Armour Security के शेयर ने निवेशकों की उड़ाई नींद, हुआ भारी घाटा

Armour Security IPO Listing ने निवेशकों को लिस्टिंग के दिन बड़ा झटका दिया है। आईपीओ में ₹57 प्रति शेयर के भाव पर खरीदी गई हिस्सेदारी NSE SME पर ₹45.60 पर लिस्ट हुई और कुछ ही देर में ₹43.35 तक गिर गई। हर लॉट 2000 शेयर का होने के कारण निवेशकों को ₹27,300 का नुकसान हुआ।

Armour Security IPO
Armour Security IPO Listing
locationभारत
userअसमीना
calendar22 Jan 2026 12:40 PM
bookmark

Armour Security IPO Listing ने शेयर बाजार में कदम रखते ही निवेशकों को बड़ा झटका दिया। सिक्योरिटी और मैनपावर सर्विसेज देने वाली आर्मर सिक्योरिटी इंडिया लिमिटेड के शेयर NSE SME प्लेटफॉर्म पर 20% डिस्काउंट के साथ लिस्ट हुए। आईपीओ में जिस शेयर को ₹57 में खरीदा गया था वह लिस्टिंग के समय ₹45.60 पर खुला और कुछ ही देर में ₹43.35 के लोअर सर्किट तक फिसल गया। नतीजा यह रहा कि हर लॉट (2000 शेयर) पर निवेशकों को करीब ₹27,300 का सीधा नुकसान उठाना पड़ा।

नहीं मिला कोई लिस्टिंग गेन

Armour Security IPO को खुदरा निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी और यह कुल 1.82 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसके बावजूद शेयरों की लिस्टिंग कमजोर रही। आईपीओ का इश्यू प्राइस ₹57 था, जबकि NSE SME पर इसकी एंट्री ₹45.60 पर हुई। यानी निवेशकों की पूंजी लिस्टिंग के साथ ही करीब 20% घट गई। लिस्टिंग के थोड़ी देर बाद शेयर और टूटकर ₹43.35 पर पहुंच गया जो इसका लोअर सर्किट लेवल था।

कहां होगा जुटाई गई रकम का इस्तेमाल?

आईपीओ से जुटाई गई रकम के इस्तेमाल को लेकर कंपनी ने साफ योजना बताई थी। इसमें से ₹15.90 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में लगाए जाएंगे। ₹1.61 करोड़ मशीनरी, इक्विपमेंट और वाहनों की खरीद पर खर्च किए जाएंगे जबकि ₹2.40 करोड़ का उपयोग कर्ज घटाने के लिए किया जाएगा। बाकी राशि को जनरल कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

Armour Security IPO की स्थापना

आर्मर सिक्योरिटी इंडिया लिमिटेड की स्थापना अगस्त 1999 में हुई थी और कंपनी पिछले दो दशकों से सिक्योरिटी और मैनपावर सर्विसेज के क्षेत्र में काम कर रही है। कंपनी कॉरपोरेट, इंडस्ट्रियल, बैंकिंग, हेल्थकेयर, गवर्नमेंट, एजुकेशन और यूनिवर्सिटी जैसे कई सेक्टर्स को सिक्योरिटी सेवाएं देती है। इसके तहत आर्म्ड और अनआर्म्ड सिक्योरिटी गार्ड्स, इंटीग्रेटेड फैसिलिटी मैनेजमेंट, हाउसकीपिंग, क्लीनिंग सर्विसेज, इवेंट मैनेजमेंट, फायरफाइटिंग ट्रेनिंग, सिक्योरिटी ट्रेनिंग और मैनपावर सप्लाई जैसी सेवाएं शामिल हैं।

