महाराष्ट्र में सियासी घमासान: कांग्रेस ने भाजपा में शामिल 12 पार्षदों को किया निलंबित
राजनीतिक उठापटक के बीच कांग्रेस ने बुधवार को अपने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और प्रखंड अध्यक्ष को निलंबित कर दिया था। इसके कुछ ही घंटों बाद बुधवार देर रात इन सभी पार्षदों ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस घटनाक्रम से नगर निकाय में भाजपा की स्थिति और मजबूत हो गई है।

महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर निकाय में चुनाव के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों के भाजपा में शामिल होने को अवैध और असंवैधानिक बताते हुए उनके खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई शुरू करने का ऐलान किया है। इस घटनाक्रम से नगर निकाय की सत्ता को लेकर एक बड़ी कानूनी लड़ाई के संकेत मिल रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप: संविधान का उल्लंघन
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता सचिन सावंत ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर जीतकर किसी अन्य दल में शामिल होना दल-बदल विरोधी कानून और संवैधानिक प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचित पार्षद न तो स्वतंत्र गुट बना सकते हैं और न ही किसी दूसरे राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं। सावंत के अनुसार, पार्टी इन सभी पार्षदों के खिलाफ अयोग्यता की कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी और जल्द ही उन्हें कानूनी नोटिस भेजे जाएंगे।
‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ से बदला सत्ता समीकरण
20 दिसंबर को हुए नगर निकाय चुनाव के बाद अंबरनाथ की राजनीति ने अचानक करवट ली। भाजपा ने स्थानीय स्तर पर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ (AVA) के नाम से नया गठबंधन बनाया। इस गठबंधन में भाजपा के साथ कांग्रेस के बागी पार्षदों और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को शामिल किया गया। इस नए सियासी समीकरण के चलते चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी शिवसेना सत्ता से बाहर हो गई, जबकि नगर निकाय की कमान भाजपा और उसके नए सहयोगियों के हाथ में चली गई।
अब कानूनी जंग तय
कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह इस पूरे मामले को अदालत में चुनौती देगी। ऐसे में आने वाले दिनों में अंबरनाथ नगर निकाय की सत्ता और वैधता को लेकर बड़ी कानूनी लड़ाई छिड़ने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह मामला सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि दल-बदल कानून की व्याख्या और उसकी सीमाओं का भी बड़ा परीक्षण बन सकता है।
महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर निकाय में चुनाव के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने अपने 12 पार्षदों के भाजपा में शामिल होने को अवैध और असंवैधानिक बताते हुए उनके खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई शुरू करने का ऐलान किया है। इस घटनाक्रम से नगर निकाय की सत्ता को लेकर एक बड़ी कानूनी लड़ाई के संकेत मिल रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप: संविधान का उल्लंघन
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता सचिन सावंत ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर जीतकर किसी अन्य दल में शामिल होना दल-बदल विरोधी कानून और संवैधानिक प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचित पार्षद न तो स्वतंत्र गुट बना सकते हैं और न ही किसी दूसरे राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं। सावंत के अनुसार, पार्टी इन सभी पार्षदों के खिलाफ अयोग्यता की कानूनी प्रक्रिया शुरू करेगी और जल्द ही उन्हें कानूनी नोटिस भेजे जाएंगे।
‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ से बदला सत्ता समीकरण
20 दिसंबर को हुए नगर निकाय चुनाव के बाद अंबरनाथ की राजनीति ने अचानक करवट ली। भाजपा ने स्थानीय स्तर पर ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ (AVA) के नाम से नया गठबंधन बनाया। इस गठबंधन में भाजपा के साथ कांग्रेस के बागी पार्षदों और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को शामिल किया गया। इस नए सियासी समीकरण के चलते चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी शिवसेना सत्ता से बाहर हो गई, जबकि नगर निकाय की कमान भाजपा और उसके नए सहयोगियों के हाथ में चली गई।
अब कानूनी जंग तय
कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह इस पूरे मामले को अदालत में चुनौती देगी। ऐसे में आने वाले दिनों में अंबरनाथ नगर निकाय की सत्ता और वैधता को लेकर बड़ी कानूनी लड़ाई छिड़ने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह मामला सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि दल-बदल कानून की व्याख्या और उसकी सीमाओं का भी बड़ा परीक्षण बन सकता है।












