“विरोध के पीछे जातिवादी सोच”, UGC नियमों पर मायावती का बड़ा बयान

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण के लिए बनाए गए इस नियम के कुछ प्रावधानों का विरोध सामान्य वर्ग के कुछ लोग अपने खिलाफ भेदभाव या साजिश मानकर कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar28 Jan 2026 11:00 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में UGC के नए नियमों को लेकर चल रही बहस अब तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री तथा बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में इक्विटी कमेटी (समता समिति) गठन से जुड़े नए प्रावधानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने कहा कि इन नियमों का विरोध केवल जातिवादी मानसिकता वाले लोग कर रहे हैं और इसे घिनौनी राजनीति का हिस्सा बताया। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण के लिए बनाए गए इस नियम के कुछ प्रावधानों का विरोध सामान्य वर्ग के कुछ लोग अपने खिलाफ भेदभाव या साजिश मानकर कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।

मायावती ने दी सरकार को नसीहत

उत्तर प्रदेश के सियासी माहौल में UGC नियमों को लेकर छिड़ी बहस के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने जोर देकर कहा कि ऐसे संवेदनशील प्रावधान लागू करने से पहले छात्रों, शिक्षकों, विश्वविद्यालय प्रशासन और सामाजिक समूहों सभी को भरोसे में लेना ज्यादा बेहतर होता। उनका तर्क था कि जब संवाद की जगह फैसले अचानक थोपे जाते हैं, तो कई बार गलतफहमियां बढ़ती हैं और सामाजिक तनाव का माहौल बन जाता है। मायावती ने सरकार और संस्थानों को सलाह दी कि नियमों की मंशा और प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट संवाद और भरोसे की नीति अपनाई जाए। साथ ही उन्होंने दलितों और पिछड़ों से अपील की कि वे अपने ही वर्गों में मौजूद स्वार्थी और बिकाऊ नेताओं की भड़काऊ बयानबाजी के झांसे में न आएं। मायावती के मुताबिक, कुछ लोग ऐसे मुद्दों की आड़ लेकर बार-बार राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करते हैं, इसलिए खासकर यूपी में जनता को सतर्क रहकर तथ्यों के आधार पर फैसला करना चाहिए।

UGC नियमों में क्या है व्यवस्था?

दरअसल, UGC ने 13 जनवरी 2026 को जारी नियमों में उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव की शिकायतों के समाधान के लिए विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी/मॉनिटरिंग टीमों जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य करने की बात कही है। उद्देश्य यह बताया गया है कि खास तौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों पर संस्थागत स्तर पर कार्रवाई हो और कैंपस में समान अवसर का माहौल बने। उत्तर प्रदेश में यह मामला तेजी से राजनीतिक रंग ले रहा है। एक तरफ इसे सामाजिक न्याय और कैंपस सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ विरोध करने वाले समूह इसे एकतरफा बताकर सवाल उठा रहे हैं। इसी के चलते प्रदेश में बहस और विरोध का माहौल लगातार गरमाया हुआ है। UP News

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UP में UGC नियमों पर सियासी भूचाल, भाजपा महिला मोर्चा का इस्तीफा

UGC के नए नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। सवर्ण संगठनों के विरोध के बीच अब भाजपा के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। इसी क्रम में फिरोजाबाद से भाजपा को बड़ा झटका लगा है।

BJP leader Shashi Tomar
UGC नियमों को लेकर BJP नेता शशि तोमर का बड़ा कदम (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar27 Jan 2026 08:56 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए नियमों को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। सवर्ण संगठनों के बाद अब इसका असर भाजपा पार्टी के भीतर भी साफ दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में फिरोजाबाद से भाजपा को बड़ा झटका लगा है, जहां महिला मोर्चा की जिला मंत्री शशि तोमर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

बता दें कि प्राप्त जानकारी के अनुसार शशि तोमर ने मंगलवार (27 जनवरी) को व्हाट्सएप के माध्यम से अपना त्यागपत्र पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भेजा। उन्होंने UGC के नए नियमों को ‘सवर्ण विरोधी’ और ‘काला कानून’ बताते हुए आरोप लगाया कि इससे सवर्ण समाज के बच्चों की शैक्षणिक स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।

