Fear Of Taliban : पाकिस्तान में शरण लेने वाली अफगान महिला कार्यकतार्ओं के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पाकिस्तानी सरकार ने अवैध विदेशी नागरिकों और अफगान नागरिकता कार्ड धारकों को 31 मार्च तक देश छोड़ने का आदेश दिया है, जिसके बाद 1 अप्रैल से जबरन निर्वासन की प्रक्रिया शुरू होगी। इस निर्णय से उन अफगान महिलाओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जो तालिबान शासन के दौरान उत्पीड़न से बचने के लिए पाकिस्तान में शरण ली थीं। उन्हें डर है कि यदि वे अफगानिस्तान लौटती हैं, तो उन्हें जेल या मौत का सामना करना पड़ सकता है।
मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान की आलोचना की
मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान के इस कदम की आलोचना की है, इसे अमानवीय और शरणार्थियों के अधिकारों का उल्लंघन बताया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान से अपील की है कि वह इन महिलाओं को तीसरे देशों में शरण लेने के लिए और समय दे। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने भी पाकिस्तान के इस निर्णय पर चिंता जताई है। खासकर उन हजारों अफगान शरणार्थियों के लिए जो अमेरिका या अन्य देशों में पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
अफगान महिलाओं के लिए इधन कुंआ उधर है खाई
इन महिलाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय है। वे न तो अपने देश लौट सकती हैं और न ही पाकिस्तान में सुरक्षित हैं। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपेक्षा है कि वे इन महिलाओं की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाएंगे, ताकि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सके। इन महिलाओं ने अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के आने के बाद उनके अत्याचारों और पाबंदियों से बचने के लिए देश छोड़कर पाकिस्तान में शरण लिया था। अब जब पाकिस्तान उन्हें अपने देश से निकाल रहा है तो इन्हें अपने जीवन पर आने वाले संकट का आभास हो रहा है। इन्हें इस विकट परिस्थिति से बचाने के लिए एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी अपील की है।
पाकिस्तान ने आतंकियों के साथ अपने नागरिक भी मारे, रिपोर्ट दबाई
ग्रेटर नोएडा – नोएडा की खबरों से अपडेट रहने के लिए चेतना मंच से जुड़े रहें।
देश–दुनिया की लेटेस्ट खबरों से अपडेट रहने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें।