‘कैप्टन कूल’ की BCCI पेंशन: हर महीने खाते में आते हैं इतने रुपये

इसी सिस्टम के तहत पूर्व कप्तान धोनी को भी उनकी कैटेगरी के मुताबिक मासिक पेंशन मिलती है। अब सवाल यही है करोड़ों की ब्रांड वैल्यू और कई स्रोतों से कमाई करने वाले ‘कैप्टन कूल’ को बोर्ड से हर महीने आखिर कितनी रकम मिलती है?

‘कैप्टन कूल’ की पेंशन
‘कैप्टन कूल’ एमएस धोनी की पेंशन
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userअभिजीत यादव
calendar02 Jan 2026 04:47 PM
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MS Dhoni : भारत को दो-दो वर्ल्ड कप का ताज पहनाने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने भले ही इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट के ताने-बाने में उनकी मौजूदगी आज भी उतनी ही मजबूत है। बीसीसीआई की पेंशन नीति सिर्फ मैदान में सक्रिय खिलाड़ियों तक सीमित नहीं, बल्कि उन सितारों को भी सम्मान और आर्थिक सहारा देती है जिन्होंने देश के लिए सुनहरे अध्याय लिखे हैं। इसी सिस्टम के तहत पूर्व कप्तान धोनी को भी उनकी कैटेगरी के मुताबिक मासिक पेंशन मिलती है। अब सवाल यही है करोड़ों की ब्रांड वैल्यू और कई स्रोतों से कमाई करने वाले ‘कैप्टन कूल’ को बोर्ड से हर महीने आखिर कितनी रकम मिलती है?

एमएस धोनी को हर महीने कितनी पेंशन मिलती है?

उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार, एमएस धोनी को बीसीसीआई से हर महीने ₹70,000 पेंशन मिलती है। टीम इंडिया के लिए उन्होंने 90 टेस्ट, 350 वनडे और 98 टी-20 मुकाबले खेले हैं। खास बात यह है कि पेंशन की रकम खिलाड़ियों की टेस्ट कैटेगरी/अनुभव के आधार पर तय होती है और धोनी उसी शीर्ष श्रेणी में आते हैं, जिसमें बोर्ड ने पहले ₹50,000 मिलने वाली पेंशन को बढ़ाकर ₹70,000 प्रति माह किया था। इस तरह माही की पेंशन सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उनके लंबे टेस्ट अनुभव और योगदान की आधिकारिक मान्यता भी है।

किन दिग्गजों को मिलती है ₹70,000?

बीसीसीआई की पेंशन व्यवस्था में ‘टॉप ब्रैकेट’ का दायरा भी खासा बड़ा है। इसी श्रेणी में सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज आते हैं, जिन्हें ₹70,000 प्रति माह पेंशन मिलती है। वहीं युवराज सिंह को बोर्ड की सूची में ₹60,000 मासिक पेंशन के तहत रखा गया है। खास बात यह है कि यह सिस्टम सिर्फ पेंशन तक सीमित नहीं है। कुछ खिलाड़ियों के लिए बोर्ड आर्थिक सहायता का रास्ता भी खोलता है, जैसे विनोद कांबली को ₹30,000 प्रति माह मदद राशि दिए जाने का उल्लेख सामने आता रहा है। कुल मिलाकर, यह ढांचा बताता है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड रिटायरमेंट के बाद भी खिलाड़ियों के योगदान को “सम्मान” और “सपोर्ट” दोनों के जरिए याद रखता है।

मुट्ठी भर क्यों लगती है ये पेंशन?

धोनी की पहचान अब सिर्फ मैदान की उपलब्धियों तक सीमित नहीं रही। आईपीएल की मोटी कमाई, ब्रांड एंडोर्समेंट की लंबी फेहरिस्त, निवेश और अलग-अलग बिजनेस वेंचर्स ने उन्हें देश के सबसे कमाऊ स्पोर्ट्स आइकॉन में शामिल कर दिया है। ऐसे में बीसीसीआई से मिलने वाली ₹70,000 मासिक पेंशन उनकी कुल आय के सामने भले ही छोटी लगभग प्रतीकात्मक दिखे, लेकिन इसका संदेश बड़ा है: बोर्ड अपने पूर्व खिलाड़ियों को रिटायरमेंट के बाद भी सम्मान और आर्थिक सुरक्षा की छत देने की जिम्मेदारी निभाता है। इसी वजह से यह रकम सिर्फ पैसे का आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट में योगदान देने वालों के प्रति सिस्टम की सराहना का संकेत भी है। MS Dhoni

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फीफा विश्व कप
फीफा विश्व कप 2026
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userअभिजीत यादव
calendar02 Jan 2026 04:08 PM
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विश्व कप की शुरुआत

