कृषि उत्पादन बढ़ाने की कुंजी: जानें एनपीके उर्वरक का सही समय और तरीका
फसल बोने से 2-4 सप्ताह पहले मिट्टी को तैयार करते समय फास्फोरस युक्त उर्वरक की आवश्यकता होती है। चूंकि फास्फोरस मिट्टी में आसानी से गतिशील नहीं होता, इसलिए इसे रोपण से पहले मिट्टी में मिलाना जड़ों के शुरुआती विकास के लिए जरूरी है।

NPK Fertilizers : व्यावसायिक खेती से लेकर घरेलू बागवानी तक, फसल की सफलता का राज़ उर्वरकों के सही और समय पर प्रयोग में छिपा है। विशेषज्ञों के अनुसार, एनपीके उर्वरक (नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम) का प्रयोग करते समय केवल मात्रा ही नहीं, बल्कि सही समय का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में जारी एक विशेषज्ञ मार्गदर्शिका में बताया गया है कि कैसे पौधों के विकास चक्र के विभिन्न चरणों में एनपीके के विभिन्न अनुपातों का उपयोग उत्पादकता को दोगुना कर सकता है।
तीनों तत्वों की अहम भूमिका
रिसो फर्टिलाइजर्स के विशेषज्ञों के मुताबिक, एनपीके के तीनों प्राथमिक तत्व पौधों के लिए जीवनदायिनी हैं। नाइट्रोजन (N) पौधों की पत्तियों और तनों की वृद्धि के साथ-साथ प्रकाश संश्लेषण में मदद करता है। वहीं, फास्फोरस (P) जड़ों के विकास, पुष्पन और फलन में सहायक है, जबकि पोटेशियम (K) पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और फलों की गुणवत्ता सुधारता है। इनका सही अनुपात और समय ही सफल फसल का आधार है।
पौधरोपण से लेकर कटाई तक: 5 महत्वपूर्ण चरण
मार्गदर्शिका में एनपीके उर्वरक के प्रयोग के पांच प्रमुख चरणों को रेखांकित किया गया है:
1. रोपण से पूर्व (मिट्टी की तैयारी):
फसल बोने से 2-4 सप्ताह पहले मिट्टी को तैयार करते समय फास्फोरस युक्त उर्वरक की आवश्यकता होती है। चूंकि फास्फोरस मिट्टी में आसानी से गतिशील नहीं होता, इसलिए इसे रोपण से पहले मिट्टी में मिलाना जड़ों के शुरुआती विकास के लिए जरूरी है। इसके लिए 10-26-10 जैसे अनुपात को प्रभावी माना गया है।
2. प्रारंभिक वृद्धि (वसंत ऋतु):
जब पौधे तेजी से बढ़ने लगते हैं, तो उन्हें हरी पत्तियों और मजबूत तने के लिए नाइट्रोजन की अधिक आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि वसंत के मौसम में या रोपण के तुरंत बाद 20-10-10 जैसे नाइट्रोजन युक्त मिश्रण का उपयोग करना चाहिए।
3. पुष्पन और फल लगने की अवस्था:
यह फसल का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है। फूल आने और फल लगने पर पौधों को फास्फोरस और पोटेशियम की अधिक जरूरत होती है। इस दौरान नाइट्रोजन की मात्रा कम और पी-के (P-K) की मात्रा अधिक रखनी चाहिए। इसके लिए 5-10-10 या 10-20-20 के अनुपात को बेहतर माना गया है।
4. देर से शुरू होने वाला मौसम:
फसल के पूरा होने के करीब, यानी ग्रीष्म के अंत या पतझड़ में, नाइट्रोजन की मात्रा कम कर देनी चाहिए ताकि पौधों में केवल फल का विकास हो और वे सर्दी के लिए मजबूत बनें। इस स्थिति में 5-10-20 या **12-10-30 जैसे उर्वरक उपयुक्त हैं।
5. फसल कटाई के बाद:
मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए कटाई के तुरंत बाद मिट्टी में पोषक तत्वों को फिर से भरना जरूरी है। इसके लिए 10-10-10 या 20-20-20 जैसे संतुलित एनपीके उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों की सलाह: मिट्टी परीक्षण और मौसम का ध्यान
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि उर्वरक डालने से पहले मिट्टी परीक्षण अनिवार्य होना चाहिए। इससे पता चलता है कि जमीन में किस तत्व की कमी है और किस फसल के लिए किस अनुपात की जरूरत है। साथ ही, मौसम की स्थिति का भी ध्यान रखें; भारी बारिश में नाइट्रोजन बह जाता है, जबकि सूखे में सिंचाई के बाद ही उर्वरक देना लाभदायक होता है।
रिसो फर्टिलाइजर्स द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे दानेदार, तरल और धीमी गति से घुलने वाले विकल्प किसानों के लिए इन आवश्यकताओं को पूरा करने में मददगार साबित हो रहे हैं। यह मार्गदर्शिका किसानों के लिए एक बेहतर उपकरण साबित हो सकती है, जिससे वे अपनी फसल को सही पोषण देकर बेहतर मुनाफा कमा सकें। NPK Fertilizers
