चंद्रपुर में सत्ता के समीकरण बदले, भाजपा और शिवसेना (यूबीटी) में समझौते की कवायद
भाजपा विधायक किशोर जोरगेवार ने कहा कि उनकी पार्टी ने उद्धव सेना के सामने एक सकारात्मक प्रस्ताव रखा है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस पर अच्छा निर्णय लिया जाएगा।

Chandrapur Municipal Corporation : महाराष्ट्र के चंद्रपुर महानगरपालिका में सत्ता के समीकरण साधने के लिए राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। महापौर पद को लेकर जारी गतिरोध को तोड़ने के लिए भाजपा ने उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना यूबीटी) के सामने एक अनोखा प्रस्ताव रखा है। भाजपा ने सत्ता की साझेदारी के लिए 'सव्वा-सव्वा साल' यानी 15-15 महीने का फॉर्मूला पेश किया है। यह प्रस्ताव शिवसेना (यूबीटी) के जिला प्रमुख संदीप गिन्हे को भेजा गया है, हालांकि अभी तक सेना की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बहुमत का गणित और सियासी समीकरण
चंद्रपुर नगर निगम में सत्ता स्थापित करने के लिए 34 नगरसेवकों का समर्थन जरूरी है। वर्तमान गणित के मुताबिक, भाजपा के पास अपने 23 और शिंदे गुट के 1 नगरसेवक के साथ कुल 24 सदस्य हैं। इसके अलावा उद्धव सेना के 6, वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) के 2 और 2 निर्दलीय सदस्य हैं। अगर ये सभी दल (24+6+2+2) एक साथ आते हैं, तो यह आंकड़ा 34 पर पहुंच जाता है। भाजपा इसी रोडमैप के जरिए प्रशासन पर अपना कब्जा करने की कोशिश में है।
आरक्षण में छिपा सियासी राज
इस पूरी राजनीतिखींचतान का मूल कारण महापौर पद का आरक्षण है। इस बार यह पद ओबीसी महिला श्रेणी के लिए आरक्षित है। उद्धव सेना के जिला प्रमुख संदीप गिन्हे की पत्नी मनस्वी गिन्हे नगरसेवक हैं और महापौर की प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। यही वजह है कि भाजपा उन्हें साधने में जुटी है और सत्ता की साझेदारी का ऑफर देकर उन्हें अपने पाले में लाना चाहती है।
कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें
चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। उसके पास 27 नगरसेवक हैं और सहयोगियों के साथ यह आंकड़ा 30 तक पहुंचता है। लेकिन, बहुमत के जादुई आंकड़े (34) से महज 4 सीटें दूर होने के बावजूद पार्टी अंदरूनी कलह और गुटबाजी की वजह से सत्ता से बाहर दिख रही है। कांग्रेस का यह गैर-जिम्मेदाराना रुख भाजपा को मैदान में उतरने का मौका दे रहा है।
भाजपा का दावा
भाजपा विधायक किशोर जोरगेवार ने कहा कि उनकी पार्टी ने उद्धव सेना के सामने एक सकारात्मक प्रस्ताव रखा है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस पर अच्छा निर्णय लिया जाएगा। अब देखना यह है कि क्या उद्धव सेना इस '15-15 महीने' के फॉर्मूले को स्वीकार करती है या फिर कांग्रेस के साथ मिलकर कोई और रास्ता निकालती है। Chandrapur Municipal Corporation
Chandrapur Municipal Corporation : महाराष्ट्र के चंद्रपुर महानगरपालिका में सत्ता के समीकरण साधने के लिए राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। महापौर पद को लेकर जारी गतिरोध को तोड़ने के लिए भाजपा ने उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना यूबीटी) के सामने एक अनोखा प्रस्ताव रखा है। भाजपा ने सत्ता की साझेदारी के लिए 'सव्वा-सव्वा साल' यानी 15-15 महीने का फॉर्मूला पेश किया है। यह प्रस्ताव शिवसेना (यूबीटी) के जिला प्रमुख संदीप गिन्हे को भेजा गया है, हालांकि अभी तक सेना की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बहुमत का गणित और सियासी समीकरण
चंद्रपुर नगर निगम में सत्ता स्थापित करने के लिए 34 नगरसेवकों का समर्थन जरूरी है। वर्तमान गणित के मुताबिक, भाजपा के पास अपने 23 और शिंदे गुट के 1 नगरसेवक के साथ कुल 24 सदस्य हैं। इसके अलावा उद्धव सेना के 6, वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) के 2 और 2 निर्दलीय सदस्य हैं। अगर ये सभी दल (24+6+2+2) एक साथ आते हैं, तो यह आंकड़ा 34 पर पहुंच जाता है। भाजपा इसी रोडमैप के जरिए प्रशासन पर अपना कब्जा करने की कोशिश में है।
आरक्षण में छिपा सियासी राज
इस पूरी राजनीतिखींचतान का मूल कारण महापौर पद का आरक्षण है। इस बार यह पद ओबीसी महिला श्रेणी के लिए आरक्षित है। उद्धव सेना के जिला प्रमुख संदीप गिन्हे की पत्नी मनस्वी गिन्हे नगरसेवक हैं और महापौर की प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। यही वजह है कि भाजपा उन्हें साधने में जुटी है और सत्ता की साझेदारी का ऑफर देकर उन्हें अपने पाले में लाना चाहती है।
कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें
चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। उसके पास 27 नगरसेवक हैं और सहयोगियों के साथ यह आंकड़ा 30 तक पहुंचता है। लेकिन, बहुमत के जादुई आंकड़े (34) से महज 4 सीटें दूर होने के बावजूद पार्टी अंदरूनी कलह और गुटबाजी की वजह से सत्ता से बाहर दिख रही है। कांग्रेस का यह गैर-जिम्मेदाराना रुख भाजपा को मैदान में उतरने का मौका दे रहा है।
भाजपा का दावा
भाजपा विधायक किशोर जोरगेवार ने कहा कि उनकी पार्टी ने उद्धव सेना के सामने एक सकारात्मक प्रस्ताव रखा है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस पर अच्छा निर्णय लिया जाएगा। अब देखना यह है कि क्या उद्धव सेना इस '15-15 महीने' के फॉर्मूले को स्वीकार करती है या फिर कांग्रेस के साथ मिलकर कोई और रास्ता निकालती है। Chandrapur Municipal Corporation












