सोशल मीडिया से हर पल चोरी हो रहा है आपका डेटा, सावधान रहें

डेटा हैकर्स आपकी निजी जानकारी जैसे आपका ई-मेल, पासवर्ड तथा दूसरी निजी जानकारी चुराकर बेच देते हैं। आपका डेटा चोरी होने के कारण हर समय उसके दुरूपयोग की संभावना बनी रहती है। दावा किया जा रहा है कि हर पल डेटा चोरी का काम हैकर्स कर रहे हैं।

डेटा लीक का नया चेहरा
डेटा लीक का नया चेहरा
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar29 Jan 2026 03:08 PM
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Social media Data Theft : वर्तमान युग इंटरनेट तथा सोशल मीडिया का युग है। ज्यादातर नागरिक सोशल मीडिया तथा इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। इंटरनेट तथा सोशल मीडिया एक बहुत बड़ा बाजार भी है। इसी बाजार में बड़ी संख्या में डेटा हैकर्स भी सक्रिय हैं। डेटा हैकर्स आपकी निजी जानकारी जैसे आपका ई-मेल, पासवर्ड तथा दूसरी  निजी जानकारी चुराकर बेच देते हैं। आपका डेटा चोरी होने के कारण हर समय उसके दुरूपयोग की संभावना बनी रहती है। दावा किया जा रहा है कि हर पल डेटा चोरी का काम हैकर्स कर रहे हैं।

14 करोड़ से अधिक यूजर्स का डेटा हो चुका है चोरी

हाल ही में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इन आंकड़ों में बताया गया है कि इंटरनेट पर मौजूद 149 मिलियन यानी कि 14 करोड़ 90 लाख यूजर्स का डेटा चोरी हुआ है। इतना बड़ा डेटा किसी एक कंपनी के सर्वर को तोडक़र या हैक करके नहीं चुराया गया है। वास्तव में यह वह आंकड़ा है जो अलग-अलग वेबसाइट्स के जरिए चुराए गए डेटा को जोडक़र तैयार किया गया है। इसका अर्थ यह है कि पूरी दुनिया में इंटरनेट के 14 करोड़ 90 लाख यूजर्स का डेटा अब तक चोरी किया जा चुका है।

कैसे सामने आया इतना बड़ा डेटा चोरी का आंकड़ा?

यह डेटा चोरी का आंकड़ा साइबर रिसर्चर जेरेमिया फाउलर ने तैयार किया है। उन्होंने ExpressVPN के जरिए अपनी रिपोर्ट शेयर की। इस रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 96GB डेटा इंटरनेट पर बिना किसी सिक्योरिटी और एन्क्रिप्शन के खुला पड़ा था, जिसे कोई भी एक्सेस कर सकता था। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह डेटा किसी हैकर ने नहीं डाला था। दरअसल, यह गलत तरीके से कॉन्फिगर किए गए डेटाबेस में पाया गया। जब तक होस्टिंग प्रोवाइडर ने इसे हटाया तब तक इसमें लगातार नए लॉगइन डिटेल्स जुड़ते रहे।

डेटा चोरी के मामले में यें हैं सबसे ज्यादा प्रभावित प्लेटफॉर्म

इस डेटा चोरी में लगभग सभी बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं। ईमेल अकाउंट्स में Gmail, Yahoo, Outlook, सोशल मीडिया में Facebook, Instagram, TikTok, X, और एंटरटेनमेंट में Netflix, Disney Plus, HBO Max, Roblox के अकाउंट्स लीक हुए। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि OnlyFans और कुछ सरकारी लॉगिन डिटेल्स भी इसमें शामिल हो सकती हैं।

कहां से कितना डेटा हुआ है चोरी

रिपोर्ट के मुताबिक 

Gmail: 4.8 करोड़ अकाउंट्स चोरी

Yahoo: 40 लाख अकाउंट्स चोरी

Outlook: 15 लाख अकाउंट्स चोरी

Facebook: 1.7 करोड़ अकाउंट्स चोरी

Instagram: 65 लाख अकाउंट्स चोरी

TikTok: 8 लाख अकाउंट्स चोरी

Netflix: 42 लाख अकाउंट्स चोरी

यह आंकड़े बताते हैं कि कितने बड़े पैमाने पर यूजर डेटा असुरक्षित रहा।

डेटा चोरी के मामले में खतरनाक मैलवेयर बना सबसे बड़ा खतरा

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक बात यह है कि डेटा किसी हैकर ने नहीं बल्कि Infostealer नाम के खतरनाक मैलवेयर ने चुराया। यह मैलवेयर चुपचाप यूजर के डिवाइस में घुसता है और यूजरनेम, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी चोरी कर लेता है। जब तक यह डेटाबेस ऑनलाइन रहा यह मैलवेयर लगातार नए डेटा जोड़ता रहा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कितने लोगों ने इस डेटा को डाउनलोड किया इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

