतीक रहा है। बाबा का दावा है कि उनके आभूषण किसी को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि उनकी परंपरा की पहचान हैं। इतना ही नहीं, वे खाने-पीने में भी यही राजसी अनुशासन निभाते हैं और चांदी के बर्तनों में ही भोजन-पानी लेने की बात करते हैं।

मेरे साथ लड्डू गोपाल हैं- गोल्डन बाबा

करोड़ों के आभूषण पहनकर मेले-भीड़ में निकलना स्वाभाविक तौर पर सुरक्षा के सवाल खड़े करता है, लेकिन गोल्डन बाबा इस चिंता को बिल्कुल अलग नजरिए से देखते हैं। जब उनसे पूछा गया कि बिना गार्ड के इतने कीमती गहने कैसे संभालते हैं, तो उन्होंने शांत स्वर में कहा - उन्हें किसी सुरक्षा घेराबंदी की जरूरत नहीं हैं। बाबा के मुताबिक, उनके हाथ में मौजूद ‘लड्डू गोपाल’ ही उनके सबसे बड़े रक्षक हैं। UP News

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इश्क़ से इंक़लाब तक: हसरत मोहानी के 5 यादगार शेर

वे सिर्फ़ एक प्रसिद्ध उर्दू शायर नहीं, बल्कि ऐसे राजनीतिक कार्यकर्ता थे जिनके विचार अपने समय से आगे थे। 1921 में “इंक़लाब ज़िंदाबाद” जैसा दमदार नारा पहली बार उनके लिखे हुए शब्दों के रूप में सामने आया।

हसरत मोहानी की शायरी
हसरत मोहानी की शायरी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar16 Jan 2026 01:48 PM
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Hasrat Mohani : सैयद फ़ज़ल-उल-हसन, जिन्हें उर्दू दुनिया हसरत मोहानी के नाम से जानती है (1 जनवरी 1875–13 मई 1951), भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की उन बेबाक आवाज़ों में थे, जिन्होंने कलम और कर्म दोनों से लड़ाई लड़ी। वे सिर्फ़ एक प्रसिद्ध उर्दू शायर नहीं, बल्कि ऐसे राजनीतिक कार्यकर्ता थे जिनके विचार अपने समय से आगे थे। 1921 में “इंक़लाब ज़िंदाबाद” जैसा दमदार नारा पहली बार उनके लिखे हुए शब्दों के रूप में सामने आया। यही नारा आगे चलकर आज़ादी की लड़ाई की पहचान बना और भगत सिंह, अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ां व राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जैसे क्रांतिकारियों के साथ जन-जन की जुबान पर चढ़ गया। उसी दौर में कांग्रेस के अहमदाबाद अधिवेशन में पूर्ण स्वतंत्रता की मांग उठाने वालों में उनका नाम सबसे पहले लिया जाता है।

शुरुआती जीवन और शिक्षा

हसरत मोहानी का जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के मोहान कस्बे में हुआ। उनके पिता का नाम सैयद अज़हर हुसैन बताया जाता है। शुरुआती पढ़ाई उन्होंने घर पर ही की और बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से 1903 में बी.ए. पूरा किया। छात्र जीवन से ही उन्हें शायरी का शौक था और वे अपना कलाम उस समय के साहित्यिक दायरे में दिखाने-सुनाने लगे।

पत्रकारिता से राजनीति तक

1903 में उन्होंने अलीगढ़ से पत्रिका ‘उर्दू-ए-मुअल्ला’ निकाली। यह पत्रिका अंग्रेज़ी हुकूमत की नीतियों पर तीखी टिप्पणी के लिए जानी गई। 1904 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े और जल्द ही राष्ट्रीय आंदोलन के सक्रिय चेहरों में शामिल हो गए। 1905 के स्वदेशी आंदोलन में भी उन्होंने भागीदारी की। उनकी लिखाई का असर इतना तीखा था कि 1907 में पत्रिका में प्रकाशित एक लेख जिसमें ब्रिटिश नीति की आलोचना थी के बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

