लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज

विपक्ष ने प्रस्ताव के समर्थन में स्पीकर पर विपक्षी नेताओं के साथ पक्षपात करने का गंभीर आरोप लगाया। आरजेडी सांसद अभय कुमार सिन्हा ने कहा, "मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि चेयर सदन की आज़ादी को नहीं, बल्कि रूलिंग पार्टी के अत्याचार का प्रतीक बन गई है।"

Lok Sabha Speaker Om Birla
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar11 Mar 2026 08:24 PM
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Lok Sabha Speaker Om Birla : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव को बुधवार को सदन ने ध्वनिमत (वॉइस वोट) से खारिज कर दिया। दो दिनों तक चली गरमागरम बहस के बाद यह प्रस्ताव अस्वीकृत होने के साथ ही ओम बिरला पद पर बने रहेंगे।

प्रस्ताव का सफाया, सरकार का जोर

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कई विपक्षी सांसदों के समर्थन से यह प्रस्ताव पेश किया था। बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पीकर का जमकर बचाव किया और विपक्ष पर हमला बोला। अमित शाह ने कहा कि संसद का कामकाज आपसी भरोसे और नियमों के पालन पर आधारित है।

अमित शाह का बयान- 'सदन मार्केटप्लेस नहीं है'

बहस में हिस्सा लेते हुए अमित शाह ने कहा, "स्पीकर एक न्यूट्रल कस्टोडियन के तौर पर काम करते हैं, जो सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह सदन कोई मार्केटप्लेस नहीं है; सदस्यों से उम्मीद की जाती है कि वे इसके नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार बोलें और हिस्सा लें।" उन्होंने स्पीकर की भूमिका को सदन का निष्पक्ष अभिभावक बताया।

विपक्ष के आरोप- 'चेयर पक्षपाती है'

विपक्ष ने प्रस्ताव के समर्थन में स्पीकर पर विपक्षी नेताओं के साथ पक्षपात करने का गंभीर आरोप लगाया। आरजेडी सांसद अभय कुमार सिन्हा ने कहा, "मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि चेयर सदन की आज़ादी को नहीं, बल्कि रूलिंग पार्टी के अत्याचार का प्रतीक बन गई है।" उन्होंने आगे कहा, "इस सदन ने वह काला दिन भी देखा जब एक दिन में 140 से ज्यादा सांसदों को सस्पेंड कर दिया गया था। असली लोकतंत्र वह है जिसमें कमजोर व्यक्ति को भी लगे कि उसकी आवाज सुनी जा सकती है।"

'टेबल फैन' वाला उदाहरण और विपक्ष का दर्द

जेएमएम सांसद विजय कुमार हंसदक ने शिकायत की कि जब भी विपक्ष के सांसद बोलते हैं, तो उन्हें रोका जाता है और कैमरा दूसरी दिशा में कर दिया जाता है। एनसीपी (एसपी) के सांसद बजरंग मनोहर सोनवाने ने एक चौंकाने वाला उदाहरण देते हुए कहा, "जैसे एक टेबल फैन सिर्फ एक तरफ कूलिंग देता है, वैसे ही जब बिरला जी दाईं ओर देखते हैं, तो उनके चेहरे पर मुस्कान होती है और जब वे दूसरी तरफ (विपक्ष) देखते हैं, तो 'नहीं, नहीं, नहीं'।" Lok Sabha Speaker Om Birla

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लोकसभा में अमित शाह का विरोधियों पर तंज, मर्यादा का ख्याल नहीं, देश की बदनामी

अमित शाह ने कहा, "लोकसभा स्पीकर के सामने जो अविश्वास प्रस्ताव आया है, इस पर मेरे विचार व्यक्त करने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। यह घटना कोई सामान्य घटना नहीं है। करीब 4 दशक बाद एक बार फिर से लोकसभा अध्यक्ष के सामने अविश्वास प्रस्ताव आया है।

Amit Shah In Lok Sabha
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar11 Mar 2026 07:17 PM
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Amit Shah In Lok Sabha: लोकसभा में विपक्ष द्वारा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक ऐतिहासिक और तीखा रुख अख्तियार किया है। शाह ने सदन में अपने भाषण के दौरान विपक्ष पर जमकर हमला बोला और कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास का प्रस्ताव लाना न केवल सदन की मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाला कदम है, बल्कि यह पूरे देश की बदनामी है।

'यह कोई सामान्य घटना नहीं'

