महिला आरक्षण को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी, लॉटरी से होगा सीटों का चयन

देश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा महिला आरक्षण अब तय समय से पहले लागू हो सकता है। केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से ही इस व्यवस्था को अमल में लाने की तैयारी में जुटी है। इसके लिए 2023 में पारित कानून में संशोधन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

महिला आरक्षण पर नई तैयारी
महिला आरक्षण पर नई तैयारी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Mar 2026 02:02 PM
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Women's Reservation : देश की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा महिला आरक्षण अब तय समय से पहले लागू हो सकता है। केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से ही इस व्यवस्था को अमल में लाने की तैयारी में जुटी है। इसके लिए 2023 में पारित कानून में संशोधन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। पहले यह माना जा रहा था कि महिला आरक्षण 2034 के आम चुनाव के बाद लागू होगा, लेकिन अब सरकार इसे अगले लोकसभा चुनाव से ही लागू करने के पक्ष में दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले सरकार विपक्षी दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। संभावना है कि संशोधन से जुड़ा विधेयक पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने लाया जाएगा और वहां से मंजूरी मिलने के बाद संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा। सरकार की मंशा है कि 2011 की जनगणना को आधार बनाकर 2029 के चुनाव में ही महिला आरक्षण लागू कर दिया जाए। यदि ऐसा होता है, तो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों का पूरा गणित बदल सकता है।

15 साल बाद होगा रोटेशन

मिली जानकारी के अनुसार, लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में कुल सीटों की संख्या में करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है। इसके बाद नई कुल सीटों में 33 फीसदी हिस्सेदारी महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि किन सीटों को महिला आरक्षण के दायरे में रखा जाएगा। सरकारी हलकों में चर्चा है कि इसके लिए लॉटरी प्रणाली अपनाई जा सकती है। यानी जिन सीटों का चयन आरक्षण के लिए होगा, उनका निर्धारण ड्रॉ के जरिए किया जाएगा। एक बार किसी सीट पर महिला आरक्षण लागू हो गया तो वह 15 वर्षों तक उसी स्वरूप में बनी रह सकती है। इसके बाद रोटेशन की प्रक्रिया लागू की जाएगी।

एससी-एसटी सीटों पर भी लागू होगा आरक्षण का प्रावधान

महिला आरक्षण को लेकर एक बड़ा प्रश्न अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों को लेकर भी उठ रहा है। इस पर जो संकेत मिल रहे हैं, उनके अनुसार यह व्यवस्था वर्टिकल आरक्षण के रूप में लागू होगी। इसका मतलब यह है कि एससी और एसटी के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। वर्तमान में लोकसभा में अनुसूचित जाति के लिए 84 सीटें आरक्षित हैं। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत इनकी संख्या बढ़कर 136 तक पहुंच सकती है। इसी तरह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 47 से बढ़कर करीब 70 होने की संभावना जताई जा रही है। इन बढ़ी हुई सीटों के भीतर भी महिलाओं के लिए एक-तिहाई हिस्सा तय किया जाएगा। इस तरह वर्गवार महिला प्रतिनिधित्व की भी एक संरचना बन जाएगी।

दक्षिण के दलों का समर्थन क्यों अहम माना जा रहा है

महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों को संसद से पारित कराने के लिए सरकार ने राजनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। इसी सिलसिले में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई गैर-कांग्रेसी विपक्षी नेताओं से बातचीत की। इस बैठक में समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव, एनसीपी-एसपी की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के संजय राउत और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता शामिल बताए गए। सरकारी सूत्रों के अनुसार, तेलुगु देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस जैसे दक्षिण भारत के प्रमुख दलों ने भी इस प्रस्ताव को समर्थन देने के संकेत दिए हैं। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि सरकार ने सीटों के पुनर्निर्धारण और आरक्षण के अनुपात के लिए 2011 की जनगणना को आधार मानने का निर्णय लिया है। दक्षिणी राज्यों की लंबे समय से यह चिंता रही है कि नई जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा होने पर उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में 2011 के आंकड़ों को आधार बनाए रखने का फैसला उनके लिए राहत की तरह देखा जा रहा है।

बदल सकती है प्रतिनिधित्व की तस्वीर

अगर यह प्रस्ताव 2029 से लागू होता है, तो भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी एक नए चरण में प्रवेश कर सकती है। लोकसभा और विधानसभाओं में उनकी संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, साथ ही सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का स्वरूप भी बदलेगा। हालांकि अंतिम तस्वीर तभी साफ होगी जब सरकार संशोधन विधेयक संसद में लाकर उसका विधायी रास्ता पूरा करेगी। Women's Reservation

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यात्रीगण कृपया ध्यान दें, अब 8 घंटे के भीतर टिकट कैंसिल करवाने पर सारे पैसे जब्त

रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक अहम बदलाव सामने आया है। ट्रेन टिकट कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े नियमों में संशोधन किया गया है, जिससे अब टिकट रद करने का समय सीधे आपके पैसे पर असर डालेगा।

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भारतीय रेलवे से सफर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar24 Mar 2026 02:11 PM
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Train Ticket Cancellation : भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक अहम बदलाव सामने आया है। ट्रेन टिकट कैंसिलेशन और रिफंड से जुड़े नियमों में संशोधन किया गया है, जिससे अब टिकट रद करने का समय सीधे आपके पैसे पर असर डालेगा। नए नियमों के अनुसार, अगर आपने तय समय से पहले टिकट कैंसिल नहीं किया, तो आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

