दिल्ली-UP बॉर्डर पर ‘सीरियल किलर’ तांत्रिक का खौफनाक खेल

तांत्रिक कमरुद्दीन द्वारा इलाज के नाम पर कम से कम 8 लोगों की हत्या का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में पता चला है कि वह जहरीले लड्डू और रूहानी सर्जरी का इस्तेमाल कर लोगों को शिकार बनाता था। दिल्ली की नेहा नामक महिला अपने पति की सतर्कता के कारण मौत से बच गई।

Serial killer tantrik
पति की एक होशियारी ने बचाई महिला की जान (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar21 Feb 2026 07:32 PM
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Tantric Creepy Game : दिल्ली और गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर पर सक्रिय एक ऐसे ‘सीरियल किलर’ तांत्रिक का पर्दाफाश हुआ है, जो इलाज के नाम पर लोगों को मौत के घाट उतार रहा था। पुलिस जांच में सामने आया है कि तांत्रिक कमरुद्दीन ने अब तक कम से कम 8 लोगों की जान ली है। पीरागढ़ी में तीन लोगों की संदिग्ध मौत के बाद शुरू हुई जांच ने इस खौफनाक गैंग के राज़ को खोल दिया है। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली कहानी 35 वर्षीय नेहा की है, जो तांत्रिक के जाल से बाल-बाल बची है।

वो 7 लड्डू जो बन सकते थे मौत का कारण

सुलतानपुर की रहने वाली नेहा पिछले साल चक्कर आने की समस्या से परेशान थीं। जब मेडिकल रिपोर्ट्स सामान्य आईं, तो एक परिचित ने उन्हें लोनी स्थित तांत्रिक कमरुद्दीन के पास ले जाने की सलाह दी। तांत्रिक ने नेहा को देखते ही डरावना दावा किया कि उन पर किसी ने सूअर और मुर्गे का मांस खिलाकर ‘काला जादू’ किया है। इसके बाद उसने नेहा को 7 ‘अभिमंत्रित’ लड्डू दिए और कहा कि उन्हें डॉक्टर की दवा की तरह रोज़ एक-एक लड्डू खाना है। यहीं पर तांत्रिक का खेल पलट गया। नेहा के पति को इस बात पर शक हुआ। उन्होंने बिना देर किए वे सभी लड्डू कूड़े में फेंक दिए और पत्नी को खाने से मना कर दिया। पुलिस का मानना है कि पति की इसी सूझ-बूझ ने नेहा की जान बचा ली, क्योंकि उन लड्डुओं में जहरीला पदार्थ मिलाया गया था।

‘रूहानी सर्जरी’ के नाम पर खौफनाक नाटक

नेहा की आपबीती सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि दूसरी मुलाकात में तांत्रिक ने 8,000 रुपये फीस मांगी और ‘रूहानी सर्जरी’ का डरावना नाटक किया।

  • उसने नेहा को लिटाकर पेट से ‘बुराई’ निकालने का दावा किया।
  • इस दौरान उसने खून से सने धागे और सड़ते हुए मांस के टुकड़े दिखाकर उन्हें डराया।
  • तांत्रिक ने कमरे के भीतर बने एक मजार के चक्कर भी लगवाए।
  • वहां उन्हें एक कोल्ड ड्रिंक पिलाई गई, जिसके बाद उनकी तबियत बिगड़ने लगी।

नेहा किसी तरह वहां से बच निकलीं, लेकिन कई अन्य लोग इतने खुशनसीब नहीं थे।

50 से ज्यादा लोग पुलिस के रडार पर

पुलिस का कहना है कि तांत्रिक कमरुद्दीन का संबंध 2014 के एक मर्डर और पिछले साल हुए डबल मर्डर से भी है। हाल ही में पीरागढ़ी में हुई तीन मौतों के पीछे भी इसी का हाथ माना जा रहा है। पुलिस अब उन 50 से ज्यादा लोगों से संपर्क कर रही है, जिन्होंने पिछले कुछ समय में कमरुद्दीन से मुलाकात की थी। जांच में शक जताया गया है कि कमरुद्दीन पीड़ितों को जहरीला पदार्थ खिलाकर उनकी संपत्ति या अन्य लालच में हत्या करता था।

पुलिस की कार्रवाई और चेतावनी

फिलहाल, लोनी और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम इस ‘सीरियल किलर’ तांत्रिक के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। कमरुद्दीन पुलिस की गिरफ्त में है और उसकी गहराई से पूछताछ जारी है। Tantric Creepy Game

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Tata Punch EV 2026 Facelift: बैटरी, रेंज और कीमत में बड़ा बदलाव

