केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने मानी नर पिशाच एपस्टीन से मिलने की बात

संसद में बोलते हुए केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने मान लिया कि उन्होंने जेफरी एपस्टीन से मुलाकात की थी, साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि लेकिन यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट (IPI) के एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहते हुए हुई थी। यह घटनाक्रम 2009 का है, जब वह न्यूयॉर्क में भारत के राजदूत थे।

केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar11 Feb 2026 06:26 PM
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National News : भारत सरकार के मंत्री हरदीप पुरी ने एक बड़ा सच उजागर किया है। केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने यह बात मान ली है कि उनकी मुलाकात चर्चित नरपिशाच जेफरी एपस्टीन के साथ हुई थी। हरदीप पुरी ने जेफरी एपस्टीन के साथ मुलाकात की बात स्वीकार करते हुए बताया कि एपस्टीन के साथ उनकी अनेक मुलाकात हुईं थीं।

हरदीप पुरी ने संसद में मान ली मुलाकात की बात

संसद में बोलते हुए केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने मान लिया कि उन्होंने जेफरी एपस्टीन से मुलाकात की थी, साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि लेकिन यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट (IPI) के एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहते हुए हुई थी। यह घटनाक्रम 2009 का है, जब वह न्यूयॉर्क में भारत के राजदूत थे। उन्होंने कहा, "यह सारे तथ्य पब्लिक डोमेन में हैं। लगभग तीन मिलियन ईमेल सार्वजनिक हैं। आठ साल बाद मैं मंत्री बना। आठ साल के दौरान 3-4 मुलाकातों का जिक्र है।"  उन्होंने आगे कहा कि मैंने राहुल गांधी को भेजे गए नोट्स में भी यह बताया था कि जब मैं संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दूत के तौर पर रिटायर हुआ था तब मुझे अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट में आमंत्रित किया गया था। मैं इंडिपेंडेंट कमीशन का जनरल सेक्रेटरी था। तब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री इस संस्थान के प्रमुख थे और वह एपस्टीन को जानते थे। तभी मेरी मुलाकातें केवल एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होने के नाते हुई थीं और इसका किसी आरोप या विवाद से कोई संबंध नहीं है।

हरदीप पुरी ने ई-मेल पर दिया जवाब

केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने संसद में कहा कि एपस्टीन से जुड़े केवल एक-दो ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था। उन्होंने बताया कि उनके एक संपर्क ने उन्हें लिंक्डइन के रीड हॉफमैन से मिलवाया था। पुरी ने कहा, "मैंने उस ईमेल में लिखा था कि भारत इंटरनेट आधारित आर्थिक गतिविधियों के लिए शानदार अवसर प्रस्तुत करता है। मैंने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का भी जिक्र किया था। जब मैंने यह लिखा, तब मैं एक निजी नागरिक था, सरकारी अधिकारी नहीं।" पुरी ने दोहराया कि एपस्टीन से उनकी मुलाकात केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के तहत हुई थी और इसका किसी भी प्रकार के आरोपों से कोई संबंध नहीं है।

