WhatsApp Privacy पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, Telegram CEO ने खोली Zuckerberg की पोल

सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर Meta को कड़ी फटकार लगाई है जिससे डेटा सुरक्षा पर नई बहस शुरू हो गई है। इसी बीच Telegram CEO द्वारा Mark Zuckerberg की पुरानी चैट शेयर किए जाने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या WhatsApp और Meta प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स का डेटा वास्तव में सुरक्षित है।

Zuckerberg
WhatsApp Privacy
locationभारत
userअसमीना
calendar04 Feb 2026 01:10 PM
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डिजिटल दौर में WhatsApp, Facebook और Instagram हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं लेकिन क्या इन प्लेटफॉर्म्स पर हमारी निजी जानकारी सच में सुरक्षित है? हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर Meta को कड़ी फटकार लगाई है जिससे एक बार फिर डेटा सुरक्षा पर बहस तेज हो गई है। इसी बीच Telegram के CEO पावेल दुरोव ने Mark Zuckerberg की एक पुरानी चैट शेयर कर दी जिसने यूजर्स की चिंता और बढ़ा दी है। सवाल साफ है क्या Meta प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स का डेटा खतरे में है?

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई WhatsApp को फटकार?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि यूजर्स की प्राइवेसी से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट का मानना है कि किसी भी टेक कंपनी को यूजर्स के पर्सनल डेटा का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। WhatsApp और उसकी पेरेंट कंपनी Meta से यह उम्मीद की जाती है कि वह भारतीय यूजर्स के डेटा की पूरी सुरक्षा करे और पारदर्शिता बनाए रखे।

Telegram CEO ने क्यों शेयर की Zuckerberg की पुरानी चैट?

SC की फटकार के बाद Telegram CEO Pavel Durov ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Mark Zuckerberg की साल 2004 की एक पुरानी चैट का स्क्रीनशॉट शेयर किया। यह चैट उस समय की है जब Zuckerberg हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे और Facebook की शुरुआत कर रहे थे।

इस चैट में Zuckerberg यह कहते हुए मजाक करते नजर आते हैं कि लोग उन पर भरोसा कर अपनी पर्सनल डिटेल्स जैसे ईमेल, फोटो, एड्रेस और सोशल सिक्योरिटी नंबर शेयर कर रहे हैं। यह चैट पहले से इंटरनेट पर मौजूद थी लेकिन डुरोव के कमेंट ने इसे फिर से चर्चा में ला दिया।

पावेल दुरोव ने कसा तंज

Pavel Durov ने लिखा कि उस समय सिर्फ कुछ हजार लोगों का डेटा था लेकिन आज Meta के पास अरबों यूजर्स का डेटा है। उनका इशारा साफ तौर पर Meta की डेटा पॉलिसी पर था। डुरोव ने तंज कसते हुए कहा कि पहले Zuckerberg 4 हजार लोगों पर हंस रहा था आज वही कंपनी 4 अरब लोगों के डेटा को संभाल रही है जो WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म्स के प्राइवेसी दावों पर भरोसा करते हैं।

WhatsApp का End-to-End Encryption कितना भरोसेमंद?

WhatsApp दावा करता है कि उसके मैसेज End-to-End Encryption से सुरक्षित हैं यानी भेजने वाला और पाने वाला ही मैसेज पढ़ सकता है। कंपनी के मुताबिक बीच में कोई तीसरा व्यक्ति, यहां तक कि WhatsApp भी मैसेज नहीं पढ़ सकता। हालांकि आलोचकों का कहना है कि भले ही मैसेज एन्क्रिप्टेड हों लेकिन Meta दूसरी तरह की जानकारी इकट्ठा कर सकता है जैसे-आप किससे बात करते हैं, कितनी बार करते हैं, आपकी लोकेशन और डिवाइस से जुड़ा डेटा आदि।

यूजर्स की प्राइवेसी पर क्यों बढ़ रही है चिंता?

SC की सख्ती और Zuckerberg की पुरानी चैट के सामने आने के बाद यह सवाल और गहरा हो गया है कि बड़ी टेक कंपनियां यूजर्स के डेटा के साथ कितना जिम्मेदार व्यवहार कर रही हैं। आज जब हमारी बातचीत, फोटो, कॉल और बिजनेस सब डिजिटल हो चुके हैं तब प्राइवेसी सिर्फ एक विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन चुकी है।

अब यूजर्स को क्या करना चाहिए?

यूजर्स को किसी भी ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी ध्यान से पढ़नी चाहिए और अनावश्यक परमिशन देने से बचना चाहिए। साथ ही, यह समझना जरूरी है कि फ्री ऐप्स अक्सर डेटा के जरिए ही कमाई करते हैं। जागरूक रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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Anthropic AI से हिला टेक वर्ल्ड, बड़ी IT कंपनियों को लगा जोरदार झटका

Anthropic AI Tool: Anthropic के नए AI Tool के लॉन्च होते ही अमेरिकी शेयर बाजार में हड़कंप मच गया है। NASDAQ, Dow Jones और S&P 500 में भारी गिरावट देखने को मिली है। कई बड़ी IT और टेक कंपनियों के शेयर 10 से 25 प्रतिशत तक टूट गए हैं।

Anthropic AI Tool
Anthropic AI Tool Launch
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userअसमीना
calendar04 Feb 2026 11:08 AM
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क्या वाकई AI अब इंसानों की नौकरियां निगलने लगा है? यही सवाल इस वक्त दुनिया के हर निवेशक, आईटी प्रोफेशनल और कॉरपोरेट सेक्टर के दिमाग में घूम रहा है। वजह है Anthropic का नया AI Tool जिसके लॉन्च होते ही अमेरिकी शेयर बाजारों में कोहराम मच गया। Dow Jones से लेकर NASDAQ तक रेड जोन में पहुंच गए और कई नामी आईटी कंपनियों के शेयर 10% से 25% तक टूट गए। जिस AI को अब तक मददगार माना जा रहा था वही अचानक खतरे की घंटी बन गया है।

अमेरिकी शेयर बाजार क्यों हिला?

सोमवार को रिकॉर्ड हाई पर बंद होने के बाद मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजारों ने अपनी सारी बढ़त गंवा दी। टेक शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली क्योंकि निवेशकों को डर सता रहा है कि Anthropic का नया AI Tool पारंपरिक IT सर्विस मॉडल को कमजोर कर सकता है। खासतौर पर वे कंपनियां जो कॉर्पोरेट, लीगल और डेटा प्रोसेसिंग जैसे काम इंसानों के दम पर करती थीं अब AI के सीधे निशाने पर आ गई हैं।

NASDAQ में सबसे बड़ी गिरावट

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे ज्यादा असर NASDAQ Index पर देखने को मिला जो टेक और IT शेयरों से भरा हुआ इंडेक्स है। मंगलवार को NASDAQ करीब 1.4% गिरकर बंद हुआ जबकि Dow Jones में 0.3% और S&P 500 में 0.8% की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निवेशकों ने NVIDIA, AMD और Micron जैसी हाई-वैल्यू चिप कंपनियों से पैसा निकालकर नए AI प्लेयर्स की ओर रुख करना शुरू कर दिया।

Anthropic AI Tool से किन कंपनियों को झटका लगा?

Anthropic की एंट्री का सबसे बड़ा झटका IT सर्विस और कंसल्टिंग कंपनियों को लगा है। Cognizant, Gartner, Accenture और EPAM जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में 10% से 25% तक की भारी गिरावट देखने को मिली। इन कंपनियों का बड़ा बिजनेस मॉडल इंसानी वर्कफोर्स और मैनुअल प्रोसेस पर टिका है जिसे AI सीधे ऑटोमेट करने की क्षमता रखता है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

इस गिरावट का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। भारतीय IT सेक्टर की बड़ी कंपनियों Infosys और Wipro के ADRs में भी करीब 6% तक की गिरावट दर्ज की गई। इसका मतलब साफ है कि ग्लोबल निवेशक अब भारतीय IT कंपनियों को भी उसी नजर से देख रहे हैं जिससे वे अमेरिकी IT फर्म्स को देख रहे हैं। बुधवार को भारतीय शेयर बाजार खुलते ही TCS, Infosys और Wipro पर निवेशकों की पैनी नजर बनी रहने वाली है।

सबसे बुरा असर कहां पड़ा?

