भारत रत्न: देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की पूरी कहानी
समय के साथ भारत रत्न से जुड़े नियमों, परंपराओं और मानदंडों में कई बड़े बदलाव हुए हैं। वर्ष 2024 में एक साथ 5 हस्तियों को यह सम्मान देकर सरकार ने 70 साल पुरानी परंपरा तोड़ दी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और सामान्य पाठकों के लिए भारत रत्न से जुड़े ये तथ्य बेहद महत्वपूर्ण हैं।

भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह केवल एक पदक नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति असाधारण सेवा, त्याग और योगदान का प्रतीक माना जाता है। इसकी शुरुआत 2 जनवरी 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने की थी। यह सम्मान कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और वर्ष 2011 से “मानवीय प्रयास के किसी भी क्षेत्र” में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को दिया जाता है।
भारत रत्न से जुड़े 10 रोचक और अनसुने तथ्य
1️⃣ पदक की खास बनावट और पीपल का पत्ता
बता दें कि भारत रत्न का पदक पीपल के पत्ते के आकार का होता है। यह तांबे से बना होता है, जिसकी लंबाई 59 मिमी और चौड़ाई 48 मिमी होती है। इसके बीच में प्लेटिनम का सूर्य और नीचे चांदी से लिखा होता है – भारत रत्न। इसे सफेद फीते के साथ गले में पहना जाता है।
2️⃣ नकद इनाम नहीं, लेकिन मिलते हैं विशेष अधिकार
बता दें कि भारत रत्न के साथ कोई नकद राशि नहीं दी जाती। हालांकि, प्राप्तकर्ता को राजकीय अतिथि का दर्जा मिलता है। उन्हें एयर इंडिया और भारतीय रेलवे की प्रथम श्रेणी में आजीवन मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है और वे Table of Precedence में 7वें स्थान पर होते हैं।
3️⃣ जब सरकार को वापस लेना पड़ा फैसला
बता दें कि साल 1992 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मरणोपरांत भारत रत्न देने की घोषणा हुई थी। लेकिन उनकी मृत्यु को लेकर कानूनी विवाद और परिवार की आपत्ति के चलते सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा। यह भारत रत्न के इतिहास की इकलौती ऐसी घटना है।
4️⃣ जब भारत रत्न पर लग गया था प्रतिबंध
बता दें कि 1977 में मोरारजी देसाई सरकार ने भारत रत्न सहित सभी नागरिक सम्मानों पर रोक लगा दी थी। उनका मानना था कि ऐसे पुरस्कार “व्यक्ति पूजा” को बढ़ावा देते हैं। 1980 में इंदिरा गांधी सरकार ने इस फैसले को पलटते हुए सम्मान फिर से शुरू किया।
5️⃣ विदेशी भी बन चुके हैं भारत रत्न
भारत रत्न केवल भारतीय नागरिकों तक सीमित नहीं है। अब तक दो विदेशियों को यह सम्मान मिल चुका है खान अब्दुल गफ्फार खान (1987), नेल्सन मंडेला (1990) वहीं मदर टेरेसा को 1980 में यह सम्मान मिला, जो बाद में भारतीय नागरिक बनीं।
6️⃣ मरणोपरांत सम्मान कब शुरू हुआ?
बता दें कि शुरुआत में भारत रत्न मरणोपरांत नहीं दिया जाता था। यह नियम 1955 में बदला गया। 1966 में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री मरणोपरांत भारत रत्न पाने वाले पहले व्यक्ति बने।
7️⃣ सबसे युवा और सबसे बुजुर्ग भारत रत्न
सचिन तेंदुलकर (40 वर्ष) सबसे कम उम्र में भारत रत्न पाने वाले व्यक्ति हैं। धोंडो केशव कर्वे को उनके 100वें जन्मदिन पर यह सम्मान दिया गया, जो एक अनोखा रिकॉर्ड है।
8️⃣ 2024 में टूटी 70 साल पुरानी परंपरा
आमतौर पर एक साल में अधिकतम 3 भारत रत्न दिए जाते हैं। लेकिन 2024 में एक साथ 5 हस्तियों को यह सम्मान दिया गया:
- कर्पूरी ठाकुर
- लालकृष्ण आडवाणी
- चौधरी चरण सिंह
- पी.वी. नरसिम्हा राव
- एम.एस. स्वामीनाथन
9️⃣ खुद को सम्मान देने पर विवाद
बता दें कि भारत के इतिहास में जवाहरलाल नेहरू (1955) और इंदिरा गांधी (1971)को उनके प्रधानमंत्री रहते हुए ही भारत रत्न मिला।
इस पर आज भी बहस होती है कि क्या कोई प्रधानमंत्री खुद के नाम की सिफारिश कर सकता है।
🔟 नाम के आगे ‘भारत रत्न’ नहीं लिख सकते
