सौरमंडल में सबसे लंबा दिन किस ग्रह पर है? जानें यहां

पृथ्वी पर एक दिन 24 घंटे का होता है, लेकिन हमारे सौरमंडल में एक ऐसा रहस्यमयी ग्रह है जहां समय के नियम पूरी तरह से बदल जाते हैं। शुक्र , जिसे पृथ्वी का जुड़वा भी कहा जाता है, सौरमंडल में सबसे लंबे दिन का रिकॉर्ड रखता है। यहां एक दिन की लंबाई एक साल से भी अधिक होती है।

Venus
सौरमंडल में 'सबसे लंबे दिन' (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Feb 2026 01:40 PM
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Venus : वैज्ञानिकों के अनुसार, शुक्र (Venus) ग्रह को अपनी धुरी पर एक पूरा चक्कर (एक दिन) लगाने में लगभग 243 पृथ्वी दिन लग जाते हैं। इसके विपरीत, शुक्र सूर्य के चारों ओर अपनी कक्षा (एक साल) महज 225 दिनों में पूरी कर लेता है। इसका सीधा मतलब यह है कि शुक्र पर एक दिन उससे पहले ही बीत जाता है जब तक कि वहां एक साल पूरा होता है।

सूर्य होता है पश्चिम में उगता

शुक्र की सबसे अनोखी बात यह है कि यह उल्टी दिशा में घूमता है। जहां अधिकतर ग्रह पश्चिम से पूर्व की ओर घूमते हैं, वहीं शुक्र 'रेट्रोग्रेड रोटेशन' (पूर्व से पश्चिम) करता है। नासा के अनुसार, अगर आप कभी शुक्र की सतह पर खड़े होंगे, तो आप सूर्य को पश्चिम में उगते और पूर्व में डूबते हुए देखेंगे।

अन्य ग्रहों की तुलना

शुक्र के बाद सबसे लंबा दिन बुध (Mercury) ग्रह पर होता है, जिसे अपनी धुरी पर घूमने में लगभग 59 दिन लगते हैं। हालांकि, कक्षीय अनुनाद की वजह से वहां एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय के बीच का समय 176 दिन हो जाता है। वहीं, गैस दिग्गज बृहस्पति सबसे तेजी से घूमने वाला ग्रह है, जो महज 10 घंटे में अपना एक दिन पूरा कर लेता है।

क्यों है शुक्र इतना धीमा?

माना जाता है कि शुक्र का घना वायुमंडल और पिछले गुरुत्वाकर्षण अंतःक्रियाओं (gravitational interactions) की वजह से यह धीमी गति से घूमता है। इस धीमी गति और घने वातावरण के चलते यहां दिन और रात बहुत लंबे होते हैं, जबकि खतरनाक ग्रीनहाउस प्रभाव की वजह से सतह का तापमान चरम पर पहुंच जाता है। Venus

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कृषि क्षेत्र में 'जीरो टिलेज' की बढ़ती लोकप्रियता

जीरो टिलेज एक ऐसी कृषि दृष्टिकोण है, जिसमें फसलों की खेती के लिए मिट्टी को जोता या परेशान नहीं किया जाता। इस पद्धति में बीजों को सीधे मिट्टी में बोया जाता है, जिससे जमीन की संरचना बनी रहती है।

Zero Tillage
टिकाऊ खेती के लिए सही निर्णय की आवश्यकता (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Feb 2026 12:44 PM
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Zero Tillage: दुनियाभर के कृषि क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और लागत बचत को लेकर 'जीरो टिलेज' (शून्य जुताई) तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कई देशों के किसान इस पद्धति को अपनाकर पारंपरिक खेती के तरीकों को बदल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक न केवल मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि आर्थिक रूप से भी किसानों को मजबूत बना सकती है, हालांकि इसकी कुछ चुनौतियों से भी निपटना जरूरी है।

जाने जीरो टिलेज के बारे में

जीरो टिलेज एक ऐसी कृषि दृष्टिकोण है, जिसमें फसलों की खेती के लिए मिट्टी को जोता या परेशान नहीं किया जाता। इस पद्धति में बीजों को सीधे मिट्टी में बोया जाता है, जिससे जमीन की संरचना बनी रहती है।

पर्यावरण और आर्थिक लाभ

बता दें कि नो-टिल खेती कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) में वृद्धि करती है और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने में मदद करती है। मिट्टी की सतह पर फसल अवशेषों की एक सुरक्षात्मक परत बनने से नमी संरक्षित रहती है और वाष्पीकरण कम होता है। यह मिट्टी के कटाव, खासकर ढलान वाले क्षेत्रों में, को भी रोकता है और भूमिगत जल स्तर को बनाए रखने में सहायक होता है।आर्थिक रूप से, इस पद्धति से किसानों को ईंधन खपत, मशीनरी के मरम्मत और श्रम घंटों में काफी बचत होती है। खेत की जुताई में लगने वाले समय की बचत से किसान जल्दी फसल बो सकते हैं, जिससे पैदावार में वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है।

