चांदी के दामों को लेकर बड़ा ब्रेकिंग अपडेट, खरीदार हो जाएं अलर्ट

Silver Price: चांदी के दाम में भारी उछाल देखने को मिल रही है ऐसे में उम्मीद की जा रही है चांदी की कीमत आज सभी रिकॉर्ड ब्रेक कर सकती है। अमेरिका के महंगाई आंकड़े, फेड पॉलिसी और ट्रंप फैक्टर ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। वायदा बाजार में चांदी पहले ही 2.75 लाख के ऊपर टिक चुकी है।

Silver Rate
चांदी की कीमतों में होगा भारी उछाल
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Jan 2026 11:00 AM
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इस समय देश के कमोडिटी बाजार सबसे ज्यादा हलचल चांदी की कीमतों को लेकर देखने को मिल रही है। अगले 24 से 36 घंटे चांदी के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि अगर मौजूदा ट्रेंड बरकरार रहता है तो चांदी 3 लाख रुपए प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर छू सकती है। मंगलवार को ही वायदा बाजार में चांदी के दाम 2.80 लाख रुपए के करीब पहुंच गए थे। बाजार बंद होते समय भाव 2.75 लाख रुपए के ऊपर टिके रहे।

क्यों हैं अगले 24 घंटे सबसे अहम?

इस समय चांदी को एक नहीं बल्कि कई बड़े फैक्टर एक साथ सपोर्ट कर रहे हैं। अमेरिका का महंगाई डेटा, फेड रिजर्व की पॉलिसी, ट्रंप और फेड के बीच बढ़ता टकराव, टैरिफ को लेकर कोर्ट का फैसला, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और डॉलर-रुपया मूवमेंट ये सभी फैक्टर अगले 24 घंटे में असर दिखा सकते हैं। इसी महीने में अब तक चांदी की कीमतों में करीब 17% की तेजी आ चुकी है। कुछ कारोबारी सत्रों में तो 5% से ज्यादा का उछाल भी देखा गया है। ऐसे में 3 लाख का स्तर अब सिर्फ चर्चा नहीं बल्कि संभावना बन चुका है।

चांदी 3 लाख के पार क्यों जा सकती है? ये रहे 8 बड़े कारण

1. अमेरिका में महंगाई के आंकड़े

अमेरिका में दिसंबर महीने का CPI महंगाई डेटा 2.7% रहा है जो बाजार के अनुमान के अनुरूप है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में फेड रिजर्व ब्याज दरों में कटौती पर विचार कर सकता है। जैसे ही रेट कट की उम्मीद बढ़ी इंटरनेशनल मार्केट में सोने और चांदी दोनों में तेजी देखने को मिली। चांदी के दाम 90 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच चुके हैं।

2. फेड और ट्रंप की बढ़ती जंग

डोनाल्ड ट्रंप और फेड रिजर्व के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रंप ने फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अगर फेड में बदलाव होता है और ट्रंप की पसंद का चेयरमैन आता है तो आक्रामक रेट कट संभव है। ऐसी स्थिति में चांदी जैसी कीमती धातुओं को बड़ा फायदा मिलता है।

3. ट्रंप टैरिफ पर कोर्ट का फैसला

15 जनवरी को ट्रंप टैरिफ से जुड़े मामले पर अमेरिकी कोर्ट का फैसला आने की संभावना है। इस फैसले से पहले निवेशकों में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में निवेशक रिस्क से बचने के लिए सेफ हेवन एसेट्स यानी सोना और चांदी की ओर रुख करते हैं।

4. 500% टैरिफ का डर

अमेरिका में रूस के खिलाफ ऐसा विधेयक लाने की चर्चा है जिसमें रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। भारत और चीन जैसे देशों पर इसके असर की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है जिससे चांदी को सपोर्ट मिल रहा है।

5. जियो-पॉलिटिकल टेंशन

ईरान, वेनेजुएला, क्यूबा, कंबोडिया और रूस-यूक्रेन जैसे मुद्दों पर वैश्विक तनाव बना हुआ है। जब भी दुनिया में राजनीतिक या सैन्य तनाव बढ़ता है, निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर जाते हैं। यही वजह है कि चांदी की कीमतों में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है।

6. गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का बड़ा संकेत

मौजूदा समय में गोल्ड-सिल्वर रेश्यो करीब 51 के आसपास है जो लगभग 13 साल के निचले स्तर के करीब माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर यह रेश्यो 43–45 के स्तर तक आता है तो चांदी इंटरनेशनल मार्केट में 100 डॉलर प्रति औंस और भारत में 3 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती है।

7. चांदी की बढ़ती इंडस्ट्रीयल डिमांड

सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है। रिसर्च के मुताबिक, 2027 तक सोलर कंपनियों को चांदी की मौजूदा सालाना सप्लाई के 20% से ज्यादा हिस्से की जरूरत हो सकती है। डिमांड बढ़ने और सप्लाई सीमित रहने से कीमतों में लंबी तेजी की संभावना बन रही है।

8. डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी

भारत चांदी का बड़ा आयातक है। डॉलर के मुकाबले जब रुपया कमजोर होता है तो चांदी के दाम अपने आप बढ़ जाते हैं। मौजूदा साल में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है जिससे लोकल मार्केट में चांदी को अतिरिक्त सपोर्ट मिला है।

क्या कहते हैं जानकार?

केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के अनुसार, जैसे ही गोल्ड-सिल्वर रेश्यो 43 के आसपास आता है, चांदी इंटरनेशनल मार्केट में 100 डॉलर और भारत में 3 लाख रुपए के स्तर को छू सकती है। फेड पॉलिसी, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और इंडस्ट्रीयल डिमांड तीनों फैक्टर चांदी के पक्ष में हैं।

बाजार का ताजा हाल

बुधवार सुबह MCX पर चांदी 7,000 रुपए से ज्यादा की तेजी के साथ 2,82,450 रुपए प्रति किलो पर कारोबार करती दिखी और इंट्रा-डे में लाइफटाइम हाई भी बनाया। वहीं सोने की कीमत भी पहली बार 1.43 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गई। इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड फ्यूचर्स 4,630 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहे हैं जबकि सिल्वर फ्यूचर्स 90 डॉलर प्रति औंस के बेहद करीब बने हुए हैं।

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10 मिनट डिलीवरी का खेल खत्म? मंत्री से बातचीत के बाद बदला सिस्टम

10-Minute Delivery: 10 मिनट में डिलीवरी को लेकर सरकार ने सख्त कदम उठाया है। श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की बातचीत के बाद Blinkit ने बड़ा फैसला लिया है। Zomato और Swiggy पर भी असर पड़ सकता है। पूरी जानकारी जानने के लिए पढ़ें।

10 Minute Delivery
10 मिनट डिलीवरी पर सरकार का बड़ा फैसला
locationभारत
userअसमीना
calendar13 Jan 2026 03:30 PM
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देश में तेजी से फैल रहे 10 मिनट डिलीवरी मॉडल पर अब सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। क्विक कॉमर्स कंपनियों द्वारा तय की गई इस समय सीमा को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे खासकर डिलीवरी बॉय की सुरक्षा को लेकर। अब केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की पहल के बाद बड़ा फैसला सामने आया है। सरकार के हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट ने अपने सभी ब्रांड से 10 मिनट डिलीवरी फीचर हटाने का ऐलान कर दिया है। आने वाले दिनों में इसका असर बाकी कंपनियों पर भी देखने को मिल सकता है।

सरकार ने 10 मिनट डिलीवरी पर क्यों दिखाई सख्ती?

10 मिनट में डिलीवरी का दबाव सीधे डिलीवरी पार्टनर्स पर पड़ता है। कम समय में ऑर्डर पहुंचाने के चक्कर में तेज रफ्तार, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। इसी को लेकर संसद से लेकर सोशल मीडिया तक लगातार आवाज़ उठाई जा रही थी। सरकार का मानना है कि तेज डिलीवरी से ज्यादा जरूरी डिलीवरी बॉय की जान और सुरक्षा है।

कंपनियों से हुई सीधी बात

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए क्विक कॉमर्स सेक्टर की बड़ी कंपनियों से बातचीत की। इस बातचीत में ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो जैसी कंपनियां शामिल थीं। मंत्री ने साफ कहा कि डिलीवरी के लिए तय की गई टाइम लिमिट हटाई जाए, ताकि डिलीवरी पार्टनर्स पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

ब्लिंकिट का बड़ा ऐलान

सरकारी बातचीत के बाद ब्लिंकिट ने सबसे पहले कदम उठाया। कंपनी ने ऐलान किया है कि वह अपने सभी ब्रांड, विज्ञापनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा देगी। यह फैसला सीधे तौर पर सरकार के निर्देश और डिलीवरी बॉय की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

बाकी कंपनियों पर भी पड़ेगा असर

सूत्रों के मुताबिक, ब्लिंकिट के बाद अन्य कंपनियां भी जल्द ऐसा ही फैसला ले सकती हैं। मंत्री के साथ हुई बैठक में सभी कंपनियों ने यह भरोसा दिया है कि वे अपने विज्ञापनों और प्रमोशनल कंटेंट से डिलीवरी की तय समय सीमा हटाएंगी। इसका मतलब है कि क्विक कॉमर्स सेक्टर में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है।

संसद और सोशल मीडिया तक उठा मुद्दा

10 मिनट डिलीवरी का मुद्दा सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं रहा। यह मामला संसद में भी उठ चुका है जहां डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई। वहीं सोशल मीडिया पर भी पिछले कुछ समय से इसके खिलाफ अभियान चल रहा था जिसमें आम लोग और डिलीवरी बॉय दोनों शामिल थे।

