खुल गया डेवलपर्स का छुपा राज! हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Claude AI: भारत क्लाउड एआई और Claude AI के इस्तेमाल में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार बनकर उभर रहा है। एंथ्रोपिक की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय डेवलपर्स सॉफ्टवेयर और वेब डेवलपमेंट के लिए क्लाउड एआई का सबसे ज्यादा उपयोग कर रहे हैं।

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userअसमीना
calendar16 Jan 2026 12:49 PM
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तकनीकी दुनिया में आज भारत तेजी से अपनी पहचान बना रहा है खासकर क्लाउड एआई (Cloud AI) के इस्तेमाल में। एंथ्रोपिक (Anthropic) की हालिया इकोनॉमिक इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, भारत क्लाउड एआई के इस्तेमाल में दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। यह रिपोर्ट 15 जनवरी को जारी की गई  जिसमें यह खुलासा हुआ कि भारतीय डेवलपर्स और प्रोफेशनल्स सॉफ्टवेयर और वेब डेवलपमेंट के लिए क्लाउड एआई का सबसे ज्यादा उपयोग कर रहे हैं।

भारत में क्लाउड एआई का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में क्लाउड एआई के लगभग 50% उपयोग का संबंध सीधे सॉफ्टवेयर और वेब डेवलपमेंट से है। यह ग्लोबल एवरेज से लगभग दोगुना है। खासकर सीएसएस, एचटीएमएल और यूआई स्टाइलिंग के काम में भारतीय डेवलपर्स क्लाउड एआई का बहुत अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। वेब एप्लिकेशन बनाने और डिबग करने में भी इसका उपयोग ग्लोबल औसत से 1.7 गुना ज्यादा है।

भारतीय डेवलपर्स क्यों कर रहे हैं Cloud AI का इस्तेमाल?

भारत में क्लाउड एआई का एक बड़ा कारण तकनीकी दक्षता और समय की बचत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में टॉप 10 क्लाउड एआई उपयोग में से 5 सॉफ्टवेयर और वेब डेवलपमेंट के लिए हैं। डेवलपर्स रूटीन कोडिंग, डिबगिंग और तकनीकी कार्यों में एआई पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं।

करियर और प्रोफेशनल विकास के लिए AI

सिर्फ तकनीकी काम ही नहीं बल्कि भारत में क्लाउड एआई का इस्तेमाल करियर प्रोग्रेशन और प्रोफेशनल डेवलपमेंट में भी बढ़ रहा है। नौकरी की तलाश, व्यवसायिक योजना (Business Planning), चैटबॉट और वर्कफ़्लो ऑटोमेशन जैसे कार्य भी इसके तहत आते हैं। भारत में इन क्षेत्रों में एआई का इस्तेमाल ग्लोबल एवरेज से 1.4 से 1.5 गुना ज्यादा है।

भारत की यूज पैटर्न में दिलचस्प तथ्य

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कामकाजी उम्र की आबादी के हिसाब से भारत में क्लाउड एआई का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम है। एन्थ्रोपिक का एआई यूज इंडेक्स (AUI) भारत के लिए 0.22 दर्ज करता है, जो इस बात का संकेत है कि जनसंख्या के अनुपात में अभी भी विकास की संभावना मौजूद है।

एंथ्रोपिक की योजना और भविष्य

एंथ्रोपिक अब बेंगलुरु में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करने की योजना बना रहा है। यह कदम यह दर्शाता है कि भारत न सिर्फ उपयोग में तेजी से बढ़ रहा है बल्कि एआई इनोवेशन और डेवलपमेंट का एक ग्लोबल हब बन सकता है।

 

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लूट लें सोना-चांदी! कीमत में आ गई भारी गिरावट

Gold Silver Price Today: MCX पर आज चांदी की कीमत में ₹6,000 की भारी गिरावट दर्ज की गई है जबकि सोने के भाव में भी हल्की कमजोरी देखने को मिली है। जानिए आज का ताजा गोल्ड और सिल्वर रेट, गिरावट की वजह, बाजार का रुझान और निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत मिल रहे हैं।

