चाणक्य नीति में बताई गई है तथाकथित दोस्त की पहचान

चाणक्य नीति में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि किस प्रकार आप धोखेबाज लोगों को पहचानकर उनसे अपनी रक्षा करने में सफल हो सकते हैं। चाणक्य नीति में दी गई यह जानकारी हर किसी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

चाणक्य नीति की चेतावनी
चाणक्य नीति की चेतावनी
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar11 Feb 2026 03:14 PM
bookmark

Chanakya Niti : आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित चाणक्य नीति ज्ञान का बहुत बड़ा भंडार है। चाणक्य नीति में दोस्त तथा दुश्मन को पहचानने तथा धोखेबाज तथाकथित दोस्त से बचने के उपाय भी बजाए गए हैं। चाणक्य नीति में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि किस प्रकार आप धोखेबाज लोगों को पहचानकर उनसे अपनी रक्षा करने में सफल हो सकते हैं। चाणक्य नीति में दी गई यह जानकारी हर किसी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। चाणक्य नीति की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसमें हर किसी के काम की जानकारी मौजूद है।

सोने की शुद्धता की तरह ही पहचान कर सकते हैं धोखेबाज की

चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिस तरह सोने की शुद्धता की पहचान उसे घिसकर, काटकर, गरम करके और पीटकर की जाती है, ठीक उसी तरह एक इंसान के चरित्र की पहचान उसके त्याग, आचरण, गुणों और कर्मों से होती है। Fake People हमेशा मीठा बोलते हैं क्योंकि उनका मकसद आपसे अपना काम निकलवाना होता है। चाणक्य नीति के अनुसार, एक धोखेबाज इंसान की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह आपकी गैर-मौजूदगी में आपकी बुराई करेगा लेकिन आपके सामने आपकी इतनी तारीफ करेगा कि आपको शक ही नहीं होगा। ऐसे लोग अक्सर आपकी कमजोरियों को जानने की कोशिश करते हैं ताकि सही समय पर वह उन पर वार कर सकें। आचार्य चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति हद से ज्यादा मीठा बोलता है, वह सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है। चाणक्य इसे ‘विषकुम्भं पयोमुखम्’ कहते हैं, यानी ऐसा घड़ा जिसके ऊपर तो दूध है लेकिन अंदर जहर भरा हुआ है। Cunning People कभी भी आपका सीधा विरोध नहीं करेंगे।

आपकी हर बात का समर्थन करता है धोखेबाज दोस्त

चाणक्य नीति में बताया गया है कि वे हमेशा आपकी हर बात का समर्थन करेंगे, चाहे आप गलत ही क्यों न हों। ऐसा इसलिए क्योंकि वे नहीं चाहते कि आप अपनी गलती सुधारें और सफल हों। Selfish Friends सिर्फ तभी तक आपके पास रहते हैं जब तक उन्हें आपसे कोई फायदा मिल रहा होता है। अगर आपको किसी पर शक है, तो चाणक्य नीति कहती है कि उसे परखने के लिए उसे कोई छोटा सा लालच देकर देखें। अगर वह इंसान उस लालच में फंस जाता है और आपके हितों को नुकसान पहुंचाता है, तो समझ लीजिए कि वह धोखेबाज है। इसके अलावा, अपनी Personal Information और बिजनेस की गुप्त बातें कभी भी किसी को न बताएं। चाणक्य कहते हैं कि वह मित्र जो आपके गुप्त राज जानता है, वह दुश्मन से भी ज्यादा डरावना हो सकता है क्योंकि वह जानता है कि आपको चोट कहाँ पहुँचानी है।

चाणक्य नीति की जरूरी शिक्षा

  1. मीठी बातों से कभी भी किसी को अपना सगा न समझें।
  2. जो व्यक्ति आपके सामने दूसरों की चुगली करता है, वह निश्चित ही दूसरों के सामने आपकी भी चुगली करेगा।
  3. संकट के समय जो व्यक्ति साथ छोड़ दे, वह कभी आपका शुभचिंतक नहीं हो सकता।
  4. सच्चा दोस्त वही है जो कड़वा सच बोले और आपको सही रास्ता दिखाए।
  5. अपनी सफलता का मंत्र तब तक किसी को न बताएं जब तक काम पूरा न हो जाए। Chanakya Niti

