महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था पर सवाल, ULC स्कैम ने मचाया राजनीतिक तूफान

महाराष्ट्र की राजनीति में हड़कंप मचाने वाला एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। वर्ष 2021 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाले में झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की थी।

Maharashtra power struggle
महाराष्ट्र में ULC घोटाले में नया मोड़ (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar10 Jan 2026 12:04 PM
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महाराष्ट्र की राजनीति और पुलिस महकमे में हड़कंप मचाने वाला एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) रश्मि शुक्ला द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2021 में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने मौजूदा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाले में झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की थी।

यह रिपोर्ट महाराष्ट्र के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, संजय पांडे ने ठाणे के तत्कालीन डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल को निर्देश दिए थे कि वे वर्ष 2016 के ULC मामले में फडणवीस और शिंदे को आरोपी के रूप में पेश करें और यह दर्शाया जाए कि उन्होंने बिल्डरों से अवैध वसूली की है।

‘गिरफ्तारी का दबाव बनाया गया’

बता दें कि रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एसीपी सरदार पाटिल पर तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को गिरफ्तार करने का सीधा दबाव डाला गया। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी संजय पुनामिया ने जांच एजेंसियों को एक कथित ऑडियो क्लिप भी सौंपी है, जिसमें संजय पांडे, डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल और एसीपी सरदार पाटिल के बीच फडणवीस को फंसाने को लेकर बातचीत होने का दावा किया गया है।

बिना जांच अधिकारी बने की गई पूछताछ

रिपोर्ट में कोपरी पुलिस स्टेशन में दर्ज केस CR No. 176/2021 का भी उल्लेख है। आरोप है कि डीसीपी लक्ष्मीकांत पाटिल ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए संजय पुनामिया और सुनील जैन से पूछताछ की, जबकि वे इस केस के आधिकारिक जांच अधिकारी नहीं थे। पूछताछ के दौरान पुनामिया पर दबाव बनाया गया कि वह देवेंद्र फडणवीस द्वारा बिल्डरों से की गई कथित वसूली की रकम बताए।

राजनीतिक प्रतिशोध के लिए पुलिस तंत्र के दुरुपयोग का आरोप

रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि यह पूरी घटना पुलिस तंत्र के राजनीतिक प्रतिशोध के लिए दुरुपयोग को दर्शाती है। रिपोर्ट ने राज्य की कानून व्यवस्था, निष्पक्ष जांच प्रक्रिया और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस खुलासे के बाद मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर सकता है।

जाने क्या है ULC घोटाला?

महाराष्ट्र में अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) घोटाला शहरी भूमि सीलिंग अधिनियम, 1976 से जुड़ा हुआ है। इस कानून के तहत शहरी क्षेत्रों में 500 वर्ग मीटर से अधिक भूमि सरकार द्वारा अधिग्रहित की जानी थी, ताकि उसका उपयोग सार्वजनिक हित में किया जा सके। हालांकि, इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया। जमीन मालिकों और बिल्डरों ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी अधिग्रहण से बचने की कोशिश की। गलत तरीके से ULC से संबंधित प्रमाणपत्र जारी किए गए, जिससे करोड़ों रुपये की कीमती जमीन सरकार के नियंत्रण से बाहर चली गई।

हाईकोर्ट ने बताया बड़ा जमीन घोटाला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ULC घोटाले को अब तक के सबसे बड़े जमीन घोटालों में से एक करार दिया है। अदालत ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस द्वारा कई गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं और जांच अभी भी जारी है। उम्मीद की जा रही है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।

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भारत–ईरान रिश्तों का इतिहास: मुगल काल से जुड़ा खास नाता

ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होते जा रहे हैं। राजधानी तेहरान में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। कई सरकारी दफ्तरों में आगजनी, तोड़फोड़ और कब्जे की खबरें सामने आई हैं।

Mughal art and literature
मुगल कला और साहित्य पर फारसी असर (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar09 Jan 2026 04:59 PM
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बता दें कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुई हैं। हालात को काबू में रखने के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं और भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। इसी बीच जब ईरान एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है, तो यह जानना दिलचस्प हो जाता है कि भारत के इतिहास में ईरान की क्या भूमिका रही है। खासकर मुगल काल में ईरान सिर्फ एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि शाही जरूरतों और संस्कृति का अहम केंद्र था।

मुगल और ईरान के रिश्ते क्यों थे खास?