चुनौतियां और नुकसान

हालांकि, यह तकनीक बिना चुनौतियों के नहीं है। शून्य जुताई में सबसे बड़ी समस्या खरपतवार नियंत्रण की है। चूंकि मिट्टी को नहीं जोता जाता, इसलिए खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए हैरोइंग जैसी यांत्रिक विधियों का उपयोग नहीं हो पाता, जिससे किसानों को रासायनिक शाकनाशी (herbicides) पर अधिक निर्भर होना पड़ता है। रसायनों का अधिक उपयोग मिट्टी और पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है। हालांकि, खरपतवार नियंत्रण के लिए डिस्क चेन (Disk Chain) जैसी यांत्रिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है, जो खरपतवारों को बाहर निकालकर उन्हें सतह पर सुखाने में मदद करती हैं। इसके अलावा, समय के साथ खेतों में पानी के बहाव से 'गलियों' (rills) का निर्माण हो सकता है और अवशेषों के प्रबंधन में कठिनाई होती है। पारंपरिक किसानों के लिए इस नई तकनीक को सीखना भी एक बड़ी बाधा साबित हो सकती है, जिसके लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।

विश्व स्तर पर बढ़ती प्रगति

इस तकनीक के प्रति दुनिया भर में रुझान बढ़ रहा है। 1970 के दशक की शुरुआत में यह केवल 3.3 मिलियन एकड़ में सीमित थी, जो अब 2017 तक बढ़कर 104 मिलियन एकड़ हो गई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2021 तक यह आंकड़ा 110 मिलियन एकड़ को पार कर चुका है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया इस मामले में अग्रणी है, जहां लगभग 67% कृषि भूमि (56.7 मिलियन एकड़) पर जीरो टिलेज विधि अपनाई गई है, जो वहां के शुष्क क्षेत्रों में किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जीरो टिलेज कृषि का भविष्य हो सकती है, लेकिन इसे अंधविश्वास से नहीं, बल्कि जागरूकता के साथ अपनाने की जरूरत है। इसके फायदे जैसे मिट्टी संरक्षण और लागत बचत को देखते हुए किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इसका चयन करना चाहिए, ताकि खरपतवार प्रबंधन और फसल अवशेषों की समस्याओं का समाधान किया जा सके और खेती टिकाऊ बनी रहे। Zero Tillage

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बच्चे के दावे पर घिरे लालू के लाल, अनुष्का वाले मामले में मचा है बवाल

हालांकि, तेजप्रताप यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इन खबरों को अफवाह बताते हुए सिरे से खारिज किया और अनुष्का से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार कर दिया। मामला इसलिए संवेदनशील हो गया है क्योंकि तेजप्रताप यादव अभी कानूनन विवाहित बताए जाते हैं उनका पत्नी ऐश्वर्या राय से तलाक का केस अदालत में लंबित है।

फिर विवादों में है लालू के लाल तेजप्रताप यादव
फिर विवादों में है लालू के लाल तेजप्रताप यादव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar10 Feb 2026 10:56 AM
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Bihar News : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर उनके कथित प्रेम-रिश्ते को लेकर नई चर्चा ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि उनकी कथित गर्लफ्रेंड बताई जा रहीं अनुष्का यादव ने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया है। हालांकि, तेजप्रताप यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इन खबरों को अफवाह बताते हुए सिरे से खारिज किया और अनुष्का से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार कर दिया। मामला इसलिए संवेदनशील हो गया है क्योंकि तेजप्रताप यादव अभी कानूनन विवाहित बताए जाते हैं उनका पत्नी ऐश्वर्या राय से तलाक का केस अदालत में लंबित है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि दूसरी शादी या बिना तलाक परिवार बसाने जैसी कोई बात साबित होती है, तो कानून की नजर में क्या परिणाम हो सकते हैं? हिंदू मैरिज एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) इस बारे में क्या कहती है ? आइए इसे समझते हैं।

अंतिम फैसले तक विवाहित ही माने जाएंगे तेजप्रताप

तेजप्रताप यादव की शादी वर्ष 2018 में ऐश्वर्या राय से हुई थी। ऐश्वर्या राय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा राय की पोती और वरिष्ठ नेता चंद्रिका राय की बेटी हैं। शादी के कुछ महीनों बाद ही दोनों के बीच मतभेदों की खबरें सामने आने लगीं और तेजप्रताप ने उसी साल तलाक की अर्जी कोर्ट में दाखिल कर दी। बताया जा रहा है कि 2026 तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, यानी कानूनी दृष्टि से तेजप्रताप अब भी शादीशुदा माने जाएंगे जब तक अदालत से तलाक का अंतिम आदेश नहीं आ जाता।

अनुष्का यादव विवाद

चुनावी साल 2025 में तेजप्रताप का नाम पहली बार अनुष्का यादव के साथ जोड़कर देखा गया। सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हुईं और दावा हुआ कि तेजप्रताप ने कथित रूप से गुपचुप शादी कर ली है। वायरल तस्वीरों में अनुष्का को नवविवाहित महिला के रूप में पेश किया गया। इसी दौरान तेजप्रताप के सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट की भी चर्चा हुई, जिसमें कथित तौर पर 13 साल पुराने रिश्ते का जिक्र बताया गया। बाद में वह पोस्ट हट गया और तेजप्रताप की तरफ से सफाई आई कि अकाउंट हैक हुआ और तस्वीरें AI से बनाई गई हैं। अब 2026 फरवरी में अनुष्का के “मां बनने” की चर्चाओं के बाद तेजप्रताप ने दोबारा स्पष्ट किया है कि अनुष्का से उनका कोई रिश्ता नहीं है। उधर, अनुष्का यादव की ओर से इस पूरे विवाद पर किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की बात सामने नहीं आई है।

बिना तलाक दूसरी शादी पर क्या सजा?

भारतीय कानून के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की पहली शादी वैध रूप से जारी हो और वह बिना तलाक लिए दूसरी शादी कर ले, तो दूसरी शादी अमान्य (Void) मानी जा सकती है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के तहत द्विविवाह से जुड़े प्रावधानों में 7 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है। Bihar News

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