फीफा विश्व कप की कहानी 1930 से शुरू होती है, जब उरुग्वे ने दुनिया को पहली बार ऐसा मंच दिया, जहां देशों की प्रतिष्ठा फुटबॉल के मैदान पर दांव पर लगती है। उद्घाटन टूर्नामेंट में कुल 13 टीमों ने भाग लिया और फाइनल मुकाबला उरुग्वे व अर्जेंटीना के बीच खेला गया। घरेलू दर्शकों के जबरदस्त उत्साह के बीच उरुग्वे ने जीत दर्ज कर पहला विश्व कप अपने नाम किया। उसी ऐतिहासिक जीत ने विश्व कप को सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि फुटबॉल की सबसे बड़ी वैश्विक पहचान बना दिया जहां हर चार साल बाद इतिहास फिर से लिखा जाता है।

ब्राजील का दबदबा

विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा बार चैंपियन बनने का रिकॉर्ड ब्राजील के नाम है। ब्राजील ने 1958, 1962, 1970, 1994 और 2002 में ट्रॉफी जीती। खास बात यह भी कि ब्राजील एकमात्र टीम है, जिसने 1930 के बाद से हर विश्व कप में हिस्सा लिया है।

रोनाल्डो का अनोखा रिकॉर्ड

क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने पांच अलग-अलग विश्व कप (2006, 2010, 2014, 2018 और 2022) में गोल करके इतिहास में अपनी जगह पक्की कर ली। यह उपलब्धि उन्हें विश्व कप रिकॉर्ड-बुक में अलग पहचान देती है।

जब युद्ध ने रोक दिया विश्व कप

विश्व कप आमतौर पर हर चार साल पर होता है, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 के टूर्नामेंट नहीं हो सके। उस दौर में वैश्विक हालात इतने बिगड़ चुके थे कि खेल आयोजनों की कल्पना भी कठिन थी।

सबसे तेज गोल

2002 विश्व कप में फुटबॉल इतिहास का सबसे बिजली-सा गोल देखने को मिला। तुर्की के हाकान शुकुर ने महज 11 सेकंड में गोल दागकर विश्व कप मैच का सबसे तेज गोल करने का रिकॉर्ड बना दिया और यह पल आज भी याद किया जाता है।

ट्रॉफी चोरी और कुत्ते की हीरो एंट्री

1966 में इंग्लैंड में टूर्नामेंट से कुछ महीने पहले ही विश्व कप ट्रॉफी चोरी हो गई थी। बाद में ‘पिकल्स’ नाम के एक कुत्ते ने ट्रॉफी को झाड़ियों के नीचे छिपा हुआ खोज निकाला। यह घटना आज भी विश्व कप के सबसे चर्चित किस्सों में गिनी जाती है।

2022 में तकनीक का नया दौर

कतर विश्व कप 2022 में पहली बार “स्मार्ट बॉल” का इस्तेमाल हुआ। एडिडास की इस गेंद में सेंसर लगे थे, जो रियल-टाइम डेटा देकर रेफरी के फैसलों में मदद करते थे।

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2026 स्पोर्ट्स रोडमैप
2026 स्पोर्ट्स रोडमैप
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar02 Jan 2026 12:55 PM
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Sports Calendar 2026 : अगर आप खेलों के शौकीन हैं, तो 2026 आपके लिए किसी उत्सव से कम नहीं होने वाला। क्रिकेट के बड़े मुकाबलों से लेकर फुटबॉल विश्व कप, कॉमनवेल्थ गेम्स, हॉकी वर्ल्ड कप, बैडमिंटन के टॉप टूर्नामेंट और एथलेटिक्स के हाई-वोल्टेज मुकाबले इस साल का स्पोर्ट्स कैलेंडर रोमांच से भरा दिख रहा है। भारत के लिहाज से खास बात यह है कि साल की शुरुआत ही क्रिकेट के बड़े आकर्षण के साथ होती नजर आ रही है, जबकि आगे बढ़ते-बढ़ते 2026 कई खेलों में भारत की प्रतिष्ठा और पदक उम्मीदों की कड़ी परीक्षा भी लेगा।

वर्ल्ड कप से पहले टीम का रोडमैप तय

2026 के शुरुआती महीने भारत में क्रिकेट का माहौल गर्म रख सकते हैं। जनवरी में भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे और टी20 सीरीज में भिड़ेगी। फैंस की नजरें खास तौर पर उन सीनियर खिलाड़ियों पर रहेंगी, जिनका अनुभव बड़े टूर्नामेंट से पहले टीम को संतुलन दे सकता है। इसके तुरंत बाद फरवरी-मार्च का फोकस ICC T20 वर्ल्ड कप 2026 पर जाएगा। यह टूर्नामेंट टीम इंडिया के लिए सिर्फ ट्रॉफी का लक्ष्य नहीं, बल्कि रणनीति, संयोजन और दबाव में प्रदर्शन की कसौटी भी होगा। कप्तान सूर्यकुमार यादव और कोचिंग सेटअप के लिए यह अभियान ‘करो या दिखाओ’ वाले माहौल जैसा माना जा सकता है।

