किसान के लिए धन की देवी बन गई है भैंस

हरियाणा के अंबाला क्षेत्र के साहा गाँव में रहने वाले रविन्द्र कुमार उर्फ बिल्लू की मुर्रा नस्ल की भैंस की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। यूट्यूब पर तो बिल्लू की मुर्रा नस्ल की भैंस की धूम मची हुई है।

अंबाला के किसान बिल्लू की मुर्रा भैंस ‘सुंदरा’
अंबाला के किसान बिल्लू की मुर्रा भैंस ‘सुंदरा’
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar14 Jan 2026 02:25 PM
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Murrah buffalo : लक्ष्मी माता को धन की देवी कहा जाता है। धन की देवी के रूप में लक्ष्मी माता की ही पूजा की जाती है। एक किसान के लिए लक्ष्मी माता नहीं बल्कि भैंस धन की देवी बन गई है। भैंस के द्वारा यह साधारण किसान खूब मालामाल हो रहा है। भैंस के कारण ही इस किसान को एक ट्रेक्टर तथा एक बुलट मोटर साइकिल ईनाम में मिले हैं। इस किसान की भैंस ने एक दिन में 30 किलो दूध देने का रिकार्ड बनाया है। 

साधारण किसान बिल्लू को भैंस ने कर दिया मालामाल

भैंस के धन की देवी बनने का यह अनोखा मामला हरियाणा प्रदेश के अंबाला क्षेत्र का है। अंबाला में रहने वाले किसान रविन्द्र कुमार उर्फ बिल्लू के लिए उसकी मुर्रा नस्ल की भैंस धन की देवी से कम नहीं है। बिल्लू की मुर्रा नस्ल की भैंस एक दिन में 30 लीटर दूध देने का चमत्कार करके दिखा रही है। हरियाणा के अंबाला क्षेत्र के साहा गाँव में रहने वाले रविन्द्र कुमार उर्फ बिल्लू की मुर्रा नस्ल की भैंस की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। यूट्यूब पर तो बिल्लू की मुर्रा नस्ल की भैंस की धूम मची हुई है।

प्रतियोगिता में जीत ली बुलेट मोटरसाइकिल 

हरियाणा के कुरूक्षेत्र में भैंसों की एक प्रतियोगिता आयोजित की गई। बिल्लू की मुर्रा भैंस ने 29.650 किलो दूध देकर कुरुक्षेत्र की प्रतियोगिता में बुलेट गाड़ी जीत ली। इससे पहले भी ये भैंस दो प्राइज जीत चुकी है। एक साल में ये उसका तीसरा प्राइज है। इससे पहले उसने एक प्रतियोगिता में ट्रैक्टर जीता था और एक बार दो लाख का इनाम जीता था।  रवींद्र कुमार (बिल्लू) पढ़े-लिखे कम हैं, लेकिन बचपन से ही उन्हें पशुओं के साथ लगाव रहा है। भैंसों के साथ-साथ उन्होंने गाय और बकरी भी रखी है। बिल्लू कहते है कि उन्हें इन सभी का बहुत शौक है। प्राइज जीतकर उन्हें बहुत अच्छा लगा है और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है। बिल्लू ने अपने बच्चों को भी इसी काम में लगा दिया है। हालांकि, उनके रिश्तेदार कहते हैं कि बच्चों को विदेश क्यों नहीं भेजते। इसके जवाब में उनका कहना है कि विदेश भेजने से अच्छा है कि यहीं पर अगर अच्छा व्यवसाय करते हैं तो अच्छी खासी इनकम हो सकती है।

बेहद अनोखी है बिल्लू की मुर्रा भैंस 

बिल्लू की मुर्रा भैंस सुंदरा ने हाल ही में कुरुक्षेत्र में DFA डेयरी फार्म एसोसिएशन हरियाणा के पशु मेले में 29.650 किलोग्राम (लगभग 29.65 लीटर) दूध एक दिन में देकर पहला स्थान हासिल किया। ये उपलब्धि काफी बड़ी है क्योंकि मुर्रा भैंस का औसत दूध 10-18 लीटर होता है, और 25 लीटर से ज्यादा दूध देने वाली भैंसें ही चैंपियन मानी जाती हैं। 29.65 किलो वाला रिकॉर्ड हरियाणा के टॉप लेवल कॉम्पिटिशन में भी बेहद शानदार है। बिल्लू हरियाणा के जाने-माने मुर्रा ब्रीडर हैं। उनकी फार्म पर कई सुपर क्वालिटी मुर्रा भैंसें हैं, जिनके मिल्किंग वीडियो पर यूट्यूब में लाखों व्यूज हैं। Murrah buffalo

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वसई-पालघर में वोटरों को लुभाने की कोशिश? नकदी जब्त, जांच में जुटी पुलिस

नगर निकाय चुनाव से पहले वसई-पालघर इलाके में सियासी माहौल उस समय गरमा गया, जब वसई फाटा क्षेत्र में पैसे बांटने का आरोप सामने आया। बहुजन विकास आघाड़ी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने देर रात कुछ लोगों को कथित तौर पर नकदी बांटते हुए रंगेहाथ पकड़ने का दावा किया है।

