धर्मेद्र प्रधान ने कहा- कक्षा 3 से ही एआई आधारित शिक्षा शुरू की जाएगी

तकनीक अब शिक्षा तंत्र का केंद्रीय तत्व बनती जा रही है। सरकार ने ज्ञान और बौद्धिक क्षमता के विकास के लिए शिक्षा क्षेत्र में एआई के लिए एक सेंटर आॅफ एक्सीलेंस स्थापित किया है। इसका उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों दोनों को उन्नत डिजिटल उपकरणों से सशक्त बनाना है।

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एआई कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन अवसर
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar12 Feb 2026 07:03 PM
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AI Based Education : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन अवसर पर देश की शिक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को व्यापक रूप से शामिल करने की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले समय में कक्षा 3 से ही आयु-उपयुक्त एआई आधारित शिक्षा शुरू की जाएगी, ताकि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही नई तकनीकों से परिचित कराया जा सके।

तकनीक अब शिक्षा तंत्र का केंद्रीय तत्व बनती जा रही

मंत्री ने कहा कि तकनीक अब शिक्षा तंत्र का केंद्रीय तत्व बनती जा रही है। सरकार ने ज्ञान और बौद्धिक क्षमता के विकास के लिए शिक्षा क्षेत्र में एआई के लिए एक सेंटर आॅफ एक्सीलेंस स्थापित किया है। इसका उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों दोनों को उन्नत डिजिटल उपकरणों से सशक्त बनाना है। दो दिवसीय इस कॉन्क्लेव में शिक्षाविदों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नीति-निमार्ताओं, स्टार्टअप्स, नवाचारकतार्ओं और कौशल विकास से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मकसद शिक्षा में एआई के बड़े पैमाने पर एकीकरण और भारत-केंद्रित एडुअक स्टैक विकसित करने की दिशा में सहयोग बढ़ाना है।

एआई मॉडल नैतिक, जिम्मेदार, समावेशी और आत्मनिर्भर होना चाहिए

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को एआई-रेडी राष्ट्र बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश में विकसित होने वाला एआई मॉडल नैतिक, जिम्मेदार, समावेशी और आत्मनिर्भर होना चाहिए। उनका कहना था कि भारत का एआई ढांचा डिजाइन के स्तर पर समावेशी, संरचना के स्तर पर इंटरआपरेबल और क्षमता के स्तर पर स्वदेशी होना चाहिए। मंत्री ने सभी हितधारकों से अपील की कि वे शिक्षा में परिवर्तन लाने और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्केलेबल और जिम्मेदार एआई समाधान तैयार करें। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कॉन्क्लेव में हुई चचार्एं भारत की एआई क्षमता को मजबूत करेंगी, शिक्षा में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देंगी और आल फार आल के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक साबित होंगी।


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अजित पवार के निधन पर नाना पाटेकर का भावुक खुलासा

नाना पाटेकर काफी भावुक नजर आए। पुरानी यादों को ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि हम अजित पवार के निधन से बेहद दुखी हैं। मेरा उनका साथ तब से था जब वे केवल 19-20 साल के थे।

Nana Patekar emotional
अजित पवार के निधन पर नाना पाटेकर भावुक (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar12 Feb 2026 04:51 PM
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Actor Nana Patekar : महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और कद्दावर नेता अजित पवार के निधन की खबर ने न केवल राजनीतिक गलियारों बल्कि मनोरंजन जगत को भी स्तब्ध कर दिया है। इस दुखद घड़ी में दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए पवार परिवार के साथ अपनी गहरी साझेदारी दर्शाई है।

जब वे 19-20 साल के थे... नाना पाटेकर का भावुक खुलासा

मीडिया से बात करते हुए नाना पाटेकर काफी भावुक नजर आए। पुरानी यादों को ताजा करते हुए उन्होंने कहा कि हम अजित पवार के निधन से बेहद दुखी हैं। मेरा उनका साथ तब से था जब वे केवल 19-20 साल के थे और उन्होंने एक साधारण पार्टी कार्यकर्ता के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी।"

नाना पाटेकर ने अजित पवार के सफर को याद करते हुए कहा, "हमने उन्हें जमीन से उठकर शिखर तक पहुंचते देखा है। अजित पवार ने जिस तरह से शुरुआत की और जिस मुकाम तक पहुंचे, वो एक कमाल का सफर था।" उन्होंने अपने रिश्ते को याद करते हुए भावुक होते हुए कहा, "मैं अजित को हमेशा मिस करूंगा, वे मेरे अच्छे दोस्त और छोटे भाई जैसे थे।"

सुनेत्रा पवार और रोहित पवार पर बोले नाना

नाना पाटेकर ने इस कठिन समय में पवार परिवार के प्रति अपना समर्थन जताते हुए कहा कि वह इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ हैं। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को लेकर उन्होंने कहा, "उन पर दुखों का पहाड़ है, लेकिन उन्होंने जो पदभार संभाला है, उसे वे निभाएंगी।" इसके अलावा, रोहित पवार द्वारा विमान हादसे पर उठाए गए सवालों पर भी नाना पाटेकर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "रोहित पवार परिवार के सदस्य हैं। उनके मन में जो सवाल आए थे, उसे उन्होंने बोला। मैंने रोहित पवार को सुना नहीं है, तो मैं उस बारे में टिप्पणी नहीं कर सकता।" उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच हो रही है और अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो दोषियों को सजा मिलेगी।