8 घंटे के भीतर कैंसिलेशन पर पूरा पैसा डूबेगा

नए नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अगर कोई यात्री ट्रेन छूटने से 8 घंटे के भीतर टिकट कैंसिल करता है, तो उसे कोई भी रिफंड नहीं मिलेगा। यानी आखिरी समय में टिकट रद करने वालों के लिए यह नियम काफी सख्त साबित होगा।

8 से 24 घंटे के बीच कैंसिल करने पर आधा पैसा कटेगा

अगर आप अपनी यात्रा से 8 से 24 घंटे पहले टिकट कैंसिल करते हैं, तो रेलवे आपके किराए का 50% हिस्सा काट लेगा। इस स्थिति में आधा पैसा ही वापस मिलेगा, जिससे यात्रियों को पहले से योजना बनाकर चलने की सलाह दी जा रही है।

24 से 72 घंटे पहले कैंसिलेशन पर 25% कटौती

वहीं, अगर टिकट को 24 से 72 घंटे पहले कैंसिल किया जाता है, तो कुल किराए का 25% हिस्सा काटा जाएगा। यह उन यात्रियों के लिए थोड़ी राहत भरी स्थिति है, जो समय रहते अपनी योजना में बदलाव कर लेते हैं।

72 घंटे से पहले कैंसिल करने पर पुराने नियम लागू

रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि टिकट 72 घंटे से पहले कैंसिल किया जाता है, तो रिफंड पुराने नियमों के अनुसार ही दिया जाएगा। यानी इस समय सीमा के भीतर कैंसिल करने पर यात्रियों को ज्यादा नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

आफलाइन टिकट कैंसिलेशन हुआ आसान

यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने एक और बड़ा बदलाव किया है। अब आॅफलाइन खरीदे गए टिकट को किसी भी स्टेशन से कैंसिल कराया जा सकता है। पहले यह सुविधा केवल उस स्टेशन तक सीमित थी, जहां से ट्रेन शुरू होती थी या खत्म होती थी। इस बदलाव से खासतौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के यात्रियों को राहत मिलेगी।

यात्रा डिटेल अपडेट करने की नई सुविधा

रेलवे ने यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा देते हुए यह भी अनुमति दी है कि वे अपनी यात्रा से जुड़ी जानकारी को ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक अपडेट कर सकते हैं। इससे अचानक बदलाव की स्थिति में यात्रियों को सहूलियत मिलेगी। रेलवे के अनुसार, ये सभी नए नियम 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। इसके बाद पूरे देश में यही नियम प्रभावी रहेंगे।

क्या रखें ध्यान?

* टिकट कैंसिलेशन का फैसला आखिरी समय तक न टालें

* यात्रा की योजना पहले से तय रखें

* रिफंड नियमों को समझकर ही टिकट बुक करें

रेलवे के इस फैसले का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ेगा। ऐसे में सफर की योजना बनाते समय इन नए नियमों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है, वरना छोटी सी चूक बड़ा नुकसान करा सकती है।


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लोकसभा में बड़े फेरबदल के संकेत, पुनर्गठन को लेकर तेज हुई चर्चा

केंद्र सरकार लोकसभा की संरचना में बड़ा बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, सरकार लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने पर विचार कर रही है।

लोकसभा
लोकसभा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Mar 2026 01:46 PM
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Lok Sabha : केंद्र सरकार लोकसभा की संरचना में बड़ा बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, सरकार लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की तैयारी भी की जा रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो लोकसभा में करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।

2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन की तैयारी

बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रस्ताव का आधार 2011 की जनगणना के आंकड़े होंगे। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है। सरकार इस बदलाव को कानूनी रूप देने के लिए संसद के मौजूदा सत्र में संशोधन विधेयक ला सकती है। राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इस विषय पर विपक्षी सांसदों के साथ चर्चा कर चुके हैं। वहीं मंगलवार को एनडीए नेताओं की बैठक में इस प्रस्ताव को लेकर आगे की रणनीति और रोडमैप पर मंथन होने की संभावना जताई जा रही है। अगर प्रस्तावित ढांचा लागू होता है, तो कई बड़े राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में सीटों का आंकड़ा काफी ऊपर जा सकता है।

संभावित सीट वृद्धि इस प्रकार हो सकती है

राज्य वर्तमान सीटें प्रस्तावित सीटें
उत्तर प्रदेश 80 120
बिहार 40 60
पश्चिम बंगाल 42 63
तमिलनाडु 39 59
महाराष्ट्र 48 72
कर्नाटक 28 42
केरल 20 30
आंध्र प्रदेश 25 38
गुजरात 26 39
राजस्थान 25 38
दिल्ली 7 11
ओडिशा 21 32
झारखंड 14 21



इस प्रस्ताव को लेकर पहले दक्षिण भारत के कई राज्यों की ओर से आशंकाएं जताई जाती रही हैं। उनका मानना था कि परिसीमन के बाद उत्तर भारत के अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को ज्यादा लाभ मिल सकता है। हालांकि अब जो संकेत मिल रहे हैं, उनके अनुसार सीटों में बढ़ोतरी का फार्मूला आनुपातिक आधार पर तय किया जा सकता है, ताकि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जा सके। कुल मिलाकर, अगर सरकार यह विधेयक लाती है और उसे संसद की मंजूरी मिलती है, तो भारतीय राजनीति में प्रतिनिधित्व का स्वरूप बदल सकता है।  Lok Sabha

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