राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन का पूरा रोडमैप: बीजेपी में कैसे तय होता है नाम?

पार्टी संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन एक तयशुदा व्यवस्था के तहत होता है, जिसमें इलेक्टोरल कॉलेज, नामांकन, जांच, नाम वापसी और जरूरत पड़ने पर मतदान शामिल है।

बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन की पूरी टाइमलाइन
बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चयन की पूरी टाइमलाइन
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar17 Jan 2026 02:03 PM
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BJP National President Election 2026 : भारतीय जनता पार्टी ने अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह चुनाव पार्टी के देशव्यापी संगठनात्मक अभियान संगठन पर्व-2024 के तहत कराया जा रहा है। शुक्रवार को बीजेपी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने चुनाव कार्यक्रम अधिसूचित कर दिया। पार्टी संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन एक तयशुदा व्यवस्था के तहत होता है, जिसमें इलेक्टोरल कॉलेज, नामांकन, जांच, नाम वापसी और जरूरत पड़ने पर मतदान शामिल है।

चरण 1: इलेक्टोरल कॉलेज की सूची जारी (16 जनवरी 2026)

राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव की शुरुआत 16 जनवरी 2026 को हुई। दोपहर 12 बजे इलेक्टोरल कॉलेज की सूची प्रकाशित की गई।बीजेपी के संविधान के अनुसार, इलेक्टोरल कॉलेज में राष्ट्रीय परिषद (नेशनल काउंसिल) के सदस्य और राज्य परिषदों से चुने गए प्रतिनिधि शामिल होते हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में वोट देने का अधिकार इन्हीं सदस्यों को होता है।

चरण 2: नामांकन दाखिल (19 जनवरी 2026)

19 जनवरी 2026 को इस चुनावी प्रक्रिया का सबसे अहम मोड़ आएगा—जब नई दिल्ली स्थित बीजेपी के केंद्रीय कार्यालय में दोपहर 2 से 4 बजे के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किए जाएंगे। लेकिन यह सिर्फ फॉर्म जमा करने की औपचारिकता नहीं है; पार्टी के संविधान ने उम्मीदवार के लिए कड़ी योग्यता और मजबूत संगठनात्मक समर्थन की शर्तें तय कर रखी हैं। दावेदार को या तो पार्टी में कम से कम चार कार्यकाल पूरे करने होंगे, या फिर 15 वर्षों तक सक्रिय सदस्य के तौर पर निरंतर भूमिका निभाई होनी चाहिए। वहीं नामांकन तभी वैध माना जाएगा जब किसी एक राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के कम से कम 20 सदस्य प्रस्तावक बनें और साथ ही कम से कम 5 राज्यों से समर्थन मिले

चरण 3: नामांकन जांच और नाम वापसी (19 जनवरी 2026)

नामांकन की घड़ी जैसे ही खत्म होगी, उसी दिन पार्टी मुख्यालय में चुनावी प्रक्रिया तेज रफ्तार में अगले चरण में प्रवेश कर जाएगी। शाम 4 से 5 बजे तक दाखिल किए गए नामांकन पत्रों की बारीकी से जांच होगी। इसके बाद शाम 5 से 6 बजे का समय उम्मीदवारों के लिए रणनीतिक फैसला लेने का होगा यहीं नाम वापस लेने की अंतिम खिड़की खुलेगी। फिर शाम 6:30 बजे राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी की प्रेस विज्ञप्ति से तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी कि पार्टी में अध्यक्ष का चयन सर्वसम्मति से तय हुआ है या फिर 20 जनवरी को वोटिंग की औपचारिक लड़ाई तक मामला पहुंचने वाला है।

चरण 4: मतदान और परिणाम (20 जनवरी 2026)

नाम वापसी के बाद तस्वीर अगर साफ नहीं होती और मैदान में एक से ज्यादा वैध दावेदार बने रहते हैं, तो मुकाबला 20 जनवरी 2026 को सीधे वोटिंग तक पहुंच जाएगा। उस दिन सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य मतदान करेंगे और उसी दिन नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। लेकिन अगर नाम वापसी के बाद सिर्फ एक ही उम्मीदवार बचता है, तो पार्टी की परंपरा और नियमों के मुताबिक उसे निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया जाएगा

संभावित उम्मीदवार के प्रस्तावक कौन हो सकते हैं?

सूत्रों की मानें तो बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के नामांकन को इस बार संगठन बहु-स्तरीय समर्थन के साथ मजबूत दिखाने की तैयारी में है। चर्चा है कि वे तीन अलग-अलग सेट में नामांकन दाखिल कर सकते हैं, ताकि संदेश सिर्फ संख्या का नहीं, बल्कि नेतृत्व से लेकर संगठन के हर स्तर की सहमति का जाए। पहले सेट में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा के प्रस्तावक बनने की संभावना जताई जा रही है। दूसरे सेट में 20 से अधिक निर्वाचित प्रदेश अध्यक्षों के हस्ताक्षर शामिल हो सकते हैं, जो देशभर में संगठनात्मक स्वीकार्यता का संकेत देंगे। वहीं तीसरे सेट में नेशनल काउंसिल के सदस्यों का समर्थन जोड़कर नामांकन को व्यापक वैधता देने की रणनीति बताई जा रही है।