कंपनी की कुल आय

कंपनी की वित्तीय स्थिति में बीते कुछ सालों में लगातार सुधार देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2023 में कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹2.26 करोड़ था जो वित्त वर्ष 2024 में बढ़कर ₹2.62 करोड़ और वित्त वर्ष 2025 में ₹3.97 करोड़ तक पहुंच गया। इसी अवधि में कंपनी की कुल आय भी सालाना 12 फीसदी से अधिक की चक्रवृद्धि दर से बढ़कर ₹36.56 करोड़ हो गई।

कंपनी पर था कुल ₹6.01 करोड़ का कर्ज

वर्तमान वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच ही कंपनी ₹2.90 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹19.69 करोड़ की कुल आय दर्ज कर चुकी है। सितंबर 2025 के अंत तक कंपनी पर कुल ₹6.01 करोड़ का कर्ज था जबकि इसके रिजर्व और सरप्लस ₹9.12 करोड़ के स्तर पर मौजूद थे जो इसकी बैलेंस शीट को संतुलित दिखाते हैं।

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

ट्रंप के एक बयान से पलट गया पूरा बाजार, मिनटों में बिखर गई गोल्ड-सिल्वर की कीमत

सोना और चांदी की कीमतों में गुरुवार को अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिली है। MCX पर चांदी करीब ₹20,000 प्रति किलो तक टूट गई है जबकि 24 कैरेट सोना ₹4,000 प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता हो गया है। इस Gold-Silver Crash के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान को बड़ी वजह माना जा रहा है।

GOLD-SILVER Rate
सोने और चांदी का भाव
locationभारत
userअसमीना
calendar22 Jan 2026 11:10 AM
bookmark

सोना और चांदी (Gold-Silver Rates) पिछले कुछ दिनों से निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न देते हुए लगातार नए रिकॉर्ड दर्ज कर रहे थे लेकिन गुरुवार को अचानक ऐसा झटका लगा कि बाजार में हाहाकार मच गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी करीब ₹20,000 प्रति किलो टूट गई जबकि सोना भी ₹4,000 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया। सोना और चांदी की कीमतों में अचानक आई इस गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान बड़ी वजह माना जा रहा है।

MCX पर खुलते ही Silver Price Crash

बुधवार को MCX पर 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी का वायदा भाव ₹3,25,602 प्रति किलो पर बंद हुआ था लेकिन गुरुवार को जैसे ही कारोबार शुरू हुआ चांदी के दाम अचानक गिरकर ₹3,05,753 प्रति किलो पर आ गए। इस तरह सिर्फ कुछ ही समय में 1 किलो चांदी करीब ₹19,849 सस्ती हो गई। यह हालिया समय की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है.

Gold Rate में भारी गिरावट

चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। बीते तीन दिनों में सोना लगातार नए लाइफ टाइम हाई बना रहा था। बुधवार को 5 फरवरी एक्सपायरी वाला सोना ₹1,52,862 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं गुरुवार को यह गिरकर ₹1,48,777 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

Gold-Silver Crash की सबसे बड़ी वजह

सोना और चांदी में आई इस अचानक गिरावट का सबसे बड़ा कारण डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ा बयान माना जा रहा है। दरअसल, बीते दिनों ट्रंप के लगातार टैरिफ धमकियों, वेनेजुएला-ईरान और यूरोप पर बयानबाजी से ग्लोबल टेंशन बढ़ गई थी। इस वजह से निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven Investment) के तौर पर सोना और चांदी की ओर भाग रहे थे जिससे इनके दाम तेजी से बढ़े।

Trump के बयान से कम हुई ग्लोबल टेंशन

अब ट्रंप की ओर से दिए गए नए बयानों ने बाजार का मूड बदल दिया है। उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर कहा कि अमेरिका और नाटो दोनों को संतुष्ट करने वाला समझौता किया जाएगा। इस बयान से यह संकेत मिला कि अमेरिका-यूरोप के बीच तनाव कम हो सकता है। जैसे ही टेंशन कम हुई निवेशकों ने सोना-चांदी से मुनाफा निकालना शुरू कर दिया और कीमतें गिर गईं।

