रिलायंस के ये सेगमेंट दे रहे सबसे ज्यादा प्रॉफिट, देखें पूरी लिस्ट
मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए। इस तिमाही में कंपनी ने 18,645 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया जबकि रेवेन्यू 2.69 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा। जियो और O2C बिजनेस का शानदार प्रदर्शन मुख्य वजह रहा।

मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर) के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी ने 18,645 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 0.56% ज्यादा है। भले ही मुनाफे में बढ़ोतरी मामूली रही हो लेकिन कंपनी की कुल कमाई में अच्छी तेजी देखने को मिली है।
रिलायंस का कुल रेवेन्यू
तीसरी तिमाही में रिलायंस का कुल रेवेन्यू 11% बढ़कर 2.69 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अगर सितंबर तिमाही से तुलना करें तो मुनाफा करीब 3% बढ़ा है जबकि रेवेन्यू में 4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कंपनी का कहना है कि इस ग्रोथ में जियो और ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस का बड़ा योगदान रहा है।
कंपनी की कमाई में सुधार
इस दौरान रिलायंस का EBITDA 6% बढ़कर 50,932 करोड़ रुपये हो गया। बेहतर ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और मजबूत डिमांड की वजह से कंपनी की कमाई में सुधार देखने को मिला। हालांकि, खर्चों में भी इजाफा हुआ है। डेप्रिसिएशन 11% बढ़कर 14,622 करोड़ रुपये हो गया जबकि फाइनेंस कॉस्ट 7% बढ़कर 6,613 करोड़ रुपये रही। इसका एक बड़ा कारण 5G स्पेक्ट्रम से जुड़े एसेट्स का ऑपरेशनल होना बताया गया है। वहीं, टैक्स खर्च भी सालाना आधार पर 10% बढ़कर 7,530 करोड़ रुपये पहुंच गया।
भविष्य के क्षेत्रों में बड़े निवेश
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा कि, कंपनी अब वैल्यू क्रिएशन के एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। उन्होंने बताया कि रिलायंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में बड़े निवेश कर रही है। उनका मानना है कि ये तकनीकें आने वाले समय में भारत और दुनिया के लिए टिकाऊ समाधान देने में अहम भूमिका निभाएंगी। पूंजीगत खर्च की बात करें तो दिसंबर तिमाही में कंपनी का कैपेक्स 33,826 करोड़ रुपये रहा। यह निवेश मुख्य रूप से O2C, न्यू एनर्जी प्रोजेक्ट्स, जियो नेटवर्क और रिटेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर किया गया है।
फ्रेट रेट्स का असर
O2C सेगमेंट में रिलायंस का प्रदर्शन मजबूत रहा। इस कारोबार का रेवेन्यू 8% बढ़कर 1.69 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, EBITDA में 15% की बढ़ोतरी के साथ यह 16,507 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बेहतर फ्यूल मार्जिन और डिमांड-सप्लाई की स्थिति ने इस सेगमेंट को फायदा पहुंचाया हालांकि डाउनस्ट्रीम केमिकल मार्जिन में कमजोरी और ज्यादा फ्रेट रेट्स का कुछ असर भी देखने को मिला।
बिजनेस में रही तेजी
जियो-बीपी के जरिए फ्यूल रिटेलिंग बिजनेस में भी तेजी रही। कंपनी ने अपने आउटलेट्स की संख्या सालाना आधार पर 14% बढ़ाकर 2,125 कर दी है। इससे हाई-स्पीड डीजल और पेट्रोल की बिक्री में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली।
जियो ने भी किया शानदार प्रदर्शन
डिजिटल और टेलीकॉम बिजनेस रिलायंस जियो ने भी शानदार प्रदर्शन किया। तीसरी तिमाही में जियो का नेट प्रॉफिट 11% बढ़कर 7,629 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 13% की बढ़त के साथ 43,683 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मजबूत सब्सक्राइबर एडिशन, ARPU में सुधार और डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने इस ग्रोथ को सपोर्ट किया।
5G सब्सक्राइबर की संख्या
तिमाही के दौरान जियो का ARPU बढ़कर 213.7 रुपये हो गया। दिसंबर तिमाही के अंत तक कंपनी का कुल ग्राहक आधार 51.5 करोड़ तक पहुंच गया जबकि 5G सब्सक्राइबर की संख्या 25.3 करोड़ हो गई है। अब जियो के कुल वायरलेस डेटा ट्रैफिक में 5G की हिस्सेदारी 53% हो चुकी है जो ग्राहकों की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है।