आप तुरन्त पता लगा सकते हैं कि आपका डेटा भी चोरी हुआ है क्या

आप इस बात का आसानी से पता लगा सकते हैं कि क्या आपका डेटा भी चोरी हो गया है। यह पता लगाने के लिए इंटरनेट पर ही उसका तरीका मौजूद है। इंटरनेट पर एक भरोसेमंद वेबसाइट जिसका नाम है Have I Been Pwned. यह वेबसाइट ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट Troy Hunt ने बनाई है और दुनिया भर की बड़ी कंपनियां भी इस पर ट्रस्ट करती हैं। इससे पहले भी कई बार डेटा लीक के दौरान ये वेबसाइट काफी पॉपुलर हुई है। इस साइट पर आपको बस अपना ईमेल डालना होता है। अगर आपका ईमेल किसी बड़े डेटा लीक में पाया गया है, तो साइट तुरंत बता देती है। ये वेबसाइट यूज करना काफी आसान है और ये फ्री भी है। इस वेबसाइट से आप यह पता लगा सकते हैं कि कौन सी वेबसाइट से डेटा लीक हुआ, किस साल ब्रीच हुआ, क्या सिर्फ ईमेल लीक हुआ या पासवर्ड्स भी शामिल हैं। घबराने की जरूरत नहीं।

सावधान रहें तथा यह चार काम तुरंत कर लें

जिस साइट से आपका डेटा लीक हुआ है, वहां पासवर्ड तुरंत बदलें, अगर वही पासवर्ड दूसरी साइट्स पर है, वहां भी बदलें, आगे से हर बड़ी साइट पर अलग पासवर्ड रखें, 2-step verification तुरंत ऑन कर लें। Social media Data Theft



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रेलवे ने खत्म की 20 साल पुरानी परंपरा, रिटायर कर्मचारियों को बड़ा झटका

भारतीय रेलवे ने रिटायर कर्मचारियों को दिए जाने वाले चांदी के सिक्के की परंपरा को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। यह फैसला भोपाल और राजस्थान में सामने आए नकली मेडल घोटाले के बाद लिया गया है। जांच में सिक्कों में मात्र 0.23 प्रतिशत चांदी पाए जाने से मामला गंभीर हो गया।

Silver Coins
रेलवे ने लिया बड़ा फैसला
locationभारत
userअसमीना
calendar29 Jan 2026 03:46 PM
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भारतीय रेलवे (Indian Railway) में पिछले करीब 20 वर्षों से चली आ रही एक खास परंपरा अब समाप्त हो गई है। रेलवे बोर्ड ने सेवानिवृत्त अधिकारियों को विदाई उपहार के रूप में दिए जाने वाले गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल (चांदी के सिक्के) देने की प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद करने का फैसला किया है। यह फैसला न केवल कर्मचारियों के लिए भावनात्मक है बल्कि इसके पीछे सामने आया एक बड़ा घोटाला भी इसकी अहम वजह माना जा रहा है।

कब और कैसे शुरू हुई थी यह परंपरा?

बता दें कि, यह परंपरा रेलवे में मार्च 2006 में शुरू की गई थी। उस समय यह तय किया गया था कि रिटायर होने वाले कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप लगभग 20 ग्राम वजन का स्वर्ण मढ़ा हुआ चांदी का सिक्का भेंट किया जाएगा। इसके बाद बीते 20 सालों में हजारों कर्मचारियों को यह मेडल दिया गया और यह रिटायरमेंट की पहचान बन गया।

रेलवे बोर्ड का आधिकारिक आदेश

रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा ने बुधवार, 28 जनवरी 2026, को इस संबंध में एक औपचारिक आदेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा गया है, “Discontinuation of practice of presenting Gold plated Silver Medals to retiring Railway officials.” यानि अब रिटायर होने वाले किसी भी रेलवे अधिकारी को यह मेडल नहीं दिया जाएगा।

‘मेडल घोटाला’ बना फैसले की सबसे बड़ी वजह

इस फैसले के पीछे भोपाल रेल मंडल में सामने आया एक गंभीर मामला अहम वजह माना जा रहा है। जांच में खुलासा हुआ कि जिन सिक्कों को चांदी बताया जा रहा था उनमें चांदी की मात्रा सिर्फ 0.23% ही थी। असल में ये सिक्के चांदी नहीं बल्कि तांबे के सोने-पॉलिश वाले नकली मेडल निकले। इस खुलासे के बाद रेलवे ने संबंधित सप्लायर के खिलाफ FIR दर्ज कराई और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी सामने आए मामले

