आज भारत बंद : न्यू लेबर कोड के खिलाफ आखिर क्यों सड़कों पर उतरे करोड़ों लोग?

आयोजकों का दावा है कि करीब 30 करोड़ से अधिक कर्मचारी और मजदूर इस हड़ताल में शामिल हैं। इस व्यापक बंद के पीछे मुख्य वजह सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कानून, कुछ आर्थिक नीतियां और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उठी चिंताएं हैं।

bharat band
भारत बंद का आह्वान
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar12 Feb 2026 12:41 PM
bookmark

Bharat Bandh : 12 फरवरी को देशभर में बड़े स्तर पर भारत बंद का आह्वान किया गया है। इस बंद को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, बैंक कर्मचारियों के संगठनों और कई किसान संगठनों का समर्थन मिला है। आयोजकों का दावा है कि करीब 30 करोड़ से अधिक कर्मचारी और मजदूर इस हड़ताल में शामिल हैं। इस व्यापक बंद के पीछे मुख्य वजह सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कानून, कुछ आर्थिक नीतियां और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उठी चिंताएं हैं।

मुख्य मुद्दा: नए लेबर कोड पर नाराजगी

सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए लेबर कोड बनाए हैं। सरकार का कहना है कि इससे श्रम कानूनों को सरल और व्यवस्थित बनाया जाएगा। लेकिन ट्रेड यूनियनों का मानना है कि इन नए प्रावधानों से कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा कमजोर हो सकती है। उनका आरोप है कि कंपनियों के लिए कर्मचारियों की छंटनी आसान हो जाएगी। स्थायी नौकरियों की जगह कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम बढ़ सकता है। हड़ताल और यूनियन गतिविधियों पर सख्ती बढ़ सकती है, काम के घंटे बढ़ने की आशंका है। इसी वजह से यूनियनें इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रही हैं।

पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग

सरकारी कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग नई पेंशन प्रणाली से असंतुष्ट है। उनकी मांग है कि पुरानी पेंशन योजना दोबारा लागू की जाए, जिसमें रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन मिलती थी। बैंक यूनियनों ने भी इस बंद को समर्थन दिया है। उनकी प्रमुख मांगें हैं सप्ताह में पांच दिन काम, वेतन समझौते में सुधार और सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण पर रोक लगाया जाए।

किसान संगठनों का समर्थन क्यों?

किसान संगठनों ने भी इस बंद में भाग लिया है। उनका कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा वे निम्न मुद्दों पर भी सरकार से असहमति जता रहे हैं। ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक और कृषि क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका। किसानों का कहना है कि इन कदमों से छोटे और मध्यम किसानों की स्थिति कमजोर हो सकती है।

मनरेगा को लेकर भी मांग

मजदूर संगठनों ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को मजबूत करने की मांग की है। वे चाहते हैं कि योजना का बजट बढ़ाया जाए, अधिक दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाए और ग्रामीण रोजगार सुरक्षा को मजबूत किया जाए। इन सेवाओं पर असर पड़ सकता है? इस बंद का असर कई जगहों पर देखने को मिल सकता है, संभावित रूप से प्रभावित होंगे:

* सरकारी बैंक

* बीमा दफ्तर

* कुछ राज्यों में बस सेवाएं

* औद्योगिक इकाइयां

* सरकारी कार्यालय

* स्थानीय बाजार

यह भारत बंद केवल श्रम कानूनों का विरोध नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों, किसानों और मजदूर संगठनों की संयुक्त नाराजगी का प्रदर्शन है। इसमें रोजगार सुरक्षा, पेंशन, कृषि नीतियां, निजीकरण और व्यापार समझौते जैसे कई बड़े मुद्दे शामिल हैं।Bharat Bandh 


संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

कृषि उत्पादन बढ़ाने की कुंजी: जानें एनपीके उर्वरक का सही समय और तरीका

फसल बोने से 2-4 सप्ताह पहले मिट्टी को तैयार करते समय फास्फोरस युक्त उर्वरक की आवश्यकता होती है। चूंकि फास्फोरस मिट्टी में आसानी से गतिशील नहीं होता, इसलिए इसे रोपण से पहले मिट्टी में मिलाना जड़ों के शुरुआती विकास के लिए जरूरी है।

NPK fertilizers
जैविक और रासायनिक एनपीके स्रोतों का सही मिश्रण (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar12 Feb 2026 10:23 AM
bookmark

