मुंबई RPF ने ‘फर्जी बाबा बंगाली’ का किया पर्दाफाश

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से लगभग 15,000 मुद्रित पोस्टर बरामद किए हैं। इन पोस्टरों पर ‘बाबा बंगाली’ की ओर से वशीकरण, प्रेम बाधा दूर करने और नौकरी दिलाने जैसी झूठी दावेदारी की गई थी।

Fake Baba Racket
फर्जी बाबा रैकेट के पीछे पूरे गिरोह का खुलासा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar18 Feb 2026 04:28 PM
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Fake Baba Racket: मुंबई की लोकल ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को अंधविश्वास के जाल में फंसाने वाले ‘फर्जी बाबा बंगाली’ रैकेट का भंडाफोड़ रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने किया है। सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे की संयुक्त टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक जालसाज को गिरफ्तार किया है, जो रेलवे की संपत्ति पर अवैध विज्ञापन चिपकाकर लोगों को लूट रहा था।

छापेमारी और गिरफ्तारी

वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त के विशेष निर्देशों पर मंगलवार, 17 फरवरी को रे रोड इलाके में दारुखाना स्थित मीरा अली दरगाह के पास छापेमारी की गई। RPF की आईटी सेल और सतर्कता टीम को इस रैकेट की जानकारी लंबे समय से थी। मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर जाल बिछाया और आरोपी मोहम्मद नजीर अंदारी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

भारी मात्रा में बरामदगी

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से लगभग 15,000 मुद्रित पोस्टर बरामद किए हैं। इन पोस्टरों पर ‘बाबा बंगाली’ की ओर से वशीकरण, प्रेम बाधा दूर करने और नौकरी दिलाने जैसी झूठी दावेदारी की गई थी। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार किया। उसने बताया कि वह बिना किसी आधिकारिक अनुमति के ट्रेनों के डिब्बों और स्टेशनों की दीवारों पर ये पोस्टर चिपकाता था ताकि लोगों की नजर उन पर पड़े और वे फंस जाएं।

कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए वडाला RPF स्टेशन में रेलवे अधिनियम की धारा 144 (अवैध फेरी), 145(बी) (न्यूसेंस), 147 (अतिक्रमण) और 166 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस को शक है कि यह काम केवल एक व्यक्ति नहीं कर रहा था, बल्कि पूरा गिरोह सक्रिय है। जांचकर्ता अब उन प्रिंटिंग प्रेसों को खोज रहे हैं जहां ये पोस्टर छपते थे और इस रैकेट के वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि इस नेटवर्क के सूत्र मुंबई के बाहर भी जुड़े हो सकते हैं। Fake Baba Racket

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रमजान में दुबई सरकार का बड़ा ऐलान, 'फैमिली इयर' का तोहफा

सरकारी कर्मचारी अब सुबह 9 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक ही काम करेंगे।शुक्रवार सप्ताह के अंतिम कार्य दिवस पर काम का समय और सीमित कर दिया गया है। शुक्रवार को टाइमिंग सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगी।

Year of the Family
दुबई में रमजान के नए नियम लागू (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar18 Feb 2026 03:23 PM
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Year of the Family : पवित्र महीने रमजान की शुरुआत के साथ ही दुबई में सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी सामने आई है। दुबई सरकार ने अपने कर्मचारियों के कल्याण और पारिवारिक जीवन को प्राथमिकता देते हुए कार्य संस्कृति में बड़े बदलाव की घोषणा की है। 'ईयर ऑफ द फैमिली' (Year of the Family) पहल के तहत लिए गए इस फैसले से लाखों सरकारी कर्मचारियों को रोजे के दौरान काम और निजी जीवन के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।

कम हुए काम के घंटे, बदली ऑफिस की टाइमिंग

 दुबई मानव संसाधन विभाग (Dubai Government Human Resources Department) द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, रमजान के दौरान सरकारी दफ्तरों की टाइमिंग में उल्लेखनीय कमी की गई है। नए नियमों के मुताबिक सोमवार से गुरुवार सरकारी कर्मचारी अब सुबह 9 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक ही काम करेंगे।शुक्रवार सप्ताह के अंतिम कार्य दिवस पर काम का समय और सीमित कर दिया गया है। शुक्रवार को टाइमिंग सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगी। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि कर्मचारी रोजे के दौरान थकान कम महसूस करें और उन्हें अपने परिवार के साथ समय बिताने तथा धार्मिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

लचीलापन है खासियत, 7 से 10 बजे के बीच कर सकते हैं शुरुआत

सिर्फ काम के घंटे घटाना ही काफी नहीं है, सरकार ने काम करने के तरीके में भी लचीलापन लाया है। विभागों को अधिकृत किया गया है कि वे कर्मचारियों को सुबह 7 बजे से 10 बजे के बीच किसी भी समय ऑफिस आने की सुविधा दे सकते हैं। इसके लिए शर्त यह है कि कर्मचारी अपने निर्धारित दैनिक कार्य घंटे पूरे करें। यह व्यवस्था उन कर्मचारियों के लिए राहत का सबब साबित होगी जो सुबह जल्दी उठना पसंद करते हैं या ट्रैफिक की समस्या से बचना चाहते हैं।

हफ्ते में दो दिन की वर्क फ्रॉम होम की सुविधा

आधुनिक कार्य संस्कृति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने योग्य (Eligible) कर्मचारियों को हफ्ते में अधिकतम दो दिन घर से काम (Work From Home) करने की अनुमति दे दी है। यह सुविधा कर्मचारी के पद और काम की प्रकृति पर निर्भर करेगी। सरकार का मानना है कि इससे न केवल आने-जाने में होने वाली थकान कम होगी, बल्कि कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा और पारिवारिक स्थिरता मजबूत होगी।