संविधान के अनुच्छेद 18(1) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति अपने नाम के आगे या पीछे भारत रत्न को उपाधि के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता। वे केवल यह लिख सकते हैं “राष्ट्रपति द्वारा भारत रत्न से सम्मानित”
भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह केवल एक पदक नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति असाधारण सेवा, त्याग और योगदान का प्रतीक माना जाता है। इसकी शुरुआत 2 जनवरी 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने की थी। यह सम्मान कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और वर्ष 2011 से “मानवीय प्रयास के किसी भी क्षेत्र” में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को दिया जाता है।
भारत रत्न से जुड़े 10 रोचक और अनसुने तथ्य
1️⃣ पदक की खास बनावट और पीपल का पत्ता
बता दें कि भारत रत्न का पदक पीपल के पत्ते के आकार का होता है। यह तांबे से बना होता है, जिसकी लंबाई 59 मिमी और चौड़ाई 48 मिमी होती है। इसके बीच में प्लेटिनम का सूर्य और नीचे चांदी से लिखा होता है – भारत रत्न। इसे सफेद फीते के साथ गले में पहना जाता है।
2️⃣ नकद इनाम नहीं, लेकिन मिलते हैं विशेष अधिकार
बता दें कि भारत रत्न के साथ कोई नकद राशि नहीं दी जाती। हालांकि, प्राप्तकर्ता को राजकीय अतिथि का दर्जा मिलता है। उन्हें एयर इंडिया और भारतीय रेलवे की प्रथम श्रेणी में आजीवन मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है और वे Table of Precedence में 7वें स्थान पर होते हैं।
3️⃣ जब सरकार को वापस लेना पड़ा फैसला
बता दें कि साल 1992 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को मरणोपरांत भारत रत्न देने की घोषणा हुई थी। लेकिन उनकी मृत्यु को लेकर कानूनी विवाद और परिवार की आपत्ति के चलते सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा। यह भारत रत्न के इतिहास की इकलौती ऐसी घटना है।
4️⃣ जब भारत रत्न पर लग गया था प्रतिबंध
बता दें कि 1977 में मोरारजी देसाई सरकार ने भारत रत्न सहित सभी नागरिक सम्मानों पर रोक लगा दी थी। उनका मानना था कि ऐसे पुरस्कार “व्यक्ति पूजा” को बढ़ावा देते हैं। 1980 में इंदिरा गांधी सरकार ने इस फैसले को पलटते हुए सम्मान फिर से शुरू किया।
5️⃣ विदेशी भी बन चुके हैं भारत रत्न
भारत रत्न केवल भारतीय नागरिकों तक सीमित नहीं है। अब तक दो विदेशियों को यह सम्मान मिल चुका है खान अब्दुल गफ्फार खान (1987), नेल्सन मंडेला (1990) वहीं मदर टेरेसा को 1980 में यह सम्मान मिला, जो बाद में भारतीय नागरिक बनीं।
6️⃣ मरणोपरांत सम्मान कब शुरू हुआ?
बता दें कि शुरुआत में भारत रत्न मरणोपरांत नहीं दिया जाता था। यह नियम 1955 में बदला गया। 1966 में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री मरणोपरांत भारत रत्न पाने वाले पहले व्यक्ति बने।
7️⃣ सबसे युवा और सबसे बुजुर्ग भारत रत्न
सचिन तेंदुलकर (40 वर्ष) सबसे कम उम्र में भारत रत्न पाने वाले व्यक्ति हैं। धोंडो केशव कर्वे को उनके 100वें जन्मदिन पर यह सम्मान दिया गया, जो एक अनोखा रिकॉर्ड है।
8️⃣ 2024 में टूटी 70 साल पुरानी परंपरा
आमतौर पर एक साल में अधिकतम 3 भारत रत्न दिए जाते हैं। लेकिन 2024 में एक साथ 5 हस्तियों को यह सम्मान दिया गया:
- कर्पूरी ठाकुर
- लालकृष्ण आडवाणी
- चौधरी चरण सिंह
- पी.वी. नरसिम्हा राव
- एम.एस. स्वामीनाथन
9️⃣ खुद को सम्मान देने पर विवाद
बता दें कि भारत के इतिहास में जवाहरलाल नेहरू (1955) और इंदिरा गांधी (1971)को उनके प्रधानमंत्री रहते हुए ही भारत रत्न मिला।
इस पर आज भी बहस होती है कि क्या कोई प्रधानमंत्री खुद के नाम की सिफारिश कर सकता है।
🔟 नाम के आगे ‘भारत रत्न’ नहीं लिख सकते
संविधान के अनुच्छेद 18(1) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति अपने नाम के आगे या पीछे भारत रत्न को उपाधि के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता। वे केवल यह लिख सकते हैं “राष्ट्रपति द्वारा भारत रत्न से सम्मानित”