कौन है नए पिशाच जेफरी एपस्टीन

पूरी दुनिया में जेफरी एपस्टीन नर पिशाच के नाम से कुख्यात हो चुका है। जेफरी एपस्टीन अमेरिका का रहने वाला है। हाल ही में अमेरिका में एपस्टीन फाइल्स के नाम से फिल्म प्रदर्शित हुई है। इस फिल्म पर पूरी दुनिया में बवाल मचा हुआ है। जेफरी एपस्टीन का मामला सबसे पहले वर्ष-2008 से जुड़ा हुआ है।  दरअसल, 2008 में एक 14 साल की लडक़ी के माता-पिता ने पुलिस को बताया था कि जेफऱी एपस्टीन ने उनकी बेटी के साथ उनके पाम बीच वाले घर पर यौन हिंसा हुई। घर में कई लड़कियों की तस्वीरें मिलीं। एपस्टीन को नाबालिगों से सेक्स वर्क करवाने के लिए दोषी ठहराया गया और सेक्स अपराधी के रूप में रजिस्टर किया गया। इसके बाद एपस्टीन ने फ़्लोरिडा में अभियोजकों से एक समझौता किया, इसकी वजह से उसे ज़्यादा जेल नहीं हुई। 11 साल बाद 2019 में उस पर फिर आरोप लगा कि वह नाबालिग लड़कियों का सेक्स के लिए नेटवर्क चला रहा था। जेल में ट्रायल का इंतज़ार करते हुए उसकी मौत हो गई, जिसे सुसाइड बताया गया। इन दोनों जांचों में बहुत सारे दस्तावेज़ जमा हुए, जैसे पीड़ितों और गवाहों के बयान, उसके घरों पर छापे में मिली चीज़ें। 2025 के न्याय विभाग के एक मेमो के मुताबिक़, इस मामले में एफ़बीआई के पास 300 गीगाबाइट (जीबी) से ज़्यादा डेटा और सबूत हैं। न्याय विभाग कहता है कि इनमें पीड़ितों की बहुत सारी तस्वीरें और वीडियो हैं, जो बच्चों के शोषण से जुड़ी हुई हैं। इन्हें सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, क्योंकि नया क़ानून सर्वाइवर की पहचान छिपाने की इजाज़त देता है। यही जानकारी एपस्टीन फ़ाइल्स हैं, जो समय-समय पर जारी हो रही हैं। एपस्टीन की ब्रिटिश साथी और पूर्व प्रेमिका गि़स्लेन मैक्सवेल पर भी अलग जांच हुई। उसे 2021 में एपस्टीन के साथ मिलकर लडिक़यों का यौन व्यापार करने का दोषी ठहराया गया।

एपस्टीन फ़ाइल्स के 30 लाख दस्तावेज जारी

एपस्टीन फ़ाइल्स से जुड़े 30 लाख नए दस्तावेज़ जारी किए गए हैं। कुछ सामग्री पहले ही सार्वजनिक हो चुकी है, जिनमें तस्वीरें भी शामिल हैं। इससे पहले कमिटी से एपस्टीन की संपत्ति के हज़ारों दस्तावेज़ आए, जिनमें ज़्यादातर ईमेल थे। सितंबर 2025 में एक बर्थडे बुक जारी हुई, जिसमें ट्रंप के नाम वाला एक नोट था। हालांकि, ट्रंप ने यह नोट लिखने से इनकार किया। ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के कुछ हफ़्तों बाद ही फऱवरी 2025 में न्याय विभाग और एफ़बीआई ने एपस्टीन फ़ाइल्स का पहला चरण जारी किया। कुछ दक्षिणपंथी प्रभावशाली लोगों को व्हाइट हाउस बुलाया गया, लेकिन उन्हें सिर्फ़ 341 पेज मिले, जो ज़्यादातर पहले से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थे। इसमें एपस्टीन के प्लेन के उड़ान रिकॉर्ड और उसके किससे संपर्क रहे, यह बताया गया। लेकिन इसमें से भी कुछ नाम छिपाए गए। अमेरिकी संसद में वोट एक डिस्चार्ज पिटीशन से हुआ, जिसमें 218 सांसदों के हस्ताक्षर ज़रूरी थे। चार रिपब्लिकन और सभी 214 डेमोक्रेट ने हस्ताक्षर किए। 18 नवंबर को वोटिंग हुई और हाउस में 427-1 से बिल पास हुआ। लुइसियाना के रिपब्लिकन सांसद क्ले हिगिंस इकलौते ऐसे शख़्स थे जिन्होंने इसका विरोध किया जबकि कुछ सांसद वोट नहीं डाल पाए। हाउस के बाद सीनेट में बिना विरोध के यह पास हुआ और ट्रंप ने हस्ताक्षर किए। इस प्रक्रिया के बाद भी फ़ाइलों का पूरी तरह से रिलीज़ होना मुश्किल है। अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी के पास अधिकार है कि वे किसी भी जानकारी को रोक सकती हैं, जो जांच को नुकसान पहुंचाए या पीडि़तों की पहचान बताए। क़ानून में कहा गया है कि व्यक्तिगत जानकारी को रोका या छिपाया जा सकता है जो 'साफ़ तौर पर निजता में अनुचित तौर पर हस्तक्षेप' करे। National News



