सुप्रीम कोर्ट का पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ा संदेश, कर्मचारियों को 25% बकाया डीए देने का निर्देश

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह अपने सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (डीए) के बकाया हिस्से का कम से कम 25 प्रतिशत भुगतान अनिवार्य रूप से करे। कोर्ट ने साफ कहा कि कर्मचारियों का डीए कोई कृपा नहीं, बल्कि उनका वैधानिक अधिकार है।

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ममता बनर्जी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar05 Feb 2026 07:32 PM
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DA Issue : पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह अपने सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (डीए) के बकाया हिस्से का कम से कम 25 प्रतिशत भुगतान अनिवार्य रूप से करे। कोर्ट ने साफ कहा कि कर्मचारियों का डीए कोई कृपा नहीं, बल्कि उनका वैधानिक अधिकार है। यह मामला लंबे समय से राज्य सरकार और कर्मचारियों के बीच विवाद का विषय बना हुआ था। कर्मचारियों की मांग थी कि उन्हें केंद्र सरकार के समान दर पर डीए दिया जाए, जबकि राज्य सरकार लगातार वित्तीय दबाव का हवाला देकर भुगतान टालती रही।

बकाया राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा तय समय सीमा के भीतर जारी किया जाए

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि आर्थिक कठिनाइयाँ कर्मचारियों के हक को नकारने का आधार नहीं बन सकतीं। अदालत ने निर्देश दिया कि बकाया राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा तय समय सीमा के भीतर जारी किया जाए। कोर्ट के इस फैसले से लगभग 20 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। हालांकि, अभी पूरी बकाया राशि नहीं मिलेगी, बल्कि शेष भुगतान के लिए आगे एक व्यवस्थित योजना तैयार की जाएगी।

पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों के लिए भी एक अहम संदेश

फैसले के बाद राज्य की राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की नीतियों पर सवाल उठने वाला फैसला बताया, वहीं कर्मचारी संगठनों ने इसे लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली बड़ी जीत करार दिया है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न सिर्फ पश्चिम बंगाल, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक अहम संदेश माना जा रहा है कि कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ी जिम्मेदारियों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

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इंदौर की 'बेवफा सोनम' के बाद गंगानगर की 'अंजू', शादी के 3 महीने बाद पति की बेरहमी से हत्या

श्रीगंगानगर एसपी अमृतु दुहान ने बताया कि शुरुआती जांच में ही पुलिस को घटना पर संदेह हो गया था। घटनास्थल का निरीक्षण और एफएसएल टीम की जांच से सामने आया कि यह कोई साधारण सड़क दुर्घटना नहीं है। पुलिस को दो बड़े सुराग मिले।

Honeymoon Murder
पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर रची साजिश (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar05 Feb 2026 03:33 PM
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Crime News : राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दुल्हन ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर शादी के महज तीन महीने बाद ही पति की बेरहमी से हत्या कर दी और इसे एक सड़क हादसे (हिट एंड रन) का रूप देने की कोशिश की। पुलिस ने इस मामले को इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड जैसा 'हनीमून मर्डर' बताया है। मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी पत्नी समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना का विवरण

बता दें कि पुलिस के अनुसार, घटना 30 जनवरी की रात करीब 9 बजे की है। रावला थाना क्षेत्र के अनूपगढ़ मार्ग पर आशीष और उसकी पत्नी अंजू बेहोशी की हालत में सड़क किनारे मिले थे। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने आशीष को मृत घोषित कर दिया, जबकि पत्नी अंजू खतरे से बाहर थी। प्रारंभिक सूचना में अंजू ने पुलिस को बताया था कि एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मारी और मौके पर मौजूद लुटेरों ने उसकी सोने की ज्वेलरी लूट ली।

पुलिस को हुआ शक, खुला हत्या का राज

बता दें कि श्रीगंगानगर एसपी अमृतु दुहान ने बताया कि शुरुआती जांच में ही पुलिस को घटना पर संदेह हो गया था। घटनास्थल का निरीक्षण और एफएसएल टीम की जांच से सामने आया कि यह कोई साधारण सड़क दुर्घटना नहीं है। पुलिस को दो बड़े सुराग मिले। पहला, मृतक आशीष के शरीर पर सड़क हादसे के बजाय बेरहमी से पिटाई के निशान थे और सबसे अहम बात उसका गला घोंटा गया था। दूसरा, जहां पति की जान चली गई, वहीं साथ मौजूद पत्नी अंजू को एक खरोंच तक नहीं आई थी।

