भारत में 124 साल पुरानी ट्रेन, सिग्नल नहीं, हाथ के इशारे पर चलने वाली अनोखी ट्रेन

अंग्रेजों के समय साल 1902 में शुरू हुई थी। यानी यह ट्रेन करीब 124 साल से ज्यादा समय से इस इलाके की सेवा में है। इतने लंबे समय में रेलवे ने कई बदलाव देखे हैं, लेकिन इस छोटी लाइन की पहचान आज भी वैसी ही बनी हुई है।

Unique trains in India
बुंदेलखंड की गलियों तक पहुंचाती है यह ट्रेन (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar13 Feb 2026 01:14 PM
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Trains in India during the British rule : भारतीय रेलवे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल सेवा है, जहां हर दिन हजारों ट्रेनें सिग्नल के हिसाब से अपना सफर तय करती हैं। हरा सिग्नल मिलने पर ट्रेन चल पड़ती है और लाल सिग्नल पर रुक जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसी भी ट्रेन है, जो लाल-हरे सिग्नल के बंधन से मुक्त है? उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में दौड़ती यह ट्रेन न तो किसी बड़े शहर का हिस्सा है और न ही हाईस्पीड, फिर भी अपनी अनोखी पहचान के कारण यह रेलवे के इतिहास में एक अलग अध्याय लिखती है।

हाथ के इशारे पर रुकती है ट्रेन

जालौन जिले के एट जंक्शन से कोंच के बीच चलने वाली यह ट्रेन अपनी खास पहचान के लिए जानी जाती है। इसे रोकने के लिए यात्रियों को किसी स्टेशन या सिग्नल का इंतजार नहीं करना पड़ता। अगर कोई व्यक्ति ट्रैक के पास या प्लेटफॉर्म पर खड़ा होकर हाथ का इशारा करता है, तो ट्रेन उसे लेने के लिए रुक जाती है। यह लचीलापन इस ट्रेन को अन्य ट्रेनों से अलग बनाता है। स्थानीय लोग इसे प्यार से 'अड्डा' कहकर बुलाते हैं।

124 साल से ज्यादा पुराना है इतिहास

यह सेवा अंग्रेजों के समय साल 1902 में शुरू हुई थी। यानी यह ट्रेन करीब 124 साल से ज्यादा समय से इस इलाके की सेवा में है। इतने लंबे समय में रेलवे ने कई बदलाव देखे हैं, लेकिन इस छोटी लाइन की पहचान आज भी वैसी ही बनी हुई है।

किसानों और छात्रों की जीवनरेखा

महज तीन डिब्बों वाली इस ट्रेन की औसत रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह 13 किलोमीटर का सफर करीब 40 मिनट में पूरा करती है। बुंदेलखंड जैसे इलाके में, जहां गांव दूर-दूर बसे हैं, यह ट्रेन रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। यहां के किसान अपनी उपज लेकर बाजार इसी ट्रेन से पहुंचते हैं, तो वहीं छोटे व्यापारी और विद्यार्थी भी इसी पर निर्भर रहते हैं। यह ट्रेन सिर्फ एक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की जीवनरेखा के रूप में अपनी सेवा निभा रही है। Trains in India during the British rule

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बड़े पैमाने पर हुए I A S अधिकारियों के तबादले, 11 अधिकारी बदले गए

उत्तराखंड सरकार ने देर शाम प्रशासनिक महकमे में बड़ा कदम उठाते हुए आईएएस-पीसीएस समेत 11 अधिकारियों के तबादले कर दिए। इस सूची में एक जिलाधिकारी का बदलाव भी शामिल है। आदेश जारी होते ही शासन-प्रशासन के गलियारों में हलचल तेज हो गई है और नई जिम्मेदारियों के मुताबिक अफसरों की तैनाती शुरू हो गई है।

उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Feb 2026 12:56 PM
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Uttarakhand News : उत्तराखंड की नौकरशाही में देर शाम बड़ा प्रशासनिक री-शफल देखने को मिला है। उत्तराखंड सरकार ने देर शाम प्रशासनिक महकमे में बड़ा कदम उठाते हुए आईएएस-पीसीएस समेत 11 अधिकारियों के तबादले कर दिए। इस सूची में एक जिलाधिकारी का बदलाव भी शामिल है। आदेश जारी होते ही शासन-प्रशासन के गलियारों में हलचल तेज हो गई है और नई जिम्मेदारियों के मुताबिक अफसरों की तैनाती शुरू हो गई है। जारी आदेश के अनुसार रुद्रप्रयाग के डीएम प्रतीक जैन को गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) का प्रबंध निदेशक बनाया गया है। वहीं आईएएस विशाल मिश्रा को रुद्रप्रयाग का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही प्रतीक जैन को निगम के एमडी पद के अलावा जल जीवन मिशन के मिशन निदेशक और नमामि गंगे के परियोजना निदेशक की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

कई विभागों में बदली गई जिम्मेदारियां

तबादला सूची में अलग-अलग विभागों में भी अहम फेरबदल किए गए हैं -

  1. संजय कुमार को निदेशक सेवायोजन का अतिरिक्त प्रभार मिला है।
  2. एमडी सिडकुल डॉ. सौरभ गहरवार को अपर सचिव उद्योग की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।
  3. नरेंद्र सिंह भंडारी को अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पर्यटन बनाया गया है।
  4. विनोद गिरी गोस्वामी को अपर सचिव आवास के साथ मुख्य कार्यपालक अधिकारी, भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण नियुक्त किया गया है।
  5. गिरधारी सिंह रावत को अपर सचिव अल्पसंख्यक कल्याण,
  6. सुरेश जोशी को अपर सचिव जनगणना,
  7. कवीन्द्र सिंह को अपर सचिव कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
  8. त्रिलोक सिंह को एमडी शुगर मिल बनाया गया है।