हसरत मोहानी के टॉप 5 शेर

1 - वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूँ,

मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ। 

2 - और तो पास मिरे हिज्र में क्या रक्खा है,

इक तिरे दर्द को पहलू में छुपा रक्खा है। 

3 -मिलते हैं इस अदा से कि गोया ख़फ़ा नहीं,

क्या आप की निगाह से हम आश्ना नहीं। 

4 - कभी की थी जो अब वफ़ा कीजिएगा,

मुझे पूछ कर आप क्या कीजिएगा। 

5 - शिकवा-ए-ग़म तिरे हुज़ूर किया,

हम ने बे-शक बड़ा क़ुसूर किया।   



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बहराइच पुलिस में बड़ी फेरबदल, एसपी ने बदली थानों-चौकियों की कमान

निलंबित किए गए कर्मियों में मटेरा थानाध्यक्ष सुरेन्द्र प्रताप बौद्ध, उपनिरीक्षक विशाल जायसवाल और सिपाही अवधेश शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद जिलेभर के थानों में जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर संदेश साफ माना जा रहा है।

बहराइच पुलिस में बड़ा फेरबदल
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locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar16 Jan 2026 11:40 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) रामनयन सिंह की सख्त कार्रवाई से पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त करने के मकसद से एसपी ने कर्तव्य में लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए तीन कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए कर्मियों में मटेरा थानाध्यक्ष सुरेन्द्र प्रताप बौद्ध, उपनिरीक्षक विशाल जायसवाल और सिपाही अवधेश शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद जिलेभर के थानों में जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर संदेश साफ माना जा रहा है।

एसपी की सख्ती के बाद ट्रांसफर लिस्ट जारी

उत्तर प्रदेश के बहराइच में एसपी रामनयन सिंह के निर्देश पर मटेरा थाना की कमान अब देहात कोतवाली की रायपुर राजा पुलिस चौकी के प्रभारी हरिकेश सिंह को सौंप दी गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में प्रभावी पुलिसिंग के लिए जहां भी कामकाज में ढिलाई या सुस्ती सामने आएगी, वहां तत्काल प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे। इसी रणनीति के तहत बहराइच में कई स्तर पर तबादलों की नई व्यवस्था लागू की गई है। आदेश के अनुसार उपनिरीक्षक पूर्णेश नारायण पांडे को कस्बा नानपारा चौकी से हटाकर रायपुर राजा चौकी की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि कामेश्वर राय को चौकी दरगाह शरीफ से स्थानांतरित कर कस्बा नानपारा भेजा गया है। इसके अलावा अभय पांडे को हरदी से विशेश्वरगंज, विजय कुमार गुप्ता को कोतवाली नगर से मटेरा, और रौशनी वर्मा को हुजूरपुर से रामगांव तैनात किया गया है। यातायात व्यवस्था को भी दुरुस्त करने के लिए रवि यादव को यातायात सर्किल नगर से यातायात नानपारा भेजा गया है, वहीं रौशन सिंह को जरवल रोड थाने से फील्ड यूनिट शाखा में नई जिम्मेदारी दी गई है।

41 महिला और पुरुष आरक्षियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव

उत्तर प्रदेश के बहराइच में पुलिसिंग को जमीन पर और प्रभावी बनाने के लिए एसपी रामनयन सिंह ने 41 महिला व पुरुष आरक्षियों के कार्यक्षेत्र में भी व्यापक फेरबदल किया है। पुलिस विभाग में इस कदम को पेट्रोलिंग, कानून-व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पुलिस अधीक्षक ने सभी स्थानांतरित कर्मियों को साफ निर्देश दिए हैं कि वे बिना देरी अपने नए तैनाती स्थल पर पहुंचकर कार्यभार संभालें, ताकि उत्तर प्रदेश के बहराइच में सुरक्षा व्यवस्था की रफ्तार और जवाबदेही दोनों और तेज हो सके। UP News

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