NPK Fertilizers : व्यावसायिक खेती से लेकर घरेलू बागवानी तक, फसल की सफलता का राज़ उर्वरकों के सही और समय पर प्रयोग में छिपा है। विशेषज्ञों के अनुसार, एनपीके उर्वरक (नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम) का प्रयोग करते समय केवल मात्रा ही नहीं, बल्कि सही समय का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में जारी एक विशेषज्ञ मार्गदर्शिका में बताया गया है कि कैसे पौधों के विकास चक्र के विभिन्न चरणों में एनपीके के विभिन्न अनुपातों का उपयोग उत्पादकता को दोगुना कर सकता है।

तीनों तत्वों की अहम भूमिका

रिसो फर्टिलाइजर्स के विशेषज्ञों के मुताबिक, एनपीके के तीनों प्राथमिक तत्व पौधों के लिए जीवनदायिनी हैं। नाइट्रोजन (N) पौधों की पत्तियों और तनों की वृद्धि के साथ-साथ प्रकाश संश्लेषण में मदद करता है। वहीं, फास्फोरस (P) जड़ों के विकास, पुष्पन और फलन में सहायक है, जबकि पोटेशियम (K) पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और फलों की गुणवत्ता सुधारता है। इनका सही अनुपात और समय ही सफल फसल का आधार है।

पौधरोपण से लेकर कटाई तक: 5 महत्वपूर्ण चरण

मार्गदर्शिका में एनपीके उर्वरक के प्रयोग के पांच प्रमुख चरणों को रेखांकित किया गया है:

1. रोपण से पूर्व (मिट्टी की तैयारी):

फसल बोने से 2-4 सप्ताह पहले मिट्टी को तैयार करते समय फास्फोरस युक्त उर्वरक की आवश्यकता होती है। चूंकि फास्फोरस मिट्टी में आसानी से गतिशील नहीं होता, इसलिए इसे रोपण से पहले मिट्टी में मिलाना जड़ों के शुरुआती विकास के लिए जरूरी है। इसके लिए 10-26-10 जैसे अनुपात को प्रभावी माना गया है।

2. प्रारंभिक वृद्धि (वसंत ऋतु):

जब पौधे तेजी से बढ़ने लगते हैं, तो उन्हें हरी पत्तियों और मजबूत तने के लिए नाइट्रोजन की अधिक आवश्यकता होती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि वसंत के मौसम में या रोपण के तुरंत बाद 20-10-10 जैसे नाइट्रोजन युक्त मिश्रण का उपयोग करना चाहिए।

3. पुष्पन और फल लगने की अवस्था:

यह फसल का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है। फूल आने और फल लगने पर पौधों को फास्फोरस और पोटेशियम की अधिक जरूरत होती है। इस दौरान नाइट्रोजन की मात्रा कम और पी-के (P-K) की मात्रा अधिक रखनी चाहिए। इसके लिए 5-10-10 या 10-20-20 के अनुपात को बेहतर माना गया है।

4. देर से शुरू होने वाला मौसम:

फसल के पूरा होने के करीब, यानी ग्रीष्म के अंत या पतझड़ में, नाइट्रोजन की मात्रा कम कर देनी चाहिए ताकि पौधों में केवल फल का विकास हो और वे सर्दी के लिए मजबूत बनें। इस स्थिति में 5-10-20 या **12-10-30 जैसे उर्वरक उपयुक्त हैं।

5. फसल कटाई के बाद:

मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए कटाई के तुरंत बाद मिट्टी में पोषक तत्वों को फिर से भरना जरूरी है। इसके लिए 10-10-10 या 20-20-20 जैसे संतुलित एनपीके उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों की सलाह: मिट्टी परीक्षण और मौसम का ध्यान

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि उर्वरक डालने से पहले मिट्टी परीक्षण अनिवार्य होना चाहिए। इससे पता चलता है कि जमीन में किस तत्व की कमी है और किस फसल के लिए किस अनुपात की जरूरत है। साथ ही, मौसम की स्थिति का भी ध्यान रखें; भारी बारिश में नाइट्रोजन बह जाता है, जबकि सूखे में सिंचाई के बाद ही उर्वरक देना लाभदायक होता है।