हल्द्वानी सिटी मजिस्ट्रेट की कुर्सी पर बाजपेयी की वापसी

हल्द्वानी में भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसला हुआ है। लंबे समय तक सिटी मजिस्ट्रेट रहे अब्ज प्रसाद बाजपेयी को एक बार फिर हल्द्वानी का सिटी मजिस्ट्रेट बनाया गया है। कुछ माह पहले उनके तबादले के बाद गोपाल चौहान को यह जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन अब शासन ने फिर से बाजपेयी को उसी पद पर तैनात कर दिया है। वहीं कमलेश मेहता को एसडीएम टिहरी नियुक्त किया गया है। गौरतलब है कि उत्तराखंड में इससे पहले अक्तूबर में भी व्यापक प्रशासनिक फेरबदल किया गया था। तब सरकार ने 22 आईएएस और 21 पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए थे, जिनमें पांच जिलों के डीएम सहित कई एडीएम-एसडीएम भी शामिल थे। अब ताजा सूची में 11 अधिकारियों के तबादले ने फिर से प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। Uttarakhand News

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सेवा तीर्थ बना सत्ता का नया पावर सेंटर, जानिए PMO के नए दफ्तर की खास बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शुक्रवार) शाम नए प्रधानमंत्री कार्यालय की इमारत सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन करेंगे। बता दें कि इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय का प्रमुख कामकाज धीरे-धीरे साउथ ब्लॉक से हटकर इसी नए परिसर से संचालित होगा।

PMO के नए दफ्तर की झलक
PMO के नए दफ्तर की झलक
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar13 Feb 2026 10:48 AM
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Seva Teerth : देश की सत्ता और प्रशासन का सबसे अहम केंद्र अब नए पते पर शिफ्ट होने जा रहा है। शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का संचालन ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक के बजाय दिल्ली के दारा शिकोह रोड पर बने नए परिसर सेवा तीर्थ से होगा। करीब 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला यह परिसर नीति-निर्णय की गति, सुरक्षा समन्वय और प्रशासनिक कामकाज को एक छत के नीचे लाने के मकसद से तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शुक्रवार) शाम नए प्रधानमंत्री कार्यालय की इमारत सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन करेंगे। बता दें कि इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय का प्रमुख कामकाज धीरे-धीरे साउथ ब्लॉक से हटकर इसी नए परिसर से संचालित होगा। सेवा तीर्थ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) को भी जगह दी गई है। पहले ये प्रमुख संस्थान अलग-अलग स्थानों पर थे, जिससे उच्चस्तरीय बैठकों और समन्वय में समय लगता था। अब इसी परिसर में कैबिनेट मीटिंग आयोजित करना भी ज्यादा सहज हो जाएगा।

कितना खर्च आया और क्या है ढांचा?

प्रधानमंत्री कार्यालय को ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट करने के पीछे मकसद सिर्फ पता बदलना नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की रफ्तार और व्यवस्था को नया ढांचा देना बताया जा रहा है। इससे प्रधानमंत्री के आवागमन को ज्यादा सुव्यवस्थित रखने के साथ-साथ विजय चौक और आसपास के इलाकों में बार-बार होने वाली ट्रैफिक असुविधा में भी कमी आने की उम्मीद है। विजय चौक के नजदीक तैयार इस आधुनिक परिसर पर करीब 1,189 करोड़ रुपये की लागत आई है। यहां कामकाज को बेहतर समन्वय के साथ चलाने के लिए तीन प्रमुख भवन बनाए गए हैंसेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) व राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के दफ्तर संचालित होंगे

‘सेवा तीर्थ’ की हाईटेक खूबियां

नए परिसर को भविष्य की सरकारी कार्यसंस्कृति को ध्यान में रखकर पूरी तरह टेक्नोलॉजी-फ्रेंडली रूप में विकसित किया गया है। यहां हाई-स्पीड इंटरनेट के साथ पेपरलेस वर्किंग को बढ़ावा देने वाले डिजिटल आर्काइव्स तैयार किए गए हैं, ताकि दस्तावेजों का प्रबंधन तेज और सुरक्षित हो सके। बैठकों के लिए अत्याधुनिक तकनीक से लैस कॉन्फ्रेंस रूम बनाए गए हैं, वहीं सुरक्षा और निगरानी के लिहाज से स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम और मजबूत मॉनिटरिंग नेटवर्क तैनात है। इसके अलावा एडवांस्ड एनर्जी रिस्पॉन्स/इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए पूरे परिसर को ऊर्जा-कुशल और ऑपरेशनल रूप से स्मार्ट बनाया गया है।

साउथ ब्लॉक में आज आखिरी कैबिनेट बैठक

इसी बीच, साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में आज कैबिनेट की आखिरी और ऐतिहासिक बैठक होने जा रही है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। यह भवन करीब 80 वर्षों से देश के शासन का प्रतीक रहा है। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि साउथ ब्लॉक के इसी कार्यालय में 15 अगस्त 1947 को पहली कैबिनेट बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी। अब 13 फरवरी 2026 की बैठक के साथ यह अध्याय समापन की ओर बढ़ेगा और सत्ता का औपचारिक संचालन ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रित हो जाएगा। Seva Teerth

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