‘कैप्टन कूल’ की BCCI पेंशन: हर महीने खाते में आते हैं इतने रुपये
इसी सिस्टम के तहत पूर्व कप्तान धोनी को भी उनकी कैटेगरी के मुताबिक मासिक पेंशन मिलती है। अब सवाल यही है करोड़ों की ब्रांड वैल्यू और कई स्रोतों से कमाई करने वाले ‘कैप्टन कूल’ को बोर्ड से हर महीने आखिर कितनी रकम मिलती है?

MS Dhoni : भारत को दो-दो वर्ल्ड कप का ताज पहनाने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने भले ही इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट के ताने-बाने में उनकी मौजूदगी आज भी उतनी ही मजबूत है। बीसीसीआई की पेंशन नीति सिर्फ मैदान में सक्रिय खिलाड़ियों तक सीमित नहीं, बल्कि उन सितारों को भी सम्मान और आर्थिक सहारा देती है जिन्होंने देश के लिए सुनहरे अध्याय लिखे हैं। इसी सिस्टम के तहत पूर्व कप्तान धोनी को भी उनकी कैटेगरी के मुताबिक मासिक पेंशन मिलती है। अब सवाल यही है करोड़ों की ब्रांड वैल्यू और कई स्रोतों से कमाई करने वाले ‘कैप्टन कूल’ को बोर्ड से हर महीने आखिर कितनी रकम मिलती है?
एमएस धोनी को हर महीने कितनी पेंशन मिलती है?
उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार, एमएस धोनी को बीसीसीआई से हर महीने ₹70,000 पेंशन मिलती है। टीम इंडिया के लिए उन्होंने 90 टेस्ट, 350 वनडे और 98 टी-20 मुकाबले खेले हैं। खास बात यह है कि पेंशन की रकम खिलाड़ियों की टेस्ट कैटेगरी/अनुभव के आधार पर तय होती है और धोनी उसी शीर्ष श्रेणी में आते हैं, जिसमें बोर्ड ने पहले ₹50,000 मिलने वाली पेंशन को बढ़ाकर ₹70,000 प्रति माह किया था। इस तरह माही की पेंशन सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके लंबे टेस्ट अनुभव और योगदान की आधिकारिक मान्यता भी है।
किन दिग्गजों को मिलती है ₹70,000?
बीसीसीआई की पेंशन व्यवस्था में ‘टॉप ब्रैकेट’ का दायरा भी खासा बड़ा है। इसी श्रेणी में सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज आते हैं, जिन्हें ₹70,000 प्रति माह पेंशन मिलती है। वहीं युवराज सिंह को बोर्ड की सूची में ₹60,000 मासिक पेंशन के तहत रखा गया है। खास बात यह है कि यह सिस्टम सिर्फ पेंशन तक सीमित नहीं है। कुछ खिलाड़ियों के लिए बोर्ड आर्थिक सहायता का रास्ता भी खोलता है, जैसे विनोद कांबली को ₹30,000 प्रति माह मदद राशि दिए जाने का उल्लेख सामने आता रहा है। कुल मिलाकर, यह ढांचा बताता है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड रिटायरमेंट के बाद भी खिलाड़ियों के योगदान को “सम्मान” और “सपोर्ट” दोनों के जरिए याद रखता है।
मुट्ठी भर क्यों लगती है ये पेंशन?
