सर्दियों में सब्जी की खेती से मोटी कमाई, किसान जरूर पढ़ें

सर्दियों का महीना सब्जी उत्पादक किसानों के लिए सुनहरा अवसर है। सही फसल चयन, समय पर बुवाई और उचित देखभाल से किसान कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं। यदि आप खेती से जल्दी पैसा कमाना चाहते हैं, तो इन फसलों करें।

Vegetable farming in winter
सर्द मौसम में खेती का सुनहरा मौका (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar08 Jan 2026 12:13 PM
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जनवरी का महीना किसानों के लिए कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का बेहतरीन अवसर लेकर आता है। सर्द मौसम सब्जी उत्पादन के लिए अनुकूल माना जाता है, जिसमें कम लागत में अच्छी पैदावार और बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं। यदि किसान सही फसलों का चुनाव करें, तो 60 से 90 दिनों में ही अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

आइए जानते हैं जनवरी में बोई जाने वाली उन फसलों के बारे में, जो किसानों की आमदनी बढ़ा सकती हैं—

🌱 बैंगन की खेती: कम समय में ज्यादा मुनाफा

बता दें कि जनवरी में बैंगन की खेती सबसे अधिक लाभदायक मानी जाती है। यह फसल लगभग 60–70 दिनों में तैयार हो जाती है। ठंडा मौसम बैंगन के विकास के लिए अनुकूल होता है, जिससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है। बाजार में इसकी मांग अधिक होने के कारण किसानों को अच्छा मूल्य मिलता है।

🌿 भिंडी की अगेती किस्में: जल्दी उत्पादन की कुंजी

जनवरी में भिंडी की अगेती प्रजातियों की बुवाई किसानों को फरवरी के अंत तक उत्पादन देना शुरू कर देती है। ठंड के कारण बीज अंकुरण में देरी हो सकती है, इसलिए बीजों को बुवाई से पहले गुनगुने पानी में भिगोकर उपचारित करना लाभकारी रहता है।

🧅 प्याज की खेती: सर्दियों में भरोसेमंद फसल

प्याज की खेती के लिए जनवरी का महीना आदर्श माना जाता है। इस मौसम में प्याज की फसल अच्छी होती है और बाजार में इसकी लगातार मांग बनी रहती है। नियमित सिंचाई और सही देखभाल से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

🍅 टमाटर की खेती: तीन बार फसल, जनवरी भी मौका

टमाटर की खेती साल में तीन बार की जा सकती है। जनवरी-फरवरी में बोई गई फसल को कोहरे और पाले से बचाने के लिए विशेषज्ञों की सलाह अनुसार दवाओं का छिड़काव जरूरी होता है, जिससे फसल सुरक्षित रहती है और बेहतर उत्पादन मिलता है।

🥕 मूली की खेती: कम लागत, तेज मुनाफा

जनवरी में मूली की बुवाई कर किसान जल्दी उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। यह फसल हमेशा बाजार में मांग में रहती है। हल्की नमी वाली **बलुई दोमट मिट्टी** मूली की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

🥕 गाजर की खेती: सर्दियों की पसंदीदा सब्जी

गाजर की खेती के लिए जनवरी का महीना बेहद उपयुक्त होता है। यह फसल ठंडे और आर्द्र मौसम में अच्छी पैदावार देती है। बाजार में सर्दियों में गाजर की मांग अधिक रहती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं।

🥦 फूलगोभी की खेती: कम सिंचाई, ज्यादा उत्पादन

फूलगोभी की बुवाई जनवरी में करने से अच्छी पैदावार मिलती है। सर्दियों में इस फसल को कम सिंचाई की जरूरत होती है, जिससे लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है।

🌿 पालक की खेती: सर्दियों की सबसे लोकप्रिय हरी सब्जी

पालक सर्दियों में सबसे अधिक उगाई जाने वाली सब्जी है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। जनवरी में पालक की खेती किसानों के लिए स्थायी आमदनी का जरिया बन सकती है।

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बीएमसी चुनाव 2026: अजित पवार गुट की एनसीपी ने जारी किया ‘आपली मुंबई’ विज़न

एनसीपी ने कहा कि ‘आपली मुंबई’ का मतलब है ऐसी मुंबई, जहां गरीब, मध्यम वर्ग और अमीर—सभी को बराबर अवसर मिलें। पार्टी ने आज़ादी, समानता और भाईचारे के संवैधानिक मूल्यों के आधार पर सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और जनता की भागीदारी से शहर की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया है।