राजनीति से इतर रिश्ता और NCP के विलय पर बयान

राजनीति से इतर मानवीय रिश्तों को तवज्जो देते हुए नाना पाटेकर ने कहा कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन एक व्यक्ति के रूप में अजित पवार का व्यक्तित्व प्रभावशाली था। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और एनसीपी (NCP) के गुटों के विलय की चर्चाओं पर भी नाना ने संक्षिप्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भविष्य की चीजें अब दो पार्टियों के फैसलों और परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। Actor Nana Patekar

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जाने भारत का गौरव, सम्राट अशोक का ऐतिहासिक परिचय

अशोक के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने कलिंग (वर्तमान ओडिशा) पर आक्रमण किया। यह युद्ध इतिहास के सबसे खूनी युद्धों में से एक था, जिसमें लगभग एक से पंद्रह लाख लोगों की जान गई।

Emperor Ashoka Historical
अशोक के धर्म प्रचार के अमिट प्रमाण (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar12 Feb 2026 03:39 PM
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Historical introduction of Emperor Ashoka : मौर्य वंश के इतिहास में एक ऐसे शासक का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया है, जिन्होंने तलवार के बजाय धर्म की शक्ति को अपनाते हुए विश्व इतिहास में एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। सम्राट अशोक, जिन्हें उनके शासनकाल में 'असोक' के नाम से जाना जाता था, न केवल मौर्य साम्राज्य का विस्तार किया, बल्कि कलिंग युद्ध के बाद अपने जीवन के बदले हुए रूप के कारण आज भी एक आदर्श शासक के रूप में याद किए जाते हैं।

चंडाशोक से प्रियदर्शी तक का सफर

चंद्रगुप्त मौर्य के पौत्र और बिंदुसार के पुत्र अशोक का जन्म 304 ईसा पूर्व पाटलिपुत्र में हुआ था। अपने प्रारंभिक जीवन में अशोक एक महत्वाकांक्षी और कठोर शासक थे, जिन्हें 'चंडाशोक' कहा जाता था। उन्होंने उज्जैन और तक्षशिला में हुए विद्रोहों को कुचलने में अपनी क्षमता का परिचय दिया। ईसा पूर्व 273 के आसपास सिंहासन संभालने वाले अशोक ने अपनी वीरता और रणनीतिक कौशल के कारण मौर्य साम्राज्य का विस्तार पश्चिम में अफगानिस्तान से लेकर पूर्व में बंगाल और दक्षिण में मैसूर तक कर दिया।

कलिंग युद्ध: जीवन का निर्णायक मोड़

अशोक के जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने कलिंग (वर्तमान ओडिशा) पर आक्रमण किया। यह युद्ध इतिहास के सबसे खूनी युद्धों में से एक था, जिसमें लगभग एक से पंद्रह लाख लोगों की जान गई। इस विनाश और खूनखराबे ने अशोक के हृदय में हलचल मचा दी। युद्ध के भयावह परिणामों ने उन्हें इतना विचलित किया कि उन्होंने युद्ध और हिंसा का मार्ग हमेशा के लिए त्याग दिया।

धम्म विजय और लोककल्याणकारी नीतियां

कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म को अपना लिया और 'धम्म विजय' (धर्म द्वारा विजय) का नारा दिया। उन्होंने अपने साम्राज्य में प्रजा के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया। उनके शासनकाल में मानव और पशु अस्पतालों की स्थापना, सड़कों पर पेड़ लगाना, कुओं की खुदाई और सिंचाई केंद्रों का निर्माण जैसे लोककल्याणकारी कार्य कराए गए। उन्होंने पशु शिकार पर भी प्रतिबंध लगा दिया। अपनी प्रजा के प्रति करुणा और प्रेम के कारण उन्हें 'देवनमप्रिय प्रियदर्शी' की उपाधि मिली। उन्होंने घोषणा की, "सभी मनुष्य मेरे बच्चे हैं।"

शिलालेखों में दर्ज है विरासत

अशोक ने अपने विचारों और आदेशों को देश के विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर चट्टानों और स्तंभों पर उत्कीर्ण करवाया। सारनाथ में मिला सिंह स्तंभ आज भारत गणराज्य का राष्ट्रीय प्रतीक बन गया है, जबकि अशोक चक्र भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का अंग है। उन्होंने अपने पुत्र महिंदा और पुत्री संघामित्रा को बौद्ध धर्म के प्रसार के लिए श्रीलंका भेजा।

अंतिम विदाई

37 वर्षों तक शासन करने वाले इस महान सम्राट का 72 वर्ष की आयु में पाटलिपुत्र में निधन हो गया है। उनकी मृत्यु के बाद मौर्य वंश का विभाजन हो गया और उनके पौत्र दशरथ मौर्य ने उनका उत्तराधिकार संभाला है। इतिहासकार मानते हैं कि अशोक ने अपने जीवन के माध्यम से यह सिखाया कि सच्ची विजय वह नहीं जो युद्ध से मिलती है, बल्कि वह है जो धर्म और दया से प्राप्त होती है। Historical introduction of Emperor Ashoka

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