प्रशांत किशोर की पार्टी SC पहुंची, बिहार चुनाव पर उठाए गंभीर सवाल

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि चुनाव से ठीक पहले और आचार संहिता लागू रहने के दौरान महिलाओं के खातों में सीधे 10,000 रुपये ट्रांसफर किए गए, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान की मूल भावना को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar05 Feb 2026 02:10 PM
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Prashant Kishore : चुनावी रणनीतिकार से सियासत में उतरे प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की प्रक्रिया पर बड़ा सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि चुनाव से ठीक पहले और आचार संहिता लागू रहने के दौरान महिलाओं के खातों में सीधे 10,000 रुपये ट्रांसफर किए गए, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान की मूल भावना को प्रभावित कर सकते हैं। याचिका में कुछ कथित व्यवस्थागत कदमों को भी गलत बताते हुए इन्हें अवैध करार देने और बिहार में नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की गई है।

महिलाओं को 10,000 रुपये ट्रांसफर पर आपत्ति

जन सुराज पार्टी का कहना है कि चुनावी माहौल के बीच महिला मतदाताओं को 10,000 रुपये का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) किया जाना अनुचित है। याचिका में दावा किया गया है कि यह कदम आचार संहिता के प्रभावी रहने के दौरान हुआ, जिससे चुनावी संतुलन प्रभावित हो सकता है। पार्टी की ओर से दाखिल याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट यह घोषित करे कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ना और आचार संहिता लागू रहने के दौरान भुगतान करना गैरकानूनी था। इसमें संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (भ्रष्ट आचरण से संबंधित) के तहत कथित उल्लंघनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव में 25 से 35 लाख महिला वोटर्स को 10,000 रुपये ट्रांसफर किए जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जन सुराज पार्टी ने आरोप लगाया है कि दो चरणों में हुए मतदान के दौरान सेल्फ-हेल्प ग्रुप ‘जीविका’ से जुड़ी करीब 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को पोलिंग बूथ पर तैनात करना अनुचित और अवैध था। पार्टी का तर्क है कि इससे मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

कल्याणकारी घोषणाओं की टाइमिंग पर उठे सवाल

याचिका में चुनाव के दौरान कथित भ्रष्ट आचरणों का हवाला देकर बिहार में फिर से विधानसभा चुनाव कराने की गुजारिश की गई है। साथ ही, पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु (2013) फैसले का उल्लेख करते हुए मुफ्त योजनाओं/डीबीटी/कल्याणकारी घोषणाओं पर व्यापक गाइडलाइंस बनाने और उन्हें लागू कराने की मांग की है। जन सुराज ने यह सुझाव भी दिया है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले सत्ताधारी दलों द्वारा नई मुफ्त योजनाएं, डीबीटी और कल्याणकारी कार्यक्रम लागू करने पर न्यूनतम समय-सीमा तय की जाए और यह अवधि करीब 6 महीने हो ताकि चुनाव प्रभावित न हों और लेवल-प्लेइंग फील्ड बना रहे। Prashant Kishore

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गाजियाबाद सुसाइड केस में बड़ा खुलासा, पिता का दर्द- जुनून ने छीन ली बेटियों की जान

पिता ने सरकार से गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि आज मेरे तीन बच्चे चले गए हैं, कल किसी और के न जाएं। सरकार को इस कोरियन कल्चर और इससे जुड़े कंटेंट पर तुरंत बैन लगाना चाहिए। यह एडिक्शन बच्चों को दीमक की तरह चाट रहा है।

Ghaziabad suicide case
गाजियाबाद सुसाइड केस में पिता ने उगली यह बात (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar05 Feb 2026 01:46 PM
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Gaziabad News : यहां एक आवासीय सोसाइटी में तीन बहनों द्वारा छलांग लगाकर आत्महत्या करने की हृदयविदारक घटना में एक नया और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। मृतकाओं के पिता चेतन गुर्जर ने अपने ऊपर लग रहे भारी कर्ज के आरोपों को खारिज करते हुए इस त्रासदी का जिम्मेदार अपनी बेटियों का 'कोरियन कल्चर' (Korean Culture) के प्रति खतरनाक जुनून बताया है। बता दें कि पिता ने बताया कि बच्चे भारतीय स्कूलों में पढ़ना ही नहीं चाहते थे और लगातार कोरिया जाकर पढ़ाई करने की जिद कर रहे थे। चेतन गुर्जर ने कहा कि भारी कर्ज के चलते बच्चों ने कदम नहीं उठाया। उनकी मौत की असली वजह कोरियन संस्कृति का एडिक्शन है, जिसने उनका दिमाग खा लिया था।

घर में बना था तनाव का माहौल

बता दें कि चेतन गुर्जर ने बताया कि पिछले कई महीनों से उनके घर में कोरियन कल्चर को लेकर तनाव का माहौल था। वह पिछले तीन महीने से बेटियों को समझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वे उनकी एक न सुनती थीं। पिता ने बताया कि बच्चे कहते थे कि हमें कोरिया भेज दो, हम वहीं पढ़ेंगे। स्कूल की टीचर ने भी हमें सलाह दी थी कि एडमिशन कराने से कुछ नहीं होगा, पहले इनके माइंडसेट को चेंज कीजिए।

आभासी दुनिया में कैद थीं बहनें

बता दें कि पिता के मुताबिक, तीनों बहनें कोरियन फिल्मों, म्यूजिक और लाइफस्टाइल की इतनी दीवानी हो गई थीं कि उन्होंने खुद को एक आभासी दुनिया (K-world) में कैद कर लिया था। एडिक्शन का स्तर इतना गहरा था कि जब भी परिजन उनसे मोबाइल छीन लेते थे, वे खाना-पीना छोड़ देती थीं।

मौत वाली रात भी दे रही थीं मोबाइल

बता दें कि चेतन गुर्जर ने आगे खुलासा किया कि जिस रात बच्चियों ने यह आत्मघाती कदम उठाया, उस रात भी वे देर रात 12 बजे तक मोबाइल पर अपने 'के-वर्ल्ड' में ही दिखाई दे रही थीं और बाहर आने को तैयार नहीं थीं। उन्होंने कहा कि बच्चों ने कर्ज के कारण नहीं, बल्कि अपनी इस जिद और मानसिक स्थिति के चलते जान दी।

सरकार से मांग- बैन किया जाए कोरियन कंटेंट

बता दें कि अपनी तीनों संतानों को खो चुके पिता ने सरकार से गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि आज मेरे तीन बच्चे चले गए हैं, कल किसी और के न जाएं। सरकार को इस कोरियन कल्चर और इससे जुड़े कंटेंट पर तुरंत बैन लगाना चाहिए। यह एडिक्शन बच्चों को दीमक की तरह चाट रहा है। Gaziabad News

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एक झड़प के बाद गांव पुरुषों से खाली, बिहार में आखिर ऐसा क्या हुआ?

पुलिस के अनुसार इस मामले में 70 नामजद और करीब 100 से 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। शिकायत के आधार पर SC/ST एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया है।

दरभंगा हिंसा केस
दरभंगा हिंसा केस
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar05 Feb 2026 12:46 PM
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Bihar News : बिहार के दरभंगा के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव में पैसों के लेनदेन से उठा विवाद अब इतना भयावह मोड़ ले चुका है कि गांव के करीब 70 घर पुरुष-खाली हो गए हैं। हिंसक झड़प के बाद गिरफ्तारी की आशंका और तनाव के माहौल ने ऐसा डर पैदा किया कि कई परिवारों के पुरुष घर छोड़कर अज्ञात ठिकानों की ओर निकल गए। हालात की गंभीरता देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर निगरानी बढ़ा दी गई है, लेकिन गांव की गलियों में डर की परछाई अब भी साफ महसूस हो रही है।

गांव में डर का माहौल

हिंसा के बाद से गांव में डर और बेचैनी का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक दुकानें बंद हैं, जरूरी सामान की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है और गांव का सामान्य जीवन लगभग ठप पड़ गया है। गांव की एक महिला ने बताया कि पहले ऐसा कभी नहीं हुआ। हम मिल-जुलकर रहते थे, लेकिन अचानक सब कुछ बदल गया। पुलिस के अनुसार इस मामले में 70 नामजद और करीब 100 से 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। शिकायत के आधार पर SC/ST एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि इसी कानूनी कार्रवाई के डर से कई घरों के पुरुष गांव से बाहर चले गए हैं।

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

पंचायत के मुखिया विमल चंद्र खान ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि 30 जनवरी को घटना के बाद यदि पुलिस तुरंत सख्ती दिखाती, तो 31 जनवरी की बड़ी वारदात रोकी जा सकती थी। वहीं, एसएसपी जगुनाथ रेड्डी ने कहा कि मामले की जांच जारी है और पुलिस तथ्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ गलत कदम नहीं उठाया जाएगा।

2015 की बकाया मजदूरी से शुरू हुआ था विवाद

अशर्फी पासवान की शिकायत के मुताबिक विवाद की जड़ 2015 में घर निर्माण से जुड़ी बकाया मजदूरी है। आरोप है कि पासवान के बेटे विक्रम पासवान ने हेमकांत झा के घर निर्माण की देखरेख की थी, लेकिन करीब 2.5 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया। बताया गया कि 30 जनवरी को जब हेमकांत झा का दामाद गांव आया, तो पासवान ने दोबारा भुगतान की मांग की। इसी पर बहस बढ़ी और अगले दिन 31 जनवरी की रात मामला हिंसक झड़प में बदल गया।

वित्तीय विवाद से भड़की झड़प

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कई लोग लाठी-डंडों और लोहे की छड़ों के साथ घर में घुसे, परिवार के लोगों पर हमला किया, मारपीट की और महिलाओं के साथ बदसलूकी भी की। साथ ही लूटपाट के आरोप भी लगाए गए हैं। बिरौलिया डीएसपी प्रभाकर तिवारी के मुताबिक घटना 31 जनवरी की रात वित्तीय विवाद के कारण हुई। झड़प में 10 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं और अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि आगे की जांच जारी है, गांव में सुरक्षा बढ़ाई गई है और स्थिति तनावपूर्ण जरूर है, लेकिन नियंत्रण में है। Bihar News

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