सदन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, "लोकसभा स्पीकर के सामने जो अविश्वास प्रस्ताव आया है, इस पर मेरे विचार व्यक्त करने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। यह घटना कोई सामान्य घटना नहीं है। करीब 4 दशक बाद एक बार फिर से लोकसभा अध्यक्ष के सामने अविश्वास प्रस्ताव आया है। संसदीय राजनीति और इस सदन दोनों के लिए यह एक अफसोसजनक घटना है।"

स्पीकर के पद की गरिमा बताई

केंद्रीय मंत्री ने स्पीकर के पद की गरिमा पर जोर देते हुए कहा, "स्पीकर किसी दल के नहीं होते, वे सदन के होते हैं। एक प्रकार से सदन के सभी सदस्यों के अधिकारों के वे संरक्षक भी होते हैं। सदन आपसी विश्वास से चलता है। पक्ष-विपक्ष दोनों के लिए स्पीकर अभिरक्षक होते हैं। उन्हें लोकसभा कैसे चलानी है, इसके लिए इसी लोकसभा ने कुछ नियम बनाए हैं और सदन के अंदर नियमों के अनुसार ही बोलना होता है।"

'नियम के खिलाफ बोलने का किसी को अधिकार नहीं'

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि संसद चलाने के जो नियम हैं, वे सभी के लिए बराबर लागू होते हैं। उन्होंने कहा, "सदन के नियम जिसकी अनुमति नहीं देते, उस हिसाब से किसी को बोलने का अधिकार नहीं है, चाहे वह कोई भी हो। जब आप नियमों को नजरअंदाज करेंगे तो स्पीकर का पवित्र दायित्व है कि वह उसे रोके, टोके और निकाल कर बाहर करें। यह नियम हमने नहीं बनाए, यह नेहरू जी के समय से चले आ रहे हैं।"

NDA बनाम विपक्ष: ऐतिहासिक संदर्भ दिया

अपने भाषण में अमित शाह ने विपक्ष के इस कदम को पूर्ववर्ती संसदीय परंपराओं के विपरीत बताया। उन्होंने कहा, "हम भी विपक्ष में रहे हैं। तीन बार लोकसभा स्पीकर पर अविश्वास प्रस्ताव आया, लेकिन भाजपा और NDA ने कभी विपक्ष में रहते हुए स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया।"

उन्होंने आगे कहा, "जब आप अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल करते हैं, तो आप एक अजीब प्रकार की स्थिति का निर्माण कर देते हैं। जिसको मध्यस्थता करनी है, जिसका संरक्षण लोकसभा के कार्यकाल की समाप्ति तक आपको मांगना है, उसकी निष्ठा पर ही आप सवाल कर देते हैं? यह हमारी उच्च परंपराओं के निर्वहन में बहुत अफसोसजनक घटना है।" Amit Shah In Lok Sabha

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दिल्ली को मिला नया उपराज्यपाल, तरणजीत सिंह संधू ने संभाली जिम्मेदारी

उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक विज्ञप्ति के बाद प्रभावी हुई। उन्होंने विनय कुमार सक्सेना की जगह ली है, जिन्हें अब लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है। संधू की तैनाती ऐसे समय में हुई है, जब दिल्ली की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।

दिल्ली के नए एलजी तरणजीत सिंह संधू
दिल्ली के नए एलजी तरणजीत सिंह संधू
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar11 Mar 2026 02:20 PM
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Delhi News : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को नया उपराज्यपाल मिल गया है। भारत के पूर्व राजनयिक और अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने बुधवार, 11 मार्च 2026 को दिल्ली के नए उपराज्यपाल के रूप में शपथ ली। उनकी नियुक्ति के साथ ही विनय कुमार सक्सेना का कार्यकाल समाप्त हुआ और उन्हें लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है। उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक विज्ञप्ति के बाद प्रभावी हुई। उन्होंने विनय कुमार सक्सेना की जगह ली है, जिन्हें अब लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है। संधू की तैनाती ऐसे समय में हुई है, जब दिल्ली की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। आबकारी नीति मामले में निचली अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को डिस्चार्ज किया था, लेकिन इस आदेश को CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, और हाईकोर्ट ने मामले से जुड़ी कुछ टिप्पणियों पर अंतरिम राहत भी दी है। ऐसे में नए एलजी की नियुक्ति को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

कौन हैं तरणजीत सिंह संधू?

