कल देश में होने वाला है कुछ बड़ा, खबर पढ़कर ही घर से निकलें बाहर

कल Ola, Uber और Rapido के ड्राइवरों ने देशभर में हड़ताल का ऐलान किया है। इस ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ की वजह से कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ड्राइवर न्यूनतम किराया तय करने और कंपनियों की मनमानी के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।

Ola Uber Rapido Strike
Cab Drivers Strike
locationभारत
userअसमीना
calendar06 Feb 2026 01:29 PM
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अगर आप 7 फरवरी (शनिवार) को कहीं बाहर जाने की योजना बना रहे हैं और Ola, Uber या Rapido जैसी कैब सेवाओं पर निर्भर हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। देशभर के कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी ड्राइवरों ने एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है जिसे उन्होंने ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ नाम दिया है। इस हड़ताल के चलते यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में समय रहते सही जानकारी होना और वैकल्पिक इंतजाम करना बेहद जरूरी हो जाता है।

7 फरवरी को क्यों बुलाई गई है देशव्यापी हड़ताल?

इस हड़ताल की अगुवाई तेलंगाना गिग वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और देश के कई अन्य ड्राइवर संगठनों द्वारा की जा रही है। यूनियन ने साफ तौर पर ऐलान किया है कि 7 फरवरी को ड्राइवर अपने मोबाइल ऐप बंद रखेंगे और काम नहीं करेंगे। ड्राइवरों का आरोप है कि Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियां बिना किसी तय नियम के किराया और कमीशन तय कर रही हैं जिससे उनकी आमदनी लगातार घटती जा रही है।

ड्राइवरों का कहना है क्या?

ड्राइवरों के अनुसार, सरकार की तरफ से न्यूनतम किराया तय नहीं होने का सीधा फायदा कंपनियां उठा रही हैं। मनमाने कटौती, बढ़ता कमीशन और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने ड्राइवरों के लिए घर चलाना मुश्किल कर दिया है। इसी को लेकर यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया है।

कैब ड्राइवरों की प्रमुख मांगें

ड्राइवर संगठनों की सबसे बड़ी मांग है कि ऑटो, टैक्सी और बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए सरकार द्वारा न्यूनतम किराया तय किया जाए और यह फैसला ड्राइवरों से बातचीत के बाद ही लिया जाए। इसके अलावा, यूनियन चाहती है कि सफेद नंबर प्लेट वाली निजी गाड़ियों के कमर्शियल इस्तेमाल पर रोक लगे या उन्हें पूरी तरह कमर्शियल श्रेणी में बदला जाए। साथ ही, ऐप-आधारित कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं।

यात्रियों पर क्या पड़ेगा असर?

इस हड़ताल का सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ेगा। Ola, Uber और Rapido जैसे ऐप्स पर गाड़ियां मिलना बेहद मुश्किल हो सकता है। कुछ शहरों में सेवाएं पूरी तरह ठप रह सकती हैं जबकि कुछ जगहों पर सीमित संख्या में वाहन उपलब्ध हो सकते हैं। अगर कैब मिल भी गई तो हाई डिमांड के कारण किराया सामान्य से काफी ज्यादा हो सकता है। इसलिए यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे मेट्रो, बस या निजी वाहन जैसे विकल्प पहले से तय कर लें।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी हड़तालें

यह पहली बार नहीं है जब गिग वर्कर्स ने देशव्यापी स्तर पर काम बंद किया हो। हाल ही में 3 फरवरी 2026 को भी गिग वर्कर्स ने सुरक्षा, बेहतर सैलरी और ‘10 मिनट डिलीवरी’ सिस्टम के विरोध में प्रदर्शन किया था। इससे पहले 31 दिसंबर 2025 को लगभग 50,000 वर्कर्स ने काम रोका था और 25 दिसंबर को भी अचानक हड़ताल देखने को मिली थी। मई और जून 2025 में महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में लंबी हड़तालें हो चुकी हैं।

बार-बार हड़ताल की असली वजह क्या है?