NPK Fertilizers : व्यावसायिक खेती से लेकर घरेलू बागवानी तक, फसल की सफलता का राज़ उर्वरकों के सही और समय पर प्रयोग में छिपा है। विशेषज्ञों के अनुसार, एनपीके उर्वरक (नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम) का प्रयोग करते समय केवल मात्रा ही नहीं, बल्कि सही समय का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में जारी एक विशेषज्ञ मार्गदर्शिका में बताया गया है कि कैसे पौधों के विकास चक्र के विभिन्न चरणों में एनपीके के विभिन्न अनुपातों का उपयोग उत्पादकता को दोगुना कर सकता है।
तीनों तत्वों की अहम भूमिका
रिसो फर्टिलाइजर्स के विशेषज्ञों के मुताबिक, एनपीके के तीनों प्राथमिक तत्व पौधों के लिए जीवनदायिनी हैं। नाइट्रोजन (N) पौधों की पत्तियों और तनों की वृद्धि के साथ-साथ प्रकाश संश्लेषण में मदद करता है। वहीं, फास्फोरस (P) जड़ों के विकास, पुष्पन और फलन में सहायक है, जबकि पोटेशियम (K) पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और फलों की गुणवत्ता सुधारता है। इनका सही अनुपात और समय ही सफल फसल का आधार है।
पौधरोपण से लेकर कटाई तक: 5 महत्वपूर्ण चरण
मार्गदर्शिका में एनपीके उर्वरक के प्रयोग के पांच प्रमुख चरणों को रेखांकित किया गया है:
1. रोपण से पूर्व (मिट्टी की तैयारी):
फसल बोने से 2-4 सप्ताह पहले मिट्टी को तैयार करते समय फास्फोरस युक्त उर्वरक की आवश्यकता होती है। चूंकि फास्फोरस मिट्टी में आसानी से गतिशील नहीं होता, इसलिए इसे रोपण से पहले मिट्टी में मिलाना जड़ों के शुरुआती विकास के लिए जरूरी है। इसके लिए 10-26-10 जैसे अनुपात को प्रभावी माना गया है।
2. प्रारंभिक वृद्धि (वसंत ऋतु):
जब पौधे तेजी से बढ़ने लगते हैं, तो उन्हें हरी पत्तियों और मजबूत तने के लिए नाइट्रोजन की अधिक आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि वसंत के मौसम में या रोपण के तुरंत बाद 20-10-10 जैसे नाइट्रोजन युक्त मिश्रण का उपयोग करना चाहिए।
3. पुष्पन और फल लगने की अवस्था:
यह फसल का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है। फूल आने और फल लगने पर पौधों को फास्फोरस और पोटेशियम की अधिक जरूरत होती है। इस दौरान नाइट्रोजन की मात्रा कम और पी-के (P-K) की मात्रा अधिक रखनी चाहिए। इसके लिए 5-10-10 या 10-20-20 के अनुपात को बेहतर माना गया है।
4. देर से शुरू होने वाला मौसम:
फसल के पूरा होने के करीब, यानी ग्रीष्म के अंत या पतझड़ में, नाइट्रोजन की मात्रा कम कर देनी चाहिए ताकि पौधों में केवल फल का विकास हो और वे सर्दी के लिए मजबूत बनें। इस स्थिति में 5-10-20 या **12-10-30 जैसे उर्वरक उपयुक्त हैं।
5. फसल कटाई के बाद:
मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए कटाई के तुरंत बाद मिट्टी में पोषक तत्वों को फिर से भरना जरूरी है। इसके लिए 10-10-10 या 20-20-20 जैसे संतुलित एनपीके उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों की सलाह: मिट्टी परीक्षण और मौसम का ध्यान
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि उर्वरक डालने से पहले मिट्टी परीक्षण अनिवार्य होना चाहिए। इससे पता चलता है कि जमीन में किस तत्व की कमी है और किस फसल के लिए किस अनुपात की जरूरत है। साथ ही, मौसम की स्थिति का भी ध्यान रखें; भारी बारिश में नाइट्रोजन बह जाता है, जबकि सूखे में सिंचाई के बाद ही उर्वरक देना लाभदायक होता है।
रिसो फर्टिलाइजर्स द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे दानेदार, तरल और धीमी गति से घुलने वाले विकल्प किसानों के लिए इन आवश्यकताओं को पूरा करने में मददगार साबित हो रहे हैं। यह मार्गदर्शिका किसानों के लिए एक बेहतर उपकरण साबित हो सकती है, जिससे वे अपनी फसल को सही पोषण देकर बेहतर मुनाफा कमा सकें। NPK Fertilizers