GOLD PRICE
मार्केट में क्या है सोने का रेट?
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userअसमीना
calendar16 Jan 2026 10:59 AM
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सोना और चांदी की कीमतों में आज गिरावट देखने को मिली है। एमसीएक्स पर बाजार खुलते ही चांदी के भाव में करीब 6,000 रुपये प्रति किलो की बड़ी गिरावट दर्ज की गई जिससे निवेशकों में हलचल मच गई। वहीं सोने की कीमत में भी आज हल्की कमजोरी देखने को मिली। हालांकि लंबी अवधि में दोनों कीमती धातुओं का रुझान अब भी मजबूत बना हुआ है।

चांदी में गिरावट

एमसीएक्स पर 5 मार्च डिलीवरी वाली चांदी पिछले सत्र में 2,91,577 रुपये प्रति किलो के भाव पर बंद हुई थी जबकि आज यह 2,87,127 रुपये प्रति किलो पर खुली। शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी 2,85,513 रुपये प्रति किलो के निचले स्तर तक फिसली और 2,88,901 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर तक गई। सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर चांदी 3,449 रुपये यानी 1.18 फीसदी की गिरावट के साथ 2,88,128 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी।

क्या है सोने की कीमत?

आज सोने की कीमत में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर 5 फरवरी डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र में 1,43,121 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था जबकि आज यह 1,42,589 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। शुरुआती कारोबार में सोना 1,42,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक गया और 1,42,837 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर तक पहुंचा। सुबह 10 बजे सोना 350 रुपये यानी 0.24 फीसदी की गिरावट के साथ 1,42,771 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।

सोना-चांदी की कीमत में गिरावट की वजहें

आज सोना और चांदी की कीमतों में आई गिरावट की सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली मानी जा रही है। बीते कुछ महीनों में दोनों धातुओं की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी जिसके बाद निवेशक अब अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली कर रहे हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और डॉलर की चाल का असर भी घरेलू कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।

कीमतों में तेजी का ट्रेंड अब भी बरकरार

हालांकि आज की गिरावट के बावजूद सोना और चांदी की कीमतों में तेजी का ट्रेंड अब भी बरकरार है। साल 2026 में अब तक सोने की कीमत में करीब 5 फीसदी और चांदी की कीमत में करीब 15 फीसदी की बढ़त दर्ज की जा चुकी है। अगर पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस दौरान सोने की कीमत करीब 80 फीसदी तक बढ़ी है जबकि चांदी ने करीब 192 फीसदी का शानदार रिटर्न दिया है। सोना और चांदी की कीमतों में इस तेजी के पीछे वैश्विक स्तर पर बढ़ता तनाव एक बड़ी वजह है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोने और चांदी की ओर रुख कर रहे हैं। इसके साथ ही दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक भी बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी कर रहे हैं जिससे कीमतों को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।

खरीदारी का बेस्ट मौका!

निवेशकों के लिए आज की गिरावट को लंबी अवधि के नजरिए से देखा जाए तो यह खरीदारी का मौका भी हो सकता है। हालांकि शॉर्ट टर्म में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है इसलिए किसी भी निवेश से पहले बाजार की स्थिति और जोखिम को समझना जरूरी है।


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दुनिया का सबसे ताकतवर कौन? जवाब जानकर उड़ जाएंगे होश

Real Estate: 2026 में दुनिया के सबसे ताकतवर असेट की चर्चा हो रही है। क्या सोना, कच्चा तेल या रियल एस्टेट सबसे ज्यादा मार्केट कैप वाला है? इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि क्यों रियल एस्टेट दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत असेट है।

