एवरेस्ट का 'डेथ जोन': 8000 मीटर के बाद शुरू होता है जीवन-मृत्यु का संघर्ष

खतरनाक ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन का स्तर समुद्र तल की तुलना में लगभग एक-तिहाई रह जाता है। शरीर को सामान्य कामकाज के लिए जितनी ऑक्सीजन चाहिए, वह यहां उपलब्ध नहीं होती। यही कमी जानलेवा साबित होती है।

Highest peak Mount Everest
जल्दी उतरना ही है एकमात्र इलाज (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar14 Feb 2026 12:58 PM
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Highest peak Mount Everest : दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करना हर पर्वतारोही का सपना होता है, लेकिन इस सपने को पूरा करने के रास्ते में एक ऐसा खतरनाक हिस्सा आता है, जहां सिर्फ इंसान की मेहनत ही नहीं, बल्कि उसकी सांसें भी उसका साथ छोड़ देती हैं। पर्वतारोही इस घातक ऊंचाई को 'डेथ जोन' (मृत्यु क्षेत्र) कहते हैं। यह वह सीमा है, जहां पहुंचकर इंसान का शरीर और दिमाग दोनों जवाब देने लगते हैं।

क्या है डेथ जोन?

विशेषज्ञों के मुताबिक, समुद्र तल से 8,000 मीटर से ऊपर के क्षेत्र को डेथ जोन कहा जाता है। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई करीब 8,848.86 मीटर (29,031.7 फीट) है, जिसे 2020 में नेपाल और चीन ने संयुक्त रूप से अपडेट किया था। इसका मतलब है कि एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने के आखिरी चरण में पर्वतारोहियों को इस खतरनाक जोन से गुजरना पड़ता है। यह कोई आधिकारिक कानूनी शब्द नहीं है, बल्कि माउंटेनियरिंग की दुनिया का एक खौफनाक शब्द है।

ऑक्सीजन का स्तर होता है एक-तिहाई

इस खतरनाक ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन का स्तर समुद्र तल की तुलना में लगभग एक-तिहाई रह जाता है। शरीर को सामान्य कामकाज के लिए जितनी ऑक्सीजन चाहिए, वह यहां उपलब्ध नहीं होती। यही कमी जानलेवा साबित होती है। इस जोन में लंबे समय तक रुकना शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह होता है, क्योंकि यहां सबसे बड़ा खतरा 'हाइपोक्सिया' का होता है—यानी शरीर और खासकर दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंच पाना।

दिमाग और फेफड़ों पर पड़ता है गहरा असर

डेथ जोन में दिमाग तक ऑक्सीजन की कमी से सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है। पर्वतारोहियों को चक्कर आना, भ्रम होना और निर्णय लेने में गलतियां करना आम बात हो जाती है। कई मामलों में यह स्थिति 'हाई एल्टीट्यूड सेरेब्रल एडेमा' (HACE) में बदल जाती है, जिसमें दिमाग में सूजन आ जाती है। इसके लक्षणों में तेज सिरदर्द, उल्टी, लड़खड़ाकर चलना और बेहोशी शामिल हैं। वहीं, दूसरा खतरा 'हाई एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडेमा' (HAPE) है, जिसमें फेफड़ों में तरल पदार्थ भरने लगता है। इससे सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न और लगातार खांसी होती है। अगर तुरंत नीचे उतरा न जाए, तो यह स्थितियां जानलेवा साबित हो सकती हैं।

चढ़ने से ज्यादा उतरना है मुश्किल

विशेषज्ञों का मानना है कि एवरेस्ट पर चढ़ाई से ज्यादा खतरनाक उतरना होता है। ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी के कारण शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म होती है। कई पर्वतारोही चढ़ाई के दौरान अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं, लेकिन वापस उतरते समय उनका शरीर जवाब दे देता है। ऐसे में हर कदम भारी पड़ता है और डेथ जोन में फंसना मौत का कगार बन जाता है। Highest peak Mount Everest

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मोहाली में मंदिर के लिए मुस्लिम व्यक्ति ने दी जमीन, हिंदू ने बनवाई मस्जिद

इस जमीन की अनुमानित कीमत लगभग 80 लाख रुपये बताई जा रही है। स्थानीय हिंदू परिवारों के पास पूजा के लिए कोई स्थायी स्थान नहीं था। जब यह बात इमरान तक पहुंची तो उन्होंने स्वयं आगे बढ़कर अपनी जमीन देने का निर्णय लिया।

mandir masjid
मंदिर मस्जिद का निर्माण
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar14 Feb 2026 01:02 PM
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Ganga-Jamuni Tehzeeb : मोहाली के झामपुर क्षेत्र में मोहम्मद इमरान हैप्पी नाम के एक मुस्लिम नागरिक ने हिंदू समुदाय को मंदिर निर्माण हेतु अपनी 325 गज भूमि दान कर दी। इस जमीन की अनुमानित कीमत लगभग 80 लाख रुपये बताई जा रही है। स्थानीय हिंदू परिवारों के पास पूजा के लिए कोई स्थायी स्थान नहीं था। जब यह बात इमरान तक पहुंची तो उन्होंने स्वयं आगे बढ़कर अपनी जमीन देने का निर्णय लिया। इस अवसर पर पंजाब के शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि राज्य की परंपरा भाईचारे और पारस्परिक सम्मान की रही है, और इसे कोई भी ताकत कमजोर नहीं कर सकती।