नई पंच ईवी का सबसे बड़़ आकर्षण इसकी कीमत और खरीदने का नया तरीका है। कार की स्टैंडर्ड कीमत 9.69 लाख रुपये से 12.59 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक है। लेकिन, सबसे बड़ी खबर यह है कि अब इसे 'बैटरी एज़ ए सर्विस' (BaaS) के साथ खरीदा जा सकता है।

Tata Punch EV 2026 Facelift
बैटरी में हुआ जबरदस्त अपग्रेड (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar21 Feb 2026 02:19 PM
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Tata Punch EV 2026 Facelift: टाटा मोटर्स ने अपनी सबसे लोकप्रिय इलेक्ट्रिक कार पंच ईवी (Punch EV) का 2026 फेसलिफ्ट मॉडल लॉन्च कर दिया है। इस बार कंपनी ने ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कार की बैटरी, रेंज और चार्जिंग क्षमता में बड़े सुधार किए हैं। डिजाइन से लेकर फीचर्स तक, यह नई कार अपने पुराने मॉडल से काफी अलग और बेहतर नज़र आ रही है। आइए जानते हैं कि इस नई इलेक्ट्रिक कार में क्या खास है।

कीमतों में बड़ा खेल: BaaS के साथ सस्ता विकल्प

नई पंच ईवी का सबसे बड़़ आकर्षण इसकी कीमत और खरीदने का नया तरीका है। कार की स्टैंडर्ड कीमत 9.69 लाख रुपये से 12.59 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक है। लेकिन, सबसे बड़ी खबर यह है कि अब इसे 'बैटरी एज़ ए सर्विस' (BaaS) के साथ खरीदा जा सकता है। इस नए ऑप्शन के साथ, ग्राहक बिना बैटरी खरीदे कार ले सकते हैं, जिससे कार की कीमत घटकर मात्र 6.49 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) हो जाती है। इस स्कीम में ग्राहकों को प्रति किलोमीटर ड्राइविंग के हिसाब से बैटरी की लागत का भुगतान करना होता है। यह उन भारतीय ग्राहकों के लिए एक बेहतरीन मौका है जो पहले इलेक्ट्रिक कार की ऊंची कीमत के कारण हिचकिचाते थे।

बैटरी और रेंज: अब 468 किलोमीटर तक बिना रुके

नए अपडेट का सबसे अहम हिस्सा इसकी बैटरी है। कंपनी ने पुरानी 25 kWh और 35 kWh की बैटरियों को बंद कर दिया है और अब इसमें बड़ी 30 kWh और 40 kWh की बैट्रियां दी जा रही हैं।

इस बदलाव का सीधा फायदा कार की रेंज पर पड़ा है:

  • पहले जहां यह कार 265 किमी और 365 किमी तक चलती थी, वहीं अब इसकी रेंज बढ़कर 375 किमी और 468 किमी हो गई है।
  • यानी दोनों मॉडलों में लगभग 100 किलोमीटर की रेंज बढ़ी है। भारतीय परिस्थितियों को देखते हुए यह एक बहुत जरूरी सुधार है, जो ग्राहकों को लंबी दूरी की यात्रा करने का आत्मविश्वास देगा।

फास्ट चार्जिंग: समय की बचत

नई पंच ईवी की चार्जिंग क्षमता में भी सुधार किया गया है। अब इसमें पहले वाली 50 किलोवाट की जगह 65 किलोवाट की डीसी फास्ट चार्जिंग मिलेगी।

  • इससे बैटरी को 20 से 80 प्रतिशत तक चार्ज होने में लगने वाला समय घटकर सिर्फ 26 मिनट रह गया है। पुराने मॉडल में इसमें 40 से 56 मिनट लगते थे।
  • यह उन ग्राहकों के लिए किफायती साबित होगा जिनके घर पर चार्जिंग की सुविधा नहीं है और जो जल्दी-जल्दी चार्ज करवाना चाहते हैं। वहीं, 7.2 किलोवाट की एसी चार्जिंग पहले जैसी ही है।

फीचर्स और सेफ्टी: पुराना आराम, नए अपडेट्स

फेसलिफ्ट मॉडल में कंपनी ने सेफ्टी फीचर्स को बरकरार रखा है। कार में 6 एयरबैग, ईएसपी, 360-डिग्री कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक जैसे फीचर्स पहले की तरह ही हैं। नए फीचर्स की बात करें तो कंपनी ने इसमें हाई बीम असिस्ट सिस्टम और इंटरफेस में कुछ मामूली बदलाव किए हैं। अगर कोई खरीदार केवल नए फीचर्स के लिए अपग्रेड कर रहा है, तो उसे ज्यादा बड़े बदलाव नहीं मिलेंगे, क्योंकि फेसलिफ्ट का मुख्य फोकस बैटरी और प्रदर्शन पर है। Tata Punch EV 2026 Facelift