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जनरल नरवणे के मुद्दे पर राहुल गाँधी के पक्ष में आए प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर ने साफ-साफ कहा है कि जनरल नरवणे की किताब वाले मामले में सरकार गलती पर है। प्रशांत किशोर ने साफ-साफ कहा कि राहुल गाँधी ने विपक्ष के नेता की भूमिका को बहुत अच्छी तरह से निभाया है।

राहुल गांधी के समर्थन में प्रशांत किशोर
राहुल गांधी के समर्थन में प्रशांत किशोर
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar11 Feb 2026 05:32 PM
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Prashant Kishore : नए-नए राजनेता बने प्रशांत किशोर राहुल गाँधी के पक्ष में खड़े हो गए हैं। प्रशांत किशोर ने जनरल नरवणे की किताब के मुद्दे पर खुलकर कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी का समर्थन किया है। प्रशांत किशोर ने साफ-साफ कहा है कि जनरल नरवणे की किताब वाले मामले में सरकार गलती पर है। प्रशांत किशोर ने साफ-साफ कहा कि राहुल गाँधी ने विपक्ष के नेता की भूमिका को बहुत अच्छी तरह से निभाया है। 

प्रशांत किशोर ने बताया कि जनता सरकार के साथ विपक्ष को भी चुनती है

जनरल नरवणे की किताब के मुद्दे पर पत्रकारों से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जब भी चुनाव होता है जनता सिर्फ सत्ता पक्ष का चुनाव नहीं करती है बल्कि विपक्ष का भी चुनाव करती है। राहुल गांधी से आपका सरोकार हो या ना हो लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि विपक्ष के नेता को बोलने से ना रोका जाए। प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर राहुल गांधी सदन में कुछ बोल रहे थे, अगर सरकार को कुछ गलत लग रहा था तो बोलने के बाद आप उसे हटा देते रिकॉर्ड से। बोलने देने से रोकना मुझे लगता है उचित नहीं है। ये लोकतंत्र के लिए घातक है। प्रशांत किशोर ने कहा कि विपक्ष के नेता को बोलने का अधिकार है। उन्हें रोकना नहीं चाहिए था इस हिसाब से सरकार की गलती है। 

किताब के संदर्भ में उचित बताया

जनरल मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंश पढ़े जाने के मुद्दे पर प्रशांत किशोर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किताब पहले से मौजूद है तभी तो उन्होंने कोट किया है। सदन में जो राहुल गांधी बोल रहे वो किताब के हवाले से नहीं एक मैगजिन में छपे एक आर्टिकल के हवाले से बोले रहे थे जिसमें उस किताब का संदर्भ दिया गया था। Prashant Kishore


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मोहम्मद दीपक को सरकार का बुलावा, चर्चा में है पूरा सच

इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि मानवता के पक्ष में खड़ा हुआ मोहम्मद दीपक नाम का यह युवक बेहतरीन काम करके भी बड़ी मुश्किल में फंस गया है। पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका दीपक बड़ी आर्थिक तंगी में फंस गया है। अब एक प्रदेश की सरकार ने मोहम्मद दीपक को बुलावा भेजा है।

मोहम्मद दीपक
मोहम्मद दीपक
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar11 Feb 2026 05:22 PM
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Mohammad Deepak : दीपक के नाम से मोहम्मद दीपक बने उत्तराखंड के युवक का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। मोहम्मद दीपक के नाम से प्रसिद्ध हो चुका यह युवक मानवता की सेवा करने की मिसाल बन चुका है। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि मानवता के पक्ष में खड़ा हुआ मोहम्मद दीपक नाम का यह युवक बेहतरीन काम करके भी बड़ी मुश्किल में फंस गया है। पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन चुका दीपक बड़ी आर्थिक तंगी में फंस गया है। अब एक प्रदेश की सरकार ने मोहम्मद दीपक को बुलावा भेजा है।

