जाने सरसों की खेती का परिचय और महत्व
खरीफ फसल की कटाई के बाद एक गहरी जुताई कर 3-4 बार हल चलाकर मिट्टी भुरभुरी बना लें। अंतिम जुताई के समय दीमक नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाएं। बुवाई कतारों में करें।

Mustard Cultivation : रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों ने सरसों की बुवाई की तैयारियां तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान शुरुआत से ही वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो सरसों से 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। देश के राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सरसों प्रमुख तिलहनी फसल है, जिसके बीजों में 30 से 48 प्रतिशत तक तेल पाया जाता है।
सही समय और उपयुक्त मिट्टी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों की खेती शरद ऋतु में की जाती है। इसके लिए 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त रहता है। बलुई दोमट मिट्टी सर्वाधिक उपजाऊ मानी जाती है। फसल हल्की क्षारीय भूमि में अच्छी होती है, लेकिन अम्लीय मिट्टी उपयुक्त नहीं है। बारानी क्षेत्रों में 5 से 25 अक्टूबर तक बुवाई कर लेनी चाहिए।
उन्नत किस्मों का चयन
विशेषज्ञों का कहना है कि किसान यदि पिछले वर्ष की अच्छी फसल से बचाए गए रोगमुक्त और मोटे दानों का बीज उपचार कर बोएं तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। जिन किसानों के पास अपना बीज नहीं है, वे आरएच-30, टी-59 (वरुणा), पूसा बोल्ड, अरावली (आरएन-393), एनआरसी एचबी 101, एनआरसी डीआर-2 और आरएच-749 जैसी उन्नत किस्मों का चयन कर सकते हैं। इन किस्मों से 20 से 26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दर्ज किया गया है।
खेत की तैयारी और बुवाई का तरीका
खरीफ फसल की कटाई के बाद एक गहरी जुताई कर 3-4 बार हल चलाकर मिट्टी भुरभुरी बना लें। अंतिम जुताई के समय दीमक नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाएं। बुवाई कतारों में करें। कतार से कतार की दूरी 45 सेमी और पौध से पौध की दूरी 20 सेमी रखें। सिंचित क्षेत्र में बीज की गहराई 5 सेमी तक रखें। शुष्क क्षेत्रों में 4-5 किलो तथा सिंचित क्षेत्रों में 3-4 किलो बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है।
बीजोपचार जरूरी
जड़ सड़न से बचाव के लिए फफूंदनाशक से 3-5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचार करें। कीट नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 10 मिली प्रति किलो बीज से उपचारित करें। इसके बाद एजोटोबैक्टर और फॉस्फोरस घोलक जीवाणु खाद से उपचार लाभकारी रहता है।
खाद एवं सिंचाई प्रबंधन
सिंचित फसल के लिए 7-12 टन सड़ी गोबर खाद, 175 किलो यूरिया, 250 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट, 50 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश और 200 किलो जिप्सम प्रति हेक्टेयर बुवाई से पहले मिलाएं। यूरिया की आधी मात्रा बुवाई के समय और शेष पहली सिंचाई के बाद दें। असिंचित क्षेत्रों में उर्वरकों की मात्रा कम रखी जाती है।पहली सिंचाई बुवाई के 35-40 दिन बाद तथा दूसरी दाना बनने की अवस्था में करनी चाहिए।
खरपतवार नियंत्रण
अच्छे उत्पादन के लिए समय पर निराई-गुड़ाई आवश्यक है। बुवाई के तुरंत बाद पेंडीमेथालीन 30 ईसी की 3.3 लीटर मात्रा 800-1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करने से खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फसल रोग, कीट और खरपतवार से मुक्त रखी जाए और वैज्ञानिक तरीकों का पालन किया जाए तो किसान सरसों से बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। Mustard Cultivation
Mustard Cultivation : रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों ने सरसों की बुवाई की तैयारियां तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान शुरुआत से ही वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो सरसों से 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। देश के राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सरसों प्रमुख तिलहनी फसल है, जिसके बीजों में 30 से 48 प्रतिशत तक तेल पाया जाता है।
सही समय और उपयुक्त मिट्टी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों की खेती शरद ऋतु में की जाती है। इसके लिए 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त रहता है। बलुई दोमट मिट्टी सर्वाधिक उपजाऊ मानी जाती है। फसल हल्की क्षारीय भूमि में अच्छी होती है, लेकिन अम्लीय मिट्टी उपयुक्त नहीं है। बारानी क्षेत्रों में 5 से 25 अक्टूबर तक बुवाई कर लेनी चाहिए।
उन्नत किस्मों का चयन
विशेषज्ञों का कहना है कि किसान यदि पिछले वर्ष की अच्छी फसल से बचाए गए रोगमुक्त और मोटे दानों का बीज उपचार कर बोएं तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। जिन किसानों के पास अपना बीज नहीं है, वे आरएच-30, टी-59 (वरुणा), पूसा बोल्ड, अरावली (आरएन-393), एनआरसी एचबी 101, एनआरसी डीआर-2 और आरएच-749 जैसी उन्नत किस्मों का चयन कर सकते हैं। इन किस्मों से 20 से 26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दर्ज किया गया है।
खेत की तैयारी और बुवाई का तरीका
खरीफ फसल की कटाई के बाद एक गहरी जुताई कर 3-4 बार हल चलाकर मिट्टी भुरभुरी बना लें। अंतिम जुताई के समय दीमक नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाएं। बुवाई कतारों में करें। कतार से कतार की दूरी 45 सेमी और पौध से पौध की दूरी 20 सेमी रखें। सिंचित क्षेत्र में बीज की गहराई 5 सेमी तक रखें। शुष्क क्षेत्रों में 4-5 किलो तथा सिंचित क्षेत्रों में 3-4 किलो बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है।
बीजोपचार जरूरी
जड़ सड़न से बचाव के लिए फफूंदनाशक से 3-5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचार करें। कीट नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 10 मिली प्रति किलो बीज से उपचारित करें। इसके बाद एजोटोबैक्टर और फॉस्फोरस घोलक जीवाणु खाद से उपचार लाभकारी रहता है।
खाद एवं सिंचाई प्रबंधन
सिंचित फसल के लिए 7-12 टन सड़ी गोबर खाद, 175 किलो यूरिया, 250 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट, 50 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश और 200 किलो जिप्सम प्रति हेक्टेयर बुवाई से पहले मिलाएं। यूरिया की आधी मात्रा बुवाई के समय और शेष पहली सिंचाई के बाद दें। असिंचित क्षेत्रों में उर्वरकों की मात्रा कम रखी जाती है।पहली सिंचाई बुवाई के 35-40 दिन बाद तथा दूसरी दाना बनने की अवस्था में करनी चाहिए।
खरपतवार नियंत्रण
अच्छे उत्पादन के लिए समय पर निराई-गुड़ाई आवश्यक है। बुवाई के तुरंत बाद पेंडीमेथालीन 30 ईसी की 3.3 लीटर मात्रा 800-1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करने से खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फसल रोग, कीट और खरपतवार से मुक्त रखी जाए और वैज्ञानिक तरीकों का पालन किया जाए तो किसान सरसों से बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। Mustard Cultivation