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जाने जंगली पौधों से आधुनिक फसलों का सफर की कहानी

खेती ने न सिर्फ भोजन की सुरक्षा दी, बल्कि समाज, व्यापार और संस्कृति को भी जन्म दिया। अनाज को पीसकर आटा बनाना, पकाना ये सब उसी दौर में विकसित हुआ। यहीं से मानव सभ्यताओं की नींव पड़ी और इंसान ने एक खानाबदोश जीवन से निकलकर एक व्यवस्थित समाज का गठन किया।

From hunter to farmer
एमर गेहूं और जौ, प्राचीन खेती के साथी (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar21 Feb 2026 01:15 PM
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The journey from wild plants to modern crops : आज जब हम सुपरमार्केट से बैग भरकर अनाज खरीदते हैं, तो शायद ही कभी सोचते हैं कि इस अनाज की कहानी कहां से शुरू हुई थी। एक समय था जब इंसान के पास न हल था, न बीज बोने की समझ। उसका जीवन जंगलों और शिकार पर टिका था। लेकिन करीब 12 हजार साल पहले एक ऐसा बदलाव आया, जिसने मानव इतिहास की दिशा ही बदल दी। यह वह क्षण था जब एक खानाबदोश शिकारी ने पहली बार धरती खोदी और किसान बना।

आइए जानते हैं कि आखिर धरती पर सबसे पहले कौन-सा अनाज उगाया गया, जिसने सभ्यताओं की नींव रखी।

जंगल से खेत तक का सफर

मानव इतिहास का एक बड़ा हिस्सा भटकने और खाना खोजने में बीता। शुरुआती इंसान जानवरों का शिकार करते और जंगली फल-फूल इकट्ठा कर अपना पेट भरते थे। वे कभी एक जगह टिककर नहीं रहते थे। लेकिन समय के साथ जलवायु में बदलाव आया और इंसान ने एक अहम सच्चाई समझी—बीज बोकर भोजन उगाया जा सकता है। इतिहासकारों के मुताबिक, करीब 12,000 साल पहले 'नवपाषाण काल' (Neolithic Age) में खेती की संगठित शुरुआत हुई, जिससे इंसान ने स्थायी बस्तियां बसानी शुरू कीं।

कहां हुई थी खेती की शुरुआत?

खेती की शुरुआत का श्रेय 'उपजाऊ अर्द्धचंद्र' (Fertile Crescent) क्षेत्र को दिया जाता है। यह क्षेत्र आज के इजराइल, जॉर्डन, सीरिया, तुर्की और इराक के हिस्सों में फैला था। यहां की उपजाऊ मिट्टी और नदियों की मौजूदगी ने खेती के लिए एक आदर्श माहौल दिया।

कौन सा था पहला अनाज?

पुरातत्व शोधों में इस क्षेत्र से सबसे पुराने अनाज के जो प्रमाण मिले हैं, उन्होंने इतिहास का पर्दा खोल दिया। दरअसल, खेती की शुरुआत 'एंकोर्न गेहूं' (Einkorn) और 'एमर गेहूं' (Emmer) से हुई।

  • एंकोर्न (Einkorn): इसे दुनिया की सबसे पुरानी गेहूं प्रजाति माना जाता है।
  • एमर (Emmer): यह भी शुरुआती खेती का एक बड़ा हिस्सा था।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इंसानों ने सबसे पहले जंगली गेहूं के पौधों को पहचाना और फिर उन्हें व्यवस्थित रूप से बोना शुरू किया। इन्हीं प्राचीन किस्मों को विकसित करके बाद में आधुनिक गेहूं का निर्माण किया गया। इसके साथ ही यहां जौ (Barley) की खेती के भी प्राचीन सबूत मिले हैं।

जब इंसान ने सीखी खेती की तकनीक

करीब 9 से 10 हजार साल पहले तक इंसान खेती की बारीकियों को समझ चुका था। उसने बीज बचाना, उन्हें दोबारा बोना और फसल काटने के तरीके सीख लिए थे। खेती की शुरुआत के बाद इंसान का जीवन पूरी तरह बदल गया। अब उसे भोजन की तलाश में लगातार घूमना नहीं पड़ता था। उसने स्थायी घर बनाए और गांव बसाए। The journey from wild plants to modern crops

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