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2026 में सबसे ताकतवर असेट कौन है?
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userअसमीना
calendar15 Jan 2026 02:20 PM
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आज के समय में लोग अक्सर सोचते हैं कि दुनिया का सबसे ताकतवर और मूल्यवान असेट क्या है। क्या यह सोना है, कच्चा तेल, करेंसी या फिर रियल एस्टेट? अगर आप सोच रहे हैं कि यह सिर्फ सोना या तेल है तो जवाब सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। बीते कुछ सालों में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। खासकर साल 2025 में गोल्ड की कीमतों में लगभग 70% से ज्यादा का इजाफा हुआ। लेकिन अगर मार्केट कैप के हिसाब से बात करें तो कच्चा तेल सोने से भी कहीं ज्यादा ताकतवर है।

कच्चा तेल बनाम सोना

असेट मार्केट कैप डॉट कॉम के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में कच्चे तेल की मार्केट वैल्यू 109 ट्रिलियन डॉलर है। वहीं, सोने की मार्केट वैल्यू लगभग 31 ट्रिलियन डॉलर है। इसका मतलब साफ है कि मार्केट कैप के हिसाब से कच्चा तेल सोने से 3 गुना ज्यादा ताकतवर है। कच्चा तेल का महत्व सिर्फ कीमत में नहीं है। यह ग्लोबल पॉवर और पॉलिटिक्स में भी अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए, अमेरिका और अन्य देशों ने हमेशा तेल की सप्लाई और कंट्रोल को लेकर अंतरराष्ट्रीय पॉलिटिक्स में बड़ा कदम उठाया है।

दुनिया का सबसे ताकतवर असेट

अगर बात दुनिया के सबसे ताकतवर और बड़े असेट की करें तो न तो सोना है, न ही तेल, न ही कोई करेंसी। असली ताकतवर असेट है रियल एस्टेट। मौजूदा समय में ग्लोबल रियल एस्टेट की मार्केट कैप 671 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा है। साल 2026-2029 तक इसमें सालाना 2.64% की वृद्धि होने का अनुमान है। 2029 तक इसका मार्केट कैप बढ़कर 727.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। अमेरिका इस मार्केट में सबसे बड़ा खिलाड़ी है, जिसका अनुमानित हिस्सा 141.3 ट्रिलियन डॉलर है। रियल एस्टेट इसलिए सबसे ताकतवर है क्योंकि यह सिर्फ निवेश का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन, बिजनेस और ग्लोबल इकॉनोमी का आधार भी है।

करेंसी की ताकत

अक्सर लोग डॉलर को सबसे मजबूत करेंसी मानते हैं लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहते हैं। युआन की मार्केट वैल्यू 48 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा है और यह दुनिया की तीसरी सबसे ताकतवर करेंसी है। डॉलर की मार्केट वैल्यू 22 ट्रिलियन डॉलर है। यूरो लगभग 19 ट्रिलियन डॉलर के साथ 6वें नंबर पर है। ब्रिटिश पाउंड 3 ट्रिलियन डॉलर के साथ 15वें नंबर पर है। इससे साफ है कि ग्लोबल मार्केट में युआन की पकड़ अब काफी मजबूत हो चुकी है।

दुनिया की सबसे ताकतवर कंपनियां

अगर कंपनियों की बात करें, तो एप्पल, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट हमेशा टॉप पर रहे हैं लेकिन हाल ही में एनवीडिया ने मार्केट में सबसे तेज ग्रोथ दिखाई है। एनवीडिया की वैल्यूएशन 4.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। इसके बाद गूगल (अल्फाबेट) की वैल्यूएशन 4 ट्रिलियन डॉलर है। एप्पल की वैल्यूएशन 3.9 ट्रिलियन डॉलर है। माइक्रोसॉफ्ट की वैल्यूएशन 3.41 ट्रिलियन डॉलर है। इस तरह, कंपनियों के क्षेत्र में एनवीडिया और टेक सेक्टर की पकड़ सबसे मजबूत बन चुकी है।

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