संगरूर में हिंदू परिवार ने बनवाई मस्जिद

इसी तरह संगरूर जिले के गांव पुणेवाल में एक हिंदू पंडित परिवार ने मुस्लिम समुदाय के लिए अपनी जमीन पर मस्जिद का निर्माण करवाया। गांव के मुसलमानों के पास नमाज अदा करने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं था। ऐसे में पंडित पाल रामजी और पंडित विजय कुमार ने पहल करते हुए मस्जिद बनवाई और उसे समुदाय को सौंप दिया। इस कदम को गांव और आसपास के क्षेत्रों में सामुदायिक एकता की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

सौहार्द का संदेश

दोनों घटनाएं इस बात को दर्शाती हैं कि सामाजिक सद्भाव केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी विश्वास और सहयोग से उसे व्यवहार में भी उतारा जा सकता है। अलग-अलग धर्मों के लोगों द्वारा एक-दूसरे के धार्मिक स्थलों के निर्माण में सहयोग देना भारतीय समाज की साझा विरासत और एकता की भावना को मजबूत करता है।


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पेट्रोल खर्च की टेंशन हुई खत्म! टाटा कर्व ईवी पर बंपर डिस्काउंट, जानें पूरी डिटेल्स

टाटा मोटर्स की तरफ से दिए जा रहे ऑफर के मुताबिक, फरवरी 2026 में कर्व ईवी सबसे ज्यादा बेनिफिट देने वाली इलेक्ट्रिक कार बनकर उभरी है। कंपनी मॉडल ईयर 2025 वाले Curvv EV पर कुल 3.80 लाख रुपये का डिस्काउंट दे रही है।

Safety Features of Tata Curvv EV
टाटा कर्व ईवी है सस्ता समाधान (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar14 Feb 2026 11:32 AM
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Tata Curvv EV : पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान ग्राहकों के लिए टाटा मोटर्स ने एक बेहतरीन मौका दिया है। अगर आप भी इलेक्ट्रिक कार की तलाश में हैं और बजट से परेशान थे, तो Tata Curvv EV आपके लिए सबसे बढ़िया डील साबित हो सकती है। कंपनी ने इस इलेक्ट्रिक एसयूवी पर भारी छूट का ऐलान किया है, जिससे इसकी पहुंच ग्राहकों के लिए और आसान हो गई है।

3.80 लाख रुपये तक मिल रहा फायदा

टाटा मोटर्स की तरफ से दिए जा रहे ऑफर के मुताबिक, फरवरी 2026 में कर्व ईवी सबसे ज्यादा बेनिफिट देने वाली इलेक्ट्रिक कार बनकर उभरी है। कंपनी मॉडल ईयर 2025 वाले Curvv EV पर कुल 3.80 लाख रुपये का डिस्काउंट दे रही है। वहीं, मॉडल ईयर 2026 के वेरिएंट पर भी खरीदारों को 3.30 लाख रुपये तक की छूट दी जा रही है। इस भारी डिस्काउंट के चलते यह कार अपने सेगमेंट में अभी सबसे सस्ती डील बन गई है।

कीमत का है ये हिसाब

Tata Curvv EV की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 17.49 लाख रुपये से शुरू होती है, जोकि इसके टॉप-स्पेक वेरिएंट तक जाकर 22.24 लाख रुपये तक पहुंचती है। ऐसे में मौजूदा डिस्काउंट ऑफर के बाद इसकी ऑन-रोड कीमत में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है, जो ग्राहकों के लिए जेब पर भारी पड़ सकती है।

केबिन में हुए बदलाव

टाटा ने इस कार के इंटीरियर को और भी प्रीमियम और स्पेशियस बनाया है। कार में पेसिव वेंटिलेशन के साथ R-कंफर्ट सीट्स दी गई हैं, जो आराम का एक नया अहसास देती हैं। इसके अलावा, डैशबोर्ड पर व्हाइट कार्बन-फाइबर-स्टाइल इंसर्ट किया गया है, जो इसे काफी स्टाइलिश लुक देता है। लग्जरी कारों की तर्ज पर पीछे बैठने वाले पैसेंजर्स के लिए 'प्योर कंफर्ट फुटरेस्ट' और 'ErgoWing हेडरेस्ट' जैसी खासियतें भी दी गई हैं।

सेफ्टी के मामले में भी मजबूत

सुरक्षा के मामले में यह कार किसी समझौते से काम नहीं लेती। Tata Curvv EV को भारत NCAP से पूरे 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली है। कार में लेवल-2 एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (Level-2 ADAS) मिलता है। पैसेंजर्स की सुरक्षा के लिए 6 एयरबैग, ब्लाइंड स्पॉट डिटेक्शन और ऑटो होल्ड के साथ इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, रेन सेंसिंग वाइपर्स और 360-डिग्री 3D सराउंड व्यू कैमरा सिस्टम भी ड्राइविंग को और सुरक्षित बनाते हैं। Tata Curvv EV

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