ऐसा ही मामला राजस्थान में भी सामने आया जहां एक रिटायर्ड कर्मचारी को शक हुआ और उसने सिक्के की जांच करवाई। लैब रिपोर्ट में सामने आया कि उसमें सिर्फ 0.25% चांदी मौजूद थी। इसके बाद पिछले दो वर्षों से नकली सिक्के बांटे जाने की आशंका पर विजिलेंस जांच शुरू की गई। मध्य प्रदेश के भोपाल रेल मंडल में भी रिटायर्ड कर्मचारियों के साथ बड़ा धोखा सामने आया। सम्मान के नाम पर दिए गए सिक्कों की लैब टेस्टिंग में पता चला कि उनमें मात्र 0.23 ग्राम चांदी ही थी।

रेलवे का बयान

पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) के सीपीआरओ हर्षित श्रीवास्तव ने बताया कि करीब 3600 सिक्के बांटे जाने थे जिनमें से एक लॉट में गंभीर डिफेक्ट पाया गया। इसके बाद पूरे मामले की जांच की गई और नकली सिक्कों की पुष्टि हुई।

रेलवे के पास मौजूद वर्तमान मेडल स्टॉक को अब अन्य प्रशासनिक कार्यों में उपयोग किया जाएगा। यह नया नियम 31 जनवरी 2026 को रिटायर होने वाले अधिकारियों पर भी लागू होगा यानी अब उन्हें भी यह चांदी का मेडल नहीं मिलेगा।

रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?

यह फैसला केवल एक उपहार बंद करने का नहीं है बल्कि रेलवे की पारदर्शिता और भरोसे से जुड़ा हुआ मामला भी है। जिन कर्मचारियों ने जीवनभर रेलवे की सेवा की, उनके साथ सम्मान के नाम पर हुआ यह धोखा बेहद गंभीर माना जा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से केन्द्र सरकार को बड़ा फायदा

UGC पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भारतीय जनता पार्टी सहित ज्यादातर राजनीतिक दलों के नेताओं के बयान आए हैं। ज्यादातर नेताओं ने UGC के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।

UGC गाइडलाइंस पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
UGC गाइडलाइंस पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar29 Jan 2026 02:39 PM
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Supreme Court's decision on UGC : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से केन्द्र सरकार को बड़ी राहत मिली है। UGC पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का केन्द्र सरकार को बड़ा फायदा हुआ है। UGC पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भारतीय जनता पार्टी सहित ज्यादातर राजनीतिक दलों के नेताओं के बयान आए हैं। ज्यादातर नेताओं ने UGC के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।

UGC पर घिर गई थी भाजपा की केन्द्र सरकार

UGC के द्वारा बनाए गए नियमों के मुद्दे पर केन्द्र सरकार पूरी तरह से घिर गई थी। देश भर में UGC के विरोध में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। UGC के नियमों का सबसे ज्यादा विरोध सवर्ण समाज के लोग कर रहे थे। सवर्ण समाज को केन्द्र की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी का कोर वोट माना जाता है। ऐसे में भाजपा सवर्ण समाज की नाराजगी का जोखिम नहीं ले सकता थी। स्थिति यह हो गई थी कि भाजपा के अंदर से ही भारी विरोध शुरू हो गया था। इस विरोध के कारण केन्द्र सरकार के पास UGC के नियमों को वापस लेकर यू-टर्न लेने के अलावा कोई मार्ग नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण केन्द्र सरकार यूटर्न लेने वाले मजबूरी भरे कदम से बच गई है।

नेताओं ने किया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत

अलग-अलग बयानों में ज्यादातर नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। भारतीय जनता पार्टी के झारखंड प्रदेश से सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सोशल मीडिया पोस्ट के द्वारा प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अपनी प्रतिक्रिया में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि संविधान की धारा-14 तथा 15 के तहत ही देश में कानून चलेंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि UGC के नियम कानून के अनुरूप नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने वही किया है जो मैंने कहा था। 

शिवसेना ने भी किया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत

शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे ट्रोल किया गया, गालियां दी गईं और मेरे उपनाम का इस्तेमाल कर मेरे खिलाफ अपमानजनक शब्द कहे गए। उन्होंने कहा कि मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए त्रष्ट के उन दिशानिर्देशों पर रोक लगाई, जो अस्पष्ट, मनमाने और कैंपसों में अधिक भेदभाव पैदा करने की कोशिश थे। प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि भारत सरकार ने हस्तक्षेप कर यूजीसी की इन गाइडलाइंस को वापस लेने की अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से छोड़ दी थी। उन्होंने कहा कि इससे अब यह पूरी तरह से साफ हो गया है कि सरकार को लोगों के विरोध-प्रदर्शन की न तो परवाह है, ना ही उसका सम्मान। प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि जो लोग इस पर चुप रहे, समय उनका भी फैसला करेगा। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। Supreme Court's decision on UGC

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