60 साल में नहीं 62 साल में रिटायर होंगे सरकारी कर्मचारी ?

सरकारी अधिकारियों तथा कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 62 साल कर दी गई है। इस प्रकार की एक खबर सोशल मीडिया पर खूब प्रसारित की जा रही है। क्या वास्तव में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 60 साल से 62 साल कर दी गई है? यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है।

केंद्र कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र पर वायरल मैसेज की सच्चाई
केंद्र कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र पर वायरल मैसेज की सच्चाई
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar12 Jan 2026 05:19 PM
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National News : भारत में सरकारी कर्मचारियों तथा अधिकारियों को 60 साल की उम्र में रिटायर किया जाता है। भारत में अब सरकारी अधिकारियों तथा कर्मचारियों को 60 साल में नहीं बल्कि 62 साल की उम्र में रिटायर किया जाएगा। सरकारी अधिकारियों तथा कर्मचारियों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 62 साल कर दी गई है। इस प्रकार की एक खबर सोशल मीडिया पर खूब प्रसारित की जा रही है। क्या वास्तव में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 60 साल से 62 साल कर दी गई है? यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है।

क्या है रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने वाली खबर का सच ?

चेतना मंच ने रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने वाली खबर की सच्चाई का पता लगा लिया है। सच्चाई यह है कि भारत सरकार ने सरकारी कर्मचारियों तथा अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया है। सोशल मीडिया पर चलाई जा रही रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने वाली खबर पूरी तरह से झूठी  खबर है। कुछ झूठ फैलाने वाले लोगों ने सोशल मीडिया पर यह झूठी खबर चलाई है कि रिटायरमेंट की उम्र 60 साल से बढ़ाकर 62 साल कर दी गई है।

भारत सरकार ने कर दिया इस खबर का खंडन

सरकारी कर्मचारियों तथा अधिकारियों को रिटायर करने की उम्र 60 साल से बढ़ाकर 62 साल कर दी गई है।  इस खबर का भारत सरकार ने खंडन कर दिया है। भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने भारत सरकार की तरफ से इस खबर का खंडन किया है। PIB ने एक्स पर पोस्ट किया "सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक खबर में दावा किया जा रहा है कि भारत सरकार ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र में 2 साल की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। यह दावा फर्जी है। National News



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मूली की खेती में सफलता के लिए जानें बुवाई से लेकर सिंचाई तक

मूली की उन्नत किस्मों की खेती अपनाकर किसान कम समय में अधिक पैदावार और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। सही किस्म का चयन, वैज्ञानिक बुवाई और समय पर सिंचाई से यह फसल किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया बन सकती है।

Radish cultivation
मूली की खेती (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar12 Jan 2026 04:01 PM
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देश में सब्जी उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए मूली की खेती एक तेज़ी से मुनाफा देने वाला विकल्प बनकर उभरी है। कम लागत, कम समय और बेहतर बाजार मांग के चलते मूली की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। खास बात यह है कि आधुनिक और उन्नत किस्मों की मदद से अब किसान सिर्फ 25 से 60 दिनों के भीतर प्रति हैक्टेयर 350 क्विंटल तक पैदावार हासिल कर सकते हैं।

कम समय में तैयार, हर मौसम में मांग

मूली का उपयोग सलाद, सब्जी, पराठा और औषधीय रूप में किया जाता है। पथरी जैसी बीमारियों में मूली का रस बेहद लाभकारी माना जाता है, जिससे इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। मूली की फसल आमतौर पर 40 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है। देसी किस्मों से जहां 250–300 क्विंटल तक उत्पादन मिलता है, वहीं उन्नत किस्मों से यह आंकड़ा और भी अधिक हो जाता है।

मूली की खेती से कितनी हो सकती है कमाई?

बाजार में मूली की कीमत 500 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल तक रहती है। ऐसे में एक हैक्टेयर भूमि से किसान करीब 1 से 1.5 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में मूली की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

मूली की टॉप 5 उन्नत किस्में

1. पूसा हिमानी

यह किस्म ठंडी जलवायु के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसकी जड़ें सफेद, मोटी और 30–35 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। यह किस्म 50–60 दिनों में तैयार होकर प्रति हैक्टेयर 320–350 क्विंटल तक पैदावार देती है।

2. पंजाब पसंद

पंजाब पसंद किस्म केवल 45 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी जड़ें लंबी, सफेद और बाल रहित होती हैं। यह बेमौसम खेती के लिए भी उपयुक्त है और मुख्य मौसम में 215–235 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक उत्पादन देती है।

3. जापानी सफेद

यह किस्म अपने हल्के तीखे स्वाद और मुलायम बनावट के लिए जानी जाती है। 45–55 दिनों में तैयार होने वाली इस किस्म से किसान 250–300 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।

4. पूसा रेशमी

इस किस्म की जड़ें लंबी, चिकनी और आकर्षक होती हैं। यह 55–60 दिनों में तैयार होती है और प्रति हैक्टेयर 315–350 क्विंटल तक उपज देती है, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।

5. रैपिड रेड व्हाइट टिप्ड

यह सबसे जल्दी तैयार होने वाली किस्म है, जो मात्र 25–30 दिनों में फसल देती है। लाल-सफेद रंग की यह मूली देखने में आकर्षक और स्वाद में तीखी होती है, जिससे इसकी बाजार में मांग अधिक रहती है।

मूली की बुवाई और देखभाल

  • लाइन से लाइन दूरी: 45–50 सेमी
  • पौधे से पौधे की दूरी: 5–8 सेमी
  • बुवाई की गहराई: 3–4 सेमी
  • सिंचाई: पहली सिंचाई बुवाई के बाद, फिर 7–10 दिन के अंतराल पर
  • खरपतवार नियंत्रण: नियमित निराई-गुड़ाई जरूरी

