बड़े पैमाने पर हुए तबादले, 49 IAS तथा IPS अधिकारी बदले

गृहमंत्री अमित शाह की समीक्षा बैठक के तुरंत बाद गृह मंत्रालय ने अलग-अलग केन्द्र शासित प्रदेशों के 49 IAS तथा IPS अधिकारियों को बदल दिया है। इन अधिकारियों में 12 अधिकारी अकेले दिल्ली प्रदेश के अधिकारी हैं।

देशभर में IAS-IPS ट्रांसफर
देशभर में IAS-IPS ट्रांसफर, 49 अफसरों का फेरबदल
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar05 Jan 2026 03:59 PM
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India Administrative Reshuffle : बड़े पैमाने पर अधिकारियों के तबादलों की खबर आई है। खबर यह है कि सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फेर-बदल करते हुए 31 IAS तथा 18 IPS अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। तबादलों की इस कड़ी में दिल्ली प्रदेश के 12 बड़े अधिकारियों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर तबादला किया गया है। IAS तथा IPS अधिकारियों के तबादले का आदेश भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने जारी किया है।

भारत सरकार ने एक साथ बदल डाले 49 अधिकारी

आपको बता दें कि भारत के केन्द्र शासित प्रदेशों में IAS तथा IPS अधिकारियों का तबादला भारत सरकार का गृह मंत्रालय करता है। हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह ने केन्द्र शासित प्रदेशों की विस्तृत समीक्षा की थी। गृहमंत्री अमित शाह की समीक्षा बैठक के तुरंत बाद गृह मंत्रालय ने अलग-अलग केन्द्र शासित प्रदेशों के 49 IAS तथा IPS अधिकारियों को बदल दिया है। इन अधिकारियों में 12 अधिकारी अकेले दिल्ली प्रदेश के अधिकारी हैं।

इन IAS अधिकारियों के बदले गए प्रदेश

जिन अधिकारियों के प्रदेश बदले गए हैं उनमें वर्ष-1992 बैच के IAS अधिकारी अश्वनी कुमार को दिल्ली प्रदेश  से जम्मू एवं लद्दाख भेजा गया है। वर्ष-1994 बैच के IAS अधिकारी  संजीव खिरवार को लद्दाख से दिल्ली, वर्ष-1998 बैच के IAS अधिकारी संतोष डी वैद्य को जम्मू एवं कश्मीर से दिल्ली, वर्ष-2003 बैच की IAS अधिकारी पद्मा जायसवाल को पुडुचेरी से दिल्ली, वर्ष-2004 बैच के IAS अधिकारी शुरबीर सिंह को दिल्ली से लद्दाख,  वर्ष-2005 बैच के IAS अधिकारी आर. एलिस वाज को दिल्ली से जम्मू एवं कश्मीर, वर्ष-2008 बैच के IAS अधिकारी यशपाल गर्ग को अरुणाचल प्रदेश से दिल्ली, वर्ष-2008 बैच के IAS अधिकारी संजीव अहूजा को गोवा से दिल्ली, वर्ष-2010 बैच के IAS अधिकारी नीरज कुमार को जम्मू एवं कश्मीर से दिल्ली, वर्ष-2012 बैच के IAS अधिकारी सैयद आबिद राशिद शाह को जम्मू एवं कश्मीर से चंडीगढ़, वर्ष-2012 बैच के IAS अधिकारी सत्येंद्र सिंह दुरसवत को अंडमान एवं निकोबार से दिल्ली, वर्ष-2013 बैच के IAS अधिकारी अमन गुप्ता  को अंडमान एवं निकोबार से दिल्ली, वर्ष-2013 बैच के IAS अधिकारी राहुल सिंह को लक्षद्वीप से दिल्ली, वर्ष-2013 बैच के IAS अधिकारी अंजलि सेहरावत को दिल्ली से जम्मू एवं कश्मीर, वर्ष-2013 बैच के IAS अधिकारी  हेमंत कुमार को दिल्ली से अंडमान और निकोबार, वर्ष-2014 बैच के IAS अधिकारी रवि दादरिच को दिल्ली से मिजोरम, वर्ष-2014 बैच के IAS अधिकारी किन्नी सिंह को दिल्ली से पुडुचेरी, वर्ष-2014 बैच के IAS  अधिकारी सागर डी दत्तात्रय को दादर नगर हवेली और दमन दीव से जम्मू एवं कश्मीर, वर्ष-2015 बैच के IAS अधिकारी अरुण शर्मा को अंडमान एवं निकोबार से दिल्ली, वर्ष-2015 बैच के IAS अधिकारी वंदना राव को दिल्ली से अंडमान एवं निकोबार, वर्ष-2015 बैच के IAS अधिकारी बसीर-उल-हक चौधरी को जम्मू एवं कश्मीर से लद्दाख, वर्ष-2015 बैच के IAS अधिकारी माइकल एम. डिसूजा को लद्दाख से गोवा, वर्ष-2016 बैच के IAS अधिकारी  अकृति सागर को अरुणाचल प्रदेश से जम्मू एवं कश्मीर, वर्ष-2016 बैच के IAS अधिकारी   कुमार अभिषेक को दिल्ली से जम्मू एवं कश्मीर, वर्ष-2016 बैच के IAS अधिकारी सलोनी राय को जम्मू कश्मीर से दिल्ली, वर्ष-2016 बैच के IAS अधिकारी निखिल यू देसाई को दादर नगर हवेली और दमन से गोवा, वर्ष-2018 बैच के IAS अधिकारी अंकिता मिश्रा को गोवा से अरुणाचल प्रदेश, वर्ष-2018 बैच के IAS अधिकारी हरि कल्लिकट को चंडीगढ़ से दिल्ली, वर्ष-2020 बैच के IAS अधिकारी विशाखा यादव को अरुणाचल प्रदेश से दिल्ली, वर्ष-2020 बैच के IAS अधिकारी अजह्रुद्दीन जहीरुद्दीन काजी को अंडमान एवं निकोबार से दिल्ली, वर्ष-2020 बैच के IASअधिकारी चीमाला सिवा गोपाल रेड्डी को मिजोरम से दिल्ली भेजा गया है। India Administrative Reshuffle