बैडमिंटन और WPL

क्रिकेट के साथ-साथ दिल्ली में इंडियन ओपन बैडमिंटन जैसे आयोजन भी चर्चा में रहेंगे। वहीं महिला क्रिकेट में WPL का आयोजन भी इस साल आकर्षण बढ़ाएगा। भारत में महिला क्रिकेट का ग्राफ जिस तरह ऊपर जा रहा है, उसके बीच WPL का हर सीजन अब सिर्फ टूर्नामेंट नहीं—एक बड़े स्पोर्टिंग प्रोडक्ट की तरह देखा जा रहा है।

2026 का स्पोर्ट्स टाइमलाइन

  1. मार्च–अप्रैल: IPL का हाई-वोल्टेज सीजन—स्टार खिलाड़ियों, नए टैलेंट और प्लेऑफ रेस का रोमांच चरम पर रहेगा।
  2. जून–जुलाई: FIFA World Cup 2026 (11 जून से 19 जुलाई) — फुटबॉल की दुनिया का सबसे बड़ा मंच, जहां हर मुकाबला ‘फाइनल’ जैसा लगेगा। इसी दौर में भारत की महिला टीम यूके में वर्ल्ड T20 (महिला) खेलने जा सकती है, जबकि पुरुष टीम का भी जुलाई में यूके दौरा चर्चा में रहेगा।
  3. 23 जुलाई–2 अगस्त: कॉमनवेल्थ गेम्स (ग्लासगो) — मल्टी-स्पोर्ट इवेंट में भारत के लिए पदकों की दौड़, खासकर शूटिंग/रेसलिंग/बैडमिंटन/एथलेटिक्स जैसे खेलों में उम्मीदें रहेंगी।

कॉमनवेल्थ के बाद हॉकी की बड़ी परीक्षा

कॉमनवेल्थ गेम्स की रौनक थमते ही भारतीय खेल जगत की निगाहें सीधे हॉकी पर टिक जाएंगी। कुछ ही हफ्तों के भीतर नीदरलैंड्स और बेल्जियम की धरती पर होने वाला हॉकी वर्ल्ड कप टीम इंडिया के लिए सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि ‘मेडल मिशन’ होगा जहां हर मैच में गलती की गुंजाइश बेहद कम रहेगी। लेकिन असली चुनौती यहीं खत्म नहीं होती। वर्ल्ड कप की थकान उतरने से पहले ही टीम के सामने एशियन गेम्स का बड़ा इम्तिहान होगा।

दिल्ली में बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप

हॉकी के साथ-साथ दिल्ली में बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी भी चर्चा का केंद्र रहेगी। भारतीय जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी–चिराग शेट्टी जैसे स्टार खिलाड़ी घरेलू दर्शकों के सामने बड़ा संदेश देना चाहेंगे खासकर एशियन गेम्स से पहले यह टूर्नामेंट लय और आत्मविश्वास दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। इसके बाद भारतीय दल का फोकस नागोया (जापान) में होने वाले एशियन गेम्स की ओर शिफ्ट होगा, जहां कई खेलों में भारत की पदक तालिका और प्रतिष्ठा की परीक्षा होगी।

नीरज चोपड़ा की वापसी

इन तमाम बड़े आयोजनों के बीच भारतीय एथलेटिक्स की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा एक बार फिर डायमंड लीग के मंच पर अपनी चमक बिखेरने उतरेंगे। यह सिर्फ एक और सीजन नहीं होगा, बल्कि उनके लिए री-स्टार्ट बटन दबाने जैसा मौका होगा जहां वह पिछले साल की चूकों और निराशाओं को पीछे छोड़कर नई लय में लौटना चाहेंगे। 

साल का आखिरी हिस्सा

जैसे-जैसे 2026 आगे बढ़ेगा, भारतीय क्रिकेट की कहानी टी20 की चमक से निकलकर टेस्ट की सख्त धूप में आ जाएगी। अगस्त में श्रीलंका के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज टीम इंडिया के लिए लय बनाने और संयोजन परखने का अहम पड़ाव होगी, लेकिन असली ‘लिटमस टेस्ट’ अक्टूबर के न्यूजीलैंड दौरे पर लिखा होगा। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की रेस में यह सीरीज निर्णायक मोड़ ला सकती है क्योंकि कीवी पिचों पर सीम मूवमेंट, स्विंग और मौसम तीनों मिलकर बल्लेबाजों का इम्तिहान लेते हैं। इतिहास यही बताता है कि न्यूजीलैंड में जीतना आसान नहीं, और इसी वजह से यह दौरा टीम इंडिया के लिए तकनीक, धैर्य और मानसिक मजबूती की असली परीक्षा बनने जा रहा है Sports Calendar 2026

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