मीशो IPO 2025 ने शेयर बाजार में इतिहास रच दिया है। मीशो के शेयरों में लिस्टिंग के बाद करीब 95 फीसदी की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई जिससे कंपनी की वैल्यूएशन में लगभग 47,000 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। यूबीएस की बाय रेटिंग के बाद मीशो 2025 का सबसे सफल बड़ा आईपीओ बनकर उभरा है।

भारत के शेयर बाजार में साल 2025 कई बड़े आईपीओ लेकर आया लेकिन इन सभी के बीच मीशो (Meesho) ने ऐसा धमाकेदार प्रदर्शन किया कि दिग्गज कंपनियां भी पीछे छूट गईं। लिस्टिंग के बाद से ही Meesho के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और कंपनी ने निवेशकों की वैल्यू में लगभग 47,000 करोड़ रुपये का इजाफा कर दिया। यही वजह है कि मीशो को अब 2025 का सबसे सफल बड़ा आईपीओ माना जा रहा है।
मीशो का आईपीओ 10 दिसंबर को शेयर बाजार में लिस्ट हुआ था, जिसमें कंपनी ने करीब 5,421 करोड़ रुपये जुटाए थे। आईपीओ के समय प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर कंपनी का वैल्यूएशन लगभग 50,100 करोड़ रुपये था। लेकिन लिस्टिंग के कुछ ही समय बाद मीशो का मार्केट कैप बढ़कर करीब 97,600 करोड़ रुपये या लगभग 11 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसका सीधा मतलब है कि लिस्टिंग के बाद निवेशकों की कुल वैल्यू में लगभग 47,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है जो किसी भी आईपीओ के लिए बेहद बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
मीशो के शेयरों में यह जबरदस्त उछाल मजबूत लिस्टिंग के साथ शुरू हुआ। कंपनी का शेयर 162 रुपये के भाव पर लिस्ट हुआ जो इश्यू प्राइस से करीब 46 फीसदी प्रीमियम पर था। पहले ही दिन शेयर का क्लोजिंग प्राइस लगभग 170 रुपये रहा और इसके बाद तेजी का सिलसिला लगातार जारी रहा। हाल ही में यूबीएस (UBS) की ‘बाय’ कॉल के बाद शेयर में एक ही सत्र में करीब 20 फीसदी की तेजी देखने को मिला जिससे कुल रिटर्न इश्यू प्राइस से लगभग 95 फीसदी तक पहुंच गया।
ब्रोकरेज हाउस यूबीएस ने मीशो को लेकर बेहद सकारात्मक रुख अपनाया है। यूबीएस ने कंपनी को ‘बाय’ रेटिंग देते हुए 220 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। ब्रोकरेज का मानना है कि मीशो का एसेट-लाइट बिजनेस मॉडल और नेगेटिव वर्किंग कैपिटल स्ट्रक्चर इसे दूसरी इंटरनेट-आधारित कंपनियों से अलग बनाता है। यही मॉडल कंपनी को लगातार पॉजिटिव कैश फ्लो जनरेट करने में मदद कर रहा है जो लॉन्ग टर्म में ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी होता है।
यूबीएस के अनुमान के मुताबिक, मीशो का नेट मर्चेंडाइज वैल्यू वित्त वर्ष 2025 से वित्त वर्ष 2030 के बीच करीब 30 फीसदी की कंपाउंड ग्रोथ रेट से बढ़ सकता है। इसके पीछे ट्रांजैक्शन करने वाले यूजर्स की तेज़ी से बढ़ती संख्या और ऑर्डर फ्रीक्वेंसी में हो रही वृद्धि को मुख्य कारण माना जा रहा है। जैसे-जैसे कंपनी का स्केल बढ़ रहा है वैसे-वैसे इसके कंट्रीब्यूशन मार्जिन और एडजस्टेड EBITDA मार्जिन में भी सुधार देखने को मिल रहा है।
अगर 2025 के अन्य बड़े आईपीओ से मीशो की तुलना की जाए तो इसका प्रदर्शन साफ तौर पर सबसे आगे नजर आता है। इस साल 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने वाली कंपनियों में ग्रोव अपने इश्यू प्राइस से करीब 43 फीसदी ऊपर है जबकि एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने लगभग 36 फीसदी की बढ़त दिखाई है। वहीं हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज अपने इश्यू प्राइस से सिर्फ 8 फीसदी से थोड़ा अधिक ऊपर है। एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज, लेंसकार्ट और टाटा कैपिटल जैसे बड़े नामों का प्रदर्शन भी मीशो के मुकाबले काफी कमजोर रहा है।
विश्लेषकों के मुताबिक मीशो के शेयरों में उतार-चढ़ाव का एक कारण इसका सीमित फ्री-फ्लोट भी है। बड़े निवेशकों की मजबूत हिस्सेदारी के चलते बाजार में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध शेयर कम हैं। ऐसे में मांग में हल्की बढ़ोतरी या सप्लाई में कमी भी कीमतों में बड़ा असर डाल सकती है। कंपनी के लॉक-इन शेयरों का पहला सेट अगले साल 6 जनवरी को खुलेगा जिस पर निवेशकों की खास नजर बनी हुई है।
मीशो की इस सफलता के पीछे इसकी बिजनेस स्ट्रैटेजी सबसे बड़ा कारण मानी जा रही है। कंपनी कम औसत ऑर्डर वैल्यू, ज्यादा यूजर पार्टिसिपेशन और खर्चों पर सख्त कंट्रोल पर फोकस करती है। इसके अलावा, मीशो की बेहतर लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी का फायदा सीधे सेलर्स और ग्राहकों को मिलता है। इससे भले ही औसत ऑर्डर वैल्यू कम रहे लेकिन ओवरऑल इकोसिस्टम का विस्तार होता है और कुल सेल्स वॉल्यूम में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलती है।