रिसो फर्टिलाइजर्स द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे दानेदार, तरल और धीमी गति से घुलने वाले विकल्प किसानों के लिए इन आवश्यकताओं को पूरा करने में मददगार साबित हो रहे हैं। यह मार्गदर्शिका किसानों के लिए एक बेहतर उपकरण साबित हो सकती है, जिससे वे अपनी फसल को सही पोषण देकर बेहतर मुनाफा कमा सकें। NPK Fertilizers

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने मानी नर पिशाच एपस्टीन से मिलने की बात

संसद में बोलते हुए केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने मान लिया कि उन्होंने जेफरी एपस्टीन से मुलाकात की थी, साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि लेकिन यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट (IPI) के एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहते हुए हुई थी। यह घटनाक्रम 2009 का है, जब वह न्यूयॉर्क में भारत के राजदूत थे।

केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar11 Feb 2026 06:26 PM
bookmark

National News : भारत सरकार के मंत्री हरदीप पुरी ने एक बड़ा सच उजागर किया है। केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने यह बात मान ली है कि उनकी मुलाकात चर्चित नरपिशाच जेफरी एपस्टीन के साथ हुई थी। हरदीप पुरी ने जेफरी एपस्टीन के साथ मुलाकात की बात स्वीकार करते हुए बताया कि एपस्टीन के साथ उनकी अनेक मुलाकात हुईं थीं।

हरदीप पुरी ने संसद में मान ली मुलाकात की बात

संसद में बोलते हुए केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने मान लिया कि उन्होंने जेफरी एपस्टीन से मुलाकात की थी, साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि लेकिन यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट (IPI) के एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहते हुए हुई थी। यह घटनाक्रम 2009 का है, जब वह न्यूयॉर्क में भारत के राजदूत थे। उन्होंने कहा, "यह सारे तथ्य पब्लिक डोमेन में हैं। लगभग तीन मिलियन ईमेल सार्वजनिक हैं। आठ साल बाद मैं मंत्री बना। आठ साल के दौरान 3-4 मुलाकातों का जिक्र है।"  उन्होंने आगे कहा कि मैंने राहुल गांधी को भेजे गए नोट्स में भी यह बताया था कि जब मैं संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दूत के तौर पर रिटायर हुआ था तब मुझे अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट में आमंत्रित किया गया था। मैं इंडिपेंडेंट कमीशन का जनरल सेक्रेटरी था। तब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री इस संस्थान के प्रमुख थे और वह एपस्टीन को जानते थे। तभी मेरी मुलाकातें केवल एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होने के नाते हुई थीं और इसका किसी आरोप या विवाद से कोई संबंध नहीं है।

हरदीप पुरी ने ई-मेल पर दिया जवाब

केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने संसद में कहा कि एपस्टीन से जुड़े केवल एक-दो ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था। उन्होंने बताया कि उनके एक संपर्क ने उन्हें लिंक्डइन के रीड हॉफमैन से मिलवाया था। पुरी ने कहा, "मैंने उस ईमेल में लिखा था कि भारत इंटरनेट आधारित आर्थिक गतिविधियों के लिए शानदार अवसर प्रस्तुत करता है। मैंने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का भी जिक्र किया था। जब मैंने यह लिखा, तब मैं एक निजी नागरिक था, सरकारी अधिकारी नहीं।" पुरी ने दोहराया कि एपस्टीन से उनकी मुलाकात केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के तहत हुई थी और इसका किसी भी प्रकार के आरोपों से कोई संबंध नहीं है।

