महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था पर सवाल, ULC स्कैम ने मचाया राजनीतिक तूफान
महाराष्ट्र की राजनीति में हड़कंप मचाने वाला एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। वर्ष 2021 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाले में झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की थी।

महाराष्ट्र की राजनीति और पुलिस महकमे में हड़कंप मचाने वाला एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) रश्मि शुक्ला द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाले में झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की थी।
यह रिपोर्ट महाराष्ट्र के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, संजय पांडे ने ठाणे के तत्कालीन डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल को निर्देश दिए थे कि वे वर्ष 2016 के ULC मामले में फडणवीस और शिंदे को आरोपी के रूप में पेश करें और यह दर्शाया जाए कि उन्होंने बिल्डरों से अवैध वसूली की है।
‘गिरफ्तारी का दबाव बनाया गया’
बता दें कि रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एसीपी सरदार पाटिल पर तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को गिरफ्तार करने का सीधा दबाव डाला गया। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी संजय पुनामिया ने जांच एजेंसियों को एक कथित ऑडियो क्लिप भी सौंपी है, जिसमें संजय पांडे, डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल के बीच फडणवीस को फंसाने को लेकर बातचीत होने का दावा किया गया है।
बिना जांच अधिकारी बने की गई पूछताछ
रिपोर्ट में कोपरी पुलिस स्टेशन में दर्ज केस CR No. 176/2021 का भी उल्लेख है। आरोप है कि डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए संजय पुनामिया और सुनील जैन से पूछताछ की, जबकि वे इस केस के आधिकारिक जांच अधिकारी नहीं थे। पूछताछ के दौरान पुनामिया पर दबाव बनाया गया कि वह देवेंद्र फडणवीस द्वारा बिल्डरों से की गई कथित वसूली की रकम बताए।
राजनीतिक प्रतिशोध के लिए पुलिस तंत्र के दुरुपयोग का आरोप
रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यह पूरी घटना पुलिस तंत्र के राजनीतिक प्रतिशोध के लिए दुरुपयोग को दर्शाती है। रिपोर्ट ने राज्य की कानून व्यवस्था, निष्पक्ष जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस खुलासे के बाद मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर सकता है।
जाने क्या है ULC घोटाला?
महाराष्ट्र में अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाला शहरी भूमि सीलिंग अधिनियम, 1976 से जुड़ा हुआ है। इस कानून के तहत शहरी क्षेत्रों में 500 वर्ग मीटर से अधिक भूमि सरकार द्वारा अधिग्रहित की जानी थी, ताकि उसका उपयोग सार्वजनिक हित में किया जा सके। हालांकि, इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया। जमीन मालिकों और बिल्डरों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी अधिग्रहण से बचने की कोशिश की। गलत तरीके से ULC से संबंधित प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिससे करोड़ों रुपये की कीमती जमीन सरकार के नियंत्रण से बाहर चली गई।
हाईकोर्ट ने बताया बड़ा जमीन घोटाला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ULC घोटाले को अब तक के सबसे बड़े जमीन घोटालों में से एक करार दिया है। अदालत ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस द्वारा कई गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं और जांच अभी भी जारी है। उम्मीद की जा रही है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।
महाराष्ट्र की राजनीति और पुलिस महकमे में हड़कंप मचाने वाला एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) रश्मि शुक्ला द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाले में झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की थी।
यह रिपोर्ट महाराष्ट्र के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, संजय पांडे ने ठाणे के तत्कालीन डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल को निर्देश दिए थे कि वे वर्ष 2016 के ULC मामले में फडणवीस और शिंदे को आरोपी के रूप में पेश करें और यह दर्शाया जाए कि उन्होंने बिल्डरों से अवैध वसूली की है।
‘गिरफ्तारी का दबाव बनाया गया’
बता दें कि रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एसीपी सरदार पाटिल पर तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को गिरफ्तार करने का सीधा दबाव डाला गया। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी संजय पुनामिया ने जांच एजेंसियों को एक कथित ऑडियो क्लिप भी सौंपी है, जिसमें संजय पांडे, डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल के बीच फडणवीस को फंसाने को लेकर बातचीत होने का दावा किया गया है।
बिना जांच अधिकारी बने की गई पूछताछ
रिपोर्ट में कोपरी पुलिस स्टेशन में दर्ज केस CR No. 176/2021 का भी उल्लेख है। आरोप है कि डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए संजय पुनामिया और सुनील जैन से पूछताछ की, जबकि वे इस केस के आधिकारिक जांच अधिकारी नहीं थे। पूछताछ के दौरान पुनामिया पर दबाव बनाया गया कि वह देवेंद्र फडणवीस द्वारा बिल्डरों से की गई कथित वसूली की रकम बताए।
राजनीतिक प्रतिशोध के लिए पुलिस तंत्र के दुरुपयोग का आरोप
रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यह पूरी घटना पुलिस तंत्र के राजनीतिक प्रतिशोध के लिए दुरुपयोग को दर्शाती है। रिपोर्ट ने राज्य की कानून व्यवस्था, निष्पक्ष जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस खुलासे के बाद मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर सकता है।
जाने क्या है ULC घोटाला?
महाराष्ट्र में अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाला शहरी भूमि सीलिंग अधिनियम, 1976 से जुड़ा हुआ है। इस कानून के तहत शहरी क्षेत्रों में 500 वर्ग मीटर से अधिक भूमि सरकार द्वारा अधिग्रहित की जानी थी, ताकि उसका उपयोग सार्वजनिक हित में किया जा सके। हालांकि, इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया। जमीन मालिकों और बिल्डरों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी अधिग्रहण से बचने की कोशिश की। गलत तरीके से ULC से संबंधित प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिससे करोड़ों रुपये की कीमती जमीन सरकार के नियंत्रण से बाहर चली गई।
हाईकोर्ट ने बताया बड़ा जमीन घोटाला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ULC घोटाले को अब तक के सबसे बड़े जमीन घोटालों में से एक करार दिया है। अदालत ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस द्वारा कई गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं और जांच अभी भी जारी है। उम्मीद की जा रही है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।












