होली को लेकर बना हुआ है कंफ्यूजन? यहां है सही तारीख

Holi 2026: होली की सही तारीख को लेकर हर किसी के जेहन में सवाल बना हुआ है कि साल 2026 में होली कब मनाई जाएगी। अगर आप भी इस कंफ्यूजन में फंसे हुए हैं तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस आर्टिकल में होली की सही तारीख बताई गई है जिससे आप अपना भ्रम दूर कर सकते हैं।

Holi 2026
होली कब है
locationभारत
userअसमीना
calendar07 Feb 2026 12:05 PM
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हर साल होली का इंतजार पूरे देश को रहता है लेकिन साल 2026 में होली की तारीख को लेकर लोगों के बीच काफी कंफ्यूजन बना हुआ है। कोई कह रहा है कि होली 3 मार्च को है तो कोई 4 मार्च को रंग खेलने की बात कर रहा है। दरअसल, इस साल होली के दौरान चंद्रग्रहण पड़ रहा है जिस वजह से रंगों के पर्व की तारीख बदल गई है। इस लेख में हम आपको शास्त्रों, पंचांग और देश के प्रसिद्ध पंडितों की राय के आधार पर होली 2026 की सही और अंतिम तारीख बता रहे हैं।

Holi 2026 को लेकर कंफ्यूजन क्यों?

इस साल फाल्गुन पूर्णिमा के दिन यानी 3 मार्च 2026 को चंद्रग्रहण लग रहा है। सनातन धर्म में ग्रहण और सूतक काल के दौरान किसी भी तरह का शुभ या मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है। इसी कारण लोग यह समझ नहीं पा रहे हैं कि रंगों की होली 3 मार्च को मनाई जाए या फिर 4 मार्च को। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इसी चंद्रग्रहण के कारण होली की तिथि में बदलाव हुआ है।

होलिका दहन 2026 की सही तिथि

ज्योतिषाचार्य पंडित दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 मार्च 2026 को पड़ रही है। इस दिन शाम के समय भद्रा लग रही है इसलिए भद्रा के मुख काल को छोड़कर भद्रा पूंछ काल में ही होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन 2 मार्च 2026 की रात 12 बजकर 50 मिनट से लेकर 2 बजकर 02 मिनट के बीच करना सबसे शुभ रहेगा।

3 मार्च 2026 को होली क्यों नहीं मनाई जाएगी?

3 मार्च 2026 को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है लेकिन इसी दिन साल का पहला चंद्रग्रहण भी लग रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। इस गणना के अनुसार, 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल लग जाएगा। सूतक काल में रंग खेलना, पूजा-पाठ करना या कोई भी शुभ कार्य करना उचित नहीं माना जाता इसलिए इस दिन होली नहीं मनाई जाएगी।

चंद्रग्रहण 3 मार्च 2026 का समय

ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, 3 मार्च 2026 को चंद्रग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी। ग्रहण का मध्यकाल शाम 5 बजकर 4 मिनट पर रहेगा जबकि चंद्रमा का उदय शाम 5 बजकर 59 मिनट पर होगा। ग्रहण का मोक्ष काल शाम 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा। भारत में चंद्रोदय के बाद केवल ग्रहण का मोक्ष काल ही दिखाई देगा लेकिन इसके बावजूद पूरे देश में सूतक काल मान्य रहेगा।

4 मार्च 2026 को ही क्यों मनाई जाएगी रंगों की होली?

ज्योतिषाचार्य पंडित वेद प्रकाश मिश्रा के अनुसार, शास्त्रीय परंपरा में होलिका दहन के अगले दिन रंगोत्सव मनाया जाता है लेकिन 3 मार्च को चंद्रग्रहण और सूतक काल होने के कारण उस दिन होली मनाना उचित नहीं है। ग्रहण समाप्त होने के बाद अगले दिन यानी 4 मार्च 2026 को चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि होगी जो रंगों की होली मनाने के लिए पूरी तरह शुभ मानी जा रही है। इसलिए पूरे भारत में होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।

चंद्रग्रहण कहां-कहां दिखाई देगा?

3 मार्च 2026 को लगने वाला यह चंद्रग्रहण भारत के अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में भी देखा जाएगा। ग्रहण का प्रभाव धार्मिक दृष्टि से पूरे भारत में मान्य रहेगा इसी कारण सभी ज्योतिषाचार्यों ने 4 मार्च को होली मनाने की सलाह दी है।

Holi 2026 की सही तारीख

सभी पंचांग, ज्योतिषीय गणना और पंडितों की राय के अनुसार, होलिका दहन 2 मार्च 2026 की रात को किया जाएगा। चंद्रग्रहण और सूतक काल के कारण 3 मार्च को रंगों की होली नहीं मनाई जाएगी। इसलिए पूरे देश में रंगों का पर्व होली 4 मार्च 2026 को ही मनाया जाना सबसे शुभ और शास्त्र सम्मत माना जा रहा है।

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यह बात मान ली तो दुश्मन भी आपके पैरों में होगा

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चाणक्य
चाणक्य
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar06 Feb 2026 06:10 PM
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खामोशी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लें