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जाने कोशिका विभाजन से लेकर बीज विकास तक साइटोकिनिन की भूमिका

साइटोकिनिन केवल एक पादप हार्मोन नहीं, बल्कि भविष्य की खेती का एक शक्तिशाली औजार है। उत्पादकता, गुणवत्ता और पर्यावरणीय लचीलेपन को एक साथ बढ़ाने की इसकी क्षमता इसे सचमुच एक “चमत्कारिक हार्मोन” बनाती है।

The role of cytokinins
साइटोकिनिन की भूमिका (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar05 Jan 2026 03:54 PM
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खेती के क्षेत्र में एक बार फिर क्रांतिकारी बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। इस बदलाव के केंद्र में है साइटोकिनिन (Cytokinin) — एक शक्तिशाली पादप हार्मोन, जिसे वैज्ञानिक भविष्य की “दूसरी हरित क्रांति” की नींव मान रहे हैं। यह हार्मोन न केवल फसलों की उपज बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि कम पानी, कम खाद और कठिन पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन का रास्ता खोलता है।

क्या है साइटोकिनिन और क्यों है खास?

बता दें कि साइटोकिनिन पौधों में कोशिका विभाजन, अंगों के विकास, बीज अंकुरण और फूल-फल बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पौधों को सूखा, गर्मी और अन्य तनावों से लड़ने की क्षमता देता है, जिससे विपरीत परिस्थितियों में भी फसलें बेहतर प्रदर्शन कर पाती हैं।

साइटोकिनिन के प्रमुख फायदे

1. अत्यधिक उपज में वृद्धि

साइटोकिनिन कोशिका विभाजन को तेज करता है, जिससे पौधों का आकार बढ़ता है और फल व अनाज का उत्पादन अधिक होता है। शोध में सोयाबीन और ल्यूपिन जैसी फसलों में इसकी सकारात्मक भूमिका देखी गई है।

2. पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण

यह हार्मोन जिंक (Zn) और आयरन (Fe) जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है। CKX एंजाइम के नियंत्रण के माध्यम से यह फसलों को अधिक पौष्टिक बनाता है, साथ ही सूखे की स्थिति में भी मजबूत जड़ विकास में मदद करता है।

