पहली बार बिना आडवाणी-जोशी के वोट के होगा भाजपा अध्यक्ष चुनाव, वजह क्या?
पार्टी के संस्थापक स्तंभ लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इस चुनाव में पहली बार मतदान से बाहर रहेंगे। यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि संगठन के बदलते समय और नई पीढ़ी के उभार का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है।

BJP National President Election 2026 : देश की सत्ता में काबिज और दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी मानी जाने वाली भाजपा के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बड़ी हलचल है। 20 जनवरी 2026 को होने वाला राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव पार्टी के संगठनात्मक इतिहास में एक नए अध्याय की तरह दर्ज होने जा रहा है। संकेत साफ हैं कि 45 वर्षीय नितिन नवीन का अध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है, यानी फैसला वोटिंग से पहले ही तय दिशा में बढ़ चुका है। मगर इसी प्रक्रिया में एक ऐसा अप्रत्याशित मोड़ भी सामने आया है, जिसने भाजपा के शुरुआती दौर की यादें ताजा कर दीं। पार्टी के संस्थापक स्तंभ लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इस चुनाव में पहली बार मतदान से बाहर रहेंगे। यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि संगठन के बदलते समय और नई पीढ़ी के उभार का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है।
नितिन नवीन का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय
दिसंबर 2025 से कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे नितिन नवीन अब पार्टी की कमान पूर्णकालिक अध्यक्ष के तौर पर संभालने की ओर बढ़ रहे हैं। वे बिहार के बांकीपुर से विधायक और पूर्व मंत्री रह चुके हैं। संगठन में उनकी पहचान एक सक्रिय कार्यकर्ता-नेता के रूप में रही है, और उन्हें संघ-पृष्ठभूमि से जोड़कर भी देखा जाता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक 19 जनवरी को नामांकन और 20 जनवरी को औपचारिक घोषणा की प्रक्रिया पूरी होगी। नामांकन प्रस्तावकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह जैसे शीर्ष नेताओं के शामिल रहने की चर्चा है।
आडवाणी-जोशी वोटर लिस्ट से बाहर क्यों हुए?
यह स्पष्ट किया जा रहा है कि यह कोई राजनीतिक दूरी या नाराजगी का मामला नहीं है। वजह पूरी तरह संगठनात्मक प्रक्रिया से जुड़ी है। पार्टी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय परिषद (National Council) का सदस्य वही बन सकता है, जिसके राज्य में संगठनात्मक चुनाव (मंडल-दिला-प्रदेश) पूरे हो चुके हों।
आडवाणी और जोशी फिलहाल दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं, लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक चुनाव अभी लंबित हैं। जब तक दिल्ली में यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, वहां से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का अंतिम चयन संभव नहीं है और इसी कारण दोनों नेताओं के नाम अध्यक्ष चुनाव की मतदाता सूची में नहीं आ सके। अतीत में आडवाणी गुजरात (गांधीनगर) और जोशी उत्तर प्रदेश (कानपुर) से परिषद सदस्य रहे हैं। सक्रिय राजनीति से अलग होने के बाद दोनों दिल्ली से परिषद सदस्य बने, लेकिन इस बार दिल्ली में संगठन चुनाव लंबित रहने का असर सीधे मतदाता सूची पर पड़ा।
चुनाव का पूरा कार्यक्रम क्या है?
भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण ने अध्यक्ष चुनाव का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। तय शेड्यूल के मुताबिक 19 जनवरी को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इसके बाद उसी दिन शाम तक नामांकन पत्रों की जांच और जरूरत पड़ने पर नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। वहीं 20 जनवरी को यदि मुकाबला हुआ तो मतदान कराया जाएगा, लेकिन अगर एक ही उम्मीदवार मैदान में रहा तो पार्टी उसी दिन निर्विरोध चुनाव की औपचारिक घोषणा कर देगी।
नितिन नवीन के सामने बड़ी चुनौती
जेपी नड्डा के बाद नेतृत्व संभालने जा रहे नितिन नवीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत करना और आगामी विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल, असम, केरल आदि) में पार्टी के प्रदर्शन को धार देना होगी। पार्टी संकेत दे रही है कि वह युवा नेतृत्व के जरिए संगठन की अगली पीढ़ी की टीम तैयार करने और जमीनी ढांचे को और चुस्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। BJP National President Election 2026
BJP National President Election 2026 : देश की सत्ता में काबिज और दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी मानी जाने वाली भाजपा के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर बड़ी हलचल है। 20 जनवरी 2026 को होने वाला राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव पार्टी के संगठनात्मक इतिहास में एक नए अध्याय की तरह दर्ज होने जा रहा है। संकेत साफ हैं कि 45 वर्षीय नितिन नवीन का अध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है, यानी फैसला वोटिंग से पहले ही तय दिशा में बढ़ चुका है। मगर इसी प्रक्रिया में एक ऐसा अप्रत्याशित मोड़ भी सामने आया है, जिसने भाजपा के शुरुआती दौर की यादें ताजा कर दीं। पार्टी के संस्थापक स्तंभ लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इस चुनाव में पहली बार मतदान से बाहर रहेंगे। यह सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि संगठन के बदलते समय और नई पीढ़ी के उभार का सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है।
नितिन नवीन का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय
दिसंबर 2025 से कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे नितिन नवीन अब पार्टी की कमान पूर्णकालिक अध्यक्ष के तौर पर संभालने की ओर बढ़ रहे हैं। वे बिहार के बांकीपुर से विधायक और पूर्व मंत्री रह चुके हैं। संगठन में उनकी पहचान एक सक्रिय कार्यकर्ता-नेता के रूप में रही है, और उन्हें संघ-पृष्ठभूमि से जोड़कर भी देखा जाता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक 19 जनवरी को नामांकन और 20 जनवरी को औपचारिक घोषणा की प्रक्रिया पूरी होगी। नामांकन प्रस्तावकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह जैसे शीर्ष नेताओं के शामिल रहने की चर्चा है।
आडवाणी-जोशी वोटर लिस्ट से बाहर क्यों हुए?
यह स्पष्ट किया जा रहा है कि यह कोई राजनीतिक दूरी या नाराजगी का मामला नहीं है। वजह पूरी तरह संगठनात्मक प्रक्रिया से जुड़ी है। पार्टी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय परिषद (National Council) का सदस्य वही बन सकता है, जिसके राज्य में संगठनात्मक चुनाव (मंडल-दिला-प्रदेश) पूरे हो चुके हों।
आडवाणी और जोशी फिलहाल दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य हैं, लेकिन दिल्ली प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक चुनाव अभी लंबित हैं। जब तक दिल्ली में यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, वहां से राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का अंतिम चयन संभव नहीं है और इसी कारण दोनों नेताओं के नाम अध्यक्ष चुनाव की मतदाता सूची में नहीं आ सके। अतीत में आडवाणी गुजरात (गांधीनगर) और जोशी उत्तर प्रदेश (कानपुर) से परिषद सदस्य रहे हैं। सक्रिय राजनीति से अलग होने के बाद दोनों दिल्ली से परिषद सदस्य बने, लेकिन इस बार दिल्ली में संगठन चुनाव लंबित रहने का असर सीधे मतदाता सूची पर पड़ा।
चुनाव का पूरा कार्यक्रम क्या है?
भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण ने अध्यक्ष चुनाव का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। तय शेड्यूल के मुताबिक 19 जनवरी को दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इसके बाद उसी दिन शाम तक नामांकन पत्रों की जांच और जरूरत पड़ने पर नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। वहीं 20 जनवरी को यदि मुकाबला हुआ तो मतदान कराया जाएगा, लेकिन अगर एक ही उम्मीदवार मैदान में रहा तो पार्टी उसी दिन निर्विरोध चुनाव की औपचारिक घोषणा कर देगी।
नितिन नवीन के सामने बड़ी चुनौती
जेपी नड्डा के बाद नेतृत्व संभालने जा रहे नितिन नवीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत करना और आगामी विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल, असम, केरल आदि) में पार्टी के प्रदर्शन को धार देना होगी। पार्टी संकेत दे रही है कि वह युवा नेतृत्व के जरिए संगठन की अगली पीढ़ी की टीम तैयार करने और जमीनी ढांचे को और चुस्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। BJP National President Election 2026