प्रधानमंत्री की मौजूदगी में नई कमान का औपचारिक हस्तांतरण

यदि नितिन नबीन पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो बीजेपी मुख्यालय में नेतृत्व परिवर्तन का औपचारिक मंचन किया जाएगा। पार्टी परंपरा के मुताबिक उन्हें दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यालय तक प्रधानमंत्री और शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में ले जाया जाएगा। इसी के साथ पार्टी में राष्ट्रीय नेतृत्व का औपचारिक बदलाव पूरा हो जाएगा। बीजेपी के लिए यह प्रक्रिया ‘संगठन पर्व-2024’ के समापन की तरह भी देखी जा रही है और साथ ही आने वाले महीनों में संगठन को चुनावी मोड में शिफ्ट करने वाले नए चरण की शुरुआत भी। इसलिए नए अध्यक्ष का चयन केवल एक पद की घोषणा नहीं, बल्कि अगले वर्षों की राजनीतिक दिशा, रणनीति और चुनावी तैयारी का रोडमैप तय करने वाला फैसला माना जा रहा है। BJP National President Election 2026

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वसई–विरार चुनाव परिणाम: क्षेत्रीय राजनीति में बहुजन विकास आघाड़ी की प्रचंड जीत

वसई–विरार महानगरपालिका चुनाव के नतीजों में बहुजन विकास आघाड़ी (बीवीए) ने एक बार फिर अपना वर्चस्व कायम रखते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल की है। कुल 115 सीटों वाली महानगरपालिका में बीवीए ने 71 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 43 सीटों से संतोष करना पड़ा।

Bahujan Vikas Aghadi
बहुजन विकास आघाड़ी (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar17 Jan 2026 01:09 PM
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चुनाव परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि वसई–विरार क्षेत्र में बहुजन विकास आघाड़ी का जनाधार अब भी मजबूत बना हुआ है। इस जीत के साथ पार्टी प्रमुख हितेंद्र ठाकुर ने अपने राजनीतिक गढ़ को बरकरार रखा है। मतदाताओं ने स्थानीय नेतृत्व और बीवीए की नीतियों पर एक बार फिर भरोसा जताया है।

अधिकांश दल खाता खोलने में असमर्थ

बता दें कि अन्य राजनीतिक दलों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। शिवसेना (शिंदे गुट) को केवल एक सीट मिली, जबकि शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) और वंचित बहुजन आघाड़ी खाता खोलने में भी असफल रहीं। समाजवादी पार्टी, एआईएमआईएम, आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को भी एक भी सीट नहीं मिल सकी।

भाजपा ने 43 सीटें जीतकर विपक्ष की भूमिका मजबूत की

बता दें कि भाजपा ने 43 सीटें जीतकर विपक्ष की भूमिका जरूर मजबूत की है, लेकिन वह बीवीए को सत्ता से बाहर करने की स्थिति में नहीं दिखी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह परिणाम स्थानीय मुद्दों, क्षेत्रीय नेतृत्व और जनता की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

नागरिक सुविधाओं में सुधार और नई सरकार की कार्यप्रणाली

बता दें कि स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद बहुजन विकास आघाड़ी वसई–विरार महानगरपालिका में नगर सरकार बनाने जा रही है। आने वाले समय में नगर प्रशासन, बुनियादी ढांचे के विकास और नागरिक सुविधाओं को लेकर नई सरकार की कार्यप्रणाली पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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मनपा नतीजों से बदली महाराष्ट्र की सियासी तस्वीर, खिला कमल

महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। सीएम फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा ने 25 नगर निगमों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस जीत के साथ ही राज्य की राजनीति में फडणवीस का कद और ऊंचा हो गया है।

Devendra Fadnavis in BJP's victory
भाजपा की जीत में देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar17 Jan 2026 11:29 AM
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चुनावी नतीजों के मुताबिक नागपुर, मुंबई, नवी मुंबई, मीरा-भाईंदर सहित करीब 20 महानगरपालिकाओं में बीजेपी ने दमदार प्रदर्शन किया। इसके अलावा पनवेल, जालना, नांदेड़, धुलिया, सोलापुर, इचलकरंजी, जलगांव, नाशिक, पुणे, पिंपरी-चिंचवड, संभाजीनगर और सांगली जैसी प्रमुख महानगरपालिकाओं में भी भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की है।

शिंदे और अजित के गढ़ में सेंध

बता दें कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का अपने गढ़ ठाणे में प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। हालांकि वे ठाणे मनपा में अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रहे, लेकिन पार्टी को अपेक्षित बढ़त नहीं मिल सकी। वहीं, शरद पवार के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार अपने गढ़ पुणे और पिंपरी-चिंचवड को बचाने में नाकाम रहे है।

मुंबई में महायुति को बहुमत

मुंबई महानगरपालिका में भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना ने मिलकर बहुमत हासिल किया है। वसई-विरार में भले ही बहुजन विकास आघाड़ी को बहुमत मिला हो, लेकिन भाजपा ने वहां भी अपनी स्थिति पहले से बेहतर की है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

महायुति का सबसे बड़ा चेहरा बने फडणवीस

महानगरपालिका चुनावों में मिली इस सफलता के बाद देवेंद्र फडणवीस महायुति के सबसे प्रभावशाली नेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा सरकार में नेतृत्व को लेकर शिंदे और अजित पवार के पास फिलहाल कोई मजबूत विकल्प नहीं है।

अमृता फडणवीस ने जताई खुशी

मुख्यमंत्री की पत्नी अमृता फडणवीस ने चुनावी जीत पर खुशी जताते हुए कहा कि युवाओं ने गुड गवर्नेंस और विकास के नाम पर वोट किया है। उन्होंने देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र का ‘इंफ्रा मैन’ बताते हुए कहा कि वे समाज के हर वर्ग के प्रति जिम्मेदार हैं और यही बात उनकी नीतियों में भी साफ दिखाई देती है। हानगरपालिका चुनावों के नतीजों ने न केवल भाजपा की संगठनात्मक मजबूती को दिखाया है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में देवेंद्र फडणवीस को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया है।