डिलीवरी बॉय की हड़ताल ने बढ़ाया दबाव

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर लाखों डिलीवरी बॉय ने हड़ताल कर दी थी। उनकी मांग थी कि वेतन बढ़ाया जाए और डिलीवरी की सख्त टाइम लिमिट हटाई जाए। इस हड़ताल ने सरकार और कंपनियों दोनों पर दबाव बनाया जिसके बाद अब ठोस कदम उठते दिख रहे हैं। अब आने वाले समय में ग्राहकों को शायद 10 मिनट में डिलीवरी का वादा न दिखे लेकिन सुरक्षित और संतुलित डिलीवरी सिस्टम देखने को मिल सकता है।

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SBI ग्राहकों को बड़ा झटका, ATM चार्ज में हुआ चौंकाने वाला बदलाव

SBI ने अपने ATM और ADWM चार्ज बढ़ा दिए हैं। अब नॉन‑SBI ATM से पैसे निकालने पर ज्यादा शुल्क देना होगा। आम सेविंग अकाउंट और सैलरी अकाउंट धारक इससे प्रभावित होंगे। BSBD अकाउंट और SBI ATM उपयोगकर्ता राहत में हैं। फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट के बारे में जानें और अतिरिक्त चार्ज से बचने के तरीके।

SBI
SBI का बड़ा बदलाव
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userअसमीना
calendar13 Jan 2026 12:38 PM
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देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने अपने ग्राहकों के लिए कुछ नए बदलाव किए हैं जो खासकर ATM और ADWM (ऑटोमेटेड डिपॉजिट कम विदड्रॉल मशीन) इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को सीधे प्रभावित करेंगे। अगर आप अक्सर नॉन-SBI ATM का इस्तेमाल करते हैं तो अब आपको इसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। इस आर्टिकल में हम विस्तार से बताएंगे कि ये बदलाव किस पर लागू होंगे, कौन राहत पा रहा है और कैसे आप अतिरिक्त चार्ज से बच सकते हैं।

SBI ने ATM और ADWM चार्ज क्यों बढ़ाया?

SBI ने दूसरे बैंकों के ATM इस्तेमाल करने पर इंटरचेंज फीस बढ़ा दी है। इंटरचेंज फीस वह राशि है जो एक बैंक को दूसरे बैंक के ATM इस्तेमाल करने पर चुकानी होती है। बढ़ी हुई इंटरचेंज फीस के कारण अब SBI ने अपने ग्राहकों के लिए सर्विस चार्ज में बदलाव किया है जिससे नॉन-SBI ATM इस्तेमाल करने वालों की जेब पर असर पड़ेगा।

आम सेविंग अकाउंट धारकों के लिए बदलाव

SBI की नई नीति के मुताबिक, हर महीने 5 फ्री ATM ट्रांजैक्शन पहले की तरह मिलेंगे। फ्री लिमिट खत्म होने के बाद, नॉन-SBI ATM से कैश निकालने पर अब 23 रुपये + GST देना होगा (पहले 21 रुपये)। जैसे बैलेंस चेक या मिनी स्टेटमेंट के लिए अब 11 रुपये + GST देना होगा (पहले 10 रुपये)। मतलब, आम सेविंग अकाउंट धारकों को ज्यादा खर्च का सामना तब करना पड़ेगा जब वे अपने मुफ्त लिमिट से ज्यादा ट्रांजैक्शन करेंगे।

सैलरी अकाउंट धारकों के लिए बड़ा झटका

SBI के सैलरी पैकेज अकाउंट रखने वालों को सबसे बड़ा बदलाव झेलना पड़ेगा। पहले ये अकाउंट धारक नॉन-SBI ATM पर अनलिमिटेड फ्री ट्रांजैक्शन कर सकते थे। अब नई व्यवस्था के अनुसार उन्हें महीने में सिर्फ 10 फ्री ट्रांजैक्शन मिलेंगे जिसमें कैश विदड्रॉल और बैलेंस चेक दोनों शामिल हैं। इसके बाद, बढ़ा हुआ चार्ज (23 रुपये + GST या 11 रुपये + GST) लागू होगा। इसलिए अगर आप सैलरी अकाउंट धारक हैं तो ध्यान दें कि मुफ्त ट्रांजैक्शन की सीमा खत्म होने के बाद आपका खर्च बढ़ सकता है।

किन ग्राहकों को राहत मिली है?

बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट (BSBD) अकाउंट रखने वालों के लिए कोई नया चार्ज नहीं लगाया गया है। अगर आप SBI के ATM या SBI डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो पुराने नियम ही लागू रहेंगे।

अतिरिक्त चार्ज से बचने के आसान तरीके

1. SBI ATM का इस्तेमाल करें – नॉन-SBI ATM से कैश निकालने पर अतिरिक्त चार्ज लगेगा।

2. फ्री लिमिट का ध्यान रखें – महीने में दिए गए फ्री ट्रांजैक्शन की संख्या को पार न करें।

3. नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर ध्यान दें – सिर्फ बैलेंस चेक या मिनी स्टेटमेंट के लिए भी शुल्क लगता है।

4. सैलरी अकाउंट धारक सावधान रहें – मुफ्त ट्रांजैक्शन खत्म होने से पहले अपने जरूरत के अनुसार ट्रांजैक्शन करें।

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