ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का बड़ा एक्शन, 10 सोसायटियों पर ठोका भारी जुर्माना
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अनुसार, सीईओ एनजी रवि कुमार तक लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं कि ग्रेटर नोएडा की कई हाई-राइज सोसायटियों में STP नियमित रूप से नहीं चल रहा और घरेलू सीवरेज बिना शोधन सीधे नालों में बहाया जा रहा है।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा में सीवर का पानी बिना ट्रीटमेंट नालों में छोड़ने वाली बिल्डर सोसायटियों पर ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने सख्त शिकंजा कस दिया है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की ताजा जांच में 10 और सोसायटियों के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बंद मिले, जिसके बाद हर सोसायटी पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया गया। इस कार्रवाई को ग्रेटर नोएडा में पर्यावरण सुरक्षा और भूजल संरक्षण के लिए ‘नो-कम्प्रोमाइज’ कदम माना जा रहा है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अनुसार, सीईओ एनजी रवि कुमार तक लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं कि ग्रेटर नोएडा की कई हाई-राइज सोसायटियों में STP नियमित रूप से नहीं चल रहा और घरेलू सीवरेज बिना शोधन सीधे नालों में बहाया जा रहा है। शिकायतों की पुष्टि के लिए सीवर विभाग ने फील्ड निगरानी बढ़ाई और अब नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की रफ्तार और तेज कर दी है।
रिपोर्ट के बाद हुई क्रॉस-चेकिंग
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने 220 से अधिक सोसायटियों को नोटिस भेजकर एसटीपी की मौजूदा स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी। अब तक करीब 30 सोसायटियों के प्रबंधन ने जवाब देकर दावा किया कि उनके यहां एसटीपी सुचारू रूप से संचालित हैं। इसके बाद अथॉरिटी ने कागजी रिपोर्ट पर भरोसा करने के बजाय मैदान में जाकर क्रॉस-चेकिंग कराई। सीवर विभाग के सीनियर मैनेजर सन्नी यादव के अनुसार, जांच के दौरान 10 और सोसायटियों में एसटीपी बंद मिले। नियम उल्लंघन की पुष्टि होने पर अथॉरिटी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हर सोसायटी पर 5-5 लाख रुपये की पेनल्टी लगा दी।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब ग्रेटर नोएडा में एसटीपी बंद होने पर दंडात्मक कार्रवाई हुई हो। इससे पहले भी 25 सोसायटियों में जांच के दौरान एसटीपी बंद मिलने पर जुर्माना लगाया जा चुका है। अथॉरिटी ने स्पष्ट किया है कि सोसायटियों से निकलने वाले सीवरेज को शोधित करने के लिए एसटीपी का संचालन अनिवार्य है और इसकी जिम्मेदारी संबंधित बिल्डर/मेंटेनेंस प्रबंधन की होती है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने हाल ही में ग्रेनो वेस्ट की एक सोसायटी में बेसमेंट में सीवर का पानी भरने की घटना को गंभीर लापरवाही मानते हुए बिल्डर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अथॉरिटी का कहना है कि उस सोसायटी का एसटीपी करीब दो साल से बंद पड़ा था, जिससे समस्या बढ़ती गई। अथॉरिटी के अनुसार, बिना ट्रीटमेंट सीवर पानी नालों में छोड़ने से ग्रेटर नोएडा में पर्यावरण, नालों की गुणवत्ता और भूजल पर सीधा और गंभीर असर पड़ता है। इसी वजह से अब निरीक्षण को नियमित बनाया जा रहा है और नियम तोड़ने पर सख्त दंड तय किया गया है। Greater Noida News
Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा में सीवर का पानी बिना ट्रीटमेंट नालों में छोड़ने वाली बिल्डर सोसायटियों पर ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने सख्त शिकंजा कस दिया है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की ताजा जांच में 10 और सोसायटियों के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बंद मिले, जिसके बाद हर सोसायटी पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया गया। इस कार्रवाई को ग्रेटर नोएडा में पर्यावरण सुरक्षा और भूजल संरक्षण के लिए ‘नो-कम्प्रोमाइज’ कदम माना जा रहा है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अनुसार, सीईओ एनजी रवि कुमार तक लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं कि ग्रेटर नोएडा की कई हाई-राइज सोसायटियों में STP नियमित रूप से नहीं चल रहा और घरेलू सीवरेज बिना शोधन सीधे नालों में बहाया जा रहा है। शिकायतों की पुष्टि के लिए सीवर विभाग ने फील्ड निगरानी बढ़ाई और अब नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की रफ्तार और तेज कर दी है।
रिपोर्ट के बाद हुई क्रॉस-चेकिंग
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने 220 से अधिक सोसायटियों को नोटिस भेजकर एसटीपी की मौजूदा स्थिति पर रिपोर्ट मांगी थी। अब तक करीब 30 सोसायटियों के प्रबंधन ने जवाब देकर दावा किया कि उनके यहां एसटीपी सुचारू रूप से संचालित हैं। इसके बाद अथॉरिटी ने कागजी रिपोर्ट पर भरोसा करने के बजाय मैदान में जाकर क्रॉस-चेकिंग कराई। सीवर विभाग के सीनियर मैनेजर सन्नी यादव के अनुसार, जांच के दौरान 10 और सोसायटियों में एसटीपी बंद मिले। नियम उल्लंघन की पुष्टि होने पर अथॉरिटी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हर सोसायटी पर 5-5 लाख रुपये की पेनल्टी लगा दी।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब ग्रेटर नोएडा में एसटीपी बंद होने पर दंडात्मक कार्रवाई हुई हो। इससे पहले भी 25 सोसायटियों में जांच के दौरान एसटीपी बंद मिलने पर जुर्माना लगाया जा चुका है। अथॉरिटी ने स्पष्ट किया है कि सोसायटियों से निकलने वाले सीवरेज को शोधित करने के लिए एसटीपी का संचालन अनिवार्य है और इसकी जिम्मेदारी संबंधित बिल्डर/मेंटेनेंस प्रबंधन की होती है। ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने हाल ही में ग्रेनो वेस्ट की एक सोसायटी में बेसमेंट में सीवर का पानी भरने की घटना को गंभीर लापरवाही मानते हुए बिल्डर पर 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अथॉरिटी का कहना है कि उस सोसायटी का एसटीपी करीब दो साल से बंद पड़ा था, जिससे समस्या बढ़ती गई। अथॉरिटी के अनुसार, बिना ट्रीटमेंट सीवर पानी नालों में छोड़ने से ग्रेटर नोएडा में पर्यावरण, नालों की गुणवत्ता और भूजल पर सीधा और गंभीर असर पड़ता है। इसी वजह से अब निरीक्षण को नियमित बनाया जा रहा है और नियम तोड़ने पर सख्त दंड तय किया गया है। Greater Noida News












