एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को घेरा

साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने एक अहम निर्णय दिया था। उस फैसले में कहा गया कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण (सब क्लासीफिकेशन) किया जा सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar11 Feb 2026 03:43 PM
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Creamy Layer Scheme for SC/ST Reservations : यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के 2024 के ऐतिहासिक फैसले और उस पर केंद्र सरकार की आगे की कार्रवाई से जुड़ा है। हाल की सुनवाई में अदालत ने सरकार से साफ-साफ पूछा है कि उस फैसले के बाद उसने क्या कदम उठाए हैं, खासकर एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने के सवाल पर। इसी वजह से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

मामला क्या है?

साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने एक अहम निर्णय दिया था। उस फैसले में कहा गया कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण (सब क्लासीफिकेशन) किया जा सकता है। यानी आरक्षण के दायरे में आने वाले अलग-अलग समुदायों के बीच लाभ का बंटवारा संतुलित तरीके से किया जा सकता है, ताकि सबसे वंचित तबकों तक अवसर पहुँच सके। इसी फैसले के दौरान कुछ न्यायाधीशों ने यह भी राय रखी कि जैसे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू है, उसी तरह एससी-एसटी में भी अपेक्षाकृत संपन्न या आगे बढ़ चुके वर्गों को अलग करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि यह तत्काल लागू करने का आदेश नहीं था, बल्कि सरकार को नीति बनाने का संकेत था।

अब सुप्रीम कोर्ट ने क्या पूछा?

हालिया सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि 2024 के फैसले के बाद क्या कोई ठोस नीति, नियम या दिशा-निर्देश बनाए गए हैं? विशेष रूप से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि क्या सरकार एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने पर विचार कर रही है या नहीं। अदालत जानना चाहती है कि सरकार का आधिकारिक रुख क्या है और उसने फैसले के अनुपालन में क्या कार्रवाई की है।

केंद्र सरकार पहले यह कह चुकी है कि संविधान में एससी-एसटी आरक्षण के संदर्भ में क्रीमी लेयर का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। सरकार का तर्क रहा है कि इन वर्गों को ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव के आधार पर आरक्षण दिया गया है, इसलिए आर्थिक मानदंड लागू करना संवैधानिक और सामाजिक दृष्टि से जटिल मुद्दा है। यही कारण है कि सरकार पर एक तरफ अदालत का दबाव है और दूसरी तरफ राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों का संतुलन भी देखना है।

सियासत क्यों गरम है?

यह मुद्दा सीधे तौर पर दलित राजनीति और सामाजिक न्याय की बहस से जुड़ा है।

* कुछ दल और संगठन मानते हैं कि क्रीमी लेयर लागू करने से आरक्षण का लाभ वास्तव में सबसे पिछड़े लोगों तक पहुँचेगा।

* वहीं कई समूहों का तर्क है कि इससे एससी-एसटी आरक्षण की मूल भावना कमजोर हो सकती है, क्योंकि उनका आरक्षण सामाजिक उत्पीड़न के आधार पर है, न कि केवल आर्थिक स्थिति पर। इसी वजह से यह विषय कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है।

आगे क्या हो सकता है?

अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। उसे सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट जवाब देना होगा। संभावित स्थिति यह हो सकती है:

1. सरकार क्रीमी लेयर पर कोई नई नीति बनाए।

2. सरकार साफ कह दे कि वह इसे लागू नहीं करेगी।

3. या फिर मामला दोबारा बड़ी संविधान पीठ के समक्ष विस्तृत सुनवाई के लिए जाए। 

जो भी फैसला होगा, उसका असर देश की आरक्षण नीति और दलित राजनीति दोनों पर दूरगामी हो सकता है।


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मैनुअल या ऑटोमैटिक? कार खरीदने से पहले जानें क्या है बेहतर विकल्प

ऑटोमैटिक कारों में स्मूद गियर शिफ्टिंग के कारण झटके कम लगते हैं। पहाड़ी रास्तों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में कार के पीछे लुढ़कने का खतरा भी कम रहता है। सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से यह तकनीक बेहतर मानी जाती है।

automatic car
ट्रैफिक में राहत चाहिए या ड्राइविंग का मजा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar11 Feb 2026 12:08 PM
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Manual Vs Automatic Car : कार खरीदना हर किसी के लिए एक बड़ा फैसला होता है। यह सिर्फ रंग, डिजाइन या आरामदायक सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि असली निर्णय इस बात पर निर्भर करता है कि कार का ट्रांसमिशन सिस्टम कैसा है। आज के समय में बाजार में मैनुअल और ऑटोमैटिक दोनों विकल्प उपलब्ध हैं। ऐसे में खरीदारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है—कौन-सी कार बेहतर रहेगी?