ड्राइवरों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह कम होती कमाई और बढ़ता खर्च है। पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं लेकिन कंपनियां ड्राइवरों का कमीशन कम नहीं कर रहीं। साथ ही, ‘10 मिनट डिलीवरी’ जैसे सिस्टम से ड्राइवरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। ड्राइवर चाहते हैं कि सरकार इस सेक्टर में हस्तक्षेप करे और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करे।

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टाटा नेक्सन बनाम किआ सोनेट - सेफ्टी, माइलेज और लुक्स में कौन है बाज़ी मारने वाला?

देश के ऑटोमोबाइल बाजार में कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट की लोकप्रियता इन दिनों आसमान छू रही है। इस सेगमेंट में सबसे कड़ा मुकाबला टाटा मोटर्स की 'नेक्सन' और किआ इंडिया की 'सोनेट' के बीच देखा जा रहा है।

Tata Nexon Vs Kia Sonet
टाटा नेक्सन बनाम किआ सोनेट (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar06 Feb 2026 12:26 PM
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दोनों ही वाहन उन खरीदारों को लुभाने में जुटे हैं जो 4 मीटर से कम लंबाई वाली एसयूवी की तलाश में हैं, जिनमें शक्तिशाली इंजन, आधुनिक फीचर्स और कई वैरिएंट हों। ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि सेफ्टी और स्टाइल के इस मुकाबले में असली चैंपियन कौन है? आइए, जानते हैं इन दोनों गाड़ियों का तुलनात्मक विश्लेषण।

कीमत और वैरिएंट: बजट में कौन भारी?

अगर हम कीमत के पैमाने को देखें, तो किआ सोनेट थोड़ी सस्ती पड़ती है। टाटा नेक्सन स्मार्ट, प्योर, क्रिएटिव और फियरलेस जैसे ट्रिम लेवल में उपलब्ध है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 7.32 लाख रुपये से शुरू होकर 14.15 लाख रुपये तक जाती है। वहीं, किआ सोनेट ग्राहकों को HTE, HTK, HTX, GTX+ और X-Line समेत कुल नौ ट्रिम्स में मिलती है। इसकी बेस वैरिएंट की कीमत 7.30 लाख रुपये है, जो टॉप-स्पेक मॉडल में 13.65 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। कीमत के मामले में दोनों कारें काफी करीब हैं, लेकिन टॉप एंड में नेक्सन थोड़ी महंगी साबित होती है।

परफॉरमेंस: इंजन और पावर

मैकेनिकल रूप से दोनों गाड़ियां अपनी-अपनी जगह मजबूत हैं। टाटा नेक्सन तीन इंजन ऑप्शन के साथ आती है: 1.2-लीटर टर्बो-पेट्रोल (118 hp), 1.2-लीटर टर्बो-पेट्रोल सीएनजी और 1.5-लीटर डीजल (113 hp)। इसमें ग्राहकों को 5-स्पीड/6-स्पीड मैनुअल, 6-स्पीड एएमटी और 7-स्पीड डीसीए ट्रांसमिशन का विकल्प मिलता है। दूसरी ओर, किआ सोनेट में 1.2 लीटर पेट्रोल, 1.0 लीटर टर्बो-पेट्रोल और 1.5 लीटर डीजल के तीन इंजन विकल्प हैं। इसकी खास बात है इसके ट्रांसमिशन ऑप्शन, जिसमें 5-स्पीड/6-स्पीड मैनुअल के अलावा 6-स्पीड आईएमटी (ऑटोमैटिक मैनुअल), 6-स्पीड ऑटोमैटिक और 7-स्पीड डीसीटी शामिल हैं।

माइलेज: कौन देता है ज्यादा औसत?

माइलेज के मामले में किआ सोनेट का पेट्रोल वैरिएंट टाटा नेक्सन से थोड़ा आगे है। सोनेट का पेट्रोल वैरिएंट 19.2 किमी प्रति लीटर का माइलेज देने का दावा करता है, जबकि नेक्सन पेट्रोल का आंकड़ा 17.18-17.44 किमी प्रति लीटर है। डीजल सेगमेंट में दोनों कारें अपनी-अपनी जगह सशक्त हैं। नेक्सन डीजल (एएमटी) 24.08 किमी प्रति लीटर और सोनेट डीजल 24.1 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती हैं। इसके अलावा, नेक्सन सीएनजी वैरिएंट में लगभग 17.44 किमी प्रति किलोग्राम का औसत देती है, जो सीएनजी खरीदारों के लिए अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।

फीचर्स और सेफ्टी: दमदारी कहां है?

