मुंबई बीएमसी में लॉटरी ने बदला खेल, अब महिला चेहरों पर होगा सियासी दांव

बहुमत जिस गठबंधन के पास होगा, वही तय करेगा कि मुंबई, पुणे, नागपुर और नाशिक जैसे बड़े शहरों की मेयर कुर्सी पर कौन बैठेगा। महिला आरक्षण के चलते अब इन महानगरों की सियासत में नए चेहरे और नई रणनीतियां देखने को मिल सकती हैं।

Lottery Brihanmumbai Municipal Corporation
लॉटरी ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar22 Jan 2026 03:58 PM
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महाराष्ट्र की राजनीति में गुरुवार का दिन अहम रहा। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत राज्य की प्रमुख महानगरपालिकाओं में मेयर पद के आरक्षण को लेकर निकाली गई लॉटरी में बड़ा फैसला हुआ। लॉटरी के अनुसार मुंबई, पुणे, नागपुर और नाशिक नगर निगमों में मेयर पद सामान्य श्रेणी (महिला) के लिए आरक्षित कर दिया गया है। इसके साथ ही इन सभी महानगरपालिकाओं की कमान अब महिला मेयर के हाथों में होगी।

मुंबई महानगरपालिका के मेयर पद को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। दरअसल, मेयर पद का आरक्षण चक्रानुक्रम पद्धति से तय होता है, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी और महिला वर्ग शामिल होते हैं। इस बार भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) ने मिलकर 118 सीटों पर जीत दर्ज की है, लेकिन उनके खेमे से कोई भी एससी वर्ग का पार्षद निर्वाचित नहीं हुआ। ऐसे में अगर मेयर पद एससी वर्ग के लिए आरक्षित होता, तो स्थिति जटिल हो सकती थी। हालांकि लॉटरी में सामान्य श्रेणी (महिला) निकलने से यह विवाद समाप्त हो गया।

सियासी मायने लोकप्रिय महिला पार्षद को मैदान में उतर सकती है

देश की सबसे अमीर महानगरपालिका मानी जाने वाली BMC का मेयर पद सामान्य श्रेणी (महिला) में जाने को केवल प्रशासनिक फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने हैं। ओपन कैटेगरी होने से जातिगत बाध्यता समाप्त हो गई है और अब सभी पार्टियां अपनी सबसे मजबूत और लोकप्रिय महिला पार्षद को मैदान में उतार सकती हैं। शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने आरोप लगाया है कि आरक्षण और रोटेशन की प्रक्रिया को सत्ता के फायदे के अनुसार मोड़ा गया है, ताकि कुछ खास चेहरों के लिए रास्ता साफ किया जा सके।

शिवसेना का गढ़ रही है बीएमसी

पिछले करीब 30 वर्षों से बीएमसी शिवसेना का अभेद्य किला रही है। ऐसे में खुले वर्ग में महिला आरक्षण आने से भाजपा और शिंदे गुट अब ऐसे महिला चेहरे की तलाश में हैं, जिसकी मुंबई की जनता में मजबूत पकड़ हो। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब मुकाबला पूरी तरह फेस वैल्यू और रणनीतिक मैनेजमेंट पर निर्भर करेगा।

लॉटरी के बाद तय कार्यक्रम

लॉटरी के बाद तय कार्यक्रम के अनुसार उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे। मेयर का चुनाव सीधे जनता नहीं, बल्कि जनता द्वारा चुने गए पार्षद करेंगे। नगर निगम की विशेष बैठक में पीठासीन अधिकारी की मौजूदगी में मतदान होगा। चुनाव से पहले सभी पार्टियां व्हिप जारी करेंगी और व्हिप का उल्लंघन करने पर पार्षद की सदस्यता भी रद्द हो सकती है।