मैनुअल कार: किफायती और कंट्रोल में बेहतर

मैनुअल ट्रांसमिशन वाली कारें लंबे समय से भारतीय बाजार में लोकप्रिय रही हैं। इनकी कीमत ऑटोमैटिक कारों के मुकाबले करीब ₹1 से ₹2 लाख तक कम होती है। साथ ही, इनका गियरबॉक्स सरल होता है, जिससे रखरखाव का खर्च भी कम आता है।  

मैनुअल कारों का एक बड़ा फायदा बेहतर माइलेज है। अगर ड्राइवर स्मूद तरीके से गाड़ी चलाता है तो ईंधन की बचत अधिक होती है। इसके अलावा, ड्राइवर को गियर पर पूरा नियंत्रण मिलता है, जिससे ओवरटेकिंग या ढलान पर ड्राइविंग में सुविधा होती है। जो लोग ड्राइविंग का असली अनुभव लेना चाहते हैं, उनके लिए मैनुअल कार बेहतर विकल्प मानी जाती है।

हालांकि, शहर के भारी ट्रैफिक में बार-बार क्लच दबाने से थकान महसूस होती है। नए ड्राइवरों के लिए शुरुआत में क्लच और गियर का तालमेल बैठाना मुश्किल हो सकता है। ढलान पर कार के पीछे लुढ़कने का खतरा भी बना रहता है।

ऑटोमैटिक कार: आरामदायक और आसान ड्राइविंग

ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन वाली कारें चलाने में आसान और आरामदायक होती हैं। इनमें क्लच नहीं होता और गियर अपने आप बदलते हैं, जिससे ट्रैफिक में ड्राइविंग काफी सहज हो जाती है। नए ड्राइवरों के लिए यह विकल्प ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है। ऑटोमैटिक कारों में स्मूद गियर शिफ्टिंग के कारण झटके कम लगते हैं। पहाड़ी रास्तों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में कार के पीछे लुढ़कने का खतरा भी कम रहता है। सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से यह तकनीक बेहतर मानी जाती है। लेकिन ऑटोमैटिक कारों की कीमत अधिक होती है। इनके गियरबॉक्स का मेंटेनेंस भी महंगा पड़ सकता है। कई मामलों में माइलेज मैनुअल कारों से थोड़ा कम होता है, हालांकि नई तकनीक के कारण यह अंतर अब पहले से कम हो गया है। Manual Vs Automatic Car 

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जाने सरसों की खेती का परिचय और महत्व

खरीफ फसल की कटाई के बाद एक गहरी जुताई कर 3-4 बार हल चलाकर मिट्टी भुरभुरी बना लें। अंतिम जुताई के समय दीमक नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाएं। बुवाई कतारों में करें।

Mustard cultivation
सरसों की बुवाई का सही समय (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar11 Feb 2026 10:43 AM
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Mustard Cultivation : रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों ने सरसों की बुवाई की तैयारियां तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान शुरुआत से ही वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो सरसों से 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। देश के राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सरसों प्रमुख तिलहनी फसल है, जिसके बीजों में 30 से 48 प्रतिशत तक तेल पाया जाता है।

सही समय और उपयुक्त मिट्टी

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों की खेती शरद ऋतु में की जाती है। इसके लिए 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त रहता है। बलुई दोमट मिट्टी सर्वाधिक उपजाऊ मानी जाती है। फसल हल्की क्षारीय भूमि में अच्छी होती है, लेकिन अम्लीय मिट्टी उपयुक्त नहीं है। बारानी क्षेत्रों में 5 से 25 अक्टूबर तक बुवाई कर लेनी चाहिए।

उन्नत किस्मों का चयन

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान यदि पिछले वर्ष की अच्छी फसल से बचाए गए रोगमुक्त और मोटे दानों का बीज उपचार कर बोएं तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। जिन किसानों के पास अपना बीज नहीं है, वे आरएच-30, टी-59 (वरुणा), पूसा बोल्ड, अरावली (आरएन-393), एनआरसी एचबी 101, एनआरसी डीआर-2 और आरएच-749 जैसी उन्नत किस्मों का चयन कर सकते हैं। इन किस्मों से 20 से 26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दर्ज किया गया है।

खेत की तैयारी और बुवाई का तरीका

खरीफ फसल की कटाई के बाद एक गहरी जुताई कर 3-4 बार हल चलाकर मिट्टी भुरभुरी बना लें। अंतिम जुताई के समय दीमक नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस 1.5 प्रतिशत चूर्ण 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाएं। बुवाई कतारों में करें। कतार से कतार की दूरी 45 सेमी और पौध से पौध की दूरी 20 सेमी रखें। सिंचित क्षेत्र में बीज की गहराई 5 सेमी तक रखें। शुष्क क्षेत्रों में 4-5 किलो तथा सिंचित क्षेत्रों में 3-4 किलो बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है।

बीजोपचार जरूरी

जड़ सड़न से बचाव के लिए फफूंदनाशक से 3-5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचार करें। कीट नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 10 मिली प्रति किलो बीज से उपचारित करें। इसके बाद एजोटोबैक्टर और फॉस्फोरस घोलक जीवाणु खाद से उपचार लाभकारी रहता है।

खाद एवं सिंचाई प्रबंधन

सिंचित फसल के लिए 7-12 टन सड़ी गोबर खाद, 175 किलो यूरिया, 250 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट, 50 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश और 200 किलो जिप्सम प्रति हेक्टेयर बुवाई से पहले मिलाएं। यूरिया की आधी मात्रा बुवाई के समय और शेष पहली सिंचाई के बाद दें। असिंचित क्षेत्रों में उर्वरकों की मात्रा कम रखी जाती है।पहली सिंचाई बुवाई के 35-40 दिन बाद तथा दूसरी दाना बनने की अवस्था में करनी चाहिए।

खरपतवार नियंत्रण

अच्छे उत्पादन के लिए समय पर निराई-गुड़ाई आवश्यक है। बुवाई के तुरंत बाद पेंडीमेथालीन 30 ईसी की 3.3 लीटर मात्रा 800-1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करने से खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि फसल रोग, कीट और खरपतवार से मुक्त रखी जाए और वैज्ञानिक तरीकों का पालन किया जाए तो किसान सरसों से बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। Mustard Cultivation

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