यहां दोनों कंपनियों की अलग विचारधारा दिखती है। टाटा नेक्सन 'सुरक्षा' को प्राथमिकता देती है। इसमें कई एयरबैग, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) और ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम जैसे सेफ्टी फीचर्स स्टैंडर्ड के करीब मिलते हैं। इसके अलावा डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट भी शामिल हैं। इसके विपरीत, किआ सोनेट 'लग्जरी और टेक्नोलॉजी' पर फोकस करती है। इसके केबिन में बड़ी टचस्क्रीन, एडवांस्ड कनेक्टेड कार टेक, वेंटिलेटेड सीटें और प्रीमियम ऑडियो सिस्टम जैसे फीचर्स देखने को मिलते हैं। हालांकि, सेफ्टी फीचर्स सोनेट में भी हैं, लेकिन वे अक्सर वैरिएंट के आधार पर अलग-अलग होते हैं।

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पूरे गांव पर केस का दावा निकला गलत, SDPO ने किया बड़ा खुलासा

स्थिति बिगड़ने से पहले ही दरभंगा प्रशासन ने मोर्चा संभालते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है और मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाकर कानून-व्यवस्था पर चौकसी बढ़ा दी गई है, ताकि अफवाहों और उकसावे की किसी भी कोशिश को समय रहते रोका जा सके।

दरभंगा के हरिनगर में कड़ी सुरक्षा
दरभंगा के हरिनगर में कड़ी सुरक्षा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar06 Feb 2026 10:54 AM
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Bihar News : बिहार के दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान प्रखंड का हरिनगर गांव इन दिनों प्रशासन की कड़ी निगरानी में है, जहां जातीय तनाव की सुलगती चिंगारी ने हालात को संवेदनशील बना दिया है। हैरानी की बात यह है कि कुछ रुपये की बकाया मजदूरी से उठा छोटा-सा विवाद अब सामाजिक तनाव की शक्ल ले चुका है। स्थिति बिगड़ने से पहले ही दरभंगा प्रशासन ने मोर्चा संभालते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है और मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाकर कानून-व्यवस्था पर चौकसी बढ़ा दी गई है, ताकि अफवाहों और उकसावे की किसी भी कोशिश को समय रहते रोका जा सके।

पूरे गांव पर FIR वाली बात बेबुनियाद

हाल के दिनों में यह चर्चा तेज हुई कि दरभंगा पुलिस ने पूरे ब्राह्मण गांव पर एफआईआर दर्ज कर दी है। लेकिन बिरौल के एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी ने इसे सिरे से खारिज करते हुए साफ कहा कि यह महज एक अफवाह है। उनके मुताबिक, करीब 3 हजार आबादी वाले गांव में 70 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि करीब 150 अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है। प्रशासन ने यह भी भरोसा दिलाया है कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी निर्दोष पर कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी। जांच के दौरान अब तक 6 लोगों के नाम एफआईआर से हटाए जा चुके हैं, क्योंकि घटना के वक्त उनके गांव में मौजूद न होने की पुष्टि हुई है। पुलिस अब वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान में जुटी है।

अफवाहों पर लगाम लगाने की कोशिश

गांव का माहौल सामान्य करने के लिए बिरौल के एसडीएम शशांक राज और एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी ने ग्रामीणों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ शांति समिति की बैठक की। बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि लोग सोशल मीडिया या गांव में फैल रही किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और शांति बनाए रखें। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए गांव में तीन शिफ्टों में मजिस्ट्रेट और पुलिस बल का पहरा लगा दिया गया है। फिलहाल स्थिति शांत बताई जा रही है, लेकिन तनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन सतर्क है और हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

जानकारी के मुताबिक विवाद की जड़ 30 जनवरी की सुबह से जुड़ी है। कैलाश पासवान ने हेमकांत झा की बहन के मकान निर्माण से जुड़ी बकाया मजदूरी मांगी थी। बताया जा रहा है कि यह राशि करीब चार वर्षों से लंबित थी। रास्ते में रोककर मजदूरी मांगने के दौरान शुरू हुई कहासुनी देखते-देखते हिंसा में बदल गई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता चला गया। Bihar News

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