प्रणब मुखर्जी ने राहुल गांधी को क्या सलाह दी थी, जिसे न मानना कांग्रेस को पड़ रहा है भारी
प्रणब मुखर्जी
भारत
RP Raghuvanshi
28 Nov 2025 03:20 PM
प्रणब मुखर्जी की पुत्री और कांग्रेस नेत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपनी आने वाली पुस्तक 'इन प्रणब, माई फादरः ए डॉटर रिमेम्बर्स' के कुछ अंश साझा किए हैं। जिसके बाद राजनीतिक धरातल पर हड़कंप मच गया है। इन अंश में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने पिता प्रणब मुखर्जी के राजनीतिक जीवन से जुड़े कई राज खोले हैं। जिनमें से एक है राहुल गांधी को राष्ट्रपति रहते दी गई अनमोल सलाह। जिसे न मानने का खामियाजा आज राहुल के साथ-साथ पूरी कांगेस पार्टी को भुगतना पड़ रहा है।
शर्मिष्ठा मुखर्जी के मुताबिक उनके पिता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का राहुल गांधी के बारे में मानना था कि राहुल गांधी जिज्ञासु प्रवृति वाले ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके पास अनेक सवालों का भंडार होता था। लेकिन दिक्कत ये है कि वे किसी भी मुद्दे पर स्थाई रूप से स्थिर नहीं रह पाते थे और कुछ ही वक्त बाद दूसरे मुद्दे पर शिफ्ट हो जाते थे। इस कारण प्रणब दा युवा राहुल गांधी को एक अपरिपक्व राजनेता मानते थे।
अपने पिता प्रणब दा से बातचीत के आधार पर शर्मिष्ठा ने अपनी इस किताब में लिखा है 'राहुल गांधी की कई सारी चीजों में रूचि थी। उनके मन में कई तरह के सवाल होते थे, जिनके वे जवाब ढूंढना चाहते थे। लेकिन समस्या ये थी कि उनका मन बहुत जल्द ही एक विषय से हट जाता था और वे दूसरे मुद्दे पर शिफ्ट हो जाते थे। उनकी यह अधीरता उन्हें कई मुद्दों पर पीछे छोड़ देती थी।'
प्रणब मुखर्जी ने राहुल गांधी को क्या सलाह दी थी
राहुल की अपरिपक्वता और अनुभवहीनता की कमी को दूर करने के लिए प्रणब दा ने राहुल गांधी को मनमोहन सिंह की सरकार में शामिल होने का सुझाव भी दिया, लेकिन राहुल ने इस सुझाव को नहीं माना। जिसका खामियाजा आज भी राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी दोनों ही भुगत रहे हैं। यदि अनुभवी प्रणब दा की बात राहुल गांधी ने मान ली होती तो उनके साथ कांग्रेस की हालत भी आज इतनी पतली नहीं होती।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपनी आने वाली पुस्तक 'इन प्रणब, माई फादरः ए डॉटर रिमेम्बर्स' में लिखा है। 'राहुल गांधी अक्सर राष्ट्रपति भवन में उनके पिता प्रणब मुखर्जी से मिलने जाया करते थे। एक बार प्रणब दा ने उन्हें सलाह दी कि वे देश के भावी नेता हैं। इसलिए उन्हें सरकार चलाने के लिए कुछ अनुभव हासिल करना चाहिए। उन्होंने इसके लिए राहुल को कैबिनेट में शामिल हो जाने का सुझाव दिया, लेकिन राहुल गांधी ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।'
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