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

महाशिवरात्रि में क्या करें और क्या न करें? त्यौहार से पहले जान लें वरना होगा पछतावा

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि 2026 का व्रत और पूजा का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान शिव की पूजा विधिपूर्वक करने और व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महाशिवरात्रि व्रत के दौरान निर्जला, फलाहार या आंशिक व्रत रखा जा सकता है और शारीरिक व मानसिक शुद्धता बनाए रखना जरूरी है।

Mahashivratri Vrat
महाशिवरात्रि व्रत का महत्व
locationभारत
userअसमीना
calendar10 Feb 2026 04:40 PM
bookmark

महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है जिसे भगवान शिव को समर्पित किया गया है। इस वर्ष, महाशिवरात्रि 15 फरवरी (रविवार) को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। अगर आप पहली बार महाशिवरात्रि का व्रत रखने जा रहे हैं तो व्रत के दौरान कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना आवश्यक है। यह आर्टिकल आपको पूरी जानकारी देगा कि महाशिवरात्रि व्रत कैसे रखें, क्या करें और क्या न करें।

महाशिवरात्रि का व्रत कैसे रखा जाता है?

महाशिवरात्रि का व्रत रखने के लिए सबसे पहले अपने लिए उपयुक्त व्रत का प्रकार चुनें। मुख्य रूप से तीन तरह के व्रत रखे जाते हैं-

1. निर्जला व्रत- इस व्रत में पूरे दिन पानी और भोजन दोनों का त्याग किया जाता है।

2. फलाहार व्रत- इस व्रत में केवल फल और व्रत के अनुसार विशेष चीजें खाई जाती हैं।

3. आंशिक व्रत- इसमें व्रत रखते हुए हल्का भोजन किया जा सकता है।

व्रत के दौरान शारीरिक और मानसिक शुद्धता बनाए रखना बहुत जरूरी है। इस दिन मन को सकारात्मक रखना चाहिए और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना लाभकारी माना जाता है। विशेष रूप से पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से मन और आत्मा दोनों को शांति मिलती है।

महाशिवरात्रि के दिन क्या करें?

1. शरीर को हाइड्रेट रखें- दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें ताकि कमजोरी न महसूस हो और शरीर में ऊर्जा बनी रहे।

2. पूजा और ध्यान करें- इस दिन भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

3. सकारात्मक सोच रखें- व्रत के दिन केवल सकारात्मक विचार रखें और मन को शांत रखें।

4. रातभर जागरण करें- महाशिवरात्रि की रात शिव ध्यान, मंत्र जाप और भजन में बिताएं।

महाशिवरात्रि के व्रत में क्या न करें?

1. ज्यादा मेहनत वाला काम न करें- भारी या थकाने वाले काम से बचें ताकि शरीर में कमजोरी न आए।

2. निगेटिव सोच से दूर रहें- गुस्सा, झगड़ा और नकारात्मक गतिविधियों से बचें।

3. तामसिक चीजों से परहेज करें- शराब, मांसाहार, प्याज, लहसुन और जुआ से दूर रहें।

4. रात को सोने से बचें- जागरण और ध्यान का महत्व इस दिन और बढ़ जाता है।

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

Ramadan 2026: कब रखा जाएगा पहला रोजा? आ गई पक्की तारीख!

