BMC Mayor List: मुंबई में 25 साल बाद टूटा शिवसेना का किला, जाने 25 साल का इतिहास

2026 के चुनावों ने बीएमसी की राजनीति का समीकरण बदल दिया है। भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने न केवल शिवसेना के लंबे शासन को चुनौती दी है, बल्कि यह संकेत भी दिया है कि मुंबई की जनता अब नई राजनीतिक दिशा चाहती है।

BMC Mayor List
बीएमसी चुनाव 2026 (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar16 Jan 2026 09:33 PM
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देश की सबसे अमीर महानगरपालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) एक बार फिर सुर्खियों में बनी है। 227 वार्डों वाली इस नगर निगम के 2026 के चुनावों ने मुंबई की राजनीति में नया इतिहास रचा है। बता दें कि 1931 से शिवसेना का गढ़ मानी जाने वाली बीएमसी ने इस बार भाजपा (भारतीय जनता पार्टी ) ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। शुरुआती रुझानों से लेकर अंतिम परिणामों तक, यह साफ हो गया कि मुंबई की जनता ने बदलाव के पक्ष में वोट दिया है।

बीएमसी: एक छोटे बोर्ड से देश की सबसे अमीर संस्था तक

बृहन्मुंबई महानगरपालिका की नींव 19वीं सदी में रखी गई थी। वर्ष 1807 में इसकी शुरुआत बेहद सीमित दायरे में हुई थी, जब इसका कार्य केवल सेशंस कोर्ट तक सीमित था। बाद में शहर की साफ-सफाई, नगर व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारियां इसे सौंपी गईं। 1907 में प्राथमिक शिक्षा का दायित्व भी बीएमसी के अधीन आ गया। इसके बाद 1931 में बॉम्बे अधिनियम संख्या 21 के तहत अध्यक्ष के पद को ‘मेयर’ नाम दिया गया। इसी के साथ मुंबई को अपना पहला ‘प्रथम नागरिक’ मिला।

यहां देखें 1931 से 2022 तक बीएमसी मेयर की पूरी सूची

75 हजार करोड़ का बजट, कई राज्यों से ज्यादा ताकत

बता दें कि बीएमसी की असली ताकत उसके विशाल बजट में झलकती है। लगभग 75 हजार करोड़ रुपये का वार्षिक बजट भारत के कई छोटे राज्यों के कुल बजट से भी अधिक है। करीब 1 करोड़ 87 लाख की आबादी वाले मुंबई शहर की बुनियादी सुविधाओं—पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और सफाई—की जिम्मेदारी बीएमसी पर ही है। राजनीतिक दृष्टि से यहां मराठी, गुजराती और उत्तर भारतीय मतदाताओं की बड़ी भूमिका रही है, जिसके चलते ‘मराठी बनाम गैर-मराठी’ जैसे मुद्दे अक्सर चुनावी बहस का केंद्र बनते रहे हैं।

शिवसेना का लंबा शासन और दिग्गज मेयर

बीएमसी के इतिहास में पिछले 25 वर्षों तक शिवसेना का दबदबा रहा है। पार्टी ने नगर निगम की सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाए रखी थी। इससे पहले भी कई दिग्गज नेता मेयर पद तक पहुंचे। 1971 में डॉ. हेमचंद्र गुप्ते मेयर बने। इसके बाद सुधीर जोशी, मनोहर जोशी और छगन भुजबल जैसे कद्दावर नेताओं ने इस प्रतिष्ठित पद को संभाला और मुंबई की राजनीति को दिशा दी।

2026 चुनाव: बदलाव की बयार

2026 के चुनावों ने बीएमसी की राजनीति का समीकरण बदल दिया है। भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने न केवल शिवसेना के लंबे शासन को चुनौती दी है, बल्कि यह संकेत भी दिया है कि मुंबई की जनता अब नई राजनीतिक दिशा चाहती है। बीएमसी का मेयर पद सिर्फ एक संवैधानिक पद नहीं, बल्कि मुंबई के ‘असली राजा’ की पहचान माना जाता है। 1931 से शुरू हुई यह यात्रा आज भी उतनी ही प्रभावशाली और सत्ता के केंद्र में बनी हुई है।


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BMC Mumbai Election Result 2026: बीएमसी चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनने की ओर

महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) सहित 29 नगर निकाय चुनावों के नतीजे शुक्रवार को सामने आ रहे हैं। शुरुआती रुझानों में भाजपा ने बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी बनने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।

BMC Mumbai Election Result 2026
महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar16 Jan 2026 05:51 PM
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बता दें कि अब तक आए रुझानों के अनुसार भाजपा लगभग शतक के आंकड़े को छूने के करीब है, जबकि करीब तीन दशक बाद मुंबई में ठाकरे बंधुओं का वर्चस्व टूटता नजर आ रहा है। बीएमसी की 227 सीटों में से 225 पर आए रुझानों में भाजपा 99 सीटों पर बढ़त के साथ सबसे आगे चल रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) 62 सीटों पर, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना 31 सीटों पर आगे है। कांग्रेस 13 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को केवल 9 सीटों पर ही संतोष करना पड़ता दिख रहा है।

पवार परिवार को झटका, अजित पवार का खाता भी नहीं खुला

मुंबई में एनसीपी (अजित पवार गुट) का खाता खुलता नजर नहीं आ रहा है। वहीं शरद पवार गुट की एनसीपी को अब तक 3 सीटों पर बढ़त मिली है। चुनाव में एनसीपी नेता नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक को हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा शिंदे गुट के सांसद रविंद्र वायकर की बेटी दीप्ति वायकर को जोगेशरी से पराजय झेलनी पड़ी।

कांग्रेस की संकरी जीत, 7 वोट से पलड़ा भारी

मुंबई में कांग्रेस की एक प्रत्याशी ने महज़ 7 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर सभी का ध्यान खींचा। वहीं वार्ड नंबर 111 से शिवसेना (UBT) के दीपक सावंत विजयी रहे। वार्ड नंबर 197 से शिवसेना (शिंदे गुट) की दीक्षा कारकर और दहिसार के वार्ड नंबर 5 से संजय घाड़ी ने जीत हासिल की।

अन्य नगर निगमों में भी भाजपा की बढ़त

बीएमसी के अलावा नवी मुंबई, पुणे, नागपुर, सोलापुर, पनवेल, अकोला, उल्हासनगर, वसई-विरार, धुले, कोल्हापुर और जलगांव समेत कई नगरपालिकाओं में भाजपा लगातार बढ़त बनाए हुए है। हालांकि चंद्रपुर और लातूर में कांग्रेस ने दमदार प्रदर्शन किया है। चंद्रपुर में कांग्रेस 16 सीटों पर आगे है जबकि भाजपा 10 सीटों पर। लातूर में कांग्रेस 36 सीटों पर बढ़त के साथ भाजपा (22 सीट) से आगे निकल गई है।

पुणे में भाजपा का क्लीन स्वीप जैसा प्रदर्शन

पुणे से आए नतीजे सबसे चौंकाने वाले हैं। यहां भाजपा ने 92 में से 80 सीटों पर बढ़त बना ली है। अजित पवार गुट की एनसीपी को केवल 6 सीटों और शरद पवार गुट को 3 सीटों पर बढ़त मिली है। कांग्रेस यहां 3 सीटों पर आगे चल रही है। नागपुर में भी भाजपा का दबदबा बरकरार है। कोल्हापुर से सबसे पहले नतीजे आए, जहां बीजेपी ने 4 सीटें अपने नाम कीं।

कड़ी सुरक्षा के बीच हो रही मतगणना

बीएमसी चुनावों के लिए 23 काउंटिंग सेंटर बनाए गए हैं। म्युनिसिपल कमिश्नर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी भूषण गगरानी ने बताया कि मतगणना भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ कराई जा रही है। मतगणना में 779 सुपरवाइज़र, 770 असिस्टेंट और 770 क्लास-IV कर्मचारियों की तैनाती की गई है। सभी काउंटिंग सेंटर्स पर CCTV, पुलिस सुरक्षा, फायर और मेडिकल सुविधाएं मौजूद हैं।

लोकतंत्र में भरोसा मजबूत करने पर जोर

गगरानी ने कहा कि परिणामों की घोषणा में कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि सटीकता और पारदर्शिता बनी रहे। केवल अधिकृत प्रतिनिधियों और पहचान पत्रधारकों को ही मतगणना केंद्र में प्रवेश की अनुमति दी गई है।

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जाने दाऊद के जानी दुश्मन हुसैन उस्तरा पर टिकी ‘ओ रोमियो’ की कहानी