तरणजीत सिंह संधू भारतीय विदेश सेवा के 1988 बैच के अधिकारी रहे हैं और उन्हें देश के अनुभवी कूटनीतिज्ञों में गिना जाता है। उन्होंने फरवरी 2020 से जनवरी 2024 तक अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इससे पहले वे श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त और फ्रैंकफर्ट में महावाणिज्य दूत जैसे अहम पदों पर भी रह चुके हैं। लंबे राजनयिक अनुभव के कारण उनकी पहचान एक संतुलित, सधे हुए और परिणामोन्मुख अधिकारी के रूप में रही है।

कितने पढ़े-लिखे हैं दिल्ली के नए एलजी?

दिल्ली के नए उपराज्यपाल की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद मजबूत मानी जाती है। तरणजीत सिंह संधू ने अपनी शुरुआती पढ़ाई द लॉरेंस स्कूल, सनावर से की। इसके बाद उन्होंने सेंट स्टीफंस कॉलेज, दिल्ली से इतिहास (ऑनर्स) में स्नातक किया। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का रुख किया, जहां से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। यानी प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने जा रहे इस नए चेहरे के पास अकादमिक मजबूती के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मामलों की गहरी समझ भी है।

विनय सक्सेना की जगह संधू को क्यों मिली जिम्मेदारी?

तरणजीत सिंह संधू की नियुक्ति को केवल एक नियमित प्रशासनिक बदलाव मानना शायद जल्दबाजी होगी। दिल्ली देश की राजधानी है, जहां न सिर्फ केंद्र सरकार का राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचा सक्रिय रहता है, बल्कि बड़ी संख्या में विदेशी दूतावास, वैश्विक एजेंसियां और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहते हैं। ऐसे में संधू जैसा अनुभवी कूटनीतिज्ञ राजधानी के लिए केंद्र की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। विनय कुमार सक्सेना के कार्यकाल में आम आदमी पार्टी सरकार और उपराज्यपाल कार्यालय के बीच कई मुद्दों पर तीखा टकराव देखने को मिला था। फाइलों की मंजूरी से लेकर प्रशासनिक अधिकारों तक, कई बार दिल्ली की राजनीति सीधे राज निवास बनाम निर्वाचित सरकार की लड़ाई में बदलती नजर आई। अब जबकि दिल्ली की सत्ता में भाजपा की सरकार है और रेखा गुप्ता मुख्यमंत्री हैं, ऐसे में केंद्र शायद एक ऐसे एलजी पर दांव लगाना चाहता है जो टकराव की जगह संस्थागत नियंत्रण और संतुलित प्रशासन पर जोर दे सके।

क्या अरविंद केजरीवाल और AAP की मुश्किलें बढ़ेंगी?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तरणजीत सिंह संधू की नियुक्ति से अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं? इसका सीधा और तात्कालिक जवाब देना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि संधू नियम, प्रक्रिया और प्रशासनिक अनुशासन को गंभीरता से लेने वाले अधिकारी माने जाते हैं। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी अब दिल्ली की सत्ता में नहीं, बल्कि विपक्ष की भूमिका में है। ऐसे में उसकी राजनीति का बड़ा हिस्सा सरकार और प्रशासन की जवाबदेही पर टिका रहेगा। यहीं पर संधू की भूमिका अहम हो जाती है। अगर वे फाइल-स्तर पर कड़ाई, विकास परियोजनाओं की सख्त मॉनिटरिंग, कानून-व्यवस्था, प्रदूषण, यमुना सफाई और पुराने भ्रष्टाचार मामलों में सक्रिय रवैया अपनाते हैं, तो इसका राजनीतिक दबाव विपक्ष पर पड़ना तय है। खासकर तब, जब आबकारी नीति केस अभी कानूनी रूप से पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। हालांकि एक दूसरा पक्ष भी है। चूंकि अब दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच वैचारिक दूरी पहले जैसी नहीं है, इसलिए एलजी और सरकार के बीच पहले वाला टकराव कम होने की संभावना है। इसका मतलब यह हुआ कि आने वाले दिनों में राजनीतिक घमासान का केंद्र सरकार बनाम एलजी नहीं, बल्कि सरकार बनाम विपक्ष हो सकता है। इस स्थिति में आम आदमी पार्टी के लिए नई चुनौती यह होगी कि वह प्रशासनिक सख्ती को राजनीतिक मुद्दा कैसे बनाती है। Delhi News

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