Thursday, 27 March 2025

कितना मुश्किल होता है रात दिन दूसरों की सेवा करना, जानिए आज के इस खास दिन पर

International Nurses Day: आज विश्व नर्सेज डे (International Nurses Day) हैं। आज हम आपको यहां कुछ ऐसी भारतीय नर्सों की…

कितना मुश्किल होता है रात दिन दूसरों की सेवा करना, जानिए आज के इस खास दिन पर

International Nurses Day: आज विश्व नर्सेज डे (International Nurses Day) हैं। आज हम आपको यहां कुछ ऐसी भारतीय नर्सों की जानकारी देंगे, जिन्होंने दिन रात बिना जाति, धर्म और वर्ण का भेदभाव​ किए मरीजों की सेवा की। अब यह नर्स विश्व स्तर पर भारत देश का नाम रोशन करने जा रही हैं।

International Nurses Day

शांति टेरेसा लाकरा –

शांति टेरेसा लाकड़ा का जन्म 1 मई 1972 को मध्य अंडमान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में रंगत नामक एक छोटे से गांव में हुआ था। नर्सिंग में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने 2001 में एक सहायक नर्स और दाई के रूप में अपना करियर शुरू किया। स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, अंडमान और निकोबार प्रशासन। उनकी प्रारंभिक पोस्टिंग ओन्गे लोगों की भूमि डुगोंग क्रीक के सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र में थी। उन्होंने वहां पांच साल तक काम किया जिसके दौरान 2004 की सुनामी ने बस्तियों को तबाह कर दिया। शांति टेरेसा लाकरा ने सुनामी पीड़ितों की दिन रात सेवा की। जिस पर उन्हें

शांति टेरेसा लाकरा पोर्ट ब्लेयर में जीबी पंत अस्पताल में काम करती हैं। साल 2011 से अंडमान और निकोबार के आदिवासी समुदाय के साथ विश्वसनीयता से काम करती आ रही हैं। समुदाय की स्वास्थ्य संबंधी सभी जरूरतों को समझते हुए उनके साथ काम किया। इन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

लाकरा कहती हैं कि मेरी पूरी दुनिया अंडमान और निकोबार के एक बहुत ही आंतरिक और अलग-थलग हिस्से में रहने वाले जनजातियों-लोकों की है। जब 2004 की सूनामी ने ओंगी जनजाति के द्वीप पर हमला किया और उन्हें घने जंगल में धकेल दिया, तो लाकरा ने भी उन जनजातियों संग अपना घर बना लिया। लाकरा एक खुले तंबू में रहने लगीं। उन्होंने सुनामी की रात एक ओंगी किशोरी को एक किलो से भी कम वजन के बच्चे को जन्म देने में मदद की थी। लाकरा ने बताया कि अगर वह पुरस्कार जीतती हैं, तो वह लुप्तप्राय देशी द्वीपवासियों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए एक एनजीओ बनाने के लिए रुपयों का इस्तेमाल करेंगी।

जिंसी जेरी –

जिंसी जेरी के बारे में जानें? वहीं, जिंसी जेरी ग्लोबल नर्सिंग अवॉर्ड के लिए दूसरी भारतीय नर्स चुनी गईं। यह डबलिन के मेटर मिसेरिकोर्डिया यूनिवर्सिटी अस्पताल में संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए नर्सिंग के सहायक निदेशक के रुप में काम करती हैं। दिल्ली के जामिया हमदर्द में एक नर्स के रूप में प्रशिक्षण के बाद 2006 में डबलिन चली गईं। उन्हें मार्च 2020 में डबलिन अस्पताल में रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन पेश करने के लिए आइरिश हेल्थकेयर अवॉर्ड भी मिल चुका है। International Nurses Day:

MBBS doctor: 3 रुपये वाला MBBS डाक्टर, हर दिन करता है 500 मरीजों का इलाज

देश विदेश की खबरों से अपडेट रहने लिए चेतना मंच के साथ जुड़े रहें।

देश-दुनिया की लेटेस्ट खबरों से अपडेट रहने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें।

Related Post