
ब्रह्मकुमारी आश्रम
माउंट आबू में ही अध्यात्मिक समुदाय ब्रह्मकुमारी का मुख्यालय भी है। मधुबन, शांतिवन, ओम शांति रिट्रीट सेंटर और शांति सरोवर के साथ यहाँ पर 4 भाग हैं, जिनमें कुछ वक्त बिताकर आप अध्यात्म से जुड़ सकते हैं।
महाराणा प्रताप ने यहां गुजारे दो वर्ष
ढेर सारे दर्शनीय स्थल देखने के अलावा ये भी जानना महत्वपूर्ण है कि महाराणा प्रताप ने अपने जीवन के दो साल माउंट आबू के घने जंगलों में बिताए थे। इस दौरान वे गुरुशिखर से नीचे की ओर स्थित शेरगांव में रहे, जिस गुफा में वे रहे वह आज भी यहां मौजूद है और इसे भैरुगुफा के नाम से जाना जाता है। गुरु शिखर से उत्तर दिशा की ओर टेढ़े-मेढ़े रास्तों और घने जंगलों के बीच यह गुफा ऐसे स्थान पर है, जहां आज भी जाने में डर लगता है। घना जंगल होने से यहां बहुत ही कम लोग ही पहुंच पाते हैं। यह वह समय था जब महाराणा प्रताप बुरे दौर से गुजर रहे थे और अकबर के भय से किसी ने भी उनकी न तो मदद की और ना ही शरण दी। ऐसे में सिरोही के नरेश महाराव सुरताण ने उनकी मदद की और उन्हें सुरक्षित शेरगांव के जंगलों में पहुंचा दिया। महाराणा प्रताप यहां करीब दो साल तक रहे।
माउंट आबू कैसे पहुंचे
- हवाई यात्रा से जाना चाहते हैं, तो माउंट आबू पहुंचने के लिए उदयपुर एयरपोर्ट सबसे नजदीक है। यहां से माउंट आबू तक की 185 कि.मी. की दूरी आप टैक्सी से तय कर सकते हैं।
- रेल यात्रा करना चाहते हैं, तो माउंट आबू से सबसे करीबी स्टेशन आबू रोड रेलवे स्टेशन है। स्टेशन मुख्य शहर से सिर्फ 28 कि.मी. की दूरी पर है और आपको यहां से आसानी से बस या टैक्सी मिल जाएगी।
- सड़क यात्रा से जाना चाहते हैं, तो माउंट आबू सभी बड़े शहरों से सड़क के जरिए जुड़ा हुआ है। आपको जयपुर, उदयपुर, दिल्ली और जैसलमेर से आसानी से सीधी बसें मिल जाएंगी।
माउंट आबू में होटल
माउंट आबू में रहने के लिए सस्ते से लेकर महंगे रिज़ॉर्ट सभी का विकल्प मौजूद है। यहां होटल में एक रात का किराया करीब 1000 रुपए से शुरू होता है।
माउंट आबू जाने का सही समय
यूं तो घूमने फिरने का कोई मौसम नहीं होता। समर विकेशन की छुट्टियों में यहां खूब भीड़ रहती है। मानसून में हल्की बारिश और सुहाने मौसम के बीच छुट्टियां मनाने के लिए भी माउंट आबू जाना एक अच्छा विकल्प है। वैसे अक्टूबर से मार्च के बीच यहां पीक सीजन होता है।