बीज उपचार भी है जरूरी

बता दें कि अच्छे अंकुरण और रोग से बचाव के लिए बीज उपचार आवश्यक है।

  • रासायनिक उपचार: 1 किग्रा बीज को 2.5 ग्राम थायरम से उपचारित करें।
  • जैविक उपचार: 1 किग्रा बीज को 5 लीटर गोमूत्र में भिगोकर उपचार करें।

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देश के 7 बड़े शहरों में पानी हुआ दूषित, ग्रेटर नोएडा भी शामिल

इंदौर में गंदा पानी पीने से 20 लोगों की जान चली गई लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सिर्फ इंदौर की समस्या नहीं है। देश के कई बड़े शहरों में भी पानी दूषित पाया गया है। गांधीनगर, हैदराबाद और ग्रेटर नोएडा जैसी जगहों में लोग बीमार हो रहे हैं।

Dirty Water
देश के बड़े शहरों में दूषित पानी की समस्या
locationभारत
userअसमीना
calendar11 Jan 2026 01:24 PM
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पानी को जिंदगी कहा जाता है लेकिन जब यही पानी जान लेने लगे तो हालात कितने डरावने हो सकते हैं इसका ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश का इंदौर है। यहां गंदा पानी पीने से 20 लोगों की मौत हो गई और कई लोग अब भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। इंदौर की इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है क्योंकि यह समस्या सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं है। हैरानी की बात यह है कि देश के कई बड़े और विकसित शहरों में भी लोगों तक दूषित पानी पहुंच रहा है।

7 बड़े शहरों में पानी बना खतरा

जांच रिपोर्ट्स और मीडिया खबरों के मुताबिक, देश के कम से कम सात बड़े शहरों में पानी की क्वालिटी चिंता का विषय बन चुकी है। गुजरात के गांधीनगर से लेकर तेलंगाना के हैदराबाद, उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा, मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल और हरियाणा के रोहतक व झज्जर तक गंदे पानी की शिकायतें सामने आई हैं। कई जगहों पर पानी की टेस्टिंग फेल हुई है जिसमें सीवेज और बैक्टीरिया पाए गए हैं।

गांधीनगर और हैदराबाद में बिगड़े हालात

गुजरात की राजधानी गांधीनगर में दूषित पानी पीने से टाइफाइड के 100 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। सिविल अस्पताल में भर्ती दो लोगों की मौत ने हालात की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। वहीं, हैदराबाद में अलग-अलग इलाकों से लिए गए पानी के सैंपल में से कई सैंपल बेहद खराब पाए गए। रिपोर्ट्स के अनुसार, पानी में सीवेज, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और इंडस्ट्रियल वेस्ट तक मिला है जो सीधे तौर पर सेहत के लिए खतरनाक है।

ग्रेटर नोएडा में बीमार पड़ रहे लोग

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में भी गंदा पानी लोगों को बीमार कर रहा है। यहां कई लोग उल्टी, बुखार, पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। हालांकि, स्थानीय प्राधिकरण ने पाइपलाइन में सीवेज पानी मिलने की बात से इनकार किया है, लेकिन लोगों की तबीयत और अस्पतालों में बढ़ते मरीज कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।

रोहतक और झज्जर में बदबूदार पानी से परेशानी

हरियाणा के रोहतक और झज्जर जिलों में भी लोगों ने नलों से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत की है। हालात ऐसे हैं कि कई परिवार रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए टैंकर का पानी खरीदने को मजबूर हैं या फिर दूर-दराज के इलाकों से पानी मंगवा रहे हैं। यह स्थिति आम लोगों की जेब और सेहत दोनों पर भारी पड़ रही है।

इंदौर और भोपाल में कोलाई बैक्टीरिया का खतरा

मध्य प्रदेश में इंदौर के साथ-साथ भोपाल के ग्राउंड वॉटर में भी कोलाई बैक्टीरिया पाए गए हैं। यही बैक्टीरिया इंदौर में हुई मौतों की बड़ी वजह माने जा रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए भोपाल नगर निगम ने जमीन के नीचे से आने वाले पानी की सप्लाई पर रोक लगा दी है, ताकि लोगों को किसी बड़े खतरे से बचाया जा सके।

गंदा पानी कैसे बन रहा है जानलेवा

दूषित पानी पीने से लोग दस्त, उल्टी, हैजा, टाइफाइड और डायरिया जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। कुछ मामलों में गिलियन बैरे सिंड्रोम जैसी गंभीर बीमारी भी देखने को मिल रही है जो नसों पर असर डालती है। सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को होता है जिनका शरीर जल्दी डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाता है।

शरीर कैसे देता है दूषित पानी से बीमारी का संकेत

जब शरीर गंदे पानी से बीमार पड़ता है, तो इसके संकेत साफ नजर आने लगते हैं। लगातार दस्त और उल्टी, तेज बुखार, कमजोरी, चक्कर आना और पेशाब कम होना इसके आम लक्षण हैं। कुछ मामलों में आंखों या शरीर में पीलापन भी दिख सकता है। बच्चों और बुजुर्गों में यह लक्षण तेजी से बिगड़ सकते हैं इसलिए इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।

बीमारी की हालत में घर पर क्या कर सकते हैं

अगर दूषित पानी की वजह से तबीयत खराब हो जाए तो शरीर में पानी की कमी न होने देना सबसे जरूरी है। नींबू पानी, नारियल पानी या इलेक्ट्रोलाइट शरीर को राहत दे सकते हैं। अदरक और तुलसी पेट की गड़बड़ी और उल्टी में मददगार साबित होते हैं। खाने में हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन जैसे दही-चावल, खिचड़ी या केला बेहतर रहता है। सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।

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