धोनी की पहचान अब सिर्फ मैदान की उपलब्धियों तक सीमित नहीं रही। आईपीएल की मोटी कमाई, ब्रांड एंडोर्समेंट की लंबी फेहरिस्त, निवेश और अलग-अलग बिजनेस वेंचर्स ने उन्हें देश के सबसे कमाऊ स्पोर्ट्स आइकॉन में शामिल कर दिया है। ऐसे में बीसीसीआई से मिलने वाली ₹70,000 मासिक पेंशन उनकी कुल आय के सामने भले ही छोटी लगभग प्रतीकात्मक दिखे, लेकिन इसका संदेश बड़ा है: बोर्ड अपने पूर्व खिलाड़ियों को रिटायरमेंट के बाद भी सम्मान और आर्थिक सुरक्षा की छत देने की जिम्मेदारी निभाता है। इसी वजह से यह रकम सिर्फ पैसे का आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट में योगदान देने वालों के प्रति सिस्टम की सराहना का संकेत भी है। MS Dhoni
MS Dhoni : भारत को दो-दो वर्ल्ड कप का ताज पहनाने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने भले ही इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट के ताने-बाने में उनकी मौजूदगी आज भी उतनी ही मजबूत है। बीसीसीआई की पेंशन नीति सिर्फ मैदान में सक्रिय खिलाड़ियों तक सीमित नहीं, बल्कि उन सितारों को भी सम्मान और आर्थिक सहारा देती है जिन्होंने देश के लिए सुनहरे अध्याय लिखे हैं। इसी सिस्टम के तहत पूर्व कप्तान धोनी को भी उनकी कैटेगरी के मुताबिक मासिक पेंशन मिलती है। अब सवाल यही है करोड़ों की ब्रांड वैल्यू और कई स्रोतों से कमाई करने वाले ‘कैप्टन कूल’ को बोर्ड से हर महीने आखिर कितनी रकम मिलती है?
एमएस धोनी को हर महीने कितनी पेंशन मिलती है?
उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार, एमएस धोनी को बीसीसीआई से हर महीने ₹70,000 पेंशन मिलती है। टीम इंडिया के लिए उन्होंने 90 टेस्ट, 350 वनडे और 98 टी-20 मुकाबले खेले हैं। खास बात यह है कि पेंशन की रकम खिलाड़ियों की टेस्ट कैटेगरी/अनुभव के आधार पर तय होती है और धोनी उसी शीर्ष श्रेणी में आते हैं, जिसमें बोर्ड ने पहले ₹50,000 मिलने वाली पेंशन को बढ़ाकर ₹70,000 प्रति माह किया था। इस तरह माही की पेंशन सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके लंबे टेस्ट अनुभव और योगदान की आधिकारिक मान्यता भी है।
किन दिग्गजों को मिलती है ₹70,000?
बीसीसीआई की पेंशन व्यवस्था में ‘टॉप ब्रैकेट’ का दायरा भी खासा बड़ा है। इसी श्रेणी में सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज आते हैं, जिन्हें ₹70,000 प्रति माह पेंशन मिलती है। वहीं युवराज सिंह को बोर्ड की सूची में ₹60,000 मासिक पेंशन के तहत रखा गया है। खास बात यह है कि यह सिस्टम सिर्फ पेंशन तक सीमित नहीं है। कुछ खिलाड़ियों के लिए बोर्ड आर्थिक सहायता का रास्ता भी खोलता है, जैसे विनोद कांबली को ₹30,000 प्रति माह मदद राशि दिए जाने का उल्लेख सामने आता रहा है। कुल मिलाकर, यह ढांचा बताता है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड रिटायरमेंट के बाद भी खिलाड़ियों के योगदान को “सम्मान” और “सपोर्ट” दोनों के जरिए याद रखता है।
मुट्ठी भर क्यों लगती है ये पेंशन?
धोनी की पहचान अब सिर्फ मैदान की उपलब्धियों तक सीमित नहीं रही। आईपीएल की मोटी कमाई, ब्रांड एंडोर्समेंट की लंबी फेहरिस्त, निवेश और अलग-अलग बिजनेस वेंचर्स ने उन्हें देश के सबसे कमाऊ स्पोर्ट्स आइकॉन में शामिल कर दिया है। ऐसे में बीसीसीआई से मिलने वाली ₹70,000 मासिक पेंशन उनकी कुल आय के सामने भले ही छोटी लगभग प्रतीकात्मक दिखे, लेकिन इसका संदेश बड़ा है: बोर्ड अपने पूर्व खिलाड़ियों को रिटायरमेंट के बाद भी सम्मान और आर्थिक सुरक्षा की छत देने की जिम्मेदारी निभाता है। इसी वजह से यह रकम सिर्फ पैसे का आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट में योगदान देने वालों के प्रति सिस्टम की सराहना का संकेत भी है। MS Dhoni












