चंद्रपुर में सत्ता के समीकरण बदले, भाजपा और शिवसेना (यूबीटी) में समझौते की कवायद

भाजपा विधायक किशोर जोरगेवार ने कहा कि उनकी पार्टी ने उद्धव सेना के सामने एक सकारात्मक प्रस्ताव रखा है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस पर अच्छा निर्णय लिया जाएगा।

Chandrapur Municipal Corporation
महाराष्ट्र राजनीति में नया मोड़ (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar05 Feb 2026 08:27 PM
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Chandrapur Municipal Corporation : महाराष्ट्र के चंद्रपुर महानगरपालिका में सत्ता के समीकरण साधने के लिए राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। महापौर पद को लेकर जारी गतिरोध को तोड़ने के लिए भाजपा ने उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना यूबीटी) के सामने एक अनोखा प्रस्ताव रखा है। भाजपा ने सत्ता की साझेदारी के लिए 'सव्वा-सव्वा साल' यानी 15-15 महीने का फॉर्मूला पेश किया है। यह प्रस्ताव शिवसेना (यूबीटी) के जिला प्रमुख संदीप गिन्हे को भेजा गया है, हालांकि अभी तक सेना की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बहुमत का गणित और सियासी समीकरण

चंद्रपुर नगर निगम में सत्ता स्थापित करने के लिए 34 नगरसेवकों का समर्थन जरूरी है। वर्तमान गणित के मुताबिक, भाजपा के पास अपने 23 और शिंदे गुट के 1 नगरसेवक के साथ कुल 24 सदस्य हैं। इसके अलावा उद्धव सेना के 6, वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) के 2 और 2 निर्दलीय सदस्य हैं। अगर ये सभी दल (24+6+2+2) एक साथ आते हैं, तो यह आंकड़ा 34 पर पहुंच जाता है। भाजपा इसी रोडमैप के जरिए प्रशासन पर अपना कब्जा करने की कोशिश में है।

आरक्षण में छिपा सियासी राज

इस पूरी राजनीतिखींचतान का मूल कारण महापौर पद का आरक्षण है। इस बार यह पद ओबीसी महिला श्रेणी के लिए आरक्षित है। उद्धव सेना के जिला प्रमुख संदीप गिन्हे की पत्नी मनस्वी गिन्हे नगरसेवक हैं और महापौर की प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। यही वजह है कि भाजपा उन्हें साधने में जुटी है और सत्ता की साझेदारी का ऑफर देकर उन्हें अपने पाले में लाना चाहती है।

कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें

चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। उसके पास 27 नगरसेवक हैं और सहयोगियों के साथ यह आंकड़ा 30 तक पहुंचता है। लेकिन, बहुमत के जादुई आंकड़े (34) से महज 4 सीटें दूर होने के बावजूद पार्टी अंदरूनी कलह और गुटबाजी की वजह से सत्ता से बाहर दिख रही है। कांग्रेस का यह गैर-जिम्मेदाराना रुख भाजपा को मैदान में उतरने का मौका दे रहा है।

भाजपा का दावा

भाजपा विधायक किशोर जोरगेवार ने कहा कि उनकी पार्टी ने उद्धव सेना के सामने एक सकारात्मक प्रस्ताव रखा है। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस पर अच्छा निर्णय लिया जाएगा। अब देखना यह है कि क्या उद्धव सेना इस '15-15 महीने' के फॉर्मूले को स्वीकार करती है या फिर कांग्रेस के साथ मिलकर कोई और रास्ता निकालती है। Chandrapur Municipal Corporation

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सुप्रीम कोर्ट का पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ा संदेश, कर्मचारियों को 25% बकाया डीए देने का निर्देश

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह अपने सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (डीए) के बकाया हिस्से का कम से कम 25 प्रतिशत भुगतान अनिवार्य रूप से करे। कोर्ट ने साफ कहा कि कर्मचारियों का डीए कोई कृपा नहीं, बल्कि उनका वैधानिक अधिकार है।

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ममता बनर्जी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar05 Feb 2026 07:32 PM
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DA Issue : पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह अपने सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (डीए) के बकाया हिस्से का कम से कम 25 प्रतिशत भुगतान अनिवार्य रूप से करे। कोर्ट ने साफ कहा कि कर्मचारियों का डीए कोई कृपा नहीं, बल्कि उनका वैधानिक अधिकार है। यह मामला लंबे समय से राज्य सरकार और कर्मचारियों के बीच विवाद का विषय बना हुआ था। कर्मचारियों की मांग थी कि उन्हें केंद्र सरकार के समान दर पर डीए दिया जाए, जबकि राज्य सरकार लगातार वित्तीय दबाव का हवाला देकर भुगतान टालती रही।

बकाया राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा तय समय सीमा के भीतर जारी किया जाए