बहुमत जिस गठबंधन के पास होगा, वही तय करेगा कि मुंबई, पुणे, नागपुर और नाशिक जैसे बड़े शहरों की मेयर कुर्सी पर कौन बैठेगा। महिला आरक्षण के चलते अब इन महानगरों की सियासत में नए चेहरे और नई रणनीतियां देखने को मिल सकती हैं।

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SUV के दौर में भी पसंद की जा रही हैं ये सस्ती सेडान कारें, जानें माइलेज और फीचर्स

ट्रेंड बढ़ने के बावजूद सेडान कारें अभी भी भारतीय बाजार में अपनी जगह बनाए हुए हैं। अगर आप कम बजट में सेफ्टी, माइलेज और कम रखरखाव वाली कार ढूंढ रहे हैं, तो Tata Tigor, Hyundai Aura और Maruti Dzire आपके लिए अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं।

Tata Tigor
Tata Tigor, Hyundai Aura और Maruti Dzire (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar22 Jan 2026 02:35 PM
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आज के समय में SUV का क्रेज बढ़ा है, लेकिन सेडान कारों की अपनी अलग पहचान अब भी कायम है। सेडान को आरामदायक राइड, बेहतर राइड क्वालिटी और लंबी दूरी की यात्रा में स्मूद एक्सपीरियंस के लिए ज्यादा पसंद किया जाता है। खासकर फैमिली यूज और डेली ड्राइव के लिए सेडान कार एक बेहतर विकल्प मानी जाती है।

अगर आपका बजट सीमित है और आप एक सुरक्षित, माइलेज देने वाली और भरोसेमंद सेडान कार की तलाश में हैं, तो भारतीय बाजार में कुछ बेहतरीन सस्ती सेडान उपलब्ध हैं। आइए जानते हैं इन कारों की कीमत, माइलेज और फीचर्स के बारे में।

1) Tata Tigor – सबसे सस्ती सेडान

Tata Tigor भारत की सबसे सस्ती सेडान कार है। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत लगभग ₹5.49 लाख है। यह कार पेट्रोल और CNG दोनों विकल्पों में उपलब्ध है।

  • पेट्रोल माइलेज: लगभग 19.2 kmpl
  • CNG माइलेज: लगभग 26 km/kg
  • सेफ्टी: Global NCAP से 4-स्टार रेटिंग
  • फीचर्स: मजबूत बॉडी, एयरबैग, ABS आदि

विशेष रूप से छोटे परिवार के लिए यह एक भरोसेमंद विकल्प माना जाता है।

2) Hyundai Aura – फीचर्स से भरपूर

Hyundai Aura की शुरुआती कीमत ₹5.98 लाख है। यह भी **पेट्रोल और CNG** दोनों विकल्पों में आती है।

  • पेट्रोल माइलेज: लगभग 20.5 kmpl
  • CNG माइलेज: लगभग 25 km/kg
  • सेफ्टी: सभी वेरिएंट में 6 एयरबैग स्टैंडर्ड
  • फीचर्स: टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट, वायरलेस चार्जिंग, क्रूज कंट्रोल

इन सभी फीचर्स के कारण Aura को डेली यूज के लिए आरामदायक और प्रीमियम विकल्प माना जाता है।

3) Maruti Dzire – सबसे ज्यादा बिकने वाली सेडान

Maruti Dzire भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली सेडान कार है। इसकी शुरुआती कीमत ₹6.26 लाख है।

  • पेट्रोल माइलेज: लगभग 25.71 kmpl
  • CNG माइलेज: लगभग 33.73 km/kg
  • सेफ्टी:5-स्टार रेटिंग प्राप्त
  • फीचर्स:6 एयरबैग, बड़ा टचस्क्रीन, सनरूफ, 360 डिग्री कैमरा

Dzire में आधुनिक फीचर्स के साथ बेहतर माइलेज भी मिलता है, इसलिए यह भारतीय ग्राहकों में बेहद लोकप्रिय है।

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BJP में इन जिम्मेदारियों पर तय होगी आयु-सीमा, बैठक में हुआ मंथन