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर) के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी ने 18,645 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले करीब 0.56% ज्यादा है। भले ही मुनाफे में बढ़ोतरी मामूली रही हो लेकिन कंपनी की कुल कमाई में अच्छी तेजी देखने को मिली है।
रिलायंस का कुल रेवेन्यू
तीसरी तिमाही में रिलायंस का कुल रेवेन्यू 11% बढ़कर 2.69 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अगर सितंबर तिमाही से तुलना करें तो मुनाफा करीब 3% बढ़ा है जबकि रेवेन्यू में 4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कंपनी का कहना है कि इस ग्रोथ में जियो और ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) बिजनेस का बड़ा योगदान रहा है।
कंपनी की कमाई में सुधार
इस दौरान रिलायंस का EBITDA 6% बढ़कर 50,932 करोड़ रुपये हो गया। बेहतर ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और मजबूत डिमांड की वजह से कंपनी की कमाई में सुधार देखने को मिला। हालांकि, खर्चों में भी इजाफा हुआ है। डेप्रिसिएशन 11% बढ़कर 14,622 करोड़ रुपये हो गया जबकि फाइनेंस कॉस्ट 7% बढ़कर 6,613 करोड़ रुपये रही। इसका एक बड़ा कारण 5G स्पेक्ट्रम से जुड़े एसेट्स का ऑपरेशनल होना बताया गया है। वहीं, टैक्स खर्च भी सालाना आधार पर 10% बढ़कर 7,530 करोड़ रुपये पहुंच गया।
भविष्य के क्षेत्रों में बड़े निवेश
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी ने कहा कि, कंपनी अब वैल्यू क्रिएशन के एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। उन्होंने बताया कि रिलायंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में बड़े निवेश कर रही है। उनका मानना है कि ये तकनीकें आने वाले समय में भारत और दुनिया के लिए टिकाऊ समाधान देने में अहम भूमिका निभाएंगी। पूंजीगत खर्च की बात करें तो दिसंबर तिमाही में कंपनी का कैपेक्स 33,826 करोड़ रुपये रहा। यह निवेश मुख्य रूप से O2C, न्यू एनर्जी प्रोजेक्ट्स, जियो नेटवर्क और रिटेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर किया गया है।
फ्रेट रेट्स का असर
O2C सेगमेंट में रिलायंस का प्रदर्शन मजबूत रहा। इस कारोबार का रेवेन्यू 8% बढ़कर 1.69 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, EBITDA में 15% की बढ़ोतरी के साथ यह 16,507 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बेहतर फ्यूल मार्जिन और डिमांड-सप्लाई की स्थिति ने इस सेगमेंट को फायदा पहुंचाया हालांकि डाउनस्ट्रीम केमिकल मार्जिन में कमजोरी और ज्यादा फ्रेट रेट्स का कुछ असर भी देखने को मिला।
बिजनेस में रही तेजी
जियो-बीपी के जरिए फ्यूल रिटेलिंग बिजनेस में भी तेजी रही। कंपनी ने अपने आउटलेट्स की संख्या सालाना आधार पर 14% बढ़ाकर 2,125 कर दी है। इससे हाई-स्पीड डीजल और पेट्रोल की बिक्री में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली।
जियो ने भी किया शानदार प्रदर्शन
डिजिटल और टेलीकॉम बिजनेस रिलायंस जियो ने भी शानदार प्रदर्शन किया। तीसरी तिमाही में जियो का नेट प्रॉफिट 11% बढ़कर 7,629 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 13% की बढ़त के साथ 43,683 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मजबूत सब्सक्राइबर एडिशन, ARPU में सुधार और डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने इस ग्रोथ को सपोर्ट किया।
5G सब्सक्राइबर की संख्या
तिमाही के दौरान जियो का ARPU बढ़कर 213.7 रुपये हो गया। दिसंबर तिमाही के अंत तक कंपनी का कुल ग्राहक आधार 51.5 करोड़ तक पहुंच गया जबकि 5G सब्सक्राइबर की संख्या 25.3 करोड़ हो गई है। अब जियो के कुल वायरलेस डेटा ट्रैफिक में 5G की हिस्सेदारी 53% हो चुकी है जो ग्राहकों की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है।












