आज भारत बंद : न्यू लेबर कोड के खिलाफ आखिर क्यों सड़कों पर उतरे करोड़ों लोग?
आयोजकों का दावा है कि करीब 30 करोड़ से अधिक कर्मचारी और मजदूर इस हड़ताल में शामिल हैं। इस व्यापक बंद के पीछे मुख्य वजह सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कानून, कुछ आर्थिक नीतियां और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उठी चिंताएं हैं।

Bharat Bandh : 12 फरवरी को देशभर में बड़े स्तर पर भारत बंद का आह्वान किया गया है। इस बंद को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, बैंक कर्मचारियों के संगठनों और कई किसान संगठनों का समर्थन मिला है। आयोजकों का दावा है कि करीब 30 करोड़ से अधिक कर्मचारी और मजदूर इस हड़ताल में शामिल हैं। इस व्यापक बंद के पीछे मुख्य वजह सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कानून, कुछ आर्थिक नीतियां और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उठी चिंताएं हैं।
मुख्य मुद्दा: नए लेबर कोड पर नाराजगी
सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए लेबर कोड बनाए हैं। सरकार का कहना है कि इससे श्रम कानूनों को सरल और व्यवस्थित बनाया जाएगा। लेकिन ट्रेड यूनियनों का मानना है कि इन नए प्रावधानों से कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा कमजोर हो सकती है। उनका आरोप है कि कंपनियों के लिए कर्मचारियों की छंटनी आसान हो जाएगी। स्थायी नौकरियों की जगह कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम बढ़ सकता है। हड़ताल और यूनियन गतिविधियों पर सख्ती बढ़ सकती है, काम के घंटे बढ़ने की आशंका है। इसी वजह से यूनियनें इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रही हैं।
पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग
सरकारी कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग नई पेंशन प्रणाली से असंतुष्ट है। उनकी मांग है कि पुरानी पेंशन योजना दोबारा लागू की जाए, जिसमें रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन मिलती थी। बैंक यूनियनों ने भी इस बंद को समर्थन दिया है। उनकी प्रमुख मांगें हैं सप्ताह में पांच दिन काम, वेतन समझौते में सुधार और सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण पर रोक लगाया जाए।
किसान संगठनों का समर्थन क्यों?
किसान संगठनों ने भी इस बंद में भाग लिया है। उनका कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा वे निम्न मुद्दों पर भी सरकार से असहमति जता रहे हैं। ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक और कृषि क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका। किसानों का कहना है कि इन कदमों से छोटे और मध्यम किसानों की स्थिति कमजोर हो सकती है।
मनरेगा को लेकर भी मांग
मजदूर संगठनों ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को मजबूत करने की मांग की है। वे चाहते हैं कि योजना का बजट बढ़ाया जाए, अधिक दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाए और ग्रामीण रोजगार सुरक्षा को मजबूत किया जाए। इन सेवाओं पर असर पड़ सकता है? इस बंद का असर कई जगहों पर देखने को मिल सकता है, संभावित रूप से प्रभावित होंगे:
* सरकारी बैंक
* बीमा दफ्तर
* कुछ राज्यों में बस सेवाएं
* औद्योगिक इकाइयां
* सरकारी कार्यालय
* स्थानीय बाजार
यह भारत बंद केवल श्रम कानूनों का विरोध नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों, किसानों और मजदूर संगठनों की संयुक्त नाराजगी का प्रदर्शन है। इसमें रोजगार सुरक्षा, पेंशन, कृषि नीतियां, निजीकरण और व्यापार समझौते जैसे कई बड़े मुद्दे शामिल हैं।Bharat Bandh
Bharat Bandh : 12 फरवरी को देशभर में बड़े स्तर पर भारत बंद का आह्वान किया गया है। इस बंद को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, बैंक कर्मचारियों के संगठनों और कई किसान संगठनों का समर्थन मिला है। आयोजकों का दावा है कि करीब 30 करोड़ से अधिक कर्मचारी और मजदूर इस हड़ताल में शामिल हैं। इस व्यापक बंद के पीछे मुख्य वजह सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कानून, कुछ आर्थिक नीतियां और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उठी चिंताएं हैं।
मुख्य मुद्दा: नए लेबर कोड पर नाराजगी
सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए लेबर कोड बनाए हैं। सरकार का कहना है कि इससे श्रम कानूनों को सरल और व्यवस्थित बनाया जाएगा। लेकिन ट्रेड यूनियनों का मानना है कि इन नए प्रावधानों से कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा कमजोर हो सकती है। उनका आरोप है कि कंपनियों के लिए कर्मचारियों की छंटनी आसान हो जाएगी। स्थायी नौकरियों की जगह कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम बढ़ सकता है। हड़ताल और यूनियन गतिविधियों पर सख्ती बढ़ सकती है, काम के घंटे बढ़ने की आशंका है। इसी वजह से यूनियनें इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रही हैं।
पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग
सरकारी कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग नई पेंशन प्रणाली से असंतुष्ट है। उनकी मांग है कि पुरानी पेंशन योजना दोबारा लागू की जाए, जिसमें रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन मिलती थी। बैंक यूनियनों ने भी इस बंद को समर्थन दिया है। उनकी प्रमुख मांगें हैं सप्ताह में पांच दिन काम, वेतन समझौते में सुधार और सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण पर रोक लगाया जाए।
किसान संगठनों का समर्थन क्यों?
किसान संगठनों ने भी इस बंद में भाग लिया है। उनका कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा वे निम्न मुद्दों पर भी सरकार से असहमति जता रहे हैं। ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक और कृषि क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका। किसानों का कहना है कि इन कदमों से छोटे और मध्यम किसानों की स्थिति कमजोर हो सकती है।
मनरेगा को लेकर भी मांग
मजदूर संगठनों ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को मजबूत करने की मांग की है। वे चाहते हैं कि योजना का बजट बढ़ाया जाए, अधिक दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाए और ग्रामीण रोजगार सुरक्षा को मजबूत किया जाए। इन सेवाओं पर असर पड़ सकता है? इस बंद का असर कई जगहों पर देखने को मिल सकता है, संभावित रूप से प्रभावित होंगे:
* सरकारी बैंक
* बीमा दफ्तर
* कुछ राज्यों में बस सेवाएं
* औद्योगिक इकाइयां
* सरकारी कार्यालय
* स्थानीय बाजार
यह भारत बंद केवल श्रम कानूनों का विरोध नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों, किसानों और मजदूर संगठनों की संयुक्त नाराजगी का प्रदर्शन है। इसमें रोजगार सुरक्षा, पेंशन, कृषि नीतियां, निजीकरण और व्यापार समझौते जैसे कई बड़े मुद्दे शामिल हैं।Bharat Bandh