इसलिए टूटा गोल्ड-सिल्वर

जब भी दुनिया में तनाव बढ़ता है निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोना-चांदी में लगाते हैं। लेकिन जैसे ही हालात सामान्य होते हैं यही पैसा वापस निकलने लगता है। ट्रंप के नरम रुख वाले बयान के बाद Safe Haven Demand कमजोर पड़ी जिसका सीधा असर Gold और Silver की कीमतों पर पड़ा।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

सोना और चांदी में आई यह गिरावट शॉर्ट टर्म मुनाफावसूली का नतीजा हो सकती है। अगर आगे फिर से ग्लोबल टेंशन बढ़ती है या डॉलर कमजोर होता है तो कीमतों में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है इसलिए निवेश से पहले सावधानी जरूरी है।

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

MSME सेक्टर पर सरकार की बड़ी मेहरबानी, जानिए कैसे मिलेगा फायदा?

केंद्र सरकार ने MSME सेक्टर को मजबूती देने के लिए SIDBI को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता मंजूर की है। इस फैसले से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सस्ता और आसान कर्ज मिलने की राह खुलेगी। सरकार का मानना है कि इस पूंजी निवेश से SIDBI की वित्तीय क्षमता बढ़ेगी।

MSME
MSME
locationभारत
userअसमीना
calendar21 Jan 2026 06:09 PM
bookmark

भारत की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर की भूमिका बेहद अहम है। यही सेक्टर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का मुख्य आधार है। अब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए MSME सेक्टर को सशक्त बनाने के लिए भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने की मंजूरी दी है। इस फैसले से न सिर्फ छोटे उद्यमों को सस्ता और आसान कर्ज मिलेगा बल्कि आने वाले वर्षों में लाखों नए उद्यम और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

SIDBI को 5,000 करोड़ की इक्विटी

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यह निर्णय लिया गया। सरकार का मानना है कि इस अतिरिक्त पूंजी से SIDBI को बाजार से कम लागत पर संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। इसके परिणामस्वरूप बैंक MSME सेक्टर को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कर सकेगा। वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के जरिए यह राशि तीन किस्तों में SIDBI में निवेश की जाएगी। वित्त वर्ष 2025-26 में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जबकि अगले दो वित्त वर्षों 2026-27 और 2027-28 में 1,000-1,000 करोड़ रुपये की इक्विटी डाली जाएगी। पहली किस्त की बुक वैल्यू 568.65 रुपये प्रति शेयर तय की गई है।

MSME देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़

एमएसएमई सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह न केवल रोजगार सृजन में मदद करता है, बल्कि छोटे उद्योगों के माध्यम से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति देता है। SIDBI को यह इक्विटी निवेश मिलने के बाद वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक जिन 76.26 लाख MSME को वित्तीय सहायता मिल रही है उनकी संख्या वित्त वर्ष 2027-28 तक 1.02 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि लगभग 25.74 लाख नए MSME इस पहल के तहत औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ेंगे। सरकार की योजना है कि इस कदम से छोटे उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और नई तकनीक अपनाकर उत्पादन बढ़ा सकेंगे।

रोजगार के अवसरों में तेजी

इस पहल से देश में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027-28 के अंत तक लगभग 1.12 करोड़ नए रोजगार उत्पन्न होंगे। यह न केवल छोटे कारोबारियों को मजबूती देगा बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी तेजी से बढ़ाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि SIDBI को मजबूत करने का यह फैसला Make in India, आत्मनिर्भर भारत और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी समर्थन देगा। आसान और सस्ता कर्ज मिलने से छोटे उद्यम नई तकनीक अपनाने, उत्पादन बढ़ाने और नए बाजारों में प्रवेश करने में सक्षम होंगे जिससे देश की समग्र आर्थिक वृद्धि को भी बल मिलेगा।

संबंधित खबरें