अध्यक्ष पद संभालते ही नितिन नवीन ने संगठन में युवाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में ठोस ढांचा बनाने का संकेत दिया है। जेन-जी और नई पीढ़ी की राजनीति पर देशभर में चल रही चर्चा के बीच भाजपा का यह कदम पार्टी के युवा-केंद्रित एजेंडे को और स्पष्ट करता है।

नितिन नवीन
नितिन नवीन
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar22 Jan 2026 01:56 PM
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BJP Organizational Changes : भाजपा ने संगठन की कमान 45 वर्षीय नितिन नवीन को सौंपकर साफ संकेत दिया है कि पार्टी अब नेतृत्व में पीढ़ीगत बदलाव को तेज करना चाहती है। अध्यक्ष पद संभालते ही नितिन नवीन ने संगठन में युवाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में ठोस ढांचा बनाने का संकेत दिया है। जेन-जी और नई पीढ़ी की राजनीति पर देशभर में चल रही चर्चा के बीच भाजपा का यह कदम पार्टी के युवा-केंद्रित एजेंडे को और स्पष्ट करता है।

युवा मोर्चा में उम्र-सीमा तय करने का प्रस्ताव

पार्टी सूत्रों के मुताबिक नितिन नवीन के स्तर पर इस बात पर विचार हुआ है कि युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी ऐसे नेता को दी जा सकती है जिसकी उम्र 35 वर्ष या उससे कम हो। वहीं, राज्यों में युवा मोर्चा प्रमुख के लिए करीब 32 वर्ष के आसपास की आयु-सीमा पर भी मंथन हुआ है। उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि युवा शब्द सिर्फ नाम तक सीमित न रहे, बल्कि संगठन के भीतर वास्तविक युवा नेतृत्व को आगे लाया जाए।

पदाधिकारियों की बैठक में हुई चर्चा

इस दिशा में बुधवार को हुई पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में आयु-सीमा वाले विचार पर विस्तार से बात हुई। बैठक में यह भी संकेत मिला कि अगर संगठन सहमत हुआ, तो इसे ज्यादा सख्ती के साथ लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। इस चर्चा में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि युवाओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियों में अधिक जगह देने के लिए एक व्यवस्थित नीति जरूरी है।

5 राज्यों के चुनावों को लेकर रणनीतिक मंथन

बैठक में सिर्फ संगठनात्मक बदलाव ही नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुदुचेरी जैसे राज्यों के आगामी चुनावों को लेकर भी रणनीति पर चर्चा हुई। नितिन नवीन ने जोर दिया कि चुनावी मोर्चे पर बेहतर संवाद, मजबूत संगठन और सरकार के साथ प्रभावी समन्वय निर्णायक साबित होगा। साथ ही उन्होंने यह रेखांकित किया कि केंद्र सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों को जनता तक सही तरीके से पहुंचाने के लिए संगठन का तालमेल और अधिक मजबूत करना होगा। बैठक में एक अहम संदेश यह भी रहा कि मीडिया में बोलते समय अनुशासन और सावधानी बरती जाए। नितिन नवीन ने स्पष्ट किया कि पार्टी का पक्ष वही लोग रखें जिन्हें अधिकृत किया गया हो, ताकि अलग-अलग बयान पार्टी की लाइन को नुकसान न पहुंचाएं।

खास वर्गों तक पहुंच के लिए अलग टीम का विचार

बैठक के दौरान यह सुझाव भी सामने आया कि दिहाड़ी मजदूरों तक संपर्क और संवाद के लिए अलग टीम बनाई जाए। इसके अलावा विकसित भारत जैसे कार्यक्रमों/योजनाओं की जानकारी जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए भी विशेष सेल गठित करने पर विचार हुआ, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के बीच जाकर योजनाओं को सरल भाषा में समझाए। BJP Organizational Changes