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि आर्थिक कठिनाइयाँ कर्मचारियों के हक को नकारने का आधार नहीं बन सकतीं। अदालत ने निर्देश दिया कि बकाया राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा तय समय सीमा के भीतर जारी किया जाए। कोर्ट के इस फैसले से लगभग 20 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। हालांकि, अभी पूरी बकाया राशि नहीं मिलेगी, बल्कि शेष भुगतान के लिए आगे एक व्यवस्थित योजना तैयार की जाएगी।

पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों के लिए भी एक अहम संदेश

फैसले के बाद राज्य की राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की नीतियों पर सवाल उठने वाला फैसला बताया, वहीं कर्मचारी संगठनों ने इसे लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली बड़ी जीत करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न सिर्फ पश्चिम बंगाल, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक अहम संदेश माना जा रहा है कि कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ी जिम्मेदारियों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

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इंदौर की 'बेवफा सोनम' के बाद गंगानगर की 'अंजू', शादी के 3 महीने बाद पति की बेरहमी से हत्या

श्रीगंगानगर एसपी अमृतु दुहान ने बताया कि शुरुआती जांच में ही पुलिस को घटना पर संदेह हो गया था। घटनास्थल का निरीक्षण और एफएसएल टीम की जांच से सामने आया कि यह कोई साधारण सड़क दुर्घटना नहीं है। पुलिस को दो बड़े सुराग मिले।

Honeymoon Murder
पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर रची साजिश (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar05 Feb 2026 03:33 PM
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Crime News : राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दुल्हन ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर शादी के महज तीन महीने बाद ही पति की बेरहमी से हत्या कर दी और इसे एक सड़क हादसे (हिट एंड रन) का रूप देने की कोशिश की। पुलिस ने इस मामले को इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड जैसा 'हनीमून मर्डर' बताया है। मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी पत्नी समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना का विवरण

बता दें कि पुलिस के अनुसार, घटना 30 जनवरी की रात करीब 9 बजे की है। रावला थाना क्षेत्र के अनूपगढ़ मार्ग पर आशीष और उसकी पत्नी अंजू बेहोशी की हालत में सड़क किनारे मिले थे। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने आशीष को मृत घोषित कर दिया, जबकि पत्नी अंजू खतरे से बाहर थी। प्रारंभिक सूचना में अंजू ने पुलिस को बताया था कि एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मारी और मौके पर मौजूद लुटेरों ने उसकी सोने की ज्वेलरी लूट ली।

पुलिस को हुआ शक, खुला हत्या का राज

बता दें कि श्रीगंगानगर एसपी अमृतु दुहान ने बताया कि शुरुआती जांच में ही पुलिस को घटना पर संदेह हो गया था। घटनास्थल का निरीक्षण और एफएसएल टीम की जांच से सामने आया कि यह कोई साधारण सड़क दुर्घटना नहीं है। पुलिस को दो बड़े सुराग मिले। पहला, मृतक आशीष के शरीर पर सड़क हादसे के बजाय बेरहमी से पिटाई के निशान थे और सबसे अहम बात उसका गला घोंटा गया था। दूसरा, जहां पति की जान चली गई, वहीं साथ मौजूद पत्नी अंजू को एक खरोंच तक नहीं आई थी।

प्रेमी से चैटिंग ने खोला राज

बता दें कि जब पुलिस ने अंजू के मोबाइल रिकॉर्ड खंगाले, तो सच्चाई सामने आ गई। अंजू सादुलशहर निवासी अपने पुराने प्रेमी संजू के लगातार संपर्क में थी। पूछताछ में अंजू लगातार बयान बदलती रही, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों के सामने उसकी एक न चली और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

ऐसे दिया गया वारदात को अंजाम

बता दें कि पुलिस जांच में सामने आया है कि 23 वर्षीय अंजू अपनी शादी से खुश नहीं थी। उसने अपने प्रेमी संजू के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची। अंजू कुछ समय पहले अपने मायके सादुलशहर गई थी, जहां उसने संजू और उसके दो साथियों (रॉकी और बादल) के साथ हत्या की प्लानिंग की। अंजू जानती थी कि आशीष डिनर के बाद टहलने जाता है। वारदात की रात वह जानबूझकर उसे एक सुनसान सड़क पर ले गई। पूर्व नियोजित योजना के तहत, झाड़ियों में छिपे संजू और उसके साथियों ने आशीष पर हमला कर दिया। पहले उसे लाठी-डंडों से पीटा गया, फिर गला घोंटकर उसे मार डाला। लूट की झूठी कहानी गढ़ने के लिए अंजू ने अपनी बालियां और फोन भी खुद आरोपियों को सौंप दिए थे।

चारों आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी पत्नी अंजू, उसके प्रेमी संजू, और सहयोगी रॉकी उर्फ रोहित व बादल उर्फ सिद्धार्थ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है ताकि पूरे मामले का खुलासा किया जा सके। Crime News

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