कौन है नए पिशाच जेफरी एपस्टीन

पूरी दुनिया में जेफरी एपस्टीन नर पिशाच के नाम से कुख्यात हो चुका है। जेफरी एपस्टीन अमेरिका का रहने वाला है। हाल ही में अमेरिका में एपस्टीन फाइल्स के नाम से फिल्म प्रदर्शित हुई है। इस फिल्म पर पूरी दुनिया में बवाल मचा हुआ है। जेफरी एपस्टीन का मामला सबसे पहले वर्ष-2008 से जुड़ा हुआ है।  दरअसल, 2008 में एक 14 साल की लडक़ी के माता-पिता ने पुलिस को बताया था कि जेफऱी एपस्टीन ने उनकी बेटी के साथ उनके पाम बीच वाले घर पर यौन हिंसा हुई। घर में कई लड़कियों की तस्वीरें मिलीं। एपस्टीन को नाबालिगों से सेक्स वर्क करवाने के लिए दोषी ठहराया गया और सेक्स अपराधी के रूप में रजिस्टर किया गया। इसके बाद एपस्टीन ने फ़्लोरिडा में अभियोजकों से एक समझौता किया, इसकी वजह से उसे ज़्यादा जेल नहीं हुई। 11 साल बाद 2019 में उस पर फिर आरोप लगा कि वह नाबालिग लड़कियों का सेक्स के लिए नेटवर्क चला रहा था। जेल में ट्रायल का इंतज़ार करते हुए उसकी मौत हो गई, जिसे सुसाइड बताया गया। इन दोनों जांचों में बहुत सारे दस्तावेज़ जमा हुए, जैसे पीड़ितों और गवाहों के बयान, उसके घरों पर छापे में मिली चीज़ें। 2025 के न्याय विभाग के एक मेमो के मुताबिक़, इस मामले में एफ़बीआई के पास 300 गीगाबाइट (जीबी) से ज़्यादा डेटा और सबूत हैं। न्याय विभाग कहता है कि इनमें पीड़ितों की बहुत सारी तस्वीरें और वीडियो हैं, जो बच्चों के शोषण से जुड़ी हुई हैं। इन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, क्योंकि नया क़ानून सर्वाइवर की पहचान छिपाने की इजाज़त देता है। यही जानकारी एपस्टीन फ़ाइल्स हैं, जो समय-समय पर जारी हो रही हैं। एपस्टीन की ब्रिटिश साथी और पूर्व प्रेमिका गि़स्लेन मैक्सवेल पर भी अलग जांच हुई। उसे 2021 में एपस्टीन के साथ मिलकर लडिक़यों का यौन व्यापार करने का दोषी ठहराया गया।

एपस्टीन फ़ाइल्स के 30 लाख दस्तावेज जारी

एपस्टीन फ़ाइल्स से जुड़े 30 लाख नए दस्तावेज़ जारी किए गए हैं। कुछ सामग्री पहले ही सार्वजनिक हो चुकी है, जिनमें तस्वीरें भी शामिल हैं। इससे पहले कमिटी से एपस्टीन की संपत्ति के हज़ारों दस्तावेज़ आए, जिनमें ज़्यादातर ईमेल थे। सितंबर 2025 में एक बर्थडे बुक जारी हुई, जिसमें ट्रंप के नाम वाला एक नोट था। हालांकि, ट्रंप ने यह नोट लिखने से इनकार किया। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के कुछ हफ़्तों बाद ही फऱवरी 2025 में न्याय विभाग और एफ़बीआई ने एपस्टीन फ़ाइल्स का पहला चरण जारी किया। कुछ दक्षिणपंथी प्रभावशाली लोगों को व्हाइट हाउस बुलाया गया, लेकिन उन्हें सिर्फ़ 341 पेज मिले, जो ज़्यादातर पहले से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थे। इसमें एपस्टीन के प्लेन के उड़ान रिकॉर्ड और उसके किससे संपर्क रहे, यह बताया गया। लेकिन इसमें से भी कुछ नाम छिपाए गए। अमेरिकी संसद में वोट एक डिस्चार्ज पिटीशन से हुआ, जिसमें 218 सांसदों के हस्ताक्षर ज़रूरी थे। चार रिपब्लिकन और सभी 214 डेमोक्रेट ने हस्ताक्षर किए। 18 नवंबर को वोटिंग हुई और हाउस में 427-1 से बिल पास हुआ। लुइसियाना के रिपब्लिकन सांसद क्ले हिगिंस इकलौते ऐसे शख़्स थे जिन्होंने इसका विरोध किया जबकि कुछ सांसद वोट नहीं डाल पाए। हाउस के बाद सीनेट में बिना विरोध के यह पास हुआ और ट्रंप ने हस्ताक्षर किए। इस प्रक्रिया के बाद भी फ़ाइलों का पूरी तरह से रिलीज़ होना मुश्किल है। अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी के पास अधिकार है कि वे किसी भी जानकारी को रोक सकती हैं, जो जांच को नुकसान पहुंचाए या पीडि़तों की पहचान बताए। क़ानून में कहा गया है कि व्यक्तिगत जानकारी को रोका या छिपाया जा सकता है जो 'साफ़ तौर पर निजता में अनुचित तौर पर हस्तक्षेप' करे। National News



संबंधित खबरें