बता दें कि मुगल साम्राज्य और ईरान के संबंध केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक भी थे। बाबर मध्य एशिया की परंपराओं से आए थे, जहां फारसी संस्कृति का गहरा प्रभाव था। सत्ता संघर्ष के दौरान हुमायूं को ईरान के शाह तहमास्प से सैन्य और राजनीतिक मदद मिली थी। इसी कारण मुगल दरबार में फारसी भाषा, पहनावा, कला और प्रशासनिक प्रणाली को विशेष स्थान मिला। धीरे-धीरे ईरान मुगल साम्राज्य की शाही जरूरतों का एक प्रमुख स्रोत बन गया।

ईरान की शराब और अफीम: शाही शौक का प्रतीक

ईरान की शराब उस दौर में अपनी बेहतरीन गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध थी। मुगल बादशाह जहांगीर को खास तौर पर फारसी शराब और अफीम का शौकीन माना जाता है। दरबार में इन चीजों को केवल नशे की वस्तु नहीं, बल्कि शाही रुतबे और विदेशी संस्कृति से जुड़ाव का प्रतीक माना जाता था। लंबी दूरी, सुरक्षा व्यवस्था और विशेष पैकिंग के कारण यह शराब बेहद महंगी पड़ती थी, जिसे केवल शाही खजाना ही वहन कर सकता था।

अफीम: नशा नहीं, दवा भी

बाबर से लेकर जहांगीर तक कई मुगल शासक अफीम का सेवन करते थे। उस समय इसे सीमित मात्रा में औषधि और आराम देने वाले पदार्थ के रूप में भी देखा जाता था। उच्च गुणवत्ता वाली अफीम ईरान और मध्य एशिया से मंगवाई जाती थी, जिसे ऊंटों के कारवां के जरिए भारत लाया जाता था। महीनों की यात्रा, सुरक्षा खर्च और रास्ते के कर इसे एक महंगा आयात बनाते थे।

फारसी रेशम और कालीन: मुगल शान की पहचान

ईरान के रेशम और कालीन मुगल दरबार की शान माने जाते थे। फारसी कालीन अपनी बारीक कारीगरी, गहरे रंगों और जटिल डिज़ाइनों के लिए विश्व प्रसिद्ध थे। इन्हें शाही महलों, दरबारों और विशिष्ट अतिथियों के स्वागत में इस्तेमाल किया जाता था। रेशमी वस्त्र शाही पोशाकों और राजनयिक उपहारों के लिए मंगवाए जाते थे, जो शक्ति और समृद्धि का प्रतीक थे।

ईरान से कलाकार, कवि और विद्वान भी आते थे

मुगल और ईरान का संबंध केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं था। फारसी कवि, चित्रकार, संगीतकार, प्रशासक और चिकित्सक भी मुगल दरबार का हिस्सा बने। अकबर के दरबार में हकीम हमाम जैसे ईरानी चिकित्सक थे, जो यूनानी चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञ थे। मुगल मिनिएचर पेंटिंग, शायरी और इतिहास लेखन पर फारसी प्रभाव साफ नजर आता है।

फल, मेवे और घोड़े भी थे अहम आयात

मुगल बादशाह ईरान और आसपास के इलाकों से अंगूर, सेब, बादाम, पिस्ता जैसे फल और मेवे मंगवाते थे, जो उस समय भारत में दुर्लभ माने जाते थे। इसके अलावा ऊंची नस्ल के घोड़े ईरान और मध्य एशिया से आयात किए जाते थे, जो सेना और शाही सवारी दोनों के लिए जरूरी थे। घोड़ों का आयात रणनीतिक महत्व और शाही प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ था।

कितना आता था खर्च?