प्रेमी से चैटिंग ने खोला राज

बता दें कि जब पुलिस ने अंजू के मोबाइल रिकॉर्ड खंगाले, तो सच्चाई सामने आ गई। अंजू सादुलशहर निवासी अपने पुराने प्रेमी संजू के लगातार संपर्क में थी। पूछताछ में अंजू लगातार बयान बदलती रही, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों के सामने उसकी एक न चली और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

ऐसे दिया गया वारदात को अंजाम

बता दें कि पुलिस जांच में सामने आया है कि 23 वर्षीय अंजू अपनी शादी से खुश नहीं थी। उसने अपने प्रेमी संजू के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने की साजिश रची। अंजू कुछ समय पहले अपने मायके सादुलशहर गई थी, जहां उसने संजू और उसके दो साथियों (रॉकी और बादल) के साथ हत्या की प्लानिंग की। अंजू जानती थी कि आशीष डिनर के बाद टहलने जाता है। वारदात की रात वह जानबूझकर उसे एक सुनसान सड़क पर ले गई। पूर्व नियोजित योजना के तहत, झाड़ियों में छिपे संजू और उसके साथियों ने आशीष पर हमला कर दिया। पहले उसे लाठी-डंडों से पीटा गया, फिर गला घोंटकर उसे मार डाला। लूट की झूठी कहानी गढ़ने के लिए अंजू ने अपनी बालियां और फोन भी खुद आरोपियों को सौंप दिए थे।

चारों आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी पत्नी अंजू, उसके प्रेमी संजू, और सहयोगी रॉकी उर्फ रोहित व बादल उर्फ सिद्धार्थ को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है ताकि पूरे मामले का खुलासा किया जा सके। Crime News

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प्रशांत किशोर की पार्टी SC पहुंची, बिहार चुनाव पर उठाए गंभीर सवाल

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि चुनाव से ठीक पहले और आचार संहिता लागू रहने के दौरान महिलाओं के खातों में सीधे 10,000 रुपये ट्रांसफर किए गए, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान की मूल भावना को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar05 Feb 2026 02:10 PM
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Prashant Kishore : चुनावी रणनीतिकार से सियासत में उतरे प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की प्रक्रिया पर बड़ा सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि चुनाव से ठीक पहले और आचार संहिता लागू रहने के दौरान महिलाओं के खातों में सीधे 10,000 रुपये ट्रांसफर किए गए, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान की मूल भावना को प्रभावित कर सकते हैं। याचिका में कुछ कथित व्यवस्थागत कदमों को भी गलत बताते हुए इन्हें अवैध करार देने और बिहार में नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने की मांग की गई है।

महिलाओं को 10,000 रुपये ट्रांसफर पर आपत्ति

जन सुराज पार्टी का कहना है कि चुनावी माहौल के बीच महिला मतदाताओं को 10,000 रुपये का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) किया जाना अनुचित है। याचिका में दावा किया गया है कि यह कदम आचार संहिता के प्रभावी रहने के दौरान हुआ, जिससे चुनावी संतुलन प्रभावित हो सकता है। पार्टी की ओर से दाखिल याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट यह घोषित करे कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ना और आचार संहिता लागू रहने के दौरान भुगतान करना गैरकानूनी था। इसमें संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (भ्रष्ट आचरण से संबंधित) के तहत कथित उल्लंघनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव में 25 से 35 लाख महिला वोटर्स को 10,000 रुपये ट्रांसफर किए जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जन सुराज पार्टी ने आरोप लगाया है कि दो चरणों में हुए मतदान के दौरान सेल्फ-हेल्प ग्रुप ‘जीविका’ से जुड़ी करीब 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को पोलिंग बूथ पर तैनात करना अनुचित और अवैध था। पार्टी का तर्क है कि इससे मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

कल्याणकारी घोषणाओं की टाइमिंग पर उठे सवाल

याचिका में चुनाव के दौरान कथित भ्रष्ट आचरणों का हवाला देकर बिहार में फिर से विधानसभा चुनाव कराने की गुजारिश की गई है। साथ ही, पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु (2013) फैसले का उल्लेख करते हुए मुफ्त योजनाओं/डीबीटी/कल्याणकारी घोषणाओं पर व्यापक गाइडलाइंस बनाने और उन्हें लागू कराने की मांग की है। जन सुराज ने यह सुझाव भी दिया है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले सत्ताधारी दलों द्वारा नई मुफ्त योजनाएं, डीबीटी और कल्याणकारी कार्यक्रम लागू करने पर न्यूनतम समय-सीमा तय की जाए और यह अवधि करीब 6 महीने हो ताकि चुनाव प्रभावित न हों और लेवल-प्लेइंग फील्ड बना रहे। Prashant Kishore

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