3. तनाव प्रतिरोध क्षमता

साइटोकिनिन पौधों को सूखा, अधिक तापमान और रोगजनकों जैसे जैविक तनावों से लड़ने की शक्ति देता है, जिससे फसलें कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहती हैं और संतोषजनक उपज देती हैं।

4. गुणवत्ता और बाजार मूल्य में सुधार

फल और सब्जियों के आकार, रंग और गुणवत्ता में सुधार से बाजार में उनकी कीमत बढ़ती है, जिससे किसानों की आय में सीधा लाभ होता है।

5. जीर्णता (Senescence) में देरी

यह पत्तियों को लंबे समय तक हरा रखता है, पर्णहरित को संरक्षित करता है और प्रकाश संश्लेषण की अवधि बढ़ाता है, जिससे पौधे अधिक समय तक सक्रिय रहते हैं।

6. फूल और बीज विकास का बेहतर नियंत्रण

साइटोकिनिन ऊर्जा को सही दिशा में भेजता है, जिससे फूल, फल और बीज बनने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होती है।

आधुनिक शोध और भविष्य की खेती

बता दें कि आज वैज्ञानिक CRISPR-Cas9 जैसी आधुनिक जीन संपादन तकनीकों का उपयोग करके साइटोकिनिन से जुड़े जीनों को सीधे लक्षित कर रहे हैं। लक्ष्य है ऐसी फसल किस्में विकसित करना जो कम पानी, कम उर्वरक और खराब मिट्टी में भी उच्च उपज दे सकें।विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच साइटोकिनिन आधारित फसल सुधार तकनीकें आने वाले दशकों में खाद्य सुरक्षा की रीढ़ बन सकती हैं।

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फिर जेल से बाहर राम रहीम, 40 दिन की पैरोल ने खड़े किए नए सवाल

रेप और हत्या के मामलों में सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 40 दिनों की पैरोल मिली है। रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आने के बाद वह सिरसा स्थित डेरा में रहेगा जहां उसकी गतिविधियों पर प्रशासन की कड़ी नजर रहेगी।

Ram Raheem
राम रहीम 40 दिन के पैरोल पर
locationभारत
userअसमीना
calendar04 Jan 2026 11:43 AM
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हर बार जब डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को जेल से बाहर आने की अनुमति मिलती है तो यह खबर चर्चा का विषय बन जाती है। एक बार फिर ऐसा ही हुआ है। रेप और हत्या जैसे गंभीर मामलों में सजा काट रहे राम रहीम को 40 दिनों की पैरोल दी गई है। यह फैसला बुधवार शाम लिया गया जिसके बाद जेल प्रशासन ने उसकी रिहाई की प्रक्रिया शुरू कर दी।

राम रहीम पर रखी जाएगी कड़ी नजर

गुरमीत राम रहीम इस समय हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद है। पैरोल की अवधि के दौरान वह सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में रहेगा। प्रशासन ने साफ किया है कि इस दौरान उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी और वह डेरा परिसर से बाहर किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले सकेगा।

राम रहीम को सुनाई गई उम्रकैद की सजा

राम रहीम को वर्ष 2017 में दो साध्वियों के साथ रेप के मामले में दोषी ठहराया गया था जिसके बाद उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके अलावा, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी वह दोषी पाया गया है। इन गंभीर मामलों के चलते उसकी सजा और पैरोल को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

पहले भी मिल चुकी है पैरोल

यह पहली बार नहीं है जब राम रहीम को पैरोल मिली हो। इससे पहले भी वह कई बार पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर आ चुका है। खासकर चुनावी समय में मिली पैरोल को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी विवाद हुआ था। हालांकि प्रशासन हर बार यही कहता रहा है कि पैरोल नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही दी जाती है।

सुनारिया जेल में करना होगा सरेंडर

इस बार मिली 40 दिन की पैरोल को लेकर भी वही शर्तें लागू होंगी। तय समय पूरा होने के बाद राम रहीम को दोबारा सुनारिया जेल में सरेंडर करना होगा। प्रशासन का कहना है कि कानून के दायरे में रहते हुए ही उसे यह राहत दी गई है।