शिफ्ट वाले कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्पतालों, सेवा केंद्रों या आपातकालीन सेवाओं जैसे विभागों में काम करने वाले शिफ्ट कर्मचारियों के लिए अलग से टाइम-टेबल तय किया जाएगा। इसका उद्देश्य सार्वजनिक सेवाओं में किसी तरह की रुकावट नहीं आने देना है। विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी जरूरत के हिसाब से समय सारणी तय करें।

संघीय सरकार भी बराबरी में

दुबई के इस कदम के साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की संघीय सरकार ने भी इसी तरह के लचीले नियमों की घोषणा की है। संघीय संस्थाएं शुक्रवार को अपनी 70 प्रतिशत तक कार्यशक्ति (Workforce) को रिमोट वर्क की अनुमति दे सकती हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि देश भर में कर्मचारी कल्याण को तरजीह दी जा रही है।

काम और आस्था का संगम

यह निर्णय खाड़ी देशों की उस परंपरा को दर्शाता है जहाँ रमजान के दौरान काम के घंटे कम किए जाते हैं, लेकिन इस बार इसे 'फैमिली इयर' से जोड़कर एक सामाजिक संदेश भी दिया गया है। सरकार का कहना है कि काम के घंटे कम होने के बावजूद उत्पादकता और संस्थागत प्रदर्शन पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। सही योजना और तकनीक के इस्तेमाल से कर्मचारियों को राहत देना संभव है। Year of the Family 

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राज्यसभा चुनाव की घोषणा, महाराष्ट्र से बिहार तक सियासी हलचल तेज

राजनीतिक दल अपनी-अपनी दाव-पेंच भिड़ाने में लगे हैं। यह चुनाव न केवल संसदीय राजनीति के भविष्य का निर्धारण करेंगे, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा भी तय करेंगे।

Rajya Sabha elections announced
चुनावों से तय होगी देश की राजनीतिक दिशा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar18 Feb 2026 12:18 PM
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Rajya Sabha Elections 2026: भारत निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और बिहार की 16 राज्यसभा सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इस ऐलान से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि इन चुनावों का असर केवल इन राज्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सियासी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

चुनाव की तिथि और प्रक्रिया

आयोग की अधिसूचना के अनुसार, नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च है, जबकि नामांकन की जांच 6 मार्च को होगी। 9 मार्च तक नाम वापसी की अनुमति होगी। मतदान 16 मार्च को होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना के साथ परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। पूरी प्रक्रिया 20 मार्च 2026 तक संपन्न हो जाएगी।

महाराष्ट्र: शरद पवार के संन्यास की आहट और नई जंग

महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे अधिक चर्चा शरद पवार के भविष्य को लेकर है। वे पहले ही सक्रिय राजनीति से संन्यास का संकेत दे चुके हैं। ऐसे में उनकी सीट पर किसका कब्जा होगा, यह सबसे बड़ा सवाल है। इस सीट के लिए धैर्यशील पाटिल, भागवत कराड, फौजिया खान, प्रियंका चतुर्वेदी, रामदास अठावले और रजनी पाटिल जैसे दिग्गजों का नाम चर्चा में है। शिवसेना-भाजपा गठबंधन और उद्धव ठाकरे गुट के बीच समीकरण बदलने के चलते यह चुनाव विशेष महत्व रखता है।  

बिहार: समीकरण बदले, क्या फिर मिलेगा मौका?

बिहार में 9 अप्रैल 2026 को अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेम चंद गुप्ता, रामनाथ ठाकुर, हरिवंश नारायण सिंह और उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। मौजूदा गठबंधन में राजद के पास दो सीटें, जदयू और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पास एक-एक सीट है। राजनीतिक समीकरणों में बदलाव और गठबंधन की स्थिति के आधार पर इन सीटों की दिशा तय होगी। कुशवाहा की उम्मीदवारी को लेकर संशय बना हुआ है, और यह चुनाव फिर से बिहार की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है।  

हरियाणा: बीजेपी का दबदबा, क्या भरोसा फिर कायम रहेगा?

हरियाणा में 9 अप्रैल 2026 को किरण चौधरी और राम चंदर जांगड़ा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। दोनों सीटें फिलहाल भारतीय जनता पार्टी के पास हैं। पार्टी की रणनीति और राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह तय किया जाएगा कि मौजूदा प्रतिनिधियों पर भरोसा जताया जाए या नई टक्कर दी जाए।  

छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश: मुकाबला सधा हुआ

छत्तीसगढ़ में कवि तेजपाल सिंह ‘तुलसी’ और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। यहां एक-एक सीट बीजेपी और कांग्रेस के पास है, जिससे मुकाबला सीधा होगा। हिमाचल प्रदेश में इंदु बाला गोस्वामी की सीट खाली हो रही है, जो बीजेपी के खाते में है।  

राज्यसभा का राजनीतिक असर 

इन पांच राज्यों की 16 सीटों पर होने वाले चुनाव का असर केवल इन राज्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर भी दलगत संतुलन को प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर महाराष्ट्र और बिहार की नतीजे केन्द्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए अहम माने जा रहे हैं।  

समय की चुनौती और सियासी दांव-पेंच

इन चुनावों के परिणाम न केवल वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को बदल सकते हैं, बल्कि आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही और नीतिगत फैसलों पर भी प्रभाव डाल सकते हैं। सभी दल अपने-अपने रणनीतिकारों के साथ इन चुनावों को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि यह आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर सकता है। Rajya Sabha Elections 2026

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