BMC elections 2026 NCP Ajit Pawar
बीएमसी चुनाव 2026 एनसीपी अजित पवार (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar07 Jan 2026 11:14 PM
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बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) चुनाव को लेकर एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) अजित पवार ने अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। पार्टी ने दावा किया है कि वह मुंबई को एक वर्ल्ड-क्लास, समावेशी और खुशहाल शहर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। घोषणापत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, हाउसिंग, महिला सुरक्षा और ट्रांसपेरेंसी जैसे अहम मुद्दों पर बड़े वादे किए गए हैं। एनसीपी ने अपने घोषणापत्र में कहा है कि वह मुंबई को सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि हर मुंबईकर के सपनों का शहर मानती है। पार्टी के मुताबिक, ‘मुंबईकर’ ही इस महानगर की असली पहचान है और उनके सपनों को पूरा करना ही एनसीपी का लक्ष्य है।

‘आपली मुंबई – सबके लिए मुंबई’ का विज़न

बता दें कि घोषणापत्र में एनसीपी ने कहा कि ‘आपली मुंबई’ का मतलब है ऐसी मुंबई, जहां गरीब, मध्यम वर्ग और अमीर—सभी को बराबर अवसर मिलें। पार्टी ने आज़ादी, समानता और भाईचारे के संवैधानिक मूल्यों के आधार पर सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और जनता की भागीदारी से शहर की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया है।

घोषणापत्र की प्रमुख घोषणाएं

इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास

  • सड़कों, पुलों और फ्लाईओवर का आधुनिकीकरण
  • 5 साल में 500 किमी नई सड़कों का निर्माण
  • स्मार्ट सिटी के तहत CCTV, Wi-Fi और डिजिटल सेवाओं का विस्तार
  • BKC, वर्ली और पूर्वी उपनगरों को फाइनेंशियल हब के रूप में विकसित करना
  • AI आधारित स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल और मोबाइल कंट्रोल सेंटर
  • इंटरनल रोड नेटवर्क खोलकर ट्रैफिक जाम कम करने का प्लान

पानी की सप्लाई

  • पुरानी चॉलों और झुग्गी-झोपड़ियों में मुफ्त पानी
  • 24x7 स्वच्छ और पर्याप्त पानी की सप्लाई
  • पानी के लीकेज रोकने के लिए आधुनिक तकनीक
  • ‘जल समृद्ध नगर अभियान’ और 2030 तक स्मार्ट वॉटर मीटर

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट

  • ज़ीरो वेस्ट पॉलिसी और रीसाइक्लिंग प्लांट्स की संख्या बढ़ाना
  • प्लास्टिक बैन को और सख्त करना
  • नालों और नदियों की सफाई के लिए ‘रिवर रिवाइटलाइजेशन’ अभियान
  • कचरा अलग-अलग करने पर नागरिकों को ‘वेस्ट क्रेडिट सर्टिफिकेट’
  • सफाई कर्मचारियों को मुफ्त घर और हेल्थ इंश्योरेंस

स्वास्थ्य सेवाएं

  • हर वार्ड में एडवांस्ड प्राइमरी हेल्थ सेंटर
  • मुफ्त मेडिकल चेक-अप और महामारी से निपटने की तैयारी
  • म्युनिसिपल हॉस्पिटल्स में डिजिटल डैशबोर्ड सिस्टम
  • स्कूलों में छात्रों को हेल्थ कार्ड
  • मेंटल हेल्थ, एडिक्शन काउंसलिंग और रिहैब सेंटर
  • आवारा कुत्तों पर नियंत्रण और पालतू कुत्तों के लाइसेंस का सख्त अमल

शिक्षा

  • म्युनिसिपल स्कूलों का मॉडर्नाइजेशन और डिजिटल क्लासरूम
  • फ्री न्यूट्रिशनल मील स्कीम
  • AI आधारित स्मार्ट क्लासरूम
  • हर वार्ड में लाइब्रेरी और फ्री स्टडी सेंटर
  • सेकेंडरी लेवल पर वोकेशनल और स्किल डेवलपमेंट कोर्स

पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी

  • 10 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य
  • इलेक्ट्रिक बसों और CNG वाहनों को बढ़ावा
  • मैंग्रोव संरक्षण और ‘क्लाइमेट रेजिलिएंट मुंबई’ स्कीम
  • डस्ट-फ्री मुंबई के लिए आधुनिक मशीनरी

ट्रैफिक और ट्रांसपोर्ट

  • लोकल ट्रेन और मेट्रो नेटवर्क का विस्तार
  • स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल और पार्किंग सिस्टम
  • महिलाओं के लिए सुरक्षित पब्लिक ट्रांसपोर्ट
  • दिव्यांगों के लिए मेट्रो में विशेष सुविधाएं
  • अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ पर खास जोर

हाउसिंग और स्लम रिहैबिलिटेशन

  • 1 लाख नए घरों का निर्माण
  • SRA स्कीम को तेज़ी से लागू करना
  • स्लमवासियों को मुफ्त मालिकाना हक और बुनियादी सुविधाएं
  • 700 वर्गफुट तक प्रॉपर्टी टैक्स माफ

महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण

  • ‘सुरक्षित मुंबई’ अभियान
  • CCTV, हेल्पलाइन और पुलिस पेट्रोलिंग में बढ़ोतरी
  • महिला उद्यमियों के लिए ट्रेनिंग और लोन
  • वर्किंग वुमन हॉस्टल और चाइल्डकेयर सेंटर

युवा और रोजगार

  • हर वार्ड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर
  • IT, टूरिज्म और स्टार्टअप्स में रोजगार के अवसर
  • जॉब फेयर और अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम
  • ओलंपिक-ग्रेड स्टेडियम और यूथ क्लब

भ्रष्टाचार और पारदर्शिता

  • ई-गवर्नेंस के ज़रिए सभी सेवाएं ऑनलाइन
  • ट्रांसपेरेंट बजट और ऑडिट सिस्टम
  • 24x7 हेल्पलाइन और शिकायतों का त्वरित समाधान

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बड़ी राहत : ईपीएफ सैलरी लिमिट बढ़ाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया कि जब देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और कई राज्यों में न्यूनतम वेतन 15,000 से ऊपर पहुंच चुका है, तो ईपीएफ की सैलरी सीमा पिछले 11 वर्षों से क्यों नहीं बदली गई। कोर्ट ने इसे मौजूदा हालात से मेल न खाने वाला नियम बताया।

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ईपीएफओ
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar07 Jan 2026 06:49 PM
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EPF Salary : निजी क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से जुड़ी सैलरी सीमा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि सरकार को अगले चार महीनों के भीतर यह तय करना होगा कि ईपीएफ की मौजूदा वेज लिमिट 15,000 से बढ़ाई जाए या नहीं।

महंगाई बढ़ी, लेकिन नियम वहीं के वहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह सवाल उठाया कि जब देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है और कई राज्यों में न्यूनतम वेतन 15,000 से ऊपर पहुंच चुका है, तो ईपीएफ की सैलरी सीमा पिछले 11 वर्षों से क्यों नहीं बदली गई। कोर्ट ने इसे मौजूदा हालात से मेल न खाने वाला नियम बताया।

2014 के बाद नहीं हुआ कोई संशोधन

ईपीएफ की वेज सीलिंग में आखिरी बार बदलाव वर्ष 2014 में किया गया था, जब इसे 6,500 से बढ़ाकर 15,000 किया गया। इसके बाद समय बदला, वेतन बढ़े, जीवन-यापन महंगा हुआ, लेकिन ईपीएफ के नियम पुराने ही बने रहे। अदालत ने इसे गंभीर चूक मानते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

न्यूनतम वेतन से भी कम हो गई ईपीएफ सीमा

आज स्थिति यह है कि कई सेक्टरों और राज्यों में सरकारी न्यूनतम वेतन ही 15,000 से अधिक है। ऐसे में कर्मचारी ईपीएफ की अनिवार्य सीमा से बाहर हो जाते हैं। कोर्ट के अनुसार, ईपीएफ का उद्देश्य कर्मचारियों को रिटायरमेंट, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा देना है, लेकिन मौजूदा सीमा अब इस उद्देश्य में बाधा बन रही है।

पहले भी हो चुकी है सिफारिश

सरकार के भीतर इस मुद्दे पर पहले ही चर्चा हो चुकी है। वर्ष 2022 में ईपीएफ की एक सब-कमेटी ने सैलरी लिमिट बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। इसके अलावा सेंट्रल बोर्ड आॅफ ट्रस्टीज ने भी इस सिफारिश को स्वीकृति दी थी। बावजूद इसके, प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। अब सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर सरकार को एक विस्तृत प्रस्तुति सौंपे, जिसके बाद केंद्र को निर्धारित समयसीमा में अंतिम फैसला लेना होगा।

कितनी बढ़ सकती है नई सीमा?

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ईपीएफ की वेज लिमिट को बढ़ाकर 21,000 या 25,000 तक ले जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा फायदा कर्मचारियों की पेंशन और भविष्य निधि पर पड़ेगा। फिलहाल कर्मचारी पेंशन योजना में योगदान 15,000 की सीमा के आधार पर होता है। अगर यह सीमा 25,000 कर दी जाती है, तो मासिक पेंशन योगदान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इससे कर्मचारियों के पेंशन फंड में सालाना हजारों रुपये अतिरिक्त जमा होंगे और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन भी बेहतर होगी।

नियोक्ताओं पर बढ़ेगा खर्च

हालांकि इस बदलाव का एक दूसरा पक्ष भी है। कर्मचारी पेंशन योजना में योगदान नियोक्ता द्वारा किया जाता है। सैलरी सीमा बढ़ने से कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा, जिस वजह से कुछ नियोक्ता इसका विरोध कर सकते हैं। सरकार इस प्रस्ताव को ईपीएफ 3.0 विजन से जोड़कर देख रही है, जिसका लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए यह एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है।

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