मुंबई अंडरवर्ल्ड से प्रेरित कई फिल्में बन चुकी हैं, जिनमें ब्लैक फ्राइडे, कंपनी, शूटआउट एट लोखंडवाला और वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई जैसी फिल्में शामिल हैं। ऐसे में ‘ओ रोमियो’ पर उठा विवाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि रियल लाइफ क्राइम और रील लाइफ कहानी के बीच की सीमा आखिर कहां तय हो।

Mumbai Underworld
‘उस्तरा’ नाम के पीछे छिपी हिंसा की कहानी (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar16 Jan 2026 02:52 PM
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मुंबई अंडरवर्ल्ड के कुख्यात नाम हुसैन उस्तरा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वजह है शाहिद कपूर अभिनीत फिल्म ‘ओ रोमियो’, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि उसका मुख्य किरदार हुसैन उस्तरा से प्रेरित है।हालांकि फिल्म निर्माताओं ने इसे पूरी तरह काल्पनिक बताते हुए किसी भी वास्तविक व्यक्ति से संबंध से इनकार किया है। इसी बीच हुसैन उस्तरा की बेटी सनोबर शेख द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस ने विवाद को और गहरा कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सनोबर शेख ने नोटिस में आरोप लगाया है कि फिल्म में उनके पिता की छवि को नकारात्मक रूप में दिखाया गया है, जिससे परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच सकती है। उन्होंने कथित तौर पर दो करोड़ रुपये के मुआवज़े की मांग की है और फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की अपील भी की है। फिल्म का निर्माण साजिद नाडियावाला ने किया है और निर्देशन विशाल भारद्वाज का बताया जा रहा है।

जाने कौन था हुसैन उस्तरा?

बता दें कि हुसैन शेख उर्फ हुसैन उस्तरा 1980 के दशक में मुंबई अंडरवर्ल्ड का एक चर्चित गैंगस्टर था। सादे पहनावे और शांत स्वभाव के बावजूद उसका नाम खौफ के साथ लिया जाता था। कम उम्र में हुए एक हिंसक हमले के बाद उसके नाम के साथ ‘उस्तरा’ जुड़ गया और धीरे-धीरे उसने अपना अलग गैंग खड़ा कर लिया। वह अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का कट्टर दुश्मन माना जाता था। हुसैन की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी प्रेमिकाएं बताई जाती हैं। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर छोटा शकील ने कथित तौर पर हनी ट्रैप रचाया और नागपाड़ा इलाके में उसकी हत्या कर दी गई। यह घटना मुंबई अंडरवर्ल्ड के इतिहास की चर्चित घटनाओं में गिनी जाती है।

जाने अशरफ उर्फ सपना दीदी की भूमिका के बारे में

बता दें कि हुसैन उस्तरा का नाम अशरफ खान उर्फ सपना दीदी के साथ भी जोड़ा जाता है। बताया जाता है कि अशरफ के पति की हत्या के बाद उसने दाऊद इब्राहिम से बदला लेने की ठानी और हुसैन के साथ मिलकर अंडरवर्ल्ड के खिलाफ अभियान शुरू किया। यह गठजोड़ दाऊद के नेटवर्क के लिए एक बड़ी चुनौती माना गया था।

फिक्शन बनाम हकीकत की बहस

बता दें कि फिल्म ‘ओ रोमियो’ को लेकर अब यही सवाल उठ रहा है कि सिनेमा सच्ची घटनाओं से प्रेरणा लेते हुए कितनी दूर तक जा सकता है। दर्शक जहां इसे वास्तविक किरदारों की कहानी मान लेते हैं, वहीं निर्माता इसे रचनात्मक स्वतंत्रता का हिस्सा बताते हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, विवाद का केंद्र यही रहेगा कि फिल्म किसी वास्तविक व्यक्ति की सीधी बायोपिक है या केवल प्रेरित कथा।

फिल्म फरवरी में रिलीज होगी या मामला अदालत तक पहुंचेगा, यह आने वाला वक्त तय करेगा। फिलहाल इतना तय है कि हुसैन उस्तरा का नाम, जो कभी मुंबई अंडरवर्ल्ड में खौफ का प्रतीक था, एक बार फिर सिनेमा और कानून दोनों के केंद्र में आ गया है।

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