पार्टी का फोकस उन मतदाताओं पर रहेगा, जिनके नाम ASD (अनुपस्थित, मृतक या स्थायी रूप से स्थानांतरित) श्रेणी में दर्ज हो गए हैं ताकि कागजो में गायब हुए असली वोटर फिर से सूची में लौटें और उत्तर प्रदेश की चुनावी बुनियाद पर किसी तरह की गलत कटौती की परछाईं न रह जाए।

UP News : उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद करीब 2.89 करोड़ नामों के कटने की चर्चा ने लखनऊ से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। इसी हलचल के बीच भाजपा ने प्रदेशभर में 10 दिन का वोटर-रिकवरी अभियान शुरू करने का फैसला किया है। पार्टी का फोकस उन मतदाताओं पर रहेगा, जिनके नाम ASD (अनुपस्थित, मृतक या स्थायी रूप से स्थानांतरित) श्रेणी में दर्ज हो गए हैं ताकि कागजो में गायब हुए असली वोटर फिर से सूची में लौटें और उत्तर प्रदेश की चुनावी बुनियाद पर किसी तरह की गलत कटौती की परछाईं न रह जाए।
भाजपा के मुताबिक इस अभियान में उत्तर प्रदेश के हर बूथ पर ASD सूची की ‘ग्राउंड रिपोर्टिंग’ होगी। कार्यकर्ता यह परखेंगे कि कहीं जीवित मतदाता कागज़ों में मृतक तो नहीं कर दिए गए, या वर्षों से उसी पते पर रहने वाले लोगों को अनुपस्थित/स्थायी रूप से शिफ्टेड तो नहीं दर्ज कर दिया गया। जहां भी ऐसी गड़बड़ी सामने आएगी, वहां संबंधित मतदाता को तुरंत संपर्क कर नाम दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।
पार्टी ने संगठन को मिशन मोड में उतारते हुए बूथ कमेटी के प्रत्येक सदस्य को प्रतिदिन कम से कम 5 नए वोटर जोड़ने का लक्ष्य दिया है। पार्टी का मुख्य फोकस फॉर्म-6 के जरिए नाम जोड़ने पर रहेगा, ताकि सूची से बाहर हुए योग्य मतदाताओं को जल्द से जल्द वापस जोड़ा जा सके। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, BJP की बेचैनी सबसे ज्यादा शहरी क्षेत्रों और उन सीटों को लेकर है जहां चुनाव कम अंतर से तय होते हैं। रणनीति यही है कि संगठन बाकी काम छोड़कर फिलहाल SIR से जुड़े इस अभियान को प्राथमिकता दे, ताकि चुनावी आधार पर किसी तरह का नुकसान न हो।
शुक्रवार शाम हुई पार्टी की वर्चुअल बैठक पूरी तरह SIR को लेकर केंद्रित रही। बैठक में प्रदेश नेतृत्व ने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को 10-दिवसीय अभियान में पूरी ताकत से जुटने का निर्देश दिया। साथ ही 16, 17 और 18 जनवरी को चलाए गए/चलने वाले विशेष अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़े काम को तेज और आसान बनाने के लिए चार दिन का विशेष अभियान तय किया गया है। इसमें 18 जनवरी, 31 जनवरी और 1 फरवरी को बूथों पर विशेष व्यवस्था रहेगी, जबकि एक अतिरिक्त तिथि संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) स्थानीय जरूरत के हिसाब से तय करेंगे। इन दिनों हर बूथ पर ड्राफ्ट मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि लोग सूची देखकर तुरंत जरूरी फॉर्म भर सकें। प्रक्रिया को सुचारू रखने के लिए हेल्प डेस्क बनाए जाएंगे और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी मतदाता को कागज़ी उलझनों में न फंसना पड़े।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बीच उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से चौंकाने वाली विसंगतियों की शिकायतें भी सामने आई हैं। गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट पर बूथ संख्या 126 में उन मतदाताओं के नाम कटने की चर्चा है, जो 1986 से उसी पते पर रह रहे बताए जा रहे हैं। वहीं गोरखपुर के वार्ड-16 में एक ही मकान पर 233 वोटरों के दर्ज होने का दावा सामने आकर सवालों के घेरे में है।
6 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होते ही उत्तर प्रदेश में फॉर्म-6 के जरिए नाम जुड़वाने की रफ्तार अचानक तेज हो गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ड्राफ्ट आने के बाद अब तक करीब 4 लाख लोगों ने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया, जबकि राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी सक्रिय दिखे और उन्होंने 9059 फॉर्म भरवाए। दिलचस्प यह है कि ड्राफ्ट जारी होने से पहले ही 16.18 लाख फॉर्म-6 जमा हो चुके थे। UP News