स्थिति बिगड़ने से पहले ही दरभंगा प्रशासन ने मोर्चा संभालते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है और मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाकर कानून-व्यवस्था पर चौकसी बढ़ा दी गई है, ताकि अफवाहों और उकसावे की किसी भी कोशिश को समय रहते रोका जा सके।

Bihar News : बिहार के दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान प्रखंड का हरिनगर गांव इन दिनों प्रशासन की कड़ी निगरानी में है, जहां जातीय तनाव की सुलगती चिंगारी ने हालात को संवेदनशील बना दिया है। हैरानी की बात यह है कि कुछ रुपये की बकाया मजदूरी से उठा छोटा-सा विवाद अब सामाजिक तनाव की शक्ल ले चुका है। स्थिति बिगड़ने से पहले ही दरभंगा प्रशासन ने मोर्चा संभालते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है और मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाकर कानून-व्यवस्था पर चौकसी बढ़ा दी गई है, ताकि अफवाहों और उकसावे की किसी भी कोशिश को समय रहते रोका जा सके।
हाल के दिनों में यह चर्चा तेज हुई कि दरभंगा पुलिस ने पूरे ब्राह्मण गांव पर एफआईआर दर्ज कर दी है। लेकिन बिरौल के एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी ने इसे सिरे से खारिज करते हुए साफ कहा कि यह महज एक अफवाह है। उनके मुताबिक, करीब 3 हजार आबादी वाले गांव में 70 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि करीब 150 अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है। प्रशासन ने यह भी भरोसा दिलाया है कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी निर्दोष पर कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी। जांच के दौरान अब तक 6 लोगों के नाम एफआईआर से हटाए जा चुके हैं, क्योंकि घटना के वक्त उनके गांव में मौजूद न होने की पुष्टि हुई है। पुलिस अब वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान में जुटी है।
गांव का माहौल सामान्य करने के लिए बिरौल के एसडीएम शशांक राज और एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी ने ग्रामीणों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ शांति समिति की बैठक की। बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि लोग सोशल मीडिया या गांव में फैल रही किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और शांति बनाए रखें। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए गांव में तीन शिफ्टों में मजिस्ट्रेट और पुलिस बल का पहरा लगा दिया गया है। फिलहाल स्थिति शांत बताई जा रही है, लेकिन तनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन सतर्क है और हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है।
जानकारी के मुताबिक विवाद की जड़ 30 जनवरी की सुबह से जुड़ी है। कैलाश पासवान ने हेमकांत झा की बहन के मकान निर्माण से जुड़ी बकाया मजदूरी मांगी थी। बताया जा रहा है कि यह राशि करीब चार वर्षों से लंबित थी। रास्ते में रोककर मजदूरी मांगने के दौरान शुरू हुई कहासुनी देखते-देखते हिंसा में बदल गई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता चला गया। Bihar News