भाजपा की सक्रिय नेता रही हैं शशि तोमर

बता दें कि शशि तोमर ने बताया कि वह चार बार भाजपा की सक्रिय सदस्य रह चुकी हैं और पूर्व में क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में भी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। छात्र जीवन के दौरान वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ी रहीं और मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में संगठन के लिए कार्य किया है।

UGC नियमों के बहिष्कार का ऐलान

बता दें कि अपने बयान में शशि तोमर ने UGC के नए नियमों को समाज विशेष के बच्चों को “गुलामी की ओर धकेलने वाला” बताया और इसके पूर्ण बहिष्कार का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि जब क्षत्राणियों ने राष्ट्र की रक्षा के लिए जौहर जैसे बलिदान दिए, तो आज वे अपने बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष क्यों नहीं कर सकतीं। उन्होंने सवर्ण समाज के बच्चों को “गुलामी की जंजीरों” से मुक्त कराने के लिए हर स्तर पर संघर्ष की बात कही।

योगी सरकार पर भरोसा बरकरार

हालांकि शशि तोमर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा योगी सरकार के विरोध में नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और कार्यों पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह आगे भी योगी सरकार का समर्थन करती रहेंगी।

भाजपा की बढ़ीं मुश्किलें

बता दें कि इस घटनाक्रम के बाद फिरोजाबाद की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वहीं, भाजपा की ओर से अब तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। UGC के नए नियमों को लेकर लगातार हो रहे विरोध और पार्टी नेताओं के इस्तीफों से भाजपा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। UP News

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अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस ने कहा-यूजीसी के नए नियम वापस लो नहीं तो इच्छामृत्यु की इजाजत दो

जगद्गुरु परमहंस ने यूजीसी के नए प्रावधानों को काला कानून बताते हुए आरोप लगाया कि यह नियम शिक्षा संस्थानों में सामाजिक संतुलन को बिगाड़ देगा और एक वर्ग विशेष को निशाना बनाएगा। उनका कहना है कि यह व्यवस्था छात्रों और शिक्षकों के बीच भय और अविश्वास का माहौल पैदा करेगी।

paramhansa
जगद्गुरु परमहंस आचार्य
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar27 Jan 2026 07:08 PM
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UP News : यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियम 2026 को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में अयोध्या के प्रसिद्ध धमार्चार्य जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने सरकार के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार इस नियमावली को वापस नहीं लेती, तो उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए।

यूजीसी के नए प्रावधानों को काला कानून बताया

जगद्गुरु परमहंस ने यूजीसी के नए प्रावधानों को काला कानून बताते हुए आरोप लगाया कि यह नियम शिक्षा संस्थानों में सामाजिक संतुलन को बिगाड़ देगा और एक वर्ग विशेष को निशाना बनाएगा। उनका कहना है कि यह व्यवस्था छात्रों और शिक्षकों के बीच भय और अविश्वास का माहौल पैदा करेगी।

दिल्ली से यूपी तक विरोध प्रदर्शन

यूजीसी नियमों के विरोध में दिल्ली में यूजीसी मुख्यालय के बाहर छात्रों और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन किया। वहीं उत्तर प्रदेश के कई जिलों लखनऊ, वाराणसी, मुजफ्फरनगर और अयोध्या में भी सड़कों पर उतरकर नारेबाजी हुई। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि नए नियमों को तत्काल रद किया जाए।

क्या है विवाद की जड़?

यूजीसी रेगुलेशन 2026 के तहत विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इक्विटी सेल और शिकायत निवारण तंत्र को और सख्त बनाया गया है। सरकार का दावा है कि इसका मकसद शिक्षा परिसरों में भेदभाव को रोकना है, लेकिन विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि यह व्यवस्था गलत आरोपों और पक्षपात को बढ़ावा दे सकती है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल

इस मुद्दे पर राजनीतिक गलियारों में भी हलचल देखी जा रही है। कुछ स्थानीय नेताओं ने विरोध में अपने पद छोड़े, जबकि एक प्रशासनिक अधिकारी के इस्तीफे के बाद उसे निलंबन का सामना करना पड़ा। इससे साफ है कि मामला केवल छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रहा। केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि नए नियमों को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनका दावा है कि यह बदलाव समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए किया गया है, न कि किसी वर्ग के खिलाफ। यूजीसी नियमों को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सरकार नियमों में संशोधन करती है या विरोध और तेज होता है।

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