Elections in Vasai-Palghar
वसई-पालघर में चुनाव (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar14 Jan 2026 01:11 PM
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घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बड़ी मात्रा में नकदी जब्त की। पुलिस ने इस मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है। इस घटना के बाद इलाके में काफी देर तक अफरा-तफरी और चर्चा का माहौल बना रहा।

पुलिस कर रही है मामले की जांच

बता दें कि पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वसई फाटा में पकड़े गए मामले की जांच जारी है। नकदी कहां से लाई गई और किस उद्देश्य से बांटी जा रही थी, इसकी जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।

प्रचार खत्म होते ही सामने आई शिकायतें

बता दें कि प्रचार समाप्त होने के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोरहे ने बताया कि कौसरबाग, कोंढवा और कटराज जैसे इलाकों में शिवसेना उम्मीदवारों के खिलाफ खड़े प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों द्वारा मतदाताओं को पैसे बांटे गए और डराने-धमकाने की कोशिश की गई।

कार्यकर्ताओं को धमकाने का भी आरोप

बता दें कि यह भी आरोप लगाया कि कुछ वार्डों में शिवसेना के कार्यकर्ताओं को प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों और उनके समर्थकों द्वारा धमकाया गया। गोरहे ने कहा कि इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र के लिए खतरा हैं और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाती हैं।

शिवसेना नेता ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि इन सभी शिकायतों का संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सकें।

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Dashrath Manjhi: एक ऐसा शख्स जिसने तोड़ा पहाड़ का गुरूर, कॉमन मैन से बने माउंटेन मैन

Dashrath Manjhi: आज दशरथ मांझी को कौन नहीं जानता। हर मेहनती स्टूडेंट के दिल में दशरथ मांझी बसे हुए हैं। माउंटेन मैन कहे जाने वाले दशरथ मांझी ने अपनी जिद और मेहनत से बिहार के गेहलौर गांव के बीच पहाड़ काटकर रास्ता बनाया। चलिए जानते हैं उनकी अनसुनी कहानी।

Mountain Man Dashrath Manjhi
दशरथ मांझी की कहानी
locationभारत
userअसमीना
calendar14 Jan 2026 12:53 PM
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हर किसी की जिंदगी में ऐसी घटनाएं जरूर होती है जो पूरी दिशा बदल देती हैं। कुछ लोग मुश्किलों के सामने हार मान लेते हैं तो कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो संघर्ष को चुनौती समझकर अपने रास्ते खुद बनाते हैं। दशरथ मांझी ऐसे ही इंसान थे। बिहार के गया जिले के छोटे से गांव गेहलौर में जन्मे यह साधारण मजदूर अपनी जिंदगी में कभी भी असंभव को स्वीकार नहीं कर सके और बन गए माउंटेन मैन।

कौन थे दशरथ मांझी?

“माउंटेन मैन” के नाम से मशहूर दशरथ मांझी बिहार के गया जिले के छोटे से गांव गेहलौर के एक साधारण मजदूर थे। उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि अगर इंसान ठान ले तो कोई भी कठिनाई उसे रोक नहीं सकती। उन्होंने 22 साल की कड़ी मेहनत के बाद अपने गांव के लिए पहाड़ को काटकर एक रास्ता बनाया जिससे गांव और अस्पताल की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर सिर्फ 15 किलोमीटर हो गई।

पत्नी से थी बेइंतहा मोहब्बत

दशरथ मांझी का जन्म 14 जनवरी 1934 को हुआ था। 1959 में उनकी पत्नी फल्गुनी देवी खाना लेकर जा रही थीं लेकिन रास्ते में उनका पैर फिसल गया और वह गहरी खाई में गिर गईं। अस्पताल तक पहुंचने में समय ज्यादा लगने के कारण उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने दशरथ को ठान लिया कि वह अपने गांव के लोगों के लिए इस पहाड़ को काटकर रास्ता बनाएंगे।

शुरूआत में लोग कहते थे पागल

1960 में दशरथ मांझी ने काम शुरू किया। लोग उन्हें पागल कहने लगे क्योंकि यह काम बहुत मुश्किल था। 1600 साल पुरानी चट्टानों को केवल हथौड़ा और छेनी से काटना आसान नहीं था। उन्होंने दिन भर खेतों में काम किया और शाम से रात तक पहाड़ काटते रहे। कभी-कभी चट्टानें बहुत सख्त होने पर उन्होंने उन्हें गर्म करके फोड़ते। उनके हाथ छिलते और पैर जख्मी होते रहे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

22 साल बाद मिली सफलता

1982 तक दशरथ मांझी ने अकेले ही 360 फीट लंबा, 30 फीट चौड़ा और 25 फीट ऊंचा रास्ता बना दिया। इस रास्ते से गांव के लोगों को अस्पताल और बाजार तक पहुंचने में आसानी हुई। उनका यह काम दिखाता है कि अगर इंसान ठान ले तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती।

दशरथ मांझी की कहानी हमें यह सिखाती है कि कड़ी मेहनत, जिद और धैर्य से किसी भी मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है। उनके प्रयास ने न केवल अपने गांव के लोगों की जिंदगी बदली बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई।

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