लगातार घाटे में क्यों चल रही शेयर मार्केट? मिल गई 5 बड़ी वजह
Stock Market: निवेशकों को शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन की भारी गिरावट ने चौंका दिया है। सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूट गया जबकि निफ्टी 25,900 के नीचे फिसल गया है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर ग्लोबल संकेतों ने बाजार की चाल बिगाड़ दी है।

भारतीय शेयर बाजार में 8 जनवरी को निवेशकों को उस वक्त जोरदार झटका लगा जब लगातार चौथे कारोबारी दिन बाजार लाल निशान में बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 700 अंकों से ज्यादा टूट गया जबकि निफ्टी फिसलकर 25,900 के नीचे आ गया। विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली, कमजोर ग्लोबल संकेत और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने बाजार के सेंटीमेंट को पूरी तरह दबाव में डाल दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी गिरावट देखने को मिली जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
सेंसेक्स और निफ्टी का ताजा हाल
दोपहर 12:10 बजे के आसपास बीएसई सेंसेक्स 713.82 अंक यानी 0.84 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84,247.32 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 251.10 अंक या 0.96 प्रतिशत टूटकर 25,889.65 पर आ गया। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे जिनमें सबसे ज्यादा गिरावट मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में दर्ज की गई।
1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
शेयर बाजार पर दबाव का सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली रही। बुधवार को विदेशी निवेशकों ने करीब 1,527.71 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। जनवरी महीने में अब तक एफआईआई लगभग 4,650 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। एक दिन को छोड़कर उन्होंने लगभग हर कारोबारी दिन बाजार से पैसा निकाला है जिससे बाजार की मजबूती कमजोर होती चली गई।
2. कमजोर ग्लोबल संकेत
वैश्विक बाजारों से भी भारतीय शेयर बाजार को कोई सहारा नहीं मिला। एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली, जहां जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट में रहे। अमेरिकी बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में कमजोरी के साथ बंद हुए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल ट्रेड से जुड़ी अनिश्चितताओं ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है।
3. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता
भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर बनी असमंजस की स्थिति ने भी बाजार पर नकारात्मक असर डाला। बीते तीन दिनों में निफ्टी करीब 0.7 प्रतिशत और सेंसेक्स लगभग 0.9 प्रतिशत टूट चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। अमेरिका पहले ही कई भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा चुका है जिससे दोनों देशों के व्यापार संबंधों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
4. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई हल्की तेजी ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी। ब्रेंट क्रूड का भाव 0.4 प्रतिशत बढ़कर करीब 60.20 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है ऐसे में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर निवेशकों की आशंकाएं बढ़ जाती हैं।
5. सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी
गुरुवार को सेंसेक्स डेरिवेटिव्स की वीकली एक्सपायरी होने के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव और वॉल्यूम दोनों बढ़ गए। एक्सपायरी के दिन ट्रेडर्स अक्सर अपनी पोजिशन अनवाइंड या रोलओवर करते हैं, जिससे बाजार में अचानक तेज गिरावट या तेजी देखने को मिलती है। इसी वजह से छोटी खबरों का भी बाजार पर बड़ा असर पड़ा।
टेक्निकल एक्सपर्ट्स की राय
HDFC सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च हेड देवर्ष वकील के अनुसार, फिलहाल बाजार में कमजोरी जरूर दिख रही है लेकिन लंबी अवधि का ट्रेंड अब भी पॉजिटिव बना हुआ है। डेली चार्ट पर लगातार ऊंचे हाई और ऊंचे लो बन रहे हैं जो मजबूती का संकेत देते हैं। उनके मुताबिक, निफ्टी के लिए 26,373 का स्तर बड़ी रुकावट बन सकता है जबकि 26,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट के रूप में काम करेगा।
भारतीय शेयर बाजार में 8 जनवरी को निवेशकों को उस वक्त जोरदार झटका लगा जब लगातार चौथे कारोबारी दिन बाजार लाल निशान में बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 700 अंकों से ज्यादा टूट गया जबकि निफ्टी फिसलकर 25,900 के नीचे आ गया। विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली, कमजोर ग्लोबल संकेत और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने बाजार के सेंटीमेंट को पूरी तरह दबाव में डाल दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी गिरावट देखने को मिली जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।
सेंसेक्स और निफ्टी का ताजा हाल
दोपहर 12:10 बजे के आसपास बीएसई सेंसेक्स 713.82 अंक यानी 0.84 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84,247.32 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 251.10 अंक या 0.96 प्रतिशत टूटकर 25,889.65 पर आ गया। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे जिनमें सबसे ज्यादा गिरावट मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में दर्ज की गई।
1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
शेयर बाजार पर दबाव का सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली रही। बुधवार को विदेशी निवेशकों ने करीब 1,527.71 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। जनवरी महीने में अब तक एफआईआई लगभग 4,650 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। एक दिन को छोड़कर उन्होंने लगभग हर कारोबारी दिन बाजार से पैसा निकाला है जिससे बाजार की मजबूती कमजोर होती चली गई।
2. कमजोर ग्लोबल संकेत
वैश्विक बाजारों से भी भारतीय शेयर बाजार को कोई सहारा नहीं मिला। एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली, जहां जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट में रहे। अमेरिकी बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में कमजोरी के साथ बंद हुए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल ट्रेड से जुड़ी अनिश्चितताओं ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है।
3. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता
भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर बनी असमंजस की स्थिति ने भी बाजार पर नकारात्मक असर डाला। बीते तीन दिनों में निफ्टी करीब 0.7 प्रतिशत और सेंसेक्स लगभग 0.9 प्रतिशत टूट चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। अमेरिका पहले ही कई भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा चुका है जिससे दोनों देशों के व्यापार संबंधों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
4. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई हल्की तेजी ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी। ब्रेंट क्रूड का भाव 0.4 प्रतिशत बढ़कर करीब 60.20 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है ऐसे में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर निवेशकों की आशंकाएं बढ़ जाती हैं।
5. सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी
गुरुवार को सेंसेक्स डेरिवेटिव्स की वीकली एक्सपायरी होने के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव और वॉल्यूम दोनों बढ़ गए। एक्सपायरी के दिन ट्रेडर्स अक्सर अपनी पोजिशन अनवाइंड या रोलओवर करते हैं, जिससे बाजार में अचानक तेज गिरावट या तेजी देखने को मिलती है। इसी वजह से छोटी खबरों का भी बाजार पर बड़ा असर पड़ा।
टेक्निकल एक्सपर्ट्स की राय
HDFC सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च हेड देवर्ष वकील के अनुसार, फिलहाल बाजार में कमजोरी जरूर दिख रही है लेकिन लंबी अवधि का ट्रेंड अब भी पॉजिटिव बना हुआ है। डेली चार्ट पर लगातार ऊंचे हाई और ऊंचे लो बन रहे हैं जो मजबूती का संकेत देते हैं। उनके मुताबिक, निफ्टी के लिए 26,373 का स्तर बड़ी रुकावट बन सकता है जबकि 26,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट के रूप में काम करेगा।