Anthropic AI Tool का सबसे ज्यादा असर लीगल और डेटा सर्विस सेक्टर पर देखने को मिला है। LegalZoom के शेयर करीब 20% टूट गए Thomson Reuters में 15% की गिरावट आई जबकि LexisNexis की पैरेंट कंपनी RELX का शेयर भी 14% तक फिसल गया। ये वही सेक्टर हैं जहां डॉक्यूमेंट एनालिसिस, कॉन्ट्रैक्ट रिव्यू और रिसर्च जैसे काम बड़ी संख्या में इंसान करते थे जिन्हें अब AI कुछ ही सेकंड में कर सकता है।

क्या AI सच में नौकरियां खा जाएगा?

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह डर पूरी तरह बेबुनियाद नहीं है। पहले कहा जा रहा था कि AI इंसानों की मदद करेगा लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। AI न सिर्फ मदद कर रहा है बल्कि कई जगह सीधे इंसानों की जगह ले रहा है। यही वजह है कि एनालिस्ट्स इसे AI Apocalypse या SaaS-pocalypse जैसी स्थिति बता रहे हैं जहां पूरा IT बिजनेस मॉडल री-शेप हो सकता है।

आगे क्या होगा IT सेक्टर का भविष्य?

हालांकि सभी एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि AI पूरी तरह नौकरियां खत्म नहीं करेगा बल्कि नौकरियों का स्वरूप बदलेगा। जो कंपनियां AI को अपनाकर खुद को अपग्रेड करेंगी वही आगे टिक पाएंगी। वहीं जो सिर्फ पुराने सर्विस मॉडल पर निर्भर रहेंग उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

(नोट- शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।)

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ट्रेड डील के बाद अमेरिका की विश-लिस्ट आउट! भारत अब क्या-क्या खरीदेगा?

भारत ने अमेरिका से एनर्जी/पेट्रोलियम, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयाँ, टेलीकॉम उत्पाद और विमान जैसी श्रेणियों में खरीद बढ़ाने पर सहमति जताई है। साथ ही, कुछ कृषि उत्पादों में अमेरिका को सीमित मार्केट एक्सेस दिए जाने की बात भी सामने आई है।

भारत–अमेरिका ट्रेड डील
भारत–अमेरिका ट्रेड डील
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar03 Feb 2026 02:22 PM
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India-US trade deal : भारत–अमेरिका के बीच कई महीनों की बातचीत के बाद ट्रेड डील पर सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इसकी घोषणा करते हुए बताया कि भारत पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18% कर दिया गया है (पहले 25%)। इसके बदले अमेरिका ने जिस “विश-लिस्ट” की ओर इशारा किया, उसमें भारत की ओर से बड़े पैमाने पर अमेरिकी सामान खरीदने की सहमति शामिल मानी जा रही है।

क्या-क्या खरीदेगा भारत?

Reuters के मुताबिक सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि भारत–अमेरिका ट्रेड डील की दिशा में यह कदम शुरुआती लेकिन रणनीतिक माना जा रहा है। भारत ने अमेरिका से एनर्जी/पेट्रोलियम, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयाँ, टेलीकॉम उत्पाद और विमान जैसी श्रेणियों में खरीद बढ़ाने पर सहमति जताई है। साथ ही, कुछ कृषि उत्पादों में अमेरिका को सीमित मार्केट एक्सेस दिए जाने की बात भी सामने आई है। अधिकारी के अनुसार यह समझौता पहला चरण है और आगे बड़ी तथा व्यापक डील पर बातचीत जारी रहेगी। अमेरिका के ट्रेड डेफिसिट को घटाने के लक्ष्य से जोड़कर देखे जा रहे इस फैसले ने देश के भीतर राजनीतिक तापमान भी बढ़ा दिया है।

500 अरब डॉलर की खरीद का संकेत

ट्रंप के बयान में यह भी संकेत दिया गया कि भारत अमेरिका से $500 अरब तक के सामान जैसे एनर्जी/कोल, टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर आदि की खरीद कर सकता है। यह दावा/अपेक्षा डील के आर्थिक पैमाने को बड़ा बनाती है, हालांकि टाइमलाइन और शर्तों का पूरा खाका अभी सार्वजनिक तौर पर साफ नहीं है। कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी–नवंबर अवधि में भारत का अमेरिका को एक्सपोर्ट $85.5 अरब रहा, जबकि इसी अवधि में आयात $46.08 अरब दर्ज हुआ। India-US trade deal

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