हालांकि उस दौर के सटीक आर्थिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन इतिहासकारों का मानना है कि इन वस्तुओं की दुर्लभता, लंबी दूरी की यात्रा, व्यापारियों की फीस, सुरक्षा खर्च और रास्ते के करों के कारण यह आयात बेहद महंगा होता था। यह सारा खर्च शाही खजाने से किया जाता था, जिसकी आय मुख्य रूप से कृषि कर और व्यापार से होती थी।

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इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग से जुड़ी जरूरी बातें, जो हर यूजर को जाननी चाहिए

इलेक्ट्रिक कार की बैटरी और चार्जिंग से जुड़ी बुनियादी जानकारी होना हर EV यूजर के लिए जरूरी है। सही चार्जिंग आदतें अपनाकर न सिर्फ बैटरी की लाइफ बढ़ाई जा सकती है, बल्कि आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।

Electric Vehicle Charging
Electric Vehicle चार्ज (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar09 Jan 2026 03:32 PM
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देश में इलेक्ट्रिक कारों (EV) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। कम ईंधन खर्च, कम मेंटेनेंस और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी के चलते लोग EV को अपनाने लगे हैं। हालांकि, इलेक्ट्रिक कार को चार्ज करते समय की गई छोटी-सी लापरवाही बैटरी को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ आपकी सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है। ऐसे में जरूरी है कि EV चार्जिंग के सही नियमों का पालन किया जाए।

सही चार्जिंग स्टेशन का करें चयन

इलेक्ट्रिक कार की बैटरी की लंबी उम्र के लिए सही चार्जिंग स्टेशन चुनना बेहद जरूरी है। हमेशा वही चार्जर इस्तेमाल करें जो आपकी कार के लिए उपयुक्त हो, जैसे CCS2 या कंपनी द्वारा सुझाया गया चार्जर।

हालांकि फास्ट चार्जिंग स्टेशन समय बचाते हैं, लेकिन रोजाना इनका इस्तेमाल बैटरी की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, डेली चार्जिंग के लिए घर पर लगे नॉर्मल चार्जर का इस्तेमाल बेहतर होता है।

ओवरचार्जिंग से बचना है जरूरी

भले ही आजकल की इलेक्ट्रिक कारों में एडवांस बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम मौजूद होता है, लेकिन फिर भी बार-बार 100% चार्ज करना सही नहीं माना जाता। इससे बैटरी की लाइफ कम हो सकती है। EV एक्सपर्ट्स 80-20 चार्जिंग नियम अपनाने की सलाह देते हैं, यानी बैटरी को 20% से नीचे न जाने दें और 80% तक ही चार्ज रखें।

सस्ते और लोकल चार्जर से रहें दूर

चार्जिंग के लिए हमेशा अच्छी क्वालिटी और भरोसेमंद ब्रांड का चार्जर ही इस्तेमाल करें। सस्ते या बिना ब्रांड वाले चार्जर से शॉर्ट सर्किट, बिजली की खराबी या आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, चार्जिंग केबल और कनेक्टर की नियमित जांच करते रहें ताकि किसी भी तरह की टूट-फूट समय रहते पकड़ी जा सके।

चार्जिंग के दौरान सुरक्षा का रखें पूरा ध्यान

इलेक्ट्रिक कार को हमेशा सूखी और हवादार जगह पर चार्ज करें। बारिश, पानी या ज्यादा नमी वाली जगह पर चार्जिंग से बचना चाहिए। अगर चार्जिंग के दौरान जलने की गंध, अजीब आवाज या बैटरी का जरूरत से ज्यादा गर्म होना महसूस हो, तो तुरंत चार्जिंग बंद कर दें और सर्विस सेंटर से संपर्क करें।