Ramadan 2026: रमजान 2026 भारत में कब शुरू होगा और पहला रोजा कब रखा जाएगा, इसकी पूरी जानकारी आपको इस आर्टिकल में मिलेगी। रमजान के पाक महीने में सहरी और इफ्तार का सही समय, रोजा रखने के नियम और ईद-उल-फित्र की संभावित तारीख भी विस्तार से बताई गई है।

Ramadan Mubarak
रमजान कब से है
locationभारत
userअसमीना
calendar10 Feb 2026 04:03 PM
bookmark

इस्लाम धर्म में रमजान का महीना सबसे पाक और रहमतों से भरा माना जाता है। इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग पूरे संयम, इबादत और सब्र के साथ रोजा रखते हैं। रमजान सिर्फ भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है बल्कि यह आत्मशुद्धि, नेकी, दुआ और इंसानियत को बेहतर बनाने का महीना होता है। हर साल की तरह 2026 में भी लोगों के मन में यही सवाल है कि रमजान 2026 कब शुरू होगा, पहला रोजा कब रखा जाएगा और ईद कब मनाई जाएगी। आइए जानते हैं रमजान 2026 से जुड़ी हर अहम जानकारी।

रमजान 2026 कब शुरू होगा?

इस्लामिक (हिजरी) कैलेंडर के अनुसार रमजान साल का नौवां महीना होता है। रमजान की शुरुआत चांद दिखने पर निर्भर करती है जो शाबान महीने की 29 या 30 तारीख को देखा जाता है। शाही इमाम मौलाना सैय्यद फ़ज़लुल्ल मन्नान रहमानी के अनुसार, भारत में रमजान 2026 की शुरुआत 19 फरवरी 2026 से होने की संभावना है। यदि 18 फरवरी की शाम को चांद दिखाई देता है तो 19 फरवरी को पहला रोजा रखा जाएगा।

पहला रोजा कब रखा जाएगा?

संभावनाओं के अनुसार, भारत में पहला रोजा 19 फरवरी 2026 (गुरुवार) को रखा जा सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला चांद दिखने के बाद ही होगा। इसी आधार पर सहरी, इफ्तार और नमाज का समय तय किया जाता है।

ईद-उल-फित्र 2026 कब मनाई जाएगी?

ईद-उल-फित्र जिसे मीठी ईद भी कहा जाता है, रमजान के खत्म होने पर मनाई जाती है। यह शव्वाल महीने के पहले दिन आती है और इसका निर्धारण भी चांद देखने पर ही होता है। मौलाना सैय्यद फ़ज़लुल्ल मन्नान रहमानी के अनुसार, ईद 20 या 21 मार्च 2026 को मनाई जा सकती है। अगर रमजान 29 दिनों का होता है तो ईद जल्दी और 30 दिनों का होता है तो एक दिन बाद मनाई जाती है।

रमजान के खास और अहम दिन

रमजान के आखिरी दस दिन सबसे ज्यादा अहम माने जाते हैं। इनमें शबे-कद्र की रात आती है जो हजार महीनों की इबादत से बेहतर मानी जाती है। 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं शब को खास तौर पर इबादत करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा रमजान के आखिरी शुक्रवार को अलविदा जुमा की नमाज का बेहद महत्व होता है।

सहरी क्या होती है और इसका महत्व क्या है?

सहरी वह भोजन होता है जो रोजा रखने से पहले फज्र की नमाज से पहले किया जाता है। सहरी करने के बाद रोजेदार सूरज ढलने तक कुछ भी खाता-पीता नहीं है। इस्लाम में सहरी को बहुत बरकत वाला माना गया है क्योंकि यह पूरे दिन रोजा रखने के लिए शरीर को ऊर्जा देती है और अल्लाह की सुन्नत भी है।

इफ्तार क्या होता है?

दिन भर रोजा रखने के बाद सूर्यास्त के समय मगरिब की अजान के साथ रोजा खोला जाता है जिसे इफ्तार कहते हैं। अक्सर इफ्तार खजूर, पानी, फल या हल्के भोजन से किया जाता है। इफ्तार का समय दुआओं की कबूलियत का खास वक्त माना जाता है।

रमजान में जकात का महत्व

रमजान के महीने में जकात और सदका देना बहुत सवाब का काम माना गया है। जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। मौलाना सैय्यद फ़ज़लुल्ल मन्नान रहमानी के अनुसार, अगर किसी के पास तयशुदा मालियत (निसाब) से ज्यादा संपत्ति है तो उसे 2.5% जकात जरूरतमंदों को देनी चाहिए। इस्लामिक मान्यता है कि रमजान में दिया गया दान कई गुना सवाब दिलाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

संबंधित खबरें