चाणक्य नीति में कहा गया है कि जो व्यक्ति अपनी वाणी पर नियंत्रण रखता है, वह बिना युद्ध किए विजय प्राप्त कर सकता है। जब आप दुश्मन की बातों का जवाब नहीं देते, तो आप उसके पूरे प्लान को फेल कर देते हैं। आपकी खामोशी ही उसके आत्मविश्वास को तोड़ देती है। चुप रहना कई बार सबसे तेज और घातक अस्त्र बन जाता है। हर परिस्थिति में खामोश रहकर दुश्मन पर निगाह बनाए रखें। सच्चा विजेता वही होता है जो अपनी उपलब्धियों का ढिंढोरा न पीटे। जब आप बिना दिखावे के सफलता प्राप्त करते हैं, तो यह आपके दुश्मनों के लिए एक चुपचाप करारा तमाचा बन जाता है और जब आप उस सफलता पर भी शांत रहते हैं, तो वह भीतर से घुटने लगता है। आप बस चुपचाप अपना काम करते जाइए।

दुश्मन को अनदेखा करना शुरू करें

चाणक्य नीति में बताया गया है कि आपके जो दुश्मन आपकी हमेशा निंदा करते रहते हैं उन्हें अनदेखा करना शुरू कर दें। चाणक्य नीति कहती है कि निंदा करने वालों को सबसे बड़ा जवाब है- उन्हें पूरी तरह से अनदेखा करना। जब आप अपने शत्रु को महत्व देना ही बंद कर देते हैं, तो वह अपने ही शब्दों और प्रयासों में घुटने लगता है। यह मानसिक रूप से उसे तोड़ देता है। उसे लगेगा कि वह आपके लिए इतना भी महत्वपूर्ण नहीं कि आप कुछ कहें। चाणक्य नीति के अनुसार, जो व्यक्ति शत्रु की योजनाओं को पहले से जान लेता है, वह अजेय हो जाता है। दुश्मन की गतिविधियों पर पैनी नजर रखिए, अंदर ही अंदर तैयारी करते रहिए, अपनी योजनाएं गुप्त रखिए। जब वह आपको हानि पहुंचाने का प्रयास करे और आप पहले से तैयार हों, तो उसकी हर रणनीति निष्फल हो जाएगी। Chanakya Niti



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महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नाराज हो जाएंगे भगवान शिव!

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Mahashivratri
महाशिवरात्रि 2026
locationभारत
userअसमीना
calendar06 Feb 2026 11:08 AM
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महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण पर्व है जो भगवान शिव को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पावन विवाह संपन्न हुआ था। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व शिव भक्तों के लिए आस्था, तप और भक्ति का विशेष अवसर होता है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक कर भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई शिव पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

महाशिवरात्रि की पूजा में महादेव को क्या चढ़ाना शुभ होता है?

  • भगवान शिव सादगी के प्रतीक हैं। उन्हें दिखावे की नहीं बल्कि सच्ची श्रद्धा की आवश्यकता होती है। यदि महाशिवरात्रि के दिन नीचे बताई गई चीजें विधि-विधान से अर्पित की जाएं तो शिव कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
  • बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। पूजा में हमेशा साफ, हरा और तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही चढ़ाएं। कटा-फटा या सूखा बेलपत्र चढ़ाने से बचना चाहिए।
  • धतूरा और भांग शिवजी को अर्पित की जाने वाली विशेष सामग्री मानी जाती है। ये नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और शिव तत्त्व का प्रतीक मानी जाती हैं।
  • कच्चा दूध और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करना अत्यंत शुभ होता है। इससे मानसिक शांति मिलती है और पापों का नाश होता है।
  • सफेद चंदन से शिवजी का तिलक करने से मन शांत रहता है और पूजा में सात्विकता बनी रहती है।
  • अक्षत (साबुत चावल) पूजा में प्रयोग करें। टूटे या खंडित चावल शिव पूजा में वर्जित माने गए हैं।

महाशिवरात्रि की पूजा में भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें

  • शिव पूजा में कुछ चीजों का प्रयोग शास्त्रों में निषेध माना गया है। इन वस्तुओं को चढ़ाने से पूजा का फल कम हो सकता है।
  • केतकी का फूल शिव पूजा में वर्जित है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने इसे अपनी पूजा से निषिद्ध कर दिया था।
  • तुलसी दल भगवान विष्णु को प्रिय है लेकिन शिव पूजा में तुलसी अर्पित नहीं की जाती। इसका संबंध जालंधर और वृंदा की कथा से बताया गया है।
  • सिंदूर या कुमकुम शिवजी वैरागी हैं, इसलिए उन्हें सौभाग्य सूचक वस्तुएं जैसे सिंदूर अर्पित नहीं की जातीं।
  • शंख से जल अर्पण भी शिव पूजा में वर्जित माना गया है क्योंकि शिवजी ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था।

महाशिवरात्रि पूजा के दौरान न करें ये गलतियां

  • महाशिवरात्रि के दिन पूजा करते समय कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है।
  • कभी भी खंडित शिवलिंग की पूजा नहीं करनी चाहिए। हालांकि, नर्मदेश्वर शिवलिंग को इसका अपवाद माना गया है।
  • शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए तांबे का पात्र श्रेष्ठ माना जाता है लेकिन तांबे के बर्तन में दूध डालकर अभिषेक नहीं करना चाहिए। दूध के लिए चांदी या स्टील के पात्र का प्रयोग करें।
  • शिवलिंग की पूरी परिक्रमा कभी न करें। हमेशा आधी परिक्रमा करें और जलाधारी (जहां से जल बाहर निकलता है) को कभी न लांघें।

महाशिवरात्रि व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

महाशिवरात्रि का व्रत केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग की सच्चे मन से पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, महाशिवरात्रि का व्रत आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। अविवाहित लोगों को मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है जबकि विवाहित लोगों के वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और प्रेम बना रहता है।

(Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। चेतना मंच इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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