सरकार के मंत्री ने भेजा मोहम्मद दीपक को बुलावा

खबर फैल रही है कि अपने आपको मोहम्मद दीपक बताने वाले युवक का जिम का कारोबार ठप्प होने की कगार पर है। मोहम्मद बनने से पहले दीपक के जिम में 150 से ज्यादा सदस्य थे। मोहम्मद बनने की घटना के बाद उसके जिम में कुल 15 सदस्य रह गए हैं। इस कारण दीपक के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। आर्थिक संकट का पता चलने पर झारखंड प्रदेश की सरकार के मंत्री इरफान अंसारी ने मोहम्मद दीपक को झारखंड आने का न्यौता दिया है। इरफान अंसारी झारखंड सरकार में स्वास्थ्य मंत्री हैं। मंत्री का यह न्यौता भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। 

मंत्री ने खुद सोशल मीडिया पर शेयर किया है न्यौते वाला वीडियो

झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया पर खुद एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में इरफान अंसारी मोहम्मद दीपक से बात करते नजर आ रहे हैं। इरफान अंसारी कहते नजर आ रहे हैं कि झारखंड के लोग आपको सम्मान देना चाहते हैं। इसके लिए आग्रह है कि आप झारखंड आएं। इसके जवाब में दीपक ने कहा कि मेरी घर में मम्मी और वाइफ की तबीयत खराब है। आगे देखें वीडियो में क्या बातचीत हुई दोनों के बीच। वीडियो शेयर करते हुए मंत्री ने लिखा कि दीपक (मोहम्मद दीपक) ने झारखंड आने का मेरा निमंत्रण स्वीकार किया है। उनसे हुई भावनात्मक बातचीत ने एक बार फिर यह विश्वास मजबूत किया कि भारत की असली ताकत भाईचारे, इंसानियत और धर्मनिरपेक्षता में है। झारखंड के मंत्री ने आगे लिखा है कि आज जब समाज में नफरत फैलाने की कोशिश हो रही है, दीपक जैसे युवाओं का साहस नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। बजट सत्र के बाद उनका भव्य स्वागत झारखंड में किया जाएगा और मार्च के बाद हजारों लोगों के बीच उनका सम्मान किया जाएगा। मैं देहरादून जाकर उन्हें सम्मानित करूंगा तथा 2,00,000 की सम्मान राशि भेंट करूंगा — यह राशि नहीं, बल्कि मोहब्बत, सद्भाव और एकता का संदेश है। आप भी देखें पूरा वीडियो। 

कौन है मोहम्मद दीपक ?

आपको दीपक कुमार से मोहम्मद दीपक बने युवक का पूरा परिचय दे देते हैं। मोहम्मद दीपक उर्फ दीपक कुमार एक पेशे से जिम ट्रेनर हैं। मोहम्मद दीपक कोटद्वार में बॉडी बिल्डिंग की ट्रेनिंग देते हैं। दीपक का जिम कोटद्वार के बद्रीनाथ मार्ग के पास है। पिछले कई सालों से वह युवाओं को फिट रहने की ट्रेनिंग देते हैं। उनके पिता का देहांत करीब 15 साल पहले हो गया था दीपक शादीशुदा है और उनकी एक बेटी भी है। उनकी मां आज भी कोटद्वार में एक टी स्टॉल चलती हैं। दीपक कुमार पिछले 30 सालों से जिम फिटनेस और जिम ट्रेनिंग का काम कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारो को बताया कि उनका जन्म और पढ़ाई-लिखाई कोटद्वार में ही हुई है। ग्रेजुएशन उन्होंने श्रीनगर गढ़वाल यूनिवर्सिटी से किया। वह बॉडीबिल्डिंग चैंपियनशिप में मुंबई भी जा चुके हैं। बॉडी बिल्डिंग ओलंपियाड में वह टॉप सिक्स में रहे थे। 26 जनवरी 2026 को हुई एक घटना के बाद दीपक के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फॉलोअर्स की बाढ़ आ गई है। लगातार लोग उनको फॉलो कर रहे हैं। दीपक कुमार बेहद सामान्य घर से आते। वह न सिर्फ जिम में फिटनेस की ट्रेनिंग देते हैं बल्कि अपने फेसबुक, इंस्टाग्राम से भी ऑनलाइन फिटनेस टिप्स देते हैं।

खुद को मोहम्मद दीपक बताते हुए बन गए चर्चा का विषय

दीपक कुमार ने क्यों मोहम्मद दीपक नाम अपना बताया। इसके पीछे की कहानी यह है कि 26 जनवरी 2026 को कोटद्वार में एक दुकान के नाम को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। क्योंकि इस दुकान का नाम बाबा स्कूल गारमेंट्स था। हिंदूवादी संगठनों का कहना था कि मुस्लिम दुकानदार बाबा नाम नहीं रख सकता, क्योंकि बाबा नाम हिंदुओं से जुड़ा है। इसके पीछे की वजह वे लोग कोटद्वार के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर जिनका नाम सिद्धबली बाबा से जोड़ रहे थे। ऐसे में वकील अहमद नाम के मुस्लिम दुकानदार ने कहा कि उनकी दुकान पिछले 30 साल पुरानी है। वह कोटद्वार में पिछले 30 साल से कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में किसी ने भी बाबा नाम शब्द पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई। उन्होंने कहा कि बाबा नाम सभी धर्मों में लिया जाता है। इसका सिद्धबली बाबा से कोई लेना-देना नहीं। इसी दौरान दीपक कुमार उर्फ मोहम्मद दीपक वकील अहमद के बचाव में आए और उन्होंने बजरंग दल और हिंदूवादी संगठन के लोगों से बातचीत की, लेकिन इस दौरान मामला गंभीर हो गया। इस बहस में दीपक कुमार ने हिंदूवादी संगठन और बजरंग दल के लोगों के सवाल पूछे जाने पर कहा कि मेरा नाम मोहम्मद दीपक है और यही नाम 26 जनवरी 2026 से देशभर में ट्रोल कर रहा है। इस पर सोशल मीडिया पर रील भी बन रही हैं। दीपक कुमार से जब पूछा गया कि आप ने क्या सोचकर मोहम्मद दीपक नाम लिया और क्या कारण था कि आप उसे भीड़ में बीच बचाव में गए। इस पर उन्होंने कहा कि मैं एक आम इंसान हूं। मैं ना हिंदू हूं ,न मुसलमान, न सिक्ख और न ईसाई। उन्होंने इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म बताया। उन्होंने कहा कि मरने के बाद इंसान के कर्म ही देखे जाते हैं कि उसने कैसा कर्म किया है।

मोहम्मद दीपक ने बताया पूरा सच

दीपक कुमार ने पत्रकारों को बताया कि जब बजरंग दल के 8 से 10 कार्यकर्ता वकील अहमद की दुकान में जब उनका नाम पूछ रहे थे को अचानक से उनकी जुबान पर मोहम्मद दीपक नाम आया। ये नाम बोलने का मकसद बजरंग दल कार्यकर्ताओं को ये बताना था कि वह एक आम इंसान हैं और देश के नागरिक हैं। भारत में सभी को रहने का हक है। किसी एक व्यक्ति को बेवजह टारगेट करना बिल्कुल गलत है। 26 जनवरी 2026 के बाद से दीपक कुमार की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई है। लोग उनको फोन कर रहे हैं। उन्होंने कभी ये सोचा नहीं था कि ये सब हो जाएगा और उनको लोग इतना पसंद करेंगे। वह बेहद सामान्य घर से आते हैं। उनके परिवार का पेट इसी जिम से चलता है। लेकिन इस घटना के बाद जिम का काम भी बंद है। उनकी मां लगातार चाय की दुकान चला रही हैं। Mohammad Deepak

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