WhatsApp Privacy पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, Telegram CEO ने खोली Zuckerberg की पोल
सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर Meta को कड़ी फटकार लगाई है जिससे डेटा सुरक्षा पर नई बहस शुरू हो गई है। इसी बीच Telegram CEO द्वारा Mark Zuckerberg की पुरानी चैट शेयर किए जाने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या WhatsApp और Meta प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स का डेटा वास्तव में सुरक्षित है।

डिजिटल दौर में WhatsApp, Facebook और Instagram हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं लेकिन क्या इन प्लेटफॉर्म्स पर हमारी निजी जानकारी सच में सुरक्षित है? हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर Meta को कड़ी फटकार लगाई है जिससे एक बार फिर डेटा सुरक्षा पर बहस तेज हो गई है। इसी बीच Telegram के CEO पावेल दुरोव ने Mark Zuckerberg की एक पुरानी चैट शेयर कर दी जिसने यूजर्स की चिंता और बढ़ा दी है। सवाल साफ है क्या Meta प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स का डेटा खतरे में है?
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई WhatsApp को फटकार?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि यूजर्स की प्राइवेसी से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट का मानना है कि किसी भी टेक कंपनी को यूजर्स के पर्सनल डेटा का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। WhatsApp और उसकी पेरेंट कंपनी Meta से यह उम्मीद की जाती है कि वह भारतीय यूजर्स के डेटा की पूरी सुरक्षा करे और पारदर्शिता बनाए रखे।
Telegram CEO ने क्यों शेयर की Zuckerberg की पुरानी चैट?
SC की फटकार के बाद Telegram CEO Pavel Durov ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Mark Zuckerberg की साल 2004 की एक पुरानी चैट का स्क्रीनशॉट शेयर किया। यह चैट उस समय की है जब Zuckerberg हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे और Facebook की शुरुआत कर रहे थे।
इस चैट में Zuckerberg यह कहते हुए मजाक करते नजर आते हैं कि लोग उन पर भरोसा कर अपनी पर्सनल डिटेल्स जैसे ईमेल, फोटो, एड्रेस और सोशल सिक्योरिटी नंबर शेयर कर रहे हैं। यह चैट पहले से इंटरनेट पर मौजूद थी लेकिन डुरोव के कमेंट ने इसे फिर से चर्चा में ला दिया।
पावेल दुरोव ने कसा तंज
Pavel Durov ने लिखा कि उस समय सिर्फ कुछ हजार लोगों का डेटा था लेकिन आज Meta के पास अरबों यूजर्स का डेटा है। उनका इशारा साफ तौर पर Meta की डेटा पॉलिसी पर था। डुरोव ने तंज कसते हुए कहा कि पहले Zuckerberg 4 हजार लोगों पर हंस रहा था आज वही कंपनी 4 अरब लोगों के डेटा को संभाल रही है जो WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स के प्राइवेसी दावों पर भरोसा करते हैं।
WhatsApp का End-to-End Encryption कितना भरोसेमंद?
WhatsApp दावा करता है कि उसके मैसेज End-to-End Encryption से सुरक्षित हैं यानी भेजने वाला और पाने वाला ही मैसेज पढ़ सकता है। कंपनी के मुताबिक बीच में कोई तीसरा व्यक्ति, यहां तक कि WhatsApp भी मैसेज नहीं पढ़ सकता। हालांकि आलोचकों का कहना है कि भले ही मैसेज एन्क्रिप्टेड हों लेकिन Meta दूसरी तरह की जानकारी इकट्ठा कर सकता है जैसे-आप किससे बात करते हैं, कितनी बार करते हैं, आपकी लोकेशन और डिवाइस से जुड़ा डेटा आदि।
यूजर्स की प्राइवेसी पर क्यों बढ़ रही है चिंता?
SC की सख्ती और Zuckerberg की पुरानी चैट के सामने आने के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि बड़ी टेक कंपनियां यूजर्स के डेटा के साथ कितना जिम्मेदार व्यवहार कर रही हैं। आज जब हमारी बातचीत, फोटो, कॉल और बिजनेस सब डिजिटल हो चुके हैं तब प्राइवेसी सिर्फ एक विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन चुकी है।
अब यूजर्स को क्या करना चाहिए?
यूजर्स को किसी भी ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी ध्यान से पढ़नी चाहिए और अनावश्यक परमिशन देने से बचना चाहिए। साथ ही, यह समझना जरूरी है कि फ्री ऐप्स अक्सर डेटा के जरिए ही कमाई करते हैं। जागरूक रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
डिजिटल दौर में WhatsApp, Facebook और Instagram हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं लेकिन क्या इन प्लेटफॉर्म्स पर हमारी निजी जानकारी सच में सुरक्षित है? हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर Meta को कड़ी फटकार लगाई है जिससे एक बार फिर डेटा सुरक्षा पर बहस तेज हो गई है। इसी बीच Telegram के CEO पावेल दुरोव ने Mark Zuckerberg की एक पुरानी चैट शेयर कर दी जिसने यूजर्स की चिंता और बढ़ा दी है। सवाल साफ है क्या Meta प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स का डेटा खतरे में है?
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई WhatsApp को फटकार?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि यूजर्स की प्राइवेसी से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट का मानना है कि किसी भी टेक कंपनी को यूजर्स के पर्सनल डेटा का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। WhatsApp और उसकी पेरेंट कंपनी Meta से यह उम्मीद की जाती है कि वह भारतीय यूजर्स के डेटा की पूरी सुरक्षा करे और पारदर्शिता बनाए रखे।
Telegram CEO ने क्यों शेयर की Zuckerberg की पुरानी चैट?
SC की फटकार के बाद Telegram CEO Pavel Durov ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Mark Zuckerberg की साल 2004 की एक पुरानी चैट का स्क्रीनशॉट शेयर किया। यह चैट उस समय की है जब Zuckerberg हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे और Facebook की शुरुआत कर रहे थे।
इस चैट में Zuckerberg यह कहते हुए मजाक करते नजर आते हैं कि लोग उन पर भरोसा कर अपनी पर्सनल डिटेल्स जैसे ईमेल, फोटो, एड्रेस और सोशल सिक्योरिटी नंबर शेयर कर रहे हैं। यह चैट पहले से इंटरनेट पर मौजूद थी लेकिन डुरोव के कमेंट ने इसे फिर से चर्चा में ला दिया।
पावेल दुरोव ने कसा तंज
Pavel Durov ने लिखा कि उस समय सिर्फ कुछ हजार लोगों का डेटा था लेकिन आज Meta के पास अरबों यूजर्स का डेटा है। उनका इशारा साफ तौर पर Meta की डेटा पॉलिसी पर था। डुरोव ने तंज कसते हुए कहा कि पहले Zuckerberg 4 हजार लोगों पर हंस रहा था आज वही कंपनी 4 अरब लोगों के डेटा को संभाल रही है जो WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स के प्राइवेसी दावों पर भरोसा करते हैं।
WhatsApp का End-to-End Encryption कितना भरोसेमंद?
WhatsApp दावा करता है कि उसके मैसेज End-to-End Encryption से सुरक्षित हैं यानी भेजने वाला और पाने वाला ही मैसेज पढ़ सकता है। कंपनी के मुताबिक बीच में कोई तीसरा व्यक्ति, यहां तक कि WhatsApp भी मैसेज नहीं पढ़ सकता। हालांकि आलोचकों का कहना है कि भले ही मैसेज एन्क्रिप्टेड हों लेकिन Meta दूसरी तरह की जानकारी इकट्ठा कर सकता है जैसे-आप किससे बात करते हैं, कितनी बार करते हैं, आपकी लोकेशन और डिवाइस से जुड़ा डेटा आदि।
यूजर्स की प्राइवेसी पर क्यों बढ़ रही है चिंता?
SC की सख्ती और Zuckerberg की पुरानी चैट के सामने आने के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि बड़ी टेक कंपनियां यूजर्स के डेटा के साथ कितना जिम्मेदार व्यवहार कर रही हैं। आज जब हमारी बातचीत, फोटो, कॉल और बिजनेस सब डिजिटल हो चुके हैं तब प्राइवेसी सिर्फ एक विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन चुकी है।
अब यूजर्स को क्या करना चाहिए?
यूजर्स को किसी भी ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी ध्यान से पढ़नी चाहिए और अनावश्यक परमिशन देने से बचना चाहिए। साथ ही, यह समझना जरूरी है कि फ्री ऐप्स अक्सर डेटा